Top Daily Current Affairs 2 may 2026: SCoR Railway, BRICS & SVANidhi

Railway & Geography Current Affairs

South Coast Railway Zone SCoR Visakhapatnam Waltair Division Current Affairs for UPSC

दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR) जोन का परिचालन शुरू: वाल्टेयर डिवीजन का विशाखापत्तनम और रायगड़ा में ऐतिहासिक विभाजन

दोस्तों, भारतीय रेलवे के प्रशासनिक और ढांचागत इतिहास में पिछले 24 घंटों में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है, जो आपकी UPSC और SSC परीक्षाओं के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।

रेल मंत्रालय की नई अधिसूचना के मुताबिक, देश के सबसे नए रेलवे जोन यानी दक्षिण तटीय रेलवे (South Coast Railway – SCoR) ने अधिकारिक तौर पर अपना कामकाज शुरू कर दिया है।

इसके साथ ही, लगभग 100 साल से भी ज्यादा पुराने और सामरिक रूप से बेहद खास वाल्टेयर रेलवे डिवीजन (Waltair Railway Division) का बंटवारा करके दो नए डिवीजन—विशाखापत्तनम (Visakhapatnam) और रायगड़ा (Rayagada)—बनाए गए हैं।

यह नया ढांचा तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा के आदिवासी इलाकों में रेल कनेक्टिविटी (Rail Connectivity) को तो बेहतर बनाएगा ही, साथ ही विशाखापत्तनम, गंगावरम और कृष्णपटनम जैसे बड़े बंदरगाहों से माल ढुलाई (Freight Movement) को भी रफ्तार देगा।

अगर आप UPSC या SSC की तैयारी कर रहे हैं, तो रेलवे का यह भौगोलिक पुनर्गठन आपके लिए भूगोल और प्रशासनिक सुधार दोनों ही लिहाज से बहुत काम का टॉपिक है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • देश का 18वां रेलवे जोन: आखिरकार दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR) भारत का 18वां रेलवे जोन बन गया है और इसका हेडक्वार्टर विशाखापत्तनम में बनाया गया है।
  • वाल्टेयर डिवीजन का अंत: एक सदी से भी ज्यादा पुराने वाल्टेयर डिवीजन को खत्म करके इसके रूट को दो नए हिस्सों में बांट दिया गया है।
  • रायगड़ा रेलवे प्रभाग: यह नया डिवीजन पूर्व तटीय रेलवे (ECoR) के तहत काम करेगा और ओडिशा के 6 पिछड़े और आदिवासी जिलों में रेल प्रोजेक्ट्स को संभालेगा।
  • विशाखापत्तनम रेलवे प्रभाग: वाल्टेयर का जो तटीय हिस्सा आंध्र प्रदेश में बच गया था, उसे अब नए SCoR जोन के तहत विशाखापत्तनम डिवीजन का नाम दिया गया है।

वाल्टेयर प्रभाग का रणनीतिक विभाजन और क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र

▪️ चलिए समझते हैं कि यह बंटवारा कैसे हुआ। पुराने वाल्टेयर डिवीजन के कुल 1106 RKM (रूट किलोमीटर) के बड़े रेल नेटवर्क को बहुत ही सोच-समझकर बांटा गया है।

इसके तहत, कोयला और खनिज ढोने के लिए सबसे जरूरी मानी जाने वाली कोट्टावलासा-किरंदुल रेल लाइन (Kottavalasa-Kirandul – KK Line) का ज्यादातर हिस्सा ओडिशा के नए रायगड़ा डिवीजन को मिला है ताकि माल ढुलाई का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

वहीं दूसरी तरफ, विशाखापत्तनम की मुख्य रेल लाइन और तटीय रास्तों को नए विशाखापत्तनम डिवीजन के पास रखा गया है। यह नया सेटअप आंध्र और ओडिशा के सीमावर्ती जिलों में तेजी से विकास लाएगा。

दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR) की परिचालन क्षमता और नए प्रभागों का ढांचा

▪️ इस नए जोन के आने से भारतीय रेलवे के फैसले लेने की रफ्तार बढ़ेगी और अटके हुए प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे। नया विशाखापत्तनम डिवीजन अब SCoR जोन के तहत एक मजबूत इकाई के रूप में काम करेगा, जिसके पास कुल 463 RKM का नेटवर्क है।

वहीं रायगड़ा डिवीजन पूर्व तटीय रेलवे (ECoR) के तहत काम करेगा और इसके हिस्से में 696 RKM का नेटवर्क आया है, जो ओडिशा के रायगड़ा, कोरापुट, मल्कनगिरी, नबरंगपुर, गजपति और कंधमाल जैसे जिलों के विकास में मदद करेगा।

रेलवे प्रभाग (Railway Division)संबद्ध जोन (Associated Zone)रूट किलोमीटर (Route Km)मुख्य रेलवे खंड (Major Railway Sections)
विशाखापत्तनम डिवीजनदक्षिण तटीय रेलवे (SCoR)463 RKMइच्छापुरम-पलासा-विशाखापत्तनम-दुव्वाड़ा (270 km), विजयनगरम-कुनेरू (102 km)
रायगड़ा डिवीजनपूर्व तटीय रेलवे (ECoR)696 RKMकोरापुट-सिंगापुर रोड (164 km), कोट्टावलासा-किरंदुल लाइन (442 km)

Static GK Connect

  • दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR): इसका मुख्यालय यानी हेडक्वार्टर विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में है। इसे भारत के 18वें रेलवे जोन के रूप में कैबिनेट से मंजूरी मिली थी और संदीप माथुर इसके पहले जनरल मैनेजर बनाए गए हैं।
  • पूर्व तटीय रेलवे (ECoR): इसका हेडक्वार्टर भुवनेश्वर (ओडिशा) में है। इसकी घोषणा 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने की थी और यह 1 अप्रैल 2003 से पूरी तरह चालू हुआ था।
  • संवैधानिक और कानूनी जुड़ाव: आपको पता होना चाहिए कि रेलवे पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन है और यह संविधान की ‘संघ सूची’ (Union List) की प्रविष्टि 22 में आता है। पूरे देश में रेलवे के काम को ‘रेलवे अधिनियम, 1989’ के नियमों के तहत चलाया जाता है।

Current Affairs MCQs

Q1. नवनिर्मित ‘दक्षिण तटीय रेलवे’ (SCoR) जोन का प्रशासनिक मुख्यालय कहाँ स्थित है?
a) सिकंदराबाद
b) विशाखापत्तनम ✅
c) विजयवाड़ा
d) भुवनेश्वर

Q2. हाल ही में पूरी तरह कार्यात्मक हुआ रायगड़ा रेलवे प्रभाग (Rayagada Railway Division) किस रेलवे जोन के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेगा?
a) दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR)
b) पूर्व तटीय रेलवे (ECoR) ✅
c) दक्षिण मध्य रेलवे (SCR)
d) दक्षिण पूर्व रेलवे (SER)

Q3. विभाजन के बाद नवगठित विशाखापत्तनम प्रभाग के भौगोलिक क्षेत्राधिकार में निम्नलिखित में से कौन-सा रेल मार्ग शामिल है?
a) कोरापुट – सिंगापुर रोड प्रभाग
b) कोट्टावलासा – किरंदुल मार्ग का मुख्य भाग
c) विजयनगरम (शामिल) – kuनेरू (शामिल) रेल खंड ✅
d) गुनुपुर – थरुवेली नया रेल मार्ग

Judiciary & Governance Current Affairs

Supreme Court India Sex Workers Protection Victim Protection Plan Guidelines

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: तस्करी की शिकार महिला यौन कर्मियों को आपराधिक मुकदमों से बचाने के लिए दिशा-निर्देश जारी

दोस्तों, हमारे देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने मानवाधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की दो जजों वाली बेंच ने केंद्र सरकार से सिफारिश की है कि वे ‘अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम’ (ITPA) में बदलाव करें।

कोर्ट का कहना है कि जिन महिलाओं को जबरन बहला-फुसलाकर या तस्करी करके वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेला जाता है, उन्हें खुद अपराधी नहीं माना जाना चाहिए।

वे तो इस जुर्म का शिकार (पीड़ित) हैं, इसलिए उन पर मुकदमा चलाना उनके साथ नाइंसाफी होगी।

यह फैसला कानून के सामने बराबरी और कमजोर तबके के पुनर्वास के लिए बेहद जरूरी है।

अगर आप UPSC या स्टेट सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं, तो GS पेपर-2 (शासन और सामाजिक न्याय) के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण न्यायिक अपडेट है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • पीड़ित सुरक्षा योजना: संसद जब तक इस बारे में कोई पक्का कानून नहीं बना देती, तब तक पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट की यह सुरक्षा योजना ही पूरे देश में लागू रहेगी।
  • मजबूरी और मर्जी में फर्क: कोर्ट ने साफ कहा है कि जो लोग अपनी मर्जी से यौन कार्य चुनते हैं और जिन्हें जबरन इस धंधे में धकेला जाता है, उनके कानूनी अधिकारों में साफ अंतर होना चाहिए।
  • कस्टडी में शोषण पर रोक: पुलिस द्वारा बचाई गई (रेस्क्यू की गई) महिलाओं के मानवाधिकारों की रक्षा और पुलिस कस्टडी में उनके साथ होने वाले शोषण को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।
  • मजिस्ट्रेटों को सख्त निर्देश: जब भी ऐसी किसी पीड़ित महिला को मजिस्ट्रेट के सामने लाया जाए, तो मजिस्ट्रेट को पहले खुद जांच करनी होगी ताकि अपनी मर्जी से काम करने वाले वयस्कों को उनकी इच्छा के खिलाफ जबरन कस्टडी में न रखा जाए।

पीड़ित सुरक्षा योजना (Victim Protection Plan) के प्रमुख नीतिगत बिंदु

▪️ सुप्रीम कोर्ट ने रेस्क्यू ऑपरेशन्स के लिए कुछ कड़े नियम तय किए हैं। अब से किसी भी महिला को रेस्क्यू करते समय पुलिस उनके साथ गाली-कॉल या किसी भी तरह की मारपीट नहीं कर सकती।

रेस्क्यू साइट्स पर फोटो या वीडियो बनाते समय पीड़ितों का चेहरा पूरी तरह छुपा कर रखना होगा ताकि समाज में उनकी पहचान उजागर न हो।

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर पुलिस हिरासत में किसी पीड़ित का शोषण होता है, तो दोषी पुलिसकर्मी पर कड़ी कार्रवाई के लिए अलग से सख्त कानून बनाया जाए।

संवैधानिक गरिमा और कानूनी बाधाएं

▪️ सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि मानव तस्करी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले ‘गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन है। ज्यादातर लोग भीषण गरीबी, मजबूरी और अशिक्षा की वजह से इस दलदल में फंसते हैं।

हां, कोर्ट ने यह बात भी साफ कर दी है कि यौन कर्मियों की मदद करने का मतलब वेश्यावृत्ति को कानूनी रूप से सही ठहराना नहीं है, बल्कि इसका मकसद हर इंसान को कानून के सामने बराबरी और सम्मान देना है।

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  • संवैधानिक प्रावधान:
    • अनुच्छेद 23: यह अनुच्छेद देश में मानव तस्करी (Human Trafficking) और जबरन मजदूरी (बेगार) को पूरी तरह बैन करता है और इसे कानूनन जुर्म मानता है।
    • अनुच्छेद 21: यह देश के हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने की आजादी (Right to Dignified Life) देता है।
  • वैधानिक अधिनियम: ‘अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956’ (ITPA) भारत में व्यावसायिक यौन शोषण और तस्करी को रोकने वाला प्राथमिक कानून है।
  • जरूरी केस स्टडी: ‘बुद्धदेव करमास्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2011)’ मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यौन कर्मियों को भी सम्मान से जीने का पूरा अधिकार है।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में किस न्यायिक पीठ ने तस्करी की शिकार महिला यौन कर्मियों को आपराधिक मुकदमों से बचाने के लिए एक ‘पीड़ित सुरक्षा योजना’ (Victim Protection Plan) लागू की है?
a) जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली
b) जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन ✅
c) जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बी.आर. गवई
d) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अभय एस. ओका

Q2. मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण को रोकने के लिए भारत में कौन-सा प्राथमिक वैधानिक कानून लागू है?
a) घरेलू हिंसा निवारण अधिनियम, 2005
b) अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (ITPA) ✅
c) किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015
d) यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012

Q3. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद मानव तस्करी और बेगार का पूर्ण निषेध करता है?
a) अनुच्छेद 17
b) अनुच्छेद 19
c) अनुच्छेद 23 ✅
d) अनुच्छेद 24

Judiciary & Constitution Current Affairs

Right to be Forgotten Delhi High Court Digital Privacy Fundamental Rights

‘भूल जाने का अधिकार’ (Right to be Forgotten) को दिल्ली हाई कोर्ट की मान्यता: सर्च इंजनों को नाम-आधारित खोज हटाने के निर्देश

दोस्तों, आज के डिजिटल और इंटरनेट के जमाने में हमारी प्राइवेसी यानी गोपनीयता सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।

इसी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘भूल जाने के अधिकार’ (Right to be Forgotten) को मान्यता देते हुए एक बहुत ही कमाल का फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने कहा है कि गूगल (Google) जैसे सर्च इंजन और ऑनलाइन कानूनी वेबसाइटें किसी भी कोर्ट केस के फैसलों को हमेशा के लिए नाम के जरिए सर्च (Name-based Searches) करने के लिए खुला नहीं रख सकते।

खास तौर पर तब, जब वह मामला किसी की बेहद निजी जिंदगी से जुड़ा हो या कोर्ट ने उस व्यक्ति को बाइज्जत बरी (Acquittal) कर दिया हो।

यह ऐतिहासिक फैसला हमारे डिजिटल अधिकारों और डिजिटल प्राइवेसी के बीच एक सही तालमेल बनाने के लिए बहुत जरूरी है।

UPSC मुख्य परीक्षा के GS पेपर-2 के लिए मौलिक अधिकारों की बदलती परिभाषा को समझने के लिए यह एक बेहतरीन उदाहरण है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • नाम सर्च पर लगेगी लगाम: गूगल और अन्य कानूनी डेटाबेस वेबसाइटों को अब बरी हो चुके याचिकाकर्ताओं के नामों को डी-इंडेक्स (De-index) करना होगा ताकि कोई नाम सर्च करके उनका पुराना केस न ढूंढ सके।
  • प्राइवेसी और सूचना के अधिकार में संतुलन: कोर्ट ने माना कि अदालती फैसले सार्वजनिक होते हैं, लेकिन किसी बेगुनाह की प्राइवेसी को बचाने के लिए उस पर कुछ पाबंदियां लगाना बिल्कुल सही है।
  • अनुच्छेद 21 का दायरा बढ़ा: इस फैसले के बाद हमारी प्राइवेसी का अधिकार अब इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में भी और अधिक मजबूत हो गया है।
  • बेगुनाहों को मिलेगी राहत: बरी होने के बावजूद जिन लोगों को इंटरनेट पर पुराने केस दिखने के कारण नौकरी मिलने, शादी होने या समाज में इज्जत से जीने में दिक्कत आ रही थी, उन्हें अब राहत मिलेगी।

डिजिटल गोपनीयता और सार्वजनिक न्याय का न्यायिक संतुलन

▪️ दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ किया कि अदालती फैसले वैसे तो पब्लिक डॉक्यूमेंट्स हैं, लेकिन बरी हो चुके व्यक्ति के अतीत के मुकदमों को हमेशा इंटरनेट पर तैरते रहने देना उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है।

निर्दोष साबित होने के बाद भी नाम-आधारित सर्च में उनके पुराने मुकदमों की खबरें आने से लोग बेवजह सामाजिक कलंक झेलने पर मजबूर थे।

इसी वजह से कोर्ट ने सर्च इंजनों को ‘डी-इंडेक्सिंग’ (De-indexing) करने और ऐसी व्यक्तिगत जानकारियों को हटाने के सख्त आदेश दिए हैं।

भूल जाने के अधिकार की वैश्विक अवधारणा और भारत की स्थिति

▪️ यह ‘भूल जाने का अधिकार’ पूरी दुनिया में चर्चा का विषय रहा है। इसकी शुरुआत यूरोपीय संघ (EU) के प्रसिद्ध जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) से हुई थी।

वैसे तो भारत में इसके लिए कोई अलग से कानून नहीं है, लेकिन हमारे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 में डेटा को डिलीट और सुधारने का अधिकार दिया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला बताता है कि इंटरनेट किसी की पुरानी भूलों या बंद हो चुके मुकदमों को उम्रभर की सजा नहीं बना सकता।

Static GK Connect

  • के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामला (2017): इस ऐतिहासिक केस में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से ‘निजता के अधिकार’ (Right to Privacy) को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार माना था, जिसमें डिजिटल प्राइवेसी भी शामिल है।
  • वैश्विक शुरुआत: भूल जाने का अधिकार पहली बार साल 2014 में ‘गूगल स्पेन’ मामले में यूरोपीय यूनियन के कोर्ट ने रखी थी।
  • संवैधानिक आधार: हमारे संविधान का अनुच्छेद 21 (जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) ही इस पूरे अधिकार का असली कानूनी आधार है।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में किस उच्च न्यायालय ने बरी हो चुके व्यक्तियों के मुकदमों के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स को हटाने के लिए ‘भूल जाने के अधिकार’ (Right to be Forgotten) के तहत गूगल को डी-इंडेक्स करने का निर्देश दिया है?
a) बॉम्बे उच्च न्यायालय
b) दिल्ली उच्च न्यायालय ✅
c) इलाहाबाद उच्च न्यायालय
d) मद्रास उच्च न्यायालय

Q2. ‘भूल जाने के अधिकार’ (Right to be Forgotten) का प्राथमिक कानूनी स्रोत वैश्विक स्तर पर निम्नलिखित में से किस कानून को माना जाता है?
a) अमेरिकी गोपनीयता अधिनियम
b) यूरोपीय संघ का सामान्य डेटा संरक्षण नियमन (GDPR) ✅
c) डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA)
d) सूचना का अधिकार अधिनियम

Q3. भारतीय न्यायशास्त्र में ‘गोपनीयता के अधिकार’ को किस वर्ष ऐतिहासिक पुट्टास्वामी मामले के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया गया था?
a) 2014
b) 2015
c) 2017 ✅
d) 2019

International Relations & Culture Current Affairs

BRICS Culture Working Group Meeting CWG Varanasi Creative Economy Current Affairs

वाराणसी में आयोजित होगी दूसरी BRICS संस्कृति कार्य समूह (CWG) की बैठक: रचनात्मक अर्थव्यवस्था और AI पर होगा मुख्य संवाद

दोस्तों, भारत की सांस्कृतिक और कूटनीतिक धाक को पूरी दुनिया में प्रदर्शित करने के लिए एक बहुत ही शानदार खबर आई है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बताया है कि इस साल की दूसरी BRICS संस्कृति कार्य समूह (Culture Working Group – CWG) की बैठक का आयोजन उत्तर प्रदेश की बेहद प्राचीन और आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में होने जा रहा है।

भारत की BRICS 2026 की अध्यक्षता के तहत हो रही इस बैठक की थीम ‘सततता, नवाचार, सहयोग और लचीलेपन का निर्माण’ रखी गई है।

इस बैठक का असली मकसद BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक तालमेल बढ़ाना, आर्ट और डिजाइन से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों के सांस्कृतिक उपयोग पर एक बेहतर ग्लोबल पॉलिसी बनाना है।

अगर आप UPSC या किसी भी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो इंटरनेशनल रिलेशंस (IR) और कल्चरल समिट्स के लिए यह टॉपिक बहुत ज्यादा अहम है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • वाराणसी में दो दिवसीय बैठक: भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाने वाली काशी नगरी में इस दो दिवसीय इंटरनेशनल मीटिंग का आयोजन किया जाएगा।
  • रचनात्मक अर्थव्यवस्था और AI: इस बैठक में कॉपीराइट की सुरक्षा, रचनात्मक उद्योगों और संस्कृति के क्षेत्र में AI के सही और नैतिक इस्तेमाल पर गहराई से चर्चा होगी।
  • लूटी हुई कलाकृतियों की वापसी: विदेशों में अवैध रूप से भेजी गई हमारे देश की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों और कलाकृतियों को सुरक्षित वापस लाने की रणनीति पर खास जोर दिया जाएगा।
  • सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी: काशी को उसके ऐतिहासिक महत्व और जीवित सांस्कृतिक धरोहरों की वजह से इस बड़ी बैठक के लिए चुना गया है।

बैठक के तीन मुख्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र और विषयगत पैनल चर्चाएं

▪️ चलिए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत होगी। इस मीटिंग के एजेंडे को तीन मुख्य प्राथमिकताओं में बांटा गया है।

पहला है ‘क्रिएटिव इकोनॉमी और AI’, जिसमें डिजिटल जमाने में कलाकारों के कॉपीराइट अधिकारों को सुरक्षित रखने पर चर्चा होगी।

दूसरा है ‘सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षित स्वदेश वापसी’ यानी जो ऐतिहासिक मूर्तियां या कलाकृतियां भारत से चोरी होकर विदेशों में चली गईं, उन्हें वापस लाने के लिए दूसरे देशों से तालमेल बनाना।

और तीसरा मुद्दा है ‘संस्कृति और क्लाइमेट चेंज’, जिसके तहत पर्यावरण को बचाने के लिए पारंपरिक ज्ञान का इस्तेमाल किया जाएगा।

वाराणसी का ऐतिहासिक चयन और सांस्कृतिक गतिविधियां

▪️ बनारस को चुनने के पीछे भारत की अपनी ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को दुनिया के सामने रखने की रणनीति है।

इस बैठक में आने वाले विदेशी मेहमानों को गंगा नदी में शानदार क्रूज की सवारी कराई जाएगी, विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती का दिव्य अनुभव दिया जाएगा और सारनाथ के बौद्ध ऐतिहासिक धरोहरों का दौरा कराया जाएगा।

इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति की छवि भी विश्व पटल पर मजबूत होगी।

प्राथमिकता क्षेत्र (Priority Areas)मुख्य ध्यान केंद्रित बिंदु (Key Focus Points)नियोजित सांस्कृतिक गतिविधियां (Cultural Itinerary)
क्रिएटिव इकोनॉमी और AIकॉपीराइट सुरक्षा, सांस्कृतिक उद्योगों में AI का नैतिक उपयोगगंगा क्रूज और प्रसिद्ध गंगा आरती का प्रत्यक्ष दर्शन
धरोहर संरक्षण और पुनर्प्राप्तिअवैध तस्करी की गई ऐतिहासिक संपत्तियों की मूल देशों को वापसीसारनाथ बौद्ध धरोहर स्थल का ऐतिहासिक शैक्षणिक दौरा
संस्कृति और सतत विकासजलवायु परिवर्तन के विरुद्ध संस्कृति को एक सतत साधन बनानाविभिन्न पारंपरिक नृत्य और संगीत के सांस्कृतिक कार्यक्रम

Static GK Connect

  • BRICS सांस्कृतिक सहयोग: सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए साल 2015 में एक ऑफिशियल समझौता हुआ था। भारत इससे पहले 2016 (गोवा) और 2021 (नई दिल्ली) में भी इस सांस्कृतिक बैठक की सफलतापूर्वक मेजबानी कर चुका है।
  • काशी का गौरव: वाराणसी दुनिया के सबसे पुराने बसे हुए शहरों में से एक है। आपको याद होगा कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) ने साल 2022-23 के लिए वाराणसी को अपनी पहली ‘सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी’ घोषित किया था।
  • नोडल मंत्रालय: इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी ‘केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय’ (Ministry of Culture) की है और वर्तमान में संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल इसके प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी हैं।

Current Affairs MCQs

Q1. वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता के दौरान दूसरी BRICS संस्कृति कार्य समूह (CWG) की बैठक किस स्थान पर आयोजित की जा रही है?
a) नई दिल्ली
b) वाराणसी ✅
c) भोपाल
d) चेन्नई

Q2. वाराणसी में होने वाली BRICS संस्कृति कार्य समूह की बैठक के एजेंडे में निम्नलिखित में से कौन-सा विषय प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है?
a) क्रिएटिव इकोनॉमी, कॉपीराइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
b) सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षित स्वदेश वापसी (Return of Cultural Property)
c) जैव विविधता संरक्षण और गहरे समुद्र में खनन (Deep Sea Mining) ✅
d) संस्कृति, जलवायु और सतत विकास

Q3. BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने वाला मूल बहुपक्षीय समझौता किस वर्ष हस्ताक्षरित किया गया था?
a) 2010
b) 2012
c) 2015 ✅
d) 2020

Economy & Government Schemes Current Affairs

PM SVANidhi Scheme 6 Years Completion Street Vendors Financial Inclusion Current Affairs

पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) योजना के शानदार 6 वर्ष पूर्ण: लाखों स्ट्रीट वेंडर्स का डिजिटल और वित्तीय सशक्तिकरण

दोस्तों, हमारे देश के छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों (Street Vendors) की जिंदगी बदलने वाली भारत सरकार की बेहद लोकप्रिय योजना पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) ने अपने सफल क्रियान्वयन के शानदार 6 साल पूरे कर लिए हैं।

इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की तारीफ करते हुए इसे हमारे गरीब भाइयों के ‘विश्वास, सम्मान और तरक्की’ का सबसे बड़ा जरिया बताया है।

कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में जून 2020 में शुरू हुई इस योजना ने देश के लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी गारंटी के (Collateral-free) बहुत ही आसान दरों पर लोन देकर उन्हें पुराने साहूकारों के कर्ज के जाल से निकाला है और उन्हें डिजिटल पेमेंट्स की मुख्यधारा से जोड़ा है।

UPSC और बैंकिंग की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह योजना वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और सरकारी कल्याणकारी नीतियों का एक बहुत ही शानदार उदाहरण है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • बिना किसी गारंटी के कर्ज: रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को अपना धंधा दोबारा शुरू करने के लिए पहली बार में ₹10,000, दूसरी बार में ₹20,000 और तीसरी बार में ₹50,000 तक का लोन बिना किसी गारंटी के आसानी से मिल जाता है।
  • 7% की ब्याज सब्सिडी: जो लोग समय पर लोन चुकाते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से 7% की सालाना ब्याज सब्सिडी मिलती है और ऑनलाइन पेमेंट्स करने पर कैशबैक भी दिया जाता है।
  • डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा: इस योजना ने छोटे दुकानदारों को मोबाइल से UPI पेमेंट्स करना सिखाया है, जिससे बैंकों में उनकी क्रेडिट रेटिंग सुधरी है और भविष्य में उन्हें बड़ा लोन मिलना आसान हुआ है।
  • स्वनिधि से समृद्धि: इस विशेष पहल के तहत लाभार्थियों के पूरे परिवार को बीमा और पेंशन जैसी अन्य सरकारी योजनाओं जैसे कि पीएम सुरक्षा बीमा और जनधन योजना से भी जोड़ा जा रहा है।

त्रि-स्तरीय ऋण संरचना (Three-tier Loan Structure) और ब्याज सब्सिडी लाभ

▪️ आइए समझते हैं कि यह स्वनिधि योजना वास्तव में काम कैसे करती है। इस स्कीम के तहत रेहड़ी-पटरी वालों को तीन चरणों में लोन की मदद दी जाती है।

सबसे पहले उन्हें अपनी दुकान शुरू करने के लिए 10,000 रुपये का शुरुआती लोन मिलता है। इसे समय पर चुकाने के बाद वे 20,000 रुपये के दूसरे लोन के हकदार हो जाते हैं, और इसके भी सफल भुगतान के बाद वे 50,000 रुपये का तीसरा लोन ले सकते हैं।

सबसे बेहतरीन बात यह है कि जो लोग समय पर अपनी किस्तें चुकाते हैं, उन्हें सालाना 7% की ब्याज सब्सिडी मिलती है जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाती है।

डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और ‘स्वनिधि से समृद्धि’ अभियान

▪️ यह योजना केवल लोन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने हमारे छोटे दुकानदारों को डिजिटल साक्षर (Digital Literate) भी बनाया है। जब वे अपनी दुकान पर मोबाइल से भुगतान स्वीकार करते हैं, तो उन्हें हर महीने कैशबैक मिलता है।

इससे उनका एक डिजिटल रिकॉर्ड बनता है जो बड़े सरकारी बैंकों की नजर में उनकी साख मजबूत करता है।

इसके साथ ही, ‘स्वनिधि से समृद्धि’ अभियान के जरिए सरकार इन परिवारों की पहचान करके उन्हें स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और राशन जैसी 8 अन्य बड़ी योजनाओं का सीधा लाभ भी दे रही है।

ऋण चरण (Loan Phase)ऋण राशि (Loan Amount)संपार्श्विक (Collateral Requirement)ब्याज सब्सिडी प्रोत्साहन (Interest Subsidy Benefit)
प्रथम किश्त (First Tranche)₹10,000 तकशून्य (No Collateral)7% वार्षिक सब्सिडी (सीधे खाते में)
द्वितीय किश्त (Second Tranche)₹20,000 तकशून्य (No Collateral)7% वार्षिक सब्सिडी (सीधे खाते में)
तृतीय किश्त (Third Tranche)₹50,000 तकशून्य (No Collateral)7% वार्षिक सब्सिडी (सीधे खाते में)

Static GK Connect

  • योजना की शुरुआत और मंत्रालय: इस योजना को कोविड महामारी के बाद 1 जून 2020 को लॉन्च किया गया था। इसे केंद्रीय ‘आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय’ (Ministry of Housing and Urban Affairs – MoHUA) द्वारा चलाया जाता है।
  • लागू करने वाली एजेंसी: ‘भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक’ यानी सिडबी (SIDBI) को इस योजना का मुख्य कार्यान्वयन भागीदार बनाया गया है।
  • सिडबी (SIDBI): सिडबी की स्थापना 2 अप्रैल 1990 को एक वैधानिक संस्था के तौर पर हुई थी। इसका हेडक्वार्टर लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में है, जो छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने का काम करता है।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में सफल क्रियान्वयन के 6 वर्ष पूरे करने वाली पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) योजना का नोडल मंत्रालय कौन-सा है?
a) केंद्रीय वित्त मंत्रालय
b) केंद्रीय आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA) ✅
c) केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME)
d) केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय

Q2. पीएम स्वनिधि योजना के तहत समय पर ऋण चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को वार्षिक रूप से कितने प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है?
a) 5 प्रतिशत
b) 7 प्रतिशत ✅
c) 8 प्रतिशत
d) 10 प्रतिशत

Q3. पीएम स्वनिधि योजना के कार्यान्वयन के लिए तकनीकी और ऋण प्रबंधन भागीदार के रूप में कौन-सा संस्थान कार्य कर रहा है?
a) नाबार्ड (NABARD)
b) भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) ✅
c) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
d) भारतीय स्टेट बैंक (SBI)

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