UPSC एवं State PCS परीक्षाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ करेंट अफेयर्स और भू-राजनीतिक विश्लेषण: 3 जून 2026

नमस्कार दोस्तों! UPSC, SSC, बैंकिंग और State PCS जैसी परीक्षाओं का पैटर्न अब काफी बदल चुका है। 3 June 2026 Current Affairs के इस अंक में हम परीक्षा के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण करेंगे।

आप भी जानते हैं कि अब सिर्फ ऊपर-ऊपर से न्यूज़ पढ़ लेने से काम नहीं चलता। एग्जाम्स में अब हर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटना के पीछे का policy framework, उसका इतिहास और geopolitical (भू-राजनीतिक) असर पूछा जाता है।

पिछले 24 घंटों की सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं भारत की शानदार प्रगति की कहानी बयां करती हैं। चाहे वो डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी तकनीक का कमाल हो, रेहड़ी-पटरी वालों को इकॉनमी की मुख्यधारा में लाने की कोशिश हो, ‘Act East Policy’ के तहत वियतनाम के साथ बड़ा रक्षा समझौता हो, या फिर लक्षद्वीप में मिली एक अद्भुत कोरल कॉलोनी।

ये सभी टॉपिक्स न सिर्फ प्रीलिम्स के लिए, बल्कि मेन्स (Mains) और इंटरव्यू के लिए भी बेहद जरूरी हैं। अगर आप रोज़ाना अभ्यास करना चाहते हैं, तो हमारी Daily Current Affairs सीरीज़ को फॉलो कर सकते हैं।

तो चलिए, 3 जून 2026 के सबसे महत्वपूर्ण UPSC Current Affairs को बिल्कुल एग्जाम के नजरिए से आसान भाषा में डिकोड करते हैं।


Defence and Strategic Affairs: DRDO द्वारा RudraM-II Anti-Radiation Missile का ऐतिहासिक सफल परीक्षण

DRDO RudraM-II Anti-Radiation Missile Successful Flight Test 3 June 2026 UPSC Current Affairs

भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत अब एक नए लेवल पर पहुँच गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक ऐसी शानदार एंटी-रेडिएशन मिसाइल बनाई है, जो मॉडर्न वॉरफेयर (आधुनिक युद्ध) में गेम-चेंजर साबित होगी।

इसका मुख्य काम क्या है? दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से तबाह कर देना। इस सफल टेस्ट के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास खुद की ‘सप्रेशन ऑफ एनिमी एयर डिफेंस’ (SEAD) तकनीक है।

हवा से सतह पर मार करने वाली RudraM-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण

हाल ही में, DRDO और भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी रूप से विकसित RudraM-II Air-to-Surface Missile का एक बेहद सफल परीक्षण पूरा किया है।

यह टेस्ट ओडिशा के चांदीपुर स्थित Integrated Test Range (ITR) से सुखोई (Su-30 MKI) फाइटर जेट के जरिए किया गया। सबसे खास बात यह है कि बेहद मुश्किल कंडीशन में भी इस मिसाइल ने ‘पिनपॉइंट एक्यूरेसी’ के साथ टारगेट को हिट किया।

असल में, इसे दुश्मन के रडार और SAM (सरफेस-टू-एयर मिसाइल) बैटरियों को तबाह करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग है!

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • खतरनाक मारक क्षमता (Lethal SEAD Capability): RudraM-II एक सॉलिड-प्रोपेलेंट (Solid-Propellant) एयर-लॉन्च मिसाइल है। यह 300 किलोमीटर की सुरक्षित दूरी (stand-off range) से ही दुश्मन के वायु रक्षा नेटवर्क को उड़ा सकती है।
  • अत्यधिक तेज गति (Hypersonic/Supersonic Terminal Speeds): यह मिसाइल अपने अंतिम चरण (terminal phase) में Mach 5.5 (यानी ध्वनि की गति से 5.5 गुना तेज) की स्पीड पकड़ लेती है। इस स्पीड पर दुश्मन के एंटी-मिसाइल सिस्टम के लिए इसे रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
  • उन्नत सीकर तकनीक (Advanced Dual Seeker Technology): इसमें पैसिव रडार होमिंग और इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर्स का एक अनोखा कॉम्बिनेशन है। इसका फायदा यह है कि अगर दुश्मन डर के मारे अपना रडार बंद भी कर दे, तब भी यह मिसाइल टारगेट को ढूंढकर खत्म कर देगी।
  • पेलोड कैपेसिटी (Payload Capacity): यह मिसाइल अपने साथ 200 किलोग्राम तक का भारी वारहेड ले जा सकती है, जो बड़े रडार स्टेशनों और बंकरों को नेस्तनाबूत करने के लिए काफी है।
  • किसने बनाया (Multi-Agency Collaboration): इसका मुख्य विकास हैदराबाद स्थित DRDO की रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) लैब ने किया है। इसमें HAL, ARDE और ITR जैसी एजेंसियों का भी बड़ा सहयोग रहा है।

मिसाइल संस्करण और उनकी विशिष्टताएँ

  • RudraM-I: गति – Mach 2 | मारक क्षमता – 100-150 किलोमीटर | प्रयुक्त सीकर तकनीक – Passive Homing Head (PHH) + Millimetre Wave (MMW) | मुख्य उद्देश्य – सामरिक रडार विनाश।
  • RudraM-II: गति – Mach 5.5 | मारक क्षमता – 300 किलोमीटर तक | प्रयुक्त सीकर तकनीक – Passive Homing Head (PHH) + Imaging Infrared (IIR) | मुख्य उद्देश्य – SEAD/DEAD मिशन एवं डीप स्ट्राइक।

तकनीक और युद्ध के मैदान में इसकी जरूरत

एंटी-रेडिएशन मिसाइलें (ARM) आज के समय में हवाई युद्ध का सबसे अहम हिस्सा हैं। जब भी कोई फाइटर जेट दुश्मन के इलाके में घुसता है, तो वहां के रडार उसे पकड़ने और मिसाइल दागने की कोशिश करते हैं।

यहीं पर RudraM-II जैसी मिसाइलें रक्षक बनकर सामने आती हैं। ये दुश्मन के रडार से निकलने वाले रेडियो सिग्नलों को ट्रैक करती हैं और सीधा उसी रडार स्टेशन पर अचूक हमला कर देती हैं।

इसकी सबसे शानदार खूबी इसका डुअल-सीकर (Dual-Seeker) मोड है। पहले दुश्मन चालाकी करते थे कि मिसाइल को आता देख अपना रडार बंद कर देते थे, जिससे मिसाइल रास्ता भटक जाती थी।

लेकिन RudraM-II में लगा ‘इमेजिंग इन्फ्रारेड’ (IIR) सीकर इस चालाकी को फेल कर देता है। रडार बंद होने के बाद भी यह उसकी थर्मल इमेज (गर्मी) को पहचान कर सटीक प्रहार करती है।

भू-राजनीतिक असर और भारत की First Strike ताकत

इस मिसाइल का सफल टेस्ट भारत की रणनीतिक आज़ादी के लिए बहुत बड़ा कदम है। पहले हमें ऐसे मिशनों के लिए रूस की Kh-31 जैसी विदेशी मिसाइलों पर निर्भर रहना पड़ता था, जो युद्ध के समय एक बड़ी कमजोरी बन सकती थी।

आज के समय में जब चीन और पाकिस्तान अपनी वायु रक्षा प्रणालियों (जैसे चीन का S-400 सिस्टम) को मजबूत कर रहे हैं, RudraM-II भारतीय वायुसेना को ‘First Strike’ (पहला प्रहार) की जबरदस्त ताकत देती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी ने भी इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक ऐतिहासिक क्षण बताया है।

Static GK Connect

  • DRDO के बारे में: इसकी स्थापना 1958 में हुई थी।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • मंत्रालय: यह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के अंतर्गत काम करता है।
  • नई नियुक्ति (Appointments): हाल ही में, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह (IAS) को DRDO के अध्यक्ष (Chairman) का अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) सौंपा गया है। उन्होंने डॉ. समीर वी. कामत की जगह ली है।
  • रिसर्च सेंटर इमारत (RCI): हैदराबाद स्थित इस प्रमुख लैब की परिकल्पना महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने की थी। अधिक जानकारी के लिए DRDO से जुड़े हमारे अन्य लेख पढ़ें।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में DRDO और भारतीय वायुसेना द्वारा सफलतापूर्वक परीक्षित ‘RudraM-II’ मिसाइल के संबंध में नीचे दिए गए कथनों पर विचार करें:
1. यह एक स्वदेशी एयर-टू-सरफेस (Air-to-Surface) एंटी-रेडिएशन मिसाइल है जिसे मुख्य रूप से SEAD (Suppression of Enemy Air Defences) मिशनों के लिए बनाया गया है।
2. यह टर्मिनल चरण में Mach 5.5 तक की हाइपरसोनिक/सुपरसोनिक गति प्राप्त कर सकती है।
3. इसमें दुश्मन द्वारा रडार बंद किए जाने की स्थिति से निपटने के लिए पैसिव रडार होमिंग के साथ ‘इमेजिंग इन्फ्रारेड’ (IIR) सीकर का उपयोग किया गया है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3 ✅

Q2. ‘RudraM-II’ मिसाइल को बनाने में लीड रोल निभाने वाली DRDO की प्रमुख एविओनिक्स और मिसाइल सीकर लैब कौन सी है?
a) डिफेंस मेटालर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी (DMRL), हैदराबाद
b) रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद ✅
c) कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (CVRDE), चेन्नई
d) नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (NPOL), कोच्चि

Q3. मई 2026 के प्रशासनिक बदलावों के तहत, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने किसे DRDO के अध्यक्ष (Chairman) का अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) सौंपा है?
a) डॉ. जी. सतीश रेड्डी
b) श्री राजेश कुमार सिंह ✅
c) डॉ. समीर वी. कामत
d) श्री अजय कुमार


Economy, Governance and Social Justice: PM SVANidhi योजना के 6 वर्ष और असंगठित शहरी अर्थव्यवस्था का वित्तीय समावेश

PM SVANidhi Scheme 6 Years Success Informal Urban Economy Micro Credit UPSC 3 June 2026

भारत की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र (informal sector) और खासकर रेहड़ी-पटरी वाले (street vendors) भाई-बहनों का बहुत बड़ा रोल है।

पहले इन्हें बैंकों से लोन नहीं मिलता था, इसलिए इन्हें मजबूरी में भारी ब्याज पर साहूकारों से पैसे लेने पड़ते थे। इसी समस्या को सुलझाने के लिए PM SVANidhi योजना लाई गई थी।

आपको जानकर खुशी होगी कि इस बेहतरीन योजना ने हाल ही में अपने कार्यान्वयन के 6 साल पूरे कर लिए हैं, जो हमारी माइक्रो-इकॉनमी के लिए एक बड़ी कामयाबी है।

PM SVANidhi योजना के 6 सफल वर्ष: असंगठित शहरी अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन

हाल ही में, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की महत्वाकांक्षी माइक्रो-क्रेडिट पहल ‘PM SVANidhi’ ने अपने 6 साल पूरे कर लिए हैं। आपको याद होगा, यह योजना जून 2020 में कोविड-19 महामारी के मुश्किल दौर में शुरू की गई थी।

आज यह रेहड़ी-पटरी वालों के लिए एक बड़ी लाइफलाइन बन चुकी है। इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी (collateral-free) के वर्किंग कैपिटल लोन दिया जाता है।

इसके शानदार नतीजों को देखते हुए, सरकार ने इसकी अवधि को मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है और इसके लिए ₹7,332 करोड़ का बजट भी मंजूर किया है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • प्रोग्रेसिव लोन स्ट्रक्चर (Progressive Loan Structure): यह योजना तीन चरणों (three-tranche) में काम करती है। शुरुआत में ₹15,000, फिर ₹25,000 और अंत में ₹50,000 तक का बिना गारंटी वाला लोन मिलता है। समय पर लोन चुकाने से वेंडर का क्रेडिट स्कोर अच्छा होता है और उसे अगला बड़ा लोन आसानी से मिल जाता है।
  • लाखों लोगों तक पहुंची मदद: पिछले 6 सालों में 75.5 लाख से ज्यादा वेंडर्स को 1.12 करोड़ से अधिक लोन बांटे जा चुके हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹17,800 करोड़ से ज्यादा है।
  • डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक (Digital Inclusion): वेंडर्स को डिजिटल पेमेंट्स (UPI) इस्तेमाल करने पर साल भर में ₹1,600 तक का कैशबैक मिलता है। अब तक 55 लाख से ज्यादा वेंडर्स ने करोड़ों डिजिटल लेनदेन किए हैं। दूसरा लोन चुकाने वालों को ₹30,000 की लिमिट वाला UPI-लिंक्ड RuPay Credit Card भी दिया जा रहा है।
  • स्वनिधि से समृद्धि (SVANidhi se Samriddhi): बात सिर्फ लोन तक सीमित नहीं है। इस प्रोग्राम के तहत 50 लाख से ज्यादा रेहड़ी-पटरी वाले परिवारों को सरकार की 8 बड़ी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत, पीएम जन धन योजना) से जोड़ा गया है ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
  • समावेशी विकास (Demographic Inclusivity): इस योजना का सबसे बड़ा फायदा महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को हुआ है। कुल लाभार्थियों में लगभग 46% महिलाएं हैं और 70% लोग SC, ST और OBC समुदायों से आते हैं।

ऋण का चरण (Tranche) और पात्रता

  • पहला चरण (First): अधिकतम ऋण सीमा – ₹15,000 | पात्रता – पंजीकृत शहरी रेहड़ी-पटरी वाले | ब्याज सब्सिडी – 7% प्रति वर्ष।
  • दूसरा चरण (Second): अधिकतम ऋण सीमा – ₹25,000 | पात्रता – पहले ऋण का समय पर पुनर्भुगतान करने पर | ब्याज सब्सिडी – 7% प्रति वर्ष।
  • तीसरा चरण (Third): अधिकतम ऋण सीमा – ₹50,000 | पात्रता – दूसरे ऋण का समय पर पुनर्भुगतान करने पर | ब्याज सब्सिडी – 7% प्रति वर्ष।

आर्थिक प्रभाव और नई क्रेडिट संस्कृति का निर्माण

PM SVANidhi योजना का सबसे बड़ा अचीवमेंट यह है कि इसने देश के निचले तबके में एक नई ‘क्रेडिट संस्कृति’ (Credit Culture) पैदा की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के 95% लाभार्थियों को जिंदगी में पहली बार किसी बैंक से फॉर्मल लोन मिला है।

जब एक छोटे सब्जी वाले को UPI इस्तेमाल करने पर कैशबैक मिलता है, तो वो डिजिटल पेमेंट्स को खुशी-खुशी अपनाता है। इससे बैंकों के पास उनका एक भरोसेमंद डिजिटल रिकॉर्ड (digital footprint) बन जाता है।

इस रिकॉर्ड की मदद से करीब 30% वेंडर्स ने अपना क्रेडिट स्कोर सुधारा है और योजना के बाहर से भी लोन लिया है। नतीजतन, इनकी आमदनी में लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे इनके बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य में भी सुधार देखा जा रहा है।

नीतिगत विस्तार और संविधान का लक्ष्य

इस योजना को 2030 तक बढ़ाने का मतलब साफ है—यह सिर्फ कोविड की राहत योजना नहीं थी, बल्कि यह शहरी गरीबी को दूर करने का एक मजबूत टूल बन गई है। पहले यह सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे जनगणना शहरों (census towns) और अर्ध-शहरी इलाकों (peri-urban areas) तक बढ़ा दिया गया है।

क्या आप जानते हैं कि यह योजना हमारे संविधान के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) को सीधे तौर पर लागू करती है? आर्टिकल 39(a) (आजीविका के साधन), आर्टिकल 41 (काम का अधिकार), और आर्टिकल 43 (निर्वाह मजदूरी) का लक्ष्य यही तो है। साथ ही, यह Street Vendors Act, 2014 के विजन को भी हकीकत में बदल रही है।

Static GK Connect

  • नोडल मंत्रालय: इसे आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और वित्त मंत्रालय के ‘वित्तीय सेवाएं विभाग’ (DFS) द्वारा मिलकर चलाया जा रहा है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) इस योजना को लागू करने वाली मुख्य एजेंसी है।
  • ट्रेनिंग: FSSAI की मदद से वेंडरों को साफ-सफाई और फूड सेफ्टी की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में अपने कार्यान्वयन के 6 वर्ष पूरे करने वाली PM SVANidhi योजना के नए अपडेट्स के बारे में नीचे दिए गए कथनों पर विचार करें:
1. भारत सरकार ने इस योजना की कार्यान्वयन अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च 2030 कर दिया है।
2. योजना के तहत अब पहले चरण (First Tranche) के लोन की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर ₹15,000 और दूसरे चरण (Second Tranche) को ₹25,000 कर दिया गया है।
3. समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को सीधे ₹1,00,000 का नकद अनुदान (Cash Grant) दिया जाता है。

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1
b) केवल 1 और 2 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

Q2. PM SVANidhi योजना के अंतर्गत चलाई जा रही ‘स्वनिधि से समृद्धि’ (SVANidhi se Samriddhi) पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) रेहड़ी-पटरी वालों को ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अपना सामान बेचने की फ्री सुविधा देना।
b) लाभार्थियों और उनके परिवारों की प्रोफाइलिंग कर उन्हें केंद्र सरकार की 8 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत, जन धन योजना) से जोड़ना। ✅
c) सभी शहरी क्षेत्रों में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए परमानेंट मार्केट बनाना।
d) केवल महिला वेंडर्स को बिना ब्याज के बिजनेस लोन देना।

Q3. PM SVANidhi योजना को सफलतापूर्वक लागू करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से किन मंत्रालयों या विभागों की है?
a) ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) और MSME मंत्रालय
b) नीति आयोग और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (MoLE)
c) आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ✅
d) सामाजिक न्याय मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय


International Relations and Strategic Agreements: भारत-वियतनाम के बीच ऐतिहासिक BrahMos मिसाइल निर्यात समझौता

India Vietnam BrahMos Missile Export Deal Shangri-La Dialogue 2026 Current Affairs

पिछले कुछ सालों में भारत की विदेश नीति और रक्षा रणनीति में गजब का बदलाव (paradigm shift) आया है। जो भारत कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक (importer) हुआ करता था, वही आज इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ और Defence Exporter बन गया है।

हमारी ‘Act East Policy’ अब जमीन पर असर दिखा रही है। इसी कड़ी में वियतनाम के साथ हुई लेटेस्ट ब्रह्मोस मिसाइल डील भू-राजनीति के लिहाज से एक मास्टरस्ट्रोक है।

भारत की Act East Policy को बड़ी कामयाबी: वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील फाइनल

हाल ही में, सिंगापुर में चल रहे एशिया के सबसे बड़े रक्षा सम्मेलन ‘शंगरी-ला डायलॉग’ (Shangri-La Dialogue – 2026) के दौरान भारत के रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने एक बड़ा ऐलान किया है।

उन्होंने कंफर्म किया है कि भारत और वियतनाम के बीच BrahMos supersonic cruise missile सप्लाई करने का समझौता साइन हो चुका है। 2022 में फिलीपींस (लगभग $375 मिलियन) के बाद वियतनाम दूसरा आसियान (ASEAN) देश है, जो भारत से यह खतरनाक मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है।

रिपोर्ट्स की मानें तो यह डील करीब ₹60 बिलियन ($629 मिलियन) की हो सकती है, जिसमें मिसाइलों के साथ ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इसके अलावा, इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस को लेकर बातचीत बिल्कुल फाइनल स्टेज में है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • वियतनाम को क्यों चाहिए ब्रह्मोस: वियतनाम इस सुपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल अपने ‘Su-30MK2’ फाइटर जेट्स को और भी ताकतवर बनाने और समंदर में अपनी मारक क्षमता (maritime strike capabilities) बढ़ाने के लिए करेगा।
  • ब्रह्मोस की ताकत: यह एक स्टील्थ-सक्षम (stealth-capable) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसमें लगा लिक्विड-फ्यूल्ड रैमजेट इंजन इसे Mach 2.8 से Mach 3 (लगभग 3,700 किमी/घंटा) की भयंकर स्पीड देता है।
  • MTCR के नियम और मारक क्षमता: अंतरराष्ट्रीय नियमों (MTCR) का पालन करते हुए, वियतनाम को जो ब्रह्मोस दी जा रही है, उसकी मारक क्षमता (Range) 290 किलोमीटर तक सीमित रखी गई है।
  • स्वदेशीकरण (Indigenisation): हालांकि ब्रह्मोस भारत और रूस का जॉइंट वेंचर है, लेकिन भारत ने अब इसमें 85% से ज्यादा पुर्जे भारत में ही बने हुए इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं।
  • स्ट्रैटेजिक भरोसा: भारत ऐसे घातक हथियार सिर्फ उन्हीं देशों को बेचता है जिन पर उसे पूरा भरोसा होता है, और वियतनाम हमारे सबसे भरोसेमंद मित्र देशों में से एक है।

मिसाइल की विशेषताएँ और विवरण

  • प्रकार (Type): सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Supersonic Cruise Missile)।
  • इंजन (Propulsion): पहला चरण – सॉलिड प्रोपेलेंट; दूसरा चरण – लिक्विड-फ्यूल्ड रैमजेट।
  • गति (Speed): Mach 2.8 से Mach 3 (समुद्र की सतह से सटी उड़ान में भी)।
  • एक्सपोर्ट वर्जन की रेंज: 290 किलोमीटर (MTCR के नियमों के अनुसार)।
  • किसने बनाया: DRDO (भारत) और NPO Mashinostroyenia (रूस)।

भू-राजनीतिक असर और दक्षिण चीन सागर का विवाद

वियतनाम को ब्रह्मोस बेचना सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं है; यह दक्षिण चीन सागर (South China Sea) की पॉलिटिक्स में चीन के लिए एक सीधा मैसेज है। आप जानते ही होंगे कि चीन अपनी ‘नाइन-डैश लाइन’ के नाम पर पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना कब्ज़ा जताता है, जिससे वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को खासी परेशानी होती है。

चीनी नौसेना की मनमानी रोकने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल एक तगड़े ‘डिटरेंट’ (निवारक) का काम करेगी। इसकी Mach 3 की तेज स्पीड और समंदर की लहरों के बिल्कुल ऊपर उड़ने की कला (Sea-skimming) इसे चीन के रडार से बचाती है।

भारत का यह कदम हमारी ‘Act East Policy’ के उस वादे को पूरा करता है, जिसमें हमने पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नेविगेशन की आज़ादी और शांति बनाए रखने की बात कही है।

MTCR (Missile Technology Control Regime) का खेल क्या है?

एग्जाम के नजरिए से MTCR को समझना बहुत जरूरी है। यह 35 देशों का एक ग्रुप है जो खतरनाक मिसाइलों की खरीद-फरोख्त पर नजर रखता है। इसके नियम कहते हैं कि कोई भी देश ऐसी मिसाइल एक्सपोर्ट नहीं कर सकता जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर से ज्यादा हो और जो 500 किलो से ज्यादा पेलोड ले जाती हो।

भारत 2016 में MTCR का सदस्य बना था। अब हम अपनी खुद की सेना के लिए तो 800 किमी रेंज वाली ब्रह्मोस बना सकते हैं, लेकिन जब एक्सपोर्ट (निर्यात) की बात आती है, तो हमें अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना होता है। इसीलिए वियतनाम को दी जा रही मिसाइल की रेंज जानबूझकर 290 किलोमीटर (300 किमी से कम) रखी गई है।

Static GK Connect

  • BrahMos Aerospace: यह 1998 में बना भारत-रूस का जॉइंट वेंचर है। इसका नाम भारत की ‘ब्रह्मपुत्र’ और रूस की ‘मोस्कवा’ नदियों के नाम पर रखा गया है।
  • शंगरी-ला डायलॉग: यह एशिया का एक बड़ा सिक्योरिटी समिट है जो हर साल सिंगापुर में IISS (इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज) द्वारा आयोजित किया जाता है।
  • ASEAN: दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संघ, जिसकी स्थापना 1967 में हुई। इसका हेडक्वार्टर जकार्ता (इंडोनेशिया) में है।

Current Affairs MCQs

Q1. ‘शंगरी-ला डायलॉग’ के दौरान भारत द्वारा वियतनाम को एक्सपोर्ट की जा रही ‘BrahMos’ मिसाइल के संबंध में नीचे दिए गए कथनों पर विचार करें:
1. ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसमें तेज गति के लिए लिक्विड-फ्यूल्ड रैमजेट (Liquid-fueled Ramjet) इंजन का इस्तेमाल होता है।
2. MTCR के अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए, इसके एक्सपोर्ट वर्जन की मारक क्षमता 290 किलोमीटर तक सीमित रखी गई है।
3. वियतनाम इस मिसाइल प्रणाली को मुख्य रूप से अपनी पनडुब्बियों (Submarines) से चलाने के लिए खरीद रहा है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1
b) केवल 1 और 2 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

Q2. ‘शंगरी-ला डायलॉग’ (Shangri-La Dialogue), जहाँ हाल ही में भारत-वियतनाम रक्षा समझौते की पुष्टि हुई, किस संस्था द्वारा हर साल आयोजित किया जाने वाला रक्षा सम्मेलन है?
a) यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC)
b) शंघाई सहयोग संगठन (SCO)
c) इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ✅
d) आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF)

Q3. ‘मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था’ (MTCR) के नियमों के अनुसार, इसके सदस्य देश Category-I के तहत आने वाले किन हथियारों के एक्सपोर्ट पर सख्त रोक लगाते हैं?
a) ऐसी मिसाइलें जिनकी मारक क्षमता 150 किमी से ज्यादा और पेलोड 250 किलोग्राम से ज्यादा हो।
b) ऐसी मिसाइलें जिनकी मारक क्षमता 300 किमी से ज्यादा और पेलोड 500 किलोग्राम से ज्यादा हो। ✅
c) ऐसी मिसाइलें जिनकी मारक क्षमता 500 किमी से ज्यादा और पेलोड 1000 किलोग्राम से ज्यादा हो।
d) ऐसी मिसाइलें जिनकी मारक क्षमता 1000 किमी से ज्यादा और पेलोड 500 किलोग्राम से ज्यादा हो।


Environment, Ecology and Biodiversity: लक्षद्वीप में विश्व की सबसे बड़ी Potato Patch Coral Colony की खोज

Lakshadweep Giant Potato Patch Coral Colony Discovery Kadmat Island Environment Current Affairs

आजकल क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया भर के समुद्री जीव, खासकर प्रवाल भित्तियां (Coral Reefs) बड़े खतरे में हैं। लगातार बढ़ते तापमान से कोरल खत्म हो रहे हैं।

लेकिन इसी बीच भारत के लक्षद्वीप से एक बहुत ही पॉजिटिव और हैरान करने वाली खबर आई है। वहां एक ऐसी विशाल कोरल कॉलोनी मिली है, जो सदियों से हर तरह के मौसमी बदलावों को झेलकर भी शान से जिंदा है। यह खोज वैज्ञानिकों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।

लक्षद्वीप के समंदर में मिली दुनिया की सबसे बड़ी Potato Patch Coral Colony

हाल ही में, लक्षद्वीप के कदमत द्वीप (Kadmat Island) के पास समंदर के अंदर एक बेहद विशाल और प्राचीन कोरल कॉलोनी खोजी गई है। इसकी अजीब सी आकृति के कारण गोताखोर इसे “Potato Patch” (आलू का खेत) कहते हैं।

विज्ञान की भाषा में यह ‘Pavona clavus‘ प्रजाति है, जिसे जाइंट पोटैटो कोरल भी कहते हैं। मजे की बात यह है कि इसका साइज इतना बड़ा है कि इसे दुनिया की सबसे बड़ी जीवित कोरल कॉलोनी माना जा रहा है।

यह शानदार खोज लक्षद्वीप के पर्यावरण विभाग, REEF (रिसर्च एंड एनवायरनमेंटल एजुकेशन फाउंडेशन), द हैबिटेट्स ट्रस्ट और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की साझा मेहनत का नतीजा है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • विशाल आकार (Massive Dimensions): यह कॉलोनी समंदर के अंदर 4,250 वर्ग मीटर (करीब 1.05 एकड़) में फैली हुई है। सोचिए, यह एक इंटरनेशनल फुटबॉल मैदान के आधे साइज जितनी बड़ी है! इसकी लंबाई 85 मीटर और चौड़ाई 50 मीटर है।
  • कितनी पुरानी है (Estimated Age): वैज्ञानिकों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक यह कोरल कॉलोनी 700 से 1,800 साल पुरानी हो सकती है। सही उम्र का पता लगाने के लिए अभी रेडियोमेट्रिक डेटिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • बिल्कुल स्वस्थ (Live Tissue Coverage): इतनी पुरानी होने के बावजूद, इसका 58.47% हिस्सा अभी भी पूरी तरह जिंदा और स्वस्थ है।
  • वर्ल्ड रिकॉर्ड (Global Record): इससे पहले सबसे बड़ी कोरल कॉलोनी का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ (3,973 वर्ग मीटर) के नाम था, लेकिन लक्षद्वीप की यह कॉलोनी उससे भी बड़ी निकली है।

Potato Patch Coral Colony का वैज्ञानिक विवरण

  • वैज्ञानिक नाम: Pavona clavus (जाइंट पोटैटो कोरल)।
  • जगह: कदमत द्वीप, लक्षद्वीप, भारत।
  • कुल एरिया: 4,250 वर्ग मीटर (लंबाई: 85m, चौड़ाई: 50m)।
  • अनुमानित उम्र: 700 से 1,800 वर्ष।
  • जीवित हिस्सा (Live Tissue): 58.47%।

प्रवाल (Coral) क्या होते हैं और कोरल ब्लीचिंग कैसे होती है?

अक्सर हम कोरल को कोई रंग-बिरंगा पत्थर या पौधा समझ लेते हैं, लेकिन असल में ये छोटे समुद्री जीव होते हैं जिन्हें ‘पॉलिप्स’ (polyps) कहा जाता है। Pavona clavus एक स्टोन कोरल है जो अपने बेस पर कैल्शियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate) का एक सख्त ढांचा बनाता है。

कोरल की जिंदगी एक बहुत ही प्यारी दोस्ती (symbiotic relationship) पर टिकी होती है। कोरल के अंदर ‘ज़ोक्सांथेला’ (Zooxanthellae) नाम के छोटे शैवाल (algae) रहते हैं। ये शैवाल सूरज की रोशनी से खाना बनाते हैं और कोरल को देते हैं, बदले में कोरल उन्हें रहने की सुरक्षित जगह देता है। कोरल के खूबसूरत रंग भी इन्हीं शैवालों की वजह से होते हैं।

लेकिन जब समंदर का पानी ज्यादा गर्म हो जाता है या उसमें एसिड बढ़ जाता है, तो कोरल स्ट्रेस में आ जाते हैं। घबराहट में वे अपने दोस्त शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। शैवाल के जाते ही कोरल सफेद पड़ जाते हैं और भूखे मरने लगते हैं। इसी दुखद घटना को ‘कोरल ब्लीचिंग’ (Coral Bleaching) कहते हैं।

यह खोज हमारे लिए इतनी जरूरी क्यों है?

इस ‘Potato Patch’ कॉलोनी की सबसे खास बात इसका आकार नहीं, बल्कि इसका “लचीलापन” (resilience) है। पिछले 30 सालों में अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज की वजह से समंदर में भयानक हीटवेव आई हैं (जैसे 1998, 2010 और 2016 में)।

इन हीटवेव ने दुनिया भर के कोरल्स को मार डाला, लेकिन हमारी लक्षद्वीप की यह कॉलोनी सब कुछ सहकर भी जिंदा है! वैज्ञानिक अब इसकी स्टडी करके यह पता लगा सकेंगे कि आखिर इसमें ऐसी क्या सुपरपावर है जो इसे मरने नहीं देती।

लक्षद्वीप भारत का इकलौता प्रवाल एटोल (Coral Atoll) है। ये कोरल मछलियों को घर देते हैं और समंदर की तूफानी लहरों से हमारे द्वीपों को कटने से बचाते हैं।

Static GK Connect

  • लक्षद्वीप: यह अरब सागर में स्थित भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है, जो 36 मूंगा द्वीपों का समूह है। इसकी राजधानी कवरत्ती है।
  • कानूनी सुरक्षा (Legal Protection): भारत में कोरल को बचाने के लिए इन्हें ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972’ की अनुसूची-I (Schedule I) में रखा गया है। यानी इन्हें मारना या नुकसान पहुंचाना उतना ही बड़ा जुर्म है जितना किसी बाघ या हाथी को मारना।
  • Sclerochronology: यह एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें कोरल के ढांचे को पढ़कर यह पता लगाया जाता है कि सैकड़ों साल पहले समंदर का तापमान कैसा रहा होगा।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में लक्षद्वीप के कदमत द्वीप के पास मिली दुनिया की सबसे बड़ी ‘Potato Patch’ कोरल कॉलोनी के संदर्भ में, Pavona clavus का क्या मतलब है?
a) यह एक दुर्लभ समुद्री शैवाल है जो केवल गहरे समंदर के ठंडे पानी में पाया जाता है।
b) यह एक प्रकार का रीफ-बिल्डिंग स्टोन कोरल (Stony Coral) है जो अपने बेस पर कैल्शियम कार्बोनेट का सख्त ढांचा बनाता है। ✅
c) यह एक आक्रामक स्टारफिश है जो लक्षद्वीप में कोरल को नष्ट कर रही है。
d) यह एक कृत्रिम (artificial) कोरल तकनीक है जिसे भारत सरकार ने विकसित किया है।

Q2. ‘कोरल ब्लीचिंग’ (Coral Bleaching) की घटना के दौरान कोरल पर क्या असर पड़ता है?
a) कोरल अपने शिकार को पकड़ने के लिए एक सफेद विषैला केमिकल छोड़ते हैं。
b) ज्यादा तापमान जैसी परेशानी के कारण कोरल अपने अंदर मौजूद दोस्त शैवाल (Zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे उनका रंग और खाना छिन जाता है। ✅
c) समंदर में कैल्शियम कार्बोनेट की कमी से कोरल का बाहरी ढांचा पूरी तरह सफेद हो जाता है。
d) कोरल सर्दियों से बचने के लिए जानबूझकर अपना रंग बदलते हैं।

Q3. भारत में कोरल (Coral Reefs) को बचाने के लिए इन्हें किस कानून के तहत सबसे कड़ी कानूनी सुरक्षा (अनुसूची I के समान) दी गई है?
a) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
b) तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचना, 2011
c) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act) ✅
d) जैव विविधता अधिनियम, 2002


Art and Culture, Summits and International Organizations: वाराणसी में 2nd BRICS Culture Working Group Meeting का महत्वपूर्ण आयोजन

2nd BRICS Culture Working Group Meeting Varanasi June 2026 Summit

आज के दौर में दुनिया में सिर्फ हथियारों और व्यापार से कूटनीति (diplomacy) नहीं होती। ‘Soft Power’ और ‘Cultural Diplomacy’ (सांस्कृतिक कूटनीति) अब सबसे ताकतवर हथियार बन गए हैं।

भारत हमेशा से ग्लोबल साउथ की आवाज़ रहा है, लेकिन अब हम दुनिया भर में सांस्कृतिक विरासतों को बचाने और AI जैसी नई तकनीक के सही इस्तेमाल पर भी लीड कर रहे हैं। इसी सिलसिले में BRICS का एक बेहद अहम इवेंट हमारे ऐतिहासिक शहर वाराणसी में होने जा रहा है।

वाराणसी में 2nd BRICS Culture Working Group Meeting: सांस्कृतिक कूटनीति में भारत का नेतृत्व

हाल ही में, संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) के सचिव श्री विवेक अग्रवाल जी ने ऐलान किया है कि 2nd BRICS Culture Working Group (CWG) की बैठक 4 और 5 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के प्राचीन शहर वाराणसी में होने जा रही है।

यह इवेंट दिखाता है कि सांस्कृतिक मामलों में भारत का कद दुनिया में कितना बढ़ गया है। खास बात यह है कि इस मीटिंग में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे नए BRICS सदस्य भी हिस्सा ले रहे हैं।

वाराणसी में होने वाली यह बैठक भारत द्वारा तय की गई BRICS 2026 की मुख्य थीम: “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” पर फोकस करेगी।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • मीटिंग के मुख्य विषय (Thematic Priorities): इस बार का एजेंडा तीन बहुत ही इंटरेस्टिंग और जरूरी मुद्दों पर टिका है:
    1. क्रिएटिव इकॉनमी, कॉपीराइट और आर्ट के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दखल।
    2. पुराने जमाने में अंग्रेजों द्वारा लूटी गई ऐतिहासिक मूर्तियों और कलाकृतियों की वापसी (Repatriation of Cultural Property)।
    3. संस्कृति, क्लाइमेट चेंज और सतत विकास के बीच का कनेक्शन।
  • परिणाम दस्तावेज़ (Outcome Document): इस मीटिंग का मकसद सभी देशों को एक पेज पर लाना है। यहां जो भी फैसले होंगे, वो अगस्त में भोपाल में होने वाली BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक (CMM) का बेस बनेंगे।
  • AI और कलाकारों के अधिकार: यह पहली बार है जब इतने बड़े इंटरनेशनल मंच पर यह बहस हो रही है कि AI का इस्तेमाल इस तरह कैसे किया जाए कि इंसानी कलाकारों का नुकसान या उनके कॉपीराइट की चोरी न हो।
  • बड़ा और मजबूत BRICS: आपको पता ही होगा कि 2024 में BRICS में कई नए देश जुड़े थे। अब भारत, चीन, रूस, ब्राजील और साउथ अफ्रीका के साथ-साथ ईरान, UAE, मिस्र और इथियोपिया जैसे देश भी इस मंच पर अपनी संस्कृति की बात रखेंगे।

BRICS 2026 सांस्कृतिक ट्रैक (Culture Track) की बैठकों का शेड्यूल

  • 1st BRICS Culture Working Group Meeting: वर्चुअल मोड | 29-30 अप्रैल, 2026
  • 2nd BRICS Culture Working Group Meeting: वाराणसी, भारत | 4-5 जून, 2026
  • 3rd BRICS Culture Working Group Meeting: भोपाल, भारत | 5-6 अगस्त, 2026
  • BRICS Cultural Festival: भोपाल, भारत | 6-7 अगस्त, 2026
  • BRICS Culture Ministers’ Meeting (CMM): भोपाल, भारत | 7-8 अगस्त, 2026

मीटिंग का सबसे बड़ा मुद्दा: पुरानी लूटी गई मूर्तियों की वापसी (Repatriation)

इस बैठक का सबसे इमोशनल और जरूरी मुद्दा है ‘सांस्कृतिक संपत्ति की वापसी’। भारत, चीन, मिस्र जैसे देशों का दर्द एक जैसा है। औपनिवेशिक काल (अंग्रेजों के जमाने) में हमारे देशों से कोहिनूर हीरे से लेकर चोल वंश की कांसे की मूर्तियां तक लूट कर यूरोप के म्यूजियम में सजा दी गईं।

अब BRICS का यह बड़ा मंच हम विकासशील देशों (Global South) को एक ताकत दे रहा है। हम सब मिलकर पुराने देशों पर दबाव बना सकते हैं कि 1970 के यूनेस्को कन्वेंशन का पालन करते हुए हमारी अनमोल धरोहरें हमें वापस लौटाई जाएं।

इसके अलावा, आज के दौर में Generative AI मिनटों में नई पेंटिंग या म्यूजिक बना देता है। इससे असली कलाकारों के ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों’ (IPR) को खतरा हो गया है। BRICS देश इस पर भी एक कॉमन पॉलिसी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

वाराणसी ही क्यों?

इस ग्लोबल मीटिंग के लिए ‘वाराणसी’ (काशी) को चुनना बहुत शानदार फैसला है। गंगा किनारे बसा वाराणसी दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे हुए (continuously inhabited) शहरों में से एक है।

इसके घाट और इसकी जीवंत विरासत (living heritage) इसे इस मीटिंग के लिए एकदम परफेक्ट जगह बनाते हैं। यहां से भारत दुनिया को अपनी ‘Soft Power’ का शानदार मैसेज दे रहा है। ऐसे और महत्वपूर्ण Current Affairs MCQs Quiz का लाभ ज़रूर उठाएँ।

Static GK Connect

  • BRICS का इतिहास: 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने ‘BRIC’ (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) शब्द दिया था। 2009 में इसका पहला समिट हुआ और 2010 में साउथ अफ्रीका के जुड़ने से यह ‘BRICS’ बन गया।
  • BRICS का विस्तार (2024): 1 जनवरी 2024 को इसमें 4 नए देश जुड़े: मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE।
  • The Antiquities and Art Treasures Act, 1972: यह कानून भारत सरकार को ऐतिहासिक कलाकृतियों की स्मगलिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित रखने की पावर देता है।
  • संस्कृति मंत्रालय: भारत सरकार के वर्तमान संस्कृति सचिव श्री विवेक अग्रवाल हैं।

Current Affairs MCQs

Q1. जून 2026 में भारत के वाराणसी में हो रही 2nd BRICS Culture Working Group (CWG) मीटिंग के मुख्य विषयों (Thematic Priorities) में नीचे दिए गए किन मुद्दों को शामिल किया गया है?
1. रचनात्मक अर्थव्यवस्था (creative economy) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट की चुनौतियां।
2. औपनिवेशिक काल के दौरान ले जाई गई सांस्कृतिक संपत्ति की वापसी (Repatriation of Cultural Property)।
3. सदस्य देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग (International Space Cooperation) और चंद्र मिशन।

नीचे दिए गए ऑप्शंस में से सही उत्तर चुनिए:
a) केवल 1 और 2 ✅
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3

Q2. BRICS संगठन के हालिया (1 जनवरी 2024) ऐतिहासिक विस्तार के बाद, इनमें से कौन से देश अब इस संगठन के पूर्ण सदस्य (Full Members) बन गए हैं?
a) अर्जेंटीना, सऊदी अरब, इंडोनेशिया
b) ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इथियोपिया, मिस्र ✅
c) तुर्की, नाइजीरिया, पाकिस्तान, वियतनाम
d) मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, चिली

Q3. अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अहमियत के कारण 2nd BRICS CWG मीटिंग के लिए चुने गए शहर ‘वाराणसी’ के बारे में इनमें से कौन सा तथ्य सही है?
a) यह भारत का पहला और इकलौता शहर है जिसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा मिला है।
b) यह दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे हुए (continuously inhabited) शहरों में से एक है जो अपनी ‘Living Heritage’ और घाटों के लिए जाना जाता है। ✅
c) यह शहर सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल (archaeological site) माना जाता है。
d) यहां हर साल पूर्वोत्तर भारत का मशहूर हॉर्नबिल फेस्टिवल मनाया जाता है।

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