4 Jun 2026: UPSC व SSC परीक्षाओं के लिए पिछले 24 घंटों की सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं का Analysis

हेलो दोस्तों! अगर आप UPSC, SSC, Banking, Railway या State PCS जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह ख़बरें आपके Syllabus के लिए बहुत मायने रखती हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि Current Affairs को सिर्फ रटने से काम क्यों नहीं चलता? क्योंकि आजकल एग्जाम्स में सिर्फ Facts नहीं, बल्कि उनके पीछे के कारण, उनके अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव और भविष्य के परिणाम भी गहराई से पूछे जाते हैं।

आज की इस खास रिपोर्ट में हम सिर्फ उन 5 चुनिंदा Topics पर बात करेंगे जो सीधे आपके एग्जाम में छपने वाले हैं।

हम इन Topics की सिर्फ ऊपर-ऊपर से बात नहीं करेंगे, बल्कि इनके Static GK, Economy और Constitutional पहलुओं को बहुत ही आसान भाषा में समझेंगे। आज के हमारे Topics अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय समझौते, साइंस, डिफेंस और पर्यावरण से जुड़े हैं। चलिए शुरू करते हैं!

Economy Current Affairs

Economy Current Affairs 4 Jun 2026 WPI Base Year Revision

थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI) हमारी अर्थव्यवस्था (Economy) में महंगाई या मुद्रास्फीति (Inflation) को मापने का एक बहुत ही जरूरी पैमाना है।

लेकिन पुराने सिस्टम में कई कमियां थीं, इसलिए नीति निर्माता लंबे समय से इसे बदलने की मांग कर रहे थे ताकि आज की नई अर्थव्यवस्था को सही से समझा जा सके।

तो हुआ यह है कि, Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) ने मुद्रास्फीति मापने के तरीके में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है।

यह कदम भारत के Data System को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बिल्कुल बराबर ले जाएगा।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का Base Year बदला: अब 2011-12 की जगह 2022-23 हुआ

हाल ही में, भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के तहत काम करने वाले Office of Economic Adviser ने WPI के आधार वर्ष (Base Year) में एक बड़े बदलाव की घोषणा की है।

दशकों से चली आ रही 2011-12 की पुरानी सीरीज को अब आधिकारिक तौर पर 2022-23 कर दिया गया है। यह नया नियम 15 जून 2026 से लागू हो जाएगा।

अब सवाल यह है कि ऐसा क्यों किया गया? दरअसल, पुराना Data कोविड-19 महामारी के बाद (Post-Pandemic) के खर्च करने के तरीकों, Supply Chain में आए बदलावों और नई डिजिटल Economy को सही से नहीं दिखा पा रहा था।

इसके साथ ही, भारत अब International Monetary Fund (IMF) की सलाह मानकर दुनिया के बेस्ट तरीकों को अपना रहा है और WPI से Producer Price Index (PPI) की तरफ कदम बढ़ा रहा है।

इससे Reserve Bank of India (RBI) और सरकार को हमारी अर्थव्यवस्था की बिल्कुल सही तस्वीर मिलेगी, जिससे बेहतरीन मौद्रिक नीति (Monetary Policy) बनाई जा सकेगी।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • Base Year में बड़ा बदलाव: National Statistical Commission (NSC) से मंजूरी मिलने के बाद, नई WPI सीरीज (Base Year 2022-23) पुरानी 2011-12 सीरीज की जगह लेगी। इसका सीधा मतलब है कि अब महंगाई का Data पहले से कहीं ज्यादा सटीक होगा।
  • नई सूचकांक प्रणाली (PPI) की शुरुआत: WPI के साथ-साथ, सरकार ने पहली बार Output Producer Price Index (OPPI) और Trial Input Producer Price Index (IPPI) की नई सीरीज भी जारी करने का एक ऐतिहासिक फैसला लिया है।
  • Service Sector की गिनती (Service PPI): भारत के इतिहास में पहली बार 7 प्रमुख सेवाओं—Banking, Securities Transaction, Insurance, Management of Pension Funds, Railways, Air Passenger, और Telecom—के लिए Service PPI जारी किया जाएगा। यह दिखाता है कि भारत की GDP में सेवाओं का योगदान (50% से ज्यादा) कितना बढ़ गया है।
  • Renewable Energy का जुड़ना: नई सीरीज में अब Renewable Energy के हिस्सों को भी शामिल किया गया है। यह भारत के ‘Net Zero’ लक्ष्यों को Data के रूप में मापने में बहुत मदद करेगा।
  • 5 साल का Transition Period: आपको बता दें कि WPI को अचानक से बंद नहीं किया जाएगा। क्योंकि कई बड़े प्रोजेक्ट्स में इसका इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे PPI के साथ अगले 5 सालों तक चलाया जाएगा। इसके बाद WPI को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

WPI से PPI की तरफ जाने का असली मतलब क्या है?

भारत में ऐतिहासिक रूप से थोक बाजार में चीजों के दाम मापने के लिए WPI का इस्तेमाल होता रहा है। लेकिन अर्थशास्त्री हमेशा इसकी कमियों की तरफ इशारा करते रहे हैं।

सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें सेवाओं (Services) को गिना ही नहीं जाता था! आज जब हमारी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सर्विस-बेस्ड (Service-Driven) है, तब सिर्फ भौतिक वस्तुओं के दामों से महंगाई मापना एक अधूरी तस्वीर दिखाता है।

Producer Price Index (PPI) इसी कमी को दूर करता है। यह इंडेक्स फैक्ट्री से निकलते वक्त प्रोडक्ट की कीमत (Output PPI) और कच्चे माल की कीमत (Input PPI) दोनों को बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से मापता है।

इसके अलावा, WPI में GST जैसे टैक्स जुड़े होते हैं जिससे दाम कृत्रिम रूप से ज्यादा लगते हैं। लेकिन PPI टैक्स हटाकर बिल्कुल शुद्ध महंगाई मापता है। यही वजह है कि PPI विदेशी निवेशकों के लिए बहुत ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।

अर्थव्यवस्था और Monetary Policy पर इसका सीधा असर

इस बदलाव का सबसे गहरा असर Reserve Bank of India (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) और सरकार के बजट की गणनाओं पर पड़ेगा।

हालांकि RBI महंगाई को कंट्रोल करने के लिए Consumer Price Index (CPI) का इस्तेमाल करता है, लेकिन GDP का असली आकार मापने के लिए WPI का बहुत बड़ा (करीब 70%) रोल होता है।

Base Year को 2022-23 करने से यह पक्का हो जाएगा कि महामारी के बाद वाले आर्थिक ढांचे और ई-कॉमर्स की ग्रोथ को सही से नापा जा सके।

Technical Advisory Committee (TAC) ने इस नए तरीके को बहुत अच्छे से चेक करके पास किया है। इस कदम से भारत की सांख्यिकीय प्रणाली G20 और OECD देशों के लेवल पर आ जाएगी।

विभिन्न मूल्य सूचकांकों की तुलना

  • Wholesale Price Index (WPI): यह थोक बाजार में व्यापारी/थोक विक्रेता का दृष्टिकोण मापता है। इसमें सेवाएं शामिल नहीं हैं, परोक्ष कर (GST) शामिल होते हैं, और आयातित वस्तुएं शामिल होती हैं। नोडल एजेंसी: Office of Economic Adviser, DPIIT.
  • Producer Price Index (PPI): यह उत्पादन स्थल (Factory Gate) पर निर्माता/उत्पादक का दृष्टिकोण मापता है। इसमें 7 प्रमुख सेवाएं शामिल की गई हैं, करों को बाहर रखा जाता है (केवल Basic Price), और आयातित वस्तुएं शामिल नहीं होतीं। नोडल एजेंसी: Office of Economic Adviser, DPIIT.
  • Consumer Price Index (CPI): यह खुदरा बाजार में अंतिम उपभोक्ता (End Consumer) का दृष्टिकोण मापता है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सेवाएं और सभी उपभोक्ता कर शामिल होते हैं। नोडल एजेंसी: National Statistical Office (NSO), MoSPI.

Static GK Connect

  • Nodal Ministry: Ministry of Commerce and Industry (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय), जिसके अंदर DPIIT काम करता है।
  • Urjit Patel Committee (2014): RBI द्वारा बनाई गई इसी विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर RBI ने महंगाई को टारगेट (Inflation Targeting) करने के लिए WPI की जगह CPI को मुख्य आधार बनाया था।
  • Reserve Bank of India Act 1934: इस कानून के Section 45ZB के तहत Monetary Policy Committee (MPC) बनाई गई है। यह 6 सदस्यों वाली समिति महंगाई (CPI) को 4% (+/- 2%) के दायरे में रखने का काम करती है।
  • National Statistical Commission (NSC): इसकी स्थापना 2005 में महान अर्थशास्त्री सी. रंगराजन (C. Rangarajan) कमीशन की सलाह पर भारत के Data सिस्टम को सुधारने के लिए की गई थी।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में DPIIT द्वारा थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार वर्ष (Base Year) को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। नई सूचकांक प्रणाली में पहली बार ‘Service PPI’ के तहत कितनी प्रमुख सेवाओं को शामिल किया गया है?
a) 5 प्रमुख सेवाएं
b) 7 प्रमुख सेवाएं ✅
c) 9 प्रमुख सेवाएं
d) 11 प्रमुख सेवाएं

Q2. भारत में WPI से Producer Price Index (PPI) में संक्रमण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. PPI में अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) को हटाकर उत्पादक (Producer) के दृष्टिकोण से शुद्ध कीमतों का मापन किया जाता है。
2. नई व्यवस्था के तहत WPI श्रृंखला को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा और सभी मूल्य वृद्धि अनुबंधों में केवल PPI का उपयोग किया जाएगा।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

a) केवल 1 ✅
b) केवल 2
c) 1 और 2 दोनों
d) न तो 1 और न ही 2

Q3. मुद्रास्फीति को मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) से संबंधित आधिकारिक आंकड़े भारत सरकार के किस मंत्रालय/निकाय द्वारा संकलित और जारी किए जाते हैं?
a) Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI)
b) Reserve Bank of India (RBI)
c) Office of Economic Adviser, DPIIT (Ministry of Commerce and Industry) ✅
d) NITI Aayog (नीति आयोग)

International Agreements Current Affairs

India Oman CEPA Trade Agreement 2026 Current Affairs

क्या आप जानते हैं कि भारत की विदेश नीति और Economic Diplomacy इन दिनों पश्चिम एशिया (Middle East) की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रही है?

अपनी ऊर्जा सुरक्षा, वहां काम करने वाले भारतीयों की भलाई और नए बाजारों की तलाश ने खाड़ी देशों के साथ हमारे रिश्तों को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।

इसी कड़ी में भारत और ओमान के बीच एक बहुत ही अहम मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) लागू हुआ है, जो हमारे रिश्तों को सिर्फ ‘दोस्ती’ से आगे बढ़ाकर एक गहरे ‘आर्थिक एकीकरण’ में बदल रहा है।

भारत-ओमान CEPA व्यापार समझौता लागू: खाड़ी क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और आर्थिक बढ़त का नया अध्याय

हाल ही में, भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) आधिकारिक रूप से लागू हो गया है।

दोस्तों, यह कोई आम व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह गल्फ (Gulf) क्षेत्र में भारत की नौसैनिक और आर्थिक ताकत को बहुत मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। 2025-26 के नए आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ते हुए 11.18 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।

इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत के 99.38% एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स को ओमान के बाजार में बिना किसी टैक्स (Duty-Free) के एंट्री मिलेगी।

यह भारत के छोटे उद्योगों (MSME), कपड़ा उद्योग और दवा कंपनियों के लिए एक जैकपॉट जैसा है। ओमान की लोकेशन इतनी शानदार है कि यह भारत के लिए पूरे गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और पूर्वी अफ्रीका के बाजारों में घुसने का एक बड़ा ‘Logistic Gateway’ बनेगा।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • Tax Free एंट्री (Tariff Elimination): इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को बहुत बड़ा फायदा होगा क्योंकि 99.38% सामानों पर आयात टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। पहले हमें केवल 15.33% प्रोडक्ट्स पर ही यह छूट मिलती थी।
  • फार्मा (Pharma) सेक्टर के लिए क्रांतिकारी छूट: जो भारतीय जीवनरक्षक दवाएं अमेरिका (USFDA) या यूरोप (EMA) से पहले ही पास हो चुकी हैं, उन्हें अब ओमान में 90 दिनों के भीतर सीधे मार्केटिंग की मंजूरी मिल जाएगी। इससे महंगे क्लीनिकल ट्रायल का झंझट खत्म हो जाएगा।
  • Service Sector के दरवाजे खुले: ओमान ने भारत के प्रोफेशनल्स (जैसे डॉक्टर, इंजीनियर) के लिए 127 सर्विस सेक्टर खोल दिए हैं। साथ ही, ओमान में प्रमुख सर्विस सेक्टर में भारतीय कंपनियों को 100% FDI की छूट मिल गई है।
  • आसान वीजा और Business Mobility: भारतीय कंपनियों के लिए इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफर की सीमा 20% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है। इसके अलावा, भारत के बिजनेस विजिटर अब ओमान में 90 दिनों तक बिना किसी रुकावट के रुक सकते हैं।
  • सर्टिफिकेट्स को डायरेक्ट मान्यता: बिजनेस को आसान बनाने के लिए ओमान अब भारत की Export Inspection Council (EIC) के सर्टिफिकेट्स और हमारे घरेलू हलाल सर्टिफिकेशन को सीधे मान्यता देगा।

Strait of Hormuz का खतरा और ओमान की शानदार लोकेशन

इस CEPA का एक ऐसा पहलू है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, और वो है इसकी समुद्री सुरक्षा (Maritime Security)।

अभी भारत का ज्यादातर कच्चा तेल (Crude Oil) होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बहुत ही संकरे रास्ते से होकर आता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते यह रास्ता अक्सर बंद होने के खतरे में रहता है।

ओमान की लोकेशन इस मामले में भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि इसके तट सीधे खुले अरब सागर (Arabian Sea) पर हैं।

ओमान के सलालाह (Salalah) और डुकम (Duqm) बंदरगाहों तक भारत की सीधी पहुंच का मतलब है कि अगर कभी होर्मुज में कोई युद्ध होता भी है, तो हमारा कच्चा तेल बिना रुके ओमान के रास्ते भारत आ सकेगा।

यह समझौता हिंद महासागर में भारत को एक “Net Security Provider” के रूप में और ताकतवर बनाता है।

CEPA और पारंपरिक FTA के बीच क्या फर्क है?

एग्जाम के नजरिए से आपको Free Trade Agreement (FTA) और CEPA के बीच का अंतर जरूर पता होना चाहिए। FTA का दायरा बहुत सीमित होता है; इसमें सिर्फ सामानों (Goods) पर कस्टम ड्यूटी कम की जाती है।

लेकिन CEPA एक बहुत ही गहरा और बड़ा समझौता है। इसमें सामान के साथ-साथ सर्विस सेक्टर, विदेशी निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और सरकारी खरीद जैसे संवेदनशील विषय भी शामिल होते हैं।

लेकिन भारत ने इस दोस्ती में अपने किसानों को नहीं भूला है। हमारे डेयरी उत्पादकों और छोटे किसानों को बचाने के लिए भारत ने दूध, अनाज, खाद्य तेल, रबर और मसालों को ‘Exclusion List’ में रखा है।

यानी इन चीजों पर ओमान से आने वाले आयात पर कोई छूट नहीं मिलेगी, ताकि हमारे किसान सुरक्षित रहें।

विभिन्न व्यापार समझौतों की तुलना

  • PTA (Preferential Trade Agreement): दायरा बहुत सीमित होता है। केवल कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर टैरिफ कम किया जाता है (सकारात्मक सूची)।
  • FTA (Free Trade Agreement): दायरा मध्यम होता है। अधिकांश वस्तुओं पर टैरिफ कम या शून्य किया जाता है (नकारात्मक सूची)।
  • CECA (Comprehensive Economic Cooperation Agreement): दायरा व्यापक होता है। वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं का व्यापार भी शामिल होता है।
  • CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement): दायरा सबसे व्यापक (Most Comprehensive) होता है। वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, IPR, और सरकारी खरीद का पूर्ण एकीकरण।

Static GK Connect

  • Gulf Cooperation Council (GCC): 1981 में बना यह एक राजनीतिक और आर्थिक गठबंधन है। इसका हेडक्वार्टर सऊदी अरब के रियाद में है। इसके 6 सदस्य हैं: बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और UAE।
  • भारतीय संविधान का Article 253: यह आर्टिकल संसद को पूरी पावर देता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय संधियों (International Treaties) को लागू करने के लिए पूरे भारत या किसी भी राज्य के लिए कानून बना सकती है।
  • Export Inspection Council (EIC): यह भारत का आधिकारिक एक्सपोर्ट सर्टिफिकेशन निकाय है, जिसे 1966 में वाणिज्य मंत्रालय के अधीन बनाया गया था।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में लागू हुए भारत-ओमान CEPA (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते) के भू-राजनीतिक महत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित में से ओमान के किन बंदरगाहों का उपयोग भारत ‘Strait of Hormuz’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को बायपास करने के लिए रणनीतिक रूप से कर सकता है?
a) चाबहार और बंदर अब्बास
b) सलालाह और डुकम ✅
c) जेबेल अली और खलीफा
d) हम्बनटोटा और त्रिंकोमाली

Q2. अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र में, एक पारंपरिक Free Trade Agreement (FTA) की तुलना में Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) की संरचनात्मक विशेषता क्या है?
a) CEPA केवल कृषि और कच्चे माल (Raw Materials) के द्विपक्षीय व्यापार तक सख्ती से सीमित है。
b) CEPA में वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और प्रतिस्पर्धा नीतियों को भी व्यापक रूप से शामिल किया जाता है। ✅
c) CEPA केवल आयात शुल्क (Customs Duty) बढ़ाने के लिए एक रक्षात्मक तंत्र के रूप में उपयोग किया जाता है。
d) CEPA के तहत भागीदार देश अपनी संप्रभुता छोड़कर एक समान मुद्रा (Common Currency) अपनाते हैं।

Q3. भारत और ओमान के बीच हालिया द्विपक्षीय व्यापार आंकड़ों (FY 2025-26) के विश्लेषण के अनुसार, ओमान से भारत के आयात बास्केट (Import Basket) में मूल्य के आधार पर सबसे बड़ा हिस्सा किस वस्तु का है?
a) सोना, चांदी और कीमती पत्थर
b) उन्नत इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी और सेमीकंडक्टर
c) कच्चा तेल (Crude Oil) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) ✅
d) खजूर, ऑलिव ऑयल और कृषि उत्पाद

National & Science Current Affairs

MAHA Water Mission Jal Shakti Current Affairs 4 Jun 2026 UPSC

दोस्तों, भारत इस वक्त अपने इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट (Water Crisis) से गुजर रहा है।

नीति आयोग (NITI Aayog) की एक रिपोर्ट बताती है कि हमारे कई प्रमुख शहर ‘डे ज़ीरो’ (Day Zero) की तरफ बढ़ रहे हैं, यानी एक ऐसा दिन जब जमीन के नीचे का पानी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।

मौसम में हो रहे बदलाव और खेती में पानी के अंधाधुंध इस्तेमाल ने इस समस्या को और भी डरावना बना दिया है।

इस संकट का समाधान सिर्फ पुरानी नीतियों से नहीं हो सकता। इसके लिए हमें लेटेस्ट साइंस और टेक्नोलॉजी की जरूरत है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने एक बेहतरीन जल मिशन शुरू किया है जो लैब की रिसर्च को सीधे किसानों के खेतों और कारखानों तक पहुंचाएगा।

200 करोड़ रुपये का ‘MAHA Water Mission’ लॉन्च: जल सुरक्षा और Deep-Tech Startups को मिलेगा बढ़ावा

हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) ने मिलकर Anusandhan National Research Foundation (ANRF) के साथ “Missions for Advancement in High-Impact Areas (MAHA) Water Mission” की एक शानदार शुरुआत की है।

नई दिल्ली में लॉन्च किए गए इस मिशन का सीधा सा लक्ष्य है—देश के गिरते जल स्तर को अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के सहारे वापस उठाना।

200 करोड़ रुपये के बड़े बजट के साथ, यह मिशन एक पुल का काम करेगा। यह उन बेहतरीन रिसर्च को लैब से निकालकर असल दुनिया (Field Deployment) में लाएगा जो अब तक फाइलों में बंद रहती थीं।

सबसे अच्छी बात यह है कि यह मिशन सरकारी विभागों के अकेले काम करने के तरीके (Silos) को तोड़कर स्टार्टअप्स, कॉलेजों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाएगा।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 200 करोड़ की बड़ी फंडिंग: अगले 5 सालों के लिए इस मिशन में 200 करोड़ रुपये रखे गए हैं। जो भी ग्रुप (Consortium) पानी बचाने की अच्छी टेक्नोलॉजी लाएगा, उसे 20 करोड़ रुपये तक का ग्रांट (Grant) दिया जाएगा।
  • 5 प्रमुख टारगेट (Core Themes): यह मिशन 5 चीजों पर सबसे ज्यादा फोकस करेगा: 1) पानी का सही आकलन, 2) पीने के पानी को शुद्ध करना, 3) पानी की क्वालिटी, 4) पानी का दोबारा इस्तेमाल (Circular Economy), और 5) मौसम के हिसाब से पानी का मैनेजमेंट।
  • Startups और MSME के लिए शानदार मौका: यह मिशन भारत के उन नए स्टार्टअप्स (Deep-Tech Startups) के लिए एक खुला दरवाजा है जो पानी बचाने के नए प्रोडक्ट्स बना रहे हैं। अब युवा टैलेंट को सीधे सरकार से फंडिंग मिलेगी।
  • ISRO की एंट्री (Space Technology): पानी बचाने की इस मुहिम में अब अंतरिक्ष विभाग (ISRO) भी शामिल हो गया है। ISRO अपने सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करके जमीन के अंदर के पानी का रियल-टाइम Data देगा ताकि सूखे वाले इलाकों में खेती की प्लानिंग की जा सके।
  • आम जनता की भागीदारी: इस पूरे मिशन को एक जन-आंदोलन बनाने के लिए सरकार ने “जल संचय जन भागीदारी” पोर्टल और मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है। इससे आप और हम रियल-टाइम में पानी के डेटा पर नजर रख सकेंगे।

ANRF (Anusandhan National Research Foundation) का गेम-चेंजिंग रोल

MAHA Water Mission की सबसे खास बात इसे चलाने वाली संस्था ‘ANRF’ है। यह भारत में रिसर्च की दुनिया में एक बहुत बड़ा सुधार है।

हाल ही में संसद द्वारा बनाई गई इस संस्था का काम भारत के हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में रिसर्च (R&D) के माहौल को बढ़ावा देना है।

ANRF यह पक्का कर रहा है कि सरकार का पैसा सिर्फ कुछ बड़े IITs या NITs तक ही सीमित न रह जाए। इसके जरिए टियर-2 शहरों की यूनिवर्सिटीज और छोटे स्टार्टअप्स को भी पैसा मिलेगा। इसे हम रिसर्च का “लोकतांत्रिक मॉडल” कह सकते हैं।

भारत का जल संकट और हमारा संविधान

अगर हम भूगोल (Geography) की बात करें, तो दुनिया की 18% से ज्यादा आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास पीने लायक ताजा पानी सिर्फ 4% है। इसलिए MAHA Water Mission पानी के दोबारा इस्तेमाल (Circular Economy) पर इतना जोर दे रहा है।

यह मिशन सरकार की दूसरी बड़ी योजनाओं, जैसे जल जीवन मिशन का एक मजबूत साथी बनेगा। आपको बता दें कि हमारी न्यायपालिका (Judiciary) ने बार-बार कहा है कि हर नागरिक को साफ पानी देना सरकार का प्राथमिक फर्ज है, और यह हमारे मौलिक अधिकारों का एक बहुत अहम हिस्सा है।

जल से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 21 (Article 21): सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के एक फैसले में साफ कहा है कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार हमारे ‘जीवन के अधिकार’ (Right to Life) का ही एक हिस्सा है।
  • राज्य सूची – प्रविष्टि 17 (State List – Entry 17): जल (जैसे जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें) मुख्य रूप से राज्य सरकारों (State) का विषय है।
  • संघ सूची – प्रविष्टि 56 (Union List – Entry 56): केंद्र सरकार को जनहित में दो राज्यों के बीच बहने वाली नदियों (Inter-state Rivers) के विकास का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 262 (Article 262): यह संसद को अधिकार देता है कि वह नदी जल विवादों को सुलझाने के लिए ट्रिब्यूनल (Tribunal) बना सके।

Static GK Connect

  • Ministry of Jal Shakti: पानी के पूरे मैनेजमेंट के लिए साल 2019 में दो अलग-अलग मंत्रालयों को मिलाकर इस नए मंत्रालय को बनाया गया था।
  • ANRF Act 2023: यह कानून हाल ही में पास हुआ है, जिसका लक्ष्य 5 सालों में 50,000 करोड़ रुपये के फंड से रिसर्च को बढ़ावा देना है। इसके पदेन अध्यक्ष (President) भारत के प्रधानमंत्री होते हैं।
  • Department of Space: 1972 में बने इस विभाग का कंट्रोल सीधे प्रधानमंत्री के पास होता है, और ISRO इसका रिसर्च विंग है।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में लॉन्च किए गए ‘MAHA Water Mission’ के संदर्भ में, इसके वित्तीय परिव्यय (Financial Outlay) और इसे संचालित करने वाली नोडल एजेंसियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन पूरी तरह से सत्य है?
a) इसे NITI Aayog द्वारा 500 करोड़ रुपये के बजट के साथ लॉन्च किया गया है, जो पूरी तरह से विदेशी ऋण पर निर्भर है。
b) इसे Ministry of Jal Shakti और ANRF द्वारा 200 करोड़ रुपये के बजट के साथ लॉन्च किया गया है, जिसमें शोध के लिए प्रत्येक कंसोर्टियम को 20 करोड़ रुपये तक का अनुदान मिलेगा। ✅
c) यह पूरी तरह से विश्व बैंक (World Bank) द्वारा वित्तपोषित 1000 करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसमें बांध बनाए जाएंगे。
d) इसे केवल IITs और NITs के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट के साथ लॉन्च किया गया है, जिसमें प्राइवेट स्टार्टअप्स भाग नहीं ले सकते।

Q2. ‘MAHA Water Mission’ का वैज्ञानिक ढांचा किन प्रमुख विषयों (Core Themes) पर ध्यान केंद्रित करेगा?
1. जल गुणवत्ता (Water Quality) और पारिस्थितिक स्वास्थ्य (Ecological Health)
2. जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy)
3. केवल समुद्र के पानी का बड़े पैमाने पर अलवणीकरण (Desalination)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

a) केवल 1
b) केवल 1 और 2 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

Q3. हाल ही में भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियम के माध्यम से स्थापित ‘Anusandhan National Research Foundation’ (ANRF) के पदेन अध्यक्ष (Ex-officio President) कौन होते हैं, जो इस संस्था को सर्वोच्च रणनीतिक दिशा प्रदान करते हैं?
a) केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री
b) भारत के राष्ट्रपति
c) भारत के प्रधानमंत्री ✅
d) नीति आयोग के सीईओ

Defence Current Affairs

BrahMos Missile Deal Vietnam Defence Current Affairs 4 Jun 2026

कई दशकों तक भारत दुनिया में हथियार खरीदने (Arms Importers) वाले देशों की लिस्ट में सबसे ऊपर रहता था। लेकिन अब वक्त बदल रहा है!

‘मेक इन इंडिया’ जैसी शानदार नीतियों के दम पर, भारत अब दुनिया के देशों को हथियार बेचकर एक ‘Net Security Provider’ बन रहा है।

अपनी इसी कूटनीति के चलते भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया (South-East Asia) में एक बहुत बड़ी जीत हासिल की है। यह कदम सीधे तौर पर चीन के बढ़ते दबदबे को संतुलित करने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है।

भारत और वियतनाम के बीच 629 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस मिसाइल डील: ‘Act East Policy’ की बड़ी कूटनीतिक जीत

हाल ही में, भारत की रक्षा इंडस्ट्री और ‘Make in India’ को ग्लोबल लेवल पर एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है।

भारत सरकार ने वियतनाम के साथ लगभग 629 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 6000 करोड़ रुपये) के BrahMos Missile System बेचने के एक महा-समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

सिंगापुर में आयोजित एशिया के सबसे बड़े सुरक्षा सम्मेलन—’Shangri-La Dialogue’—में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने दुनिया को यह खुशखबरी दी।

फिलीपींस के बाद अब वियतनाम भारत की इस बेहद खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल (Supersonic Cruise Missile) को खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन गया है। यह डील भारत की ‘Act East Policy’ की एक बहुत बड़ी सफलता है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • रक्षा निर्यात में इतिहास: 629 मिलियन डॉलर का यह समझौता भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात (Defence Export Contract) है। सरकार के 5 बिलियन डॉलर सालाना एक्सपोर्ट के लक्ष्य में यह एक बहुत बड़ी छलांग है।
  • सिर्फ मिसाइल नहीं, ट्रेनिंग भी मिलेगी: इस डील के तहत भारत सिर्फ वियतनाम को मिसाइल ही नहीं देगा, बल्कि वहां की सेना को इसे चलाने की गहन ट्रेनिंग और लंबे समय तक लॉजिस्टिक सपोर्ट (Logistical Support) भी देगा।
  • ब्रह्मोस की भारी डिमांड: फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब एक और बड़ा देश, इंडोनेशिया, भी अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए भारत से ब्रह्मोस खरीदने के बिल्कुल अंतिम चरण में है।
  • भू-राजनीतिक असर (Geopolitical Impact): दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन की मनमानियों और उसके ‘नाइन-डैश लाइन’ दावों से परेशान वियतनाम के लिए, यह मिसाइल समुद्र में चीन के खिलाफ एक बहुत बड़ी ढाल (Strategic Deterrence) का काम करेगी।

ब्रह्मोस मिसाइल इतनी खास और अजेय क्यों है?

अक्सर एग्जाम्स में ब्रह्मोस की टेक्नोलॉजी से जुड़े सवाल गहराई से पूछे जाते हैं। BrahMos असल में भारत के DRDO और रूस की कंपनी NPO Mashinostroyeniya का एक जॉइंट वेंचर (Joint Venture) है।

क्या आप जानते हैं कि इसका नाम कैसे पड़ा? भारत की शक्तिशाली ‘ब्रह्मपुत्र’ (Brahmaputra) और रूस की ‘मोस्कवा’ (Moskva) नदी के नामों को मिलाकर इसे ब्रह्मोस कहा गया है।

यह एक टू-स्टेज (Two-Stage) मिसाइल है। पहले स्टेज में इसे सॉलिड इंजन से ताकत मिलती है और दूसरे स्टेज में लिक्विड रैमजेट (Liquid Ramjet) इंजन इसे ध्वनि की गति से करीब 3 गुना तेज (2.8 Mach) उड़ाता है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ‘Fire and Forget’ सिस्टम है, मतलब एक बार टारगेट लॉक करके छोड़ दो, फिर इसे किसी निर्देश की जरूरत नहीं!

यह उड़ने के आखिरी वक्त में समुद्र की सतह से सिर्फ 3-4 मीटर ऊपर (Sea-Skimming) उड़ती है, जिसे दुनिया का कोई भी रडार पकड़ नहीं सकता।

भारत की ‘Act East Policy’ और MTCR का कमाल

यह डील दुनिया में भारत की बदलती हुई मजबूत छवि का सुबूत है। ‘Look East’ नीति को बदलकर जो ‘Act East Policy’ बनाई गई, उसका मेन फोकस आसियान (ASEAN) देशों की मिलिट्री को मजबूत करना है।

चीन जिस तरह भारत को घेरने के लिए ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (String of Pearls) बना रहा है, भारत उसी के पड़ोसियों (वियतनाम, फिलीपींस) को ताकतवर बनाकर उसे उसी की भाषा में जवाब दे रहा है।

इस सफलता के पीछे एक बहुत बड़ा कानूनी कारण भारत का Missile Technology Control Regime (MTCR) में शामिल होना है। 2016 में भारत इसका मेंबर बना था।

पहले कड़े नियमों की वजह से भारत 300 किमी से ज्यादा दूर तक मार करने वाली मिसाइल ना बना सकता था ना बेच सकता था। लेकिन MTCR में आने के बाद भारत ने ना सिर्फ ब्रह्मोस की रेंज (अब 500 किमी तक) बढ़ाई, बल्कि इसे अपने दोस्त देशों को बेचने का कानूनी अधिकार भी पा लिया।

भारत के प्रमुख रक्षा निर्यात (Major Defence Exports)

  • BrahMos Missile System: फिलीपींस और वियतनाम को निर्यात किया गया (एंटी-शिप और कोस्टल डिफेंस क्रूज मिसाइल प्रणाली)।
  • Pinaka Multi-Barrel Rocket Launcher: आर्मेनिया को निर्यात किया गया (सटीक तोपखाने प्रणाली)।
  • Swathi Weapon Locating Radar: आर्मेनिया को निर्यात किया गया (दुश्मन के तोपखाने का पता लगाने वाला रडार)।
  • Dornier-228 Aircraft: श्रीलंका और मॉरीशस को निर्यात किया गया (समुद्री गश्ती और निगरानी विमान)।
  • Advanced Towed Artillery Gun System (ATAGS): आर्मेनिया को निर्यात किया गया (DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी 155mm होवित्जर तोप)।

Static GK Connect

  • Shangri-La Dialogue: यह एशिया का एक बहुत ही प्रमुख सुरक्षा सम्मेलन है, जो 2002 से हर साल सिंगापुर में IISS द्वारा आयोजित किया जाता है।
  • Missile Technology Control Regime (MTCR): 1987 में बने इस ग्रुप में 35 देश हैं। इसका काम दुनिया में खतरनाक मिसाइलों और ड्रोन के फैलाव को रोकना है। आपको जानकर खुशी होगी कि भारत इसका मेंबर है, लेकिन चीन नहीं!
  • BrahMos Aerospace: 1998 में बनी यह कंपनी भारत सरकार (DRDO) और रूस के बीच काम करती है, और इसका हेडक्वार्टर नई दिल्ली में है।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में भारत की रक्षा कूटनीति को एक बड़ी सफलता मिली है। भारत ने किस दक्षिण-पूर्व एशियाई देश के साथ 629 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ‘ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली’ निर्यात समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस मिसाइल का दूसरा विदेशी खरीदार बन गया है?
a) फिलीपींस (Philippines)
b) इंडोनेशिया (Indonesia)
c) वियतनाम (Vietnam) ✅
d) मलेशिया (Malaysia)

Q2. रक्षा अनुसंधान में भारत की सफलता के प्रतीक ‘BrahMos’ मिसाइल की तकनीकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
a) यह केवल पनडुब्बी (Submarine) से दागी जा सकने वाली एक शॉर्ट-रेंज मिसाइल है。
b) यह एक सबसोनिक (Subsonic) बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी उड़ान गति ध्वनि से काफी कम है。
c) यह एक टू-स्टेज (Two-Stage) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो ‘फायर एंड फॉरगेट’ (Fire and Forget) सिद्धांत पर कार्य करती है और सी-स्किमिंग (Sea-Skimming) कर सकती है। ✅
d) इसे दुश्मन के रडार से छुपाने के लिए केवल अंतरिक्ष (Space) के वायुमंडल से बाहर संचालित किया जाता है।

Q3. ‘Shangri-La Dialogue’, जहां हाल ही में भारतीय रक्षा सचिव द्वारा ब्रह्मोस समझौते की आधिकारिक घोषणा की गई, प्रतिवर्ष किस देश में आयोजित किया जाने वाला एशिया का एक प्रमुख बहुपक्षीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन है?
a) स्विट्जरलैंड (जिनेवा)
b) सिंगापुर ✅
c) जापान (टोक्यो)
d) संयुक्त राज्य अमेरिका (वाशिंगटन डीसी)

Agriculture & Environment Current Affairs

Khet Bachao Abhiyan Agriculture Environment Current Affairs 4 Jun 2026

भारत की आधी से ज्यादा आबादी आज भी खेती से जुड़ी है, इसलिए कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

लेकिन बीते दशकों में हरित क्रांति (Green Revolution) से हमें पैदावार तो ज्यादा मिली, पर पर्यावरण को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा। सबसे बड़ी चिंता की बात रासायनिक खादों (खासकर यूरिया) का बहुत ज्यादा इस्तेमाल है, जिसने हमारी मिट्टी की जान निकाल दी है।

इसी राष्ट्रीय संकट से निपटने और खेती को मौसम के अनुकूल (Climate-Resilient Agriculture) बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नया जन-आंदोलन शुरू किया है। इस बार फोकस सीधा किसानों के खेतों तक साइंटिफिक नॉलेज पहुंचाना है।

खेत बचाओ अभियान की शुरुआत: टिकाऊ कृषि और मिट्टी को बचाने का एक बड़ा कदम

हाल ही में, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture) और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मिलकर पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan) शुरू किया है।

1 जून से 30 जून 2026 तक चलने वाले इस महा-अभियान का मेन टारगेट किसानों को टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) के फायदे समझाना और यूरिया जैसे रसायनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्रेरित करना है।

इस शानदार अभियान की शुरुआत केंद्रीय मंत्री ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से की।

इसी के साथ, ICAR जैसी बड़ी संस्थाओं के वैज्ञानिकों ने ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ (Mera Gaon Mera Gaurav) प्रोग्राम के तहत गांव-गांव जाकर किसानों को सीधे खेतों में जैविक खाद (Organic Manure) बनाने और कीटों से बचने की ट्रेनिंग देना भी शुरू कर दिया है。

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • यूरिया के इस्तेमाल में कटौती: इस अभियान का सबसे बड़ा टारगेट यह है कि किसान नाइट्रोजन वाली यूरिया खाद का अंधाधुंध इस्तेमाल रोकें, क्योंकि यह मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता (Natural Fertility) को पूरी तरह नष्ट कर रही है।
  • Integrated Nutrient Management (INM): किसानों को पुरानी स्टाइल की खेती छोड़कर अब सॉयल टेस्टिंग (Soil Testing) के आधार पर संतुलित पोषण वाली तकनीक (INM) अपनाने को कहा जा रहा है।
  • खेतों में प्रैक्टिकल डेमो: अब पंचायत स्तर पर कृषि वैज्ञानिक खेतों में आकर किसानों को हरी खाद (Green Manuring), केंचुआ खाद और ईको-फ्रेंडली कीटनाशक बनाना सिखा रहे हैं।
  • Climate-Smart Agriculture: मौसम के हिसाब से खेती करने के लिए किसानों को उनके इलाके की स्पेशल जानकारी (Agromet Advisories) दी जा रही है ताकि बाढ़ या सूखे में भी उनकी फसल बची रहे।
  • नकली दवाइयों से बचाव: वैज्ञानिकों ने किसानों को मार्केट में बिकने वाले नकली कीटनाशकों से बचने की सलाह दी है और PM-KISAN जैसी डायरेक्ट फायदे वाली (DBT) योजनाओं से जुड़ने को कहा है।

मिट्टी का क्षरण और NPK का बिगड़ता बैलेंस

क्या आप जानते हैं कि भारत के खेत इस वक्त एक बहुत ही गंभीर ‘पोषण असंतुलन’ (Nutrient Imbalance) के शिकार हैं?

विज्ञान के हिसाब से मिट्टी में नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P) और पोटेशियम (K) का सबसे सही अनुपात 4:2:1 होना चाहिए। लेकिन यूरिया पर मिलने वाली भारी सब्सिडी के चक्कर में, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसान इसे 10:3:1 के खतरनाक लेवल तक इस्तेमाल कर रहे हैं!

इसके परिणाम बहुत डरावने आ रहे हैं। हमारी मिट्टी तेजी से या तो बहुत ज्यादा एसिडिक (Acidic) हो रही है या क्षारीय (Alkaline)।

मिट्टी में पानी रोकने की ताकत खत्म हो रही है। और तो और, यह एक्स्ट्रा केमिकल रिस-रिस कर जमीन के पानी में मिल रहा है (Nitrate Leaching), जिससे छोटे बच्चों में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ (Blue Baby Syndrome) जैसी बीमारियां फैल रही हैं।

‘खेत बचाओ अभियान’ इसी खतरे को टालने के लिए बनाया गया है। इससे न सिर्फ मिट्टी की जान बचेगी, बल्कि हम जो विदेशों से महंगी खाद मंगाते हैं (Import Dependence), उस पर भी लगाम लगेगी। इससे हमारे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex) बचेगा।

योजनाओं का मेल और Lab-to-Land अप्रोच

यह अभियान इस बात की मिसाल है कि सरकार अब अलग-अलग नहीं, बल्कि ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole of Government) अप्रोच के साथ काम कर रही है।

इसे बजट की “PM-PRANAM” योजना से जोड़ दिया गया है, जिसका लक्ष्य भी राज्यों को यूरिया का इस्तेमाल कम करने और नैनो यूरिया अपनाने पर ईनाम देना है।

इसके अलावा, ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’ योजना के करोड़ों डेटा का इस्तेमाल करके अब ब्लॉक लेवल पर खेती की प्लानिंग (Scientific Crop Planning) की जा रही है।

ICAR के वैज्ञानिकों का गांव-गांव जाना इस बात का परफेक्ट उदाहरण है कि कैसे लैब की साइंस सीधे खेतों की मिट्टी (Lab-to-Land) तक पहुंच रही है।

कृषि प्रणाली और पर्यावरण पर उनका असर

  • पारंपरिक/हरित क्रांति कृषि: यूरिया/DAP, कीटनाशक और पानी का बहुत ज्यादा उपयोग। पर्यावरण पर असर: जमीन के पानी का प्रदूषण, मिट्टी की ताकत खत्म होना।
  • जैविक कृषि (Organic Farming): रसायनों पर पूरी तरह बैन, सिर्फ जैविक खाद का इस्तेमाल। पर्यावरण पर असर: मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, लेकिन शुरू में पैदावार कम हो सकती है।
  • एकीकृत कृषि (INM/IPM): जैविक और रासायनिक खाद का बिल्कुल सही मिश्रण। पर्यावरण पर असर: बम्पर फसल के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरण की सुरक्षा।
  • प्राकृतिक कृषि (Natural Farming): शून्य बजट (ZBNF), बीजामृत का उपयोग, कोई बाहरी खाद नहीं। पर्यावरण पर असर: पूरी तरह से प्रकृति के अनुकूल, किसानों का कर्ज कम होता है।

Static GK Connect

  • Nodal Ministry: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय। इन दोनों को मिलाकर गांव के सम्पूर्ण विकास पर फोकस किया गया है।
  • ICAR (Indian Council of Agricultural Research): इसकी स्थापना 16 जुलाई 1929 को रॉयल कमीशन की रिपोर्ट पर हुई थी। यह दुनिया के सबसे बड़े कृषि नेटवर्क्स में से एक है और केंद्रीय कृषि मंत्री हमेशा इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।
  • संविधान का Article 48: हमारे संविधान के भाग IV (DPSP) में साफ लिखा है कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो खेती और पशुपालन को मॉडर्न और साइंटिफिक तरीके (Modern and Scientific Lines) से विकसित करे।
  • Mera Gaon Mera Gaurav (MGMG): इस बेहतरीन योजना को 2015 में शुरू किया गया था। इसका मकसद वैज्ञानिकों को गांव गोद लेने (Adopt Villages) और नई तकनीकी किसानों के दरवाजे तक ले जाने के लिए प्रेरित करना है।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
a) केवल कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए GM (Genetically Modified) फसलों के उत्पादन को भारी बढ़ावा देना。
b) मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना, यूरिया के अंधाधुंध उपयोग को कम करना और जलवायु-अनुकूल टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना। ✅
c) सभी छोटे और सीमांत किसानों को नए ट्रैक्टर खरीदने के लिए 100% प्रत्यक्ष सब्सिडी प्रदान करना。
d) कम उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करके उसे औद्योगिक उपयोग (SEZ) के लिए परिवर्तित करना।

Q2. ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए ‘INM’ प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आधुनिक कृषि विज्ञान के क्षेत्र में INM का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है?
a) Indian National Market
b) Integrated Natural Modification
c) Integrated Nutrient Management ✅
d) Internal Nitrogen Mechanism

Q3. हाल ही में ICAR-CPRI (केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान) के वैज्ञानिकों ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ (MGMG) कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को जागरूक किया। कृषि अनुसंधान में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ICAR-CPRI का मुख्यालय भारत में कहाँ स्थित है?
a) नई दिल्ली (New Delhi)
b) शिमला (Shimla, Himachal Pradesh) ✅
c) लखनऊ (Lucknow, Uttar Pradesh)
d) कटक (Cuttack, Odisha)

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