Economy & Banking Current Affairs

दोस्तों, भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया गया है।
यह decision असल में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से होने वाले आर्थिक जोखिमों को कम करने की दिशा में एक बहुत अच्छी पहल है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के कदम न सिर्फ हमारे बैंकिंग सेक्टर को सुरक्षित रखेंगे, बल्कि Sustainable Development Goals (SDG) को हासिल करने में भी हमारी मदद करेंगे।
इसके अलावा, विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा और भी ज्यादा मजबूत होगा।
RBI ने Climate Risk और Green Deposits के लिए जारी किए नए सख्त दिशा-निर्देश
पिछले 24 घंटों की सबसे अहम घटनाओं की बात करें तो, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के सभी कमर्शियल बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए एक नया ‘Climate Risk Management Framework’ पेश किया है।
यह नया फ्रेमवर्क खास तौर पर Green Deposits को बढ़ावा देने और वित्तीय संस्थानों को पर्यावरण से जुड़े रिस्क से बचाने के लिए तैयार किया गया है।
फिलहाल में यह नीति बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव लाने वाली है, इसलिए आने वाली परीक्षाओं के अर्थव्यवस्था (Economy) सेक्शन के लिए यह एक बहुत ही संभावित विषय (highly expected topic) है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
Green Deposits का नया ढांचा
RBI की इस नई नीति के तहत, बैंकों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे अब Green Deposits स्वीकार करें।
और उस फंड को सिर्फ नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और हरित बुनियादी ढांचे (Green Infrastructure) जैसे प्रोजेक्ट्स में ही निवेश करें।
इसका सबसे बड़ा मकसद “Greenwashing” (यानी पर्यावरण के अनुकूल होने का झूठा दावा करना) को रोकना है।
इससे इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ेगा और पैसों का इस्तेमाल असल में पर्यावरण के फायदे के लिए हो सकेगा।
Climate Risk Stress Testing अनिवार्य
नए नियमों के मुताबिक, अब सभी बड़े वाणिज्यिक बैंकों (Commercial Banks) के लिए अपनी संपत्तियों पर जलवायु परिवर्तन के असर का सटीक आकलन करना अनिवार्य है।
इसके लिए ‘Climate Risk Stress Testing’ करना जरूरी हो गया है। अब सवाल यह है कि इससे क्या फायदा होगा?
दरअसल, यह टेस्टिंग बैंकों को अचानक आने वाली पर्यावरणीय आपदाओं (जैसे बाढ़ या सूखा) या पॉलिसियों में होने वाले बदलावों से जुड़े भारी वित्तीय नुकसान का पहले ही अंदाजा लगाने में मदद करेगी, ताकि वे सही रणनीति बना सकें।
2030 Net Zero लक्ष्यों के साथ एकीकरण
आपको याद होगा कि भारत ने 2070 तक ‘Net Zero’ का लक्ष्य रखा है।
यह नई नीति उसी लक्ष्य और 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता (Non-Fossil Fuel Capacity) हासिल करने के हमारे राष्ट्रीय संकल्प के साथ पूरी तरह जुड़ी हुई है।
RBI ने साफ कर दिया है कि सस्टेनेबल फाइनेंस (Sustainable Finance) अब सिर्फ एक विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि देश के विकास और बैंकिंग स्थिरता के लिए एक बड़ी जरूरत बन चुका है।
Static GK Connect
- Nodal Body: Reserve Bank of India (RBI)
- Headquarters: Mumbai, Maharashtra
- Important Act: RBI Act 1934 एवं Banking Regulation Act 1949
- Historical Fact: RBI की स्थापना ‘Hilton Young Commission’ की सिफारिशों के आधार पर 1 अप्रैल 1935 को हुई थी। इसका राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) 1949 में किया गया था।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में RBI द्वारा जारी ‘Climate Risk Management Framework’ के तहत ‘Green Deposits’ का उपयोग किस क्षेत्र में नहीं किया जा सकता है?
a) नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)
b) हरित बुनियादी ढांचा (Green Infrastructure)
c) जीवाश्म ईंधन निष्कर्षण (Fossil Fuel Extraction) ✅
d) अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management)
Q2. ‘Greenwashing’ शब्द, जिसका उल्लेख हाल ही में RBI के दिशा-निर्देशों में किया गया, का क्या अर्थ है?
a) वनों की कटाई को रोकना
b) पर्यावरण के अनुकूल होने का भ्रामक या झूठा दावा करना ✅
c) कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह शून्य कर देना
d) नदियों और महासागरों की सफाई के लिए धन आवंटित करना
Q3. RBI की स्थापना किस आयोग (Commission) की सिफारिश पर की गई थी?
a) हंटर कमीशन (Hunter Commission)
b) हिल्टन यंग कमीशन (Hilton Young Commission) ✅
c) नरसिम्हम समिति (Narasimham Committee)
d) शिवरामन समिति (Sivaraman Committee)
Science & Technology Current Affairs

स्पेस साइंस और Earth Observation के मामले में भारत और अमेरिका की साझेदारी अब एक बिल्कुल नए मुकाम पर पहुंच गई है।
यह प्रोजेक्ट प्राकृतिक आपदाओं का पहले से पता लगाने और हमारे कृषि प्रबंधन (Agriculture Management) में एक बड़ी तकनीकी क्रांति लेकर आने वाला है।
इस तरह के हाई-टेक सैटेलाइट मिशन से हमें जलवायु परिवर्तन के छोटे से छोटे असर का भी सटीक डेटा मिल पाएगा।
जाहिर है, यह डेटा केंद्र और राज्य सरकारों को भविष्य में बेहतर आपदा प्रबंधन नीतियां (Disaster Management Policies) बनाने में बहुत मदद करेगा।
ISRO और NASA का संयुक्त ‘NISAR’ मिशन अब राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के लिए हुआ सक्रिय
आज की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, ISRO और NASA ने मिलकर जो NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) सैटेलाइट बनाया था, उसके डेटा फीड को अब आधिकारिक तौर पर भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (NDMA) ग्रिड के साथ जोड़ दिया गया है।
हाल ही में हुए इस ऐतिहासिक डेवलपमेंट का सीधा मकसद यह है कि भूकंप, भूस्खलन (Landslides) और बाढ़ जैसी आपदाओं के समय रियल-टाइम मॉनिटरिंग (Real-time Monitoring) की जा सके।
सिविल सेवा (UPSC) और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Sci-Tech) सेक्शन के लिए यह एक बहुत ही जरूरी टॉपिक बन चुका है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
L-Band और S-Band रडार तकनीक का अद्भुत संगम
NISAR अपनी तरह का पहला ऐसा सैटेलाइट है जो दो अलग-अलग रडार फ्रीक्वेंसी (L-Band और S-Band) का एक साथ इस्तेमाल करता है।
क्या आप जानते हैं कि L-Band रडार को NASA ने बनाया है, जबकि S-Band रडार को हमारे ISRO ने तैयार किया है?
यह एडवांस तकनीक इतनी पावरफुल है कि यह सैटेलाइट बादलों के आर-पार देख सकता है और घने जंगलों के नीचे भी पृथ्वी की सतह में होने वाले 1 सेंटीमीटर से भी छोटे बदलावों को पूरी सटीकता से नाप सकता है।
आपदा प्रबंधन और कृषि में व्यापक अनुप्रयोग
इस मिशन से जो डेटा मिलेगा, उसका इस्तेमाल बर्फ की परतों (Cryosphere) के पिघलने, खेती वाली जमीन की नमी और भूजल (Groundwater) में आ रही कमी पर लगातार नजर रखने के लिए किया जा रहा है।
आपदा के समय यह बिना किसी देरी के रियल-टाइम डेटा देगा, जिससे राहत और बचाव कार्यों (Rescue Operations) को और भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।
भारत के विशाल तटीय और पहाड़ी इलाकों के लिए तो यह वाकई एक वरदान साबित होने वाला है।
वैश्विक जलवायु परिवर्तन का विस्तृत अध्ययन
सबसे खास बात यह है कि यह मिशन सिर्फ भारत या अमेरिका की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा।
यह हर 12 दिन में पूरी पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का एक शानदार हाई-रिज़ॉल्यूशन नक्शा तैयार करेगा।
कार्बन चक्र (Carbon Cycle) और बायोमास (Biomass) की बारीक जानकारी देकर, यह मिशन दुनियाभर के वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन की स्पीड समझने में एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक आधार देने वाला है।
Static GK Connect
- Nodal Ministry: Department of Space (DOS), Government of India
- Headquarters: ISRO HQ – Bengaluru, Karnataka
- Constitutional Link: Article 51A(h) – वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific temper), मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करना प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य है।
- Organization Fact: NASA (National Aeronautics and Space Administration) की स्थापना 1958 में हुई थी, जिसका मुख्यालय वाशिंगटन डी.सी. में है।
Current Affairs MCQs
Q1. NISAR मिशन के संदर्भ में, रडार तकनीक के विकास को लेकर निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित है?
a) L-Band – ISRO, S-Band – NASA
b) L-Band – NASA, S-Band – ISRO ✅
c) दोनों बैंड ISRO द्वारा विकसित
d) दोनों बैंड NASA द्वारा विकसित
Q2. NISAR उपग्रह (Satellite) पृथ्वी की सतह में होने वाले कितने छोटे बदलाव को मापने में सक्षम है?
a) 1 मीटर तक
b) 10 सेंटीमीटर तक
c) 1 सेंटीमीटर से भी कम ✅
d) 5 मीटर तक
Q3. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद (Article) नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) विकसित करने की बात करता है?
a) Article 48A
b) Article 51A(a)
c) Article 51A(h) ✅
d) Article 49
Defence Current Affairs

डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) का सपना अब और भी मजबूती से सच होता दिख रहा है।
हाल ही में एक ऐसी तकनीक का सफल परीक्षण हुआ है, जिसे हमारे देश के हवाई क्षेत्र को दुश्मन की मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से पूरी तरह अभेद्य (सुरक्षित) बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस तकनीक के सफल होने का मतलब है कि अब विदेशी रक्षा उपकरणों (जैसे रूस के S-400) पर हमारी निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
साथ ही, भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जिनके पास खुद की बनाई हुई लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) है।
DRDO ने भारत के स्वदेशी ‘Project Kusha’ (LR-SAM) का किया ऐतिहासिक सफल परीक्षण
पिछले 24 घंटों की सबसे बड़ी रक्षा उपलब्धि की बात करें तो, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर भारत की अपनी लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LR-SAM) वायु रक्षा प्रणाली का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण कर लिया है।
‘Project Kusha’ के तहत तैयार की गई इस प्रणाली को भारत की खुद की ‘Iron Dome’ और ‘S-400’ के बराबर माना जा रहा है।
हाल ही में उठाया गया यह कदम रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) में भारत की बढ़ती हुई ताकत को दिखाता है, जो SSC CGL, NDA और UPSC जैसी परीक्षाओं के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
350 किलोमीटर की मारक क्षमता
DRDO के Project Kusha के तहत विकसित की गई इस एडवांस LR-SAM डिफेंस सिस्टम की रेंज 150 किलोमीटर से लेकर 350 किलोमीटर तक है।
यह सिस्टम एक ही समय में कई खतरों, जैसे स्टील्थ फाइटर जेट्स (Stealth Fighter Jets), क्रूज मिसाइल (Cruise Missiles), ड्रोन्स (UAVs) और बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करके उन्हें हवा में ही नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है।
यह हमारी भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।
उन्नत एक्टिव रडार सीकर और इंटरसेप्शन
इस मिसाइल सिस्टम में देश में ही बनी एक्टिव रडार सीकर (Active Radar Seeker) तकनीक और बेहतरीन कमांड व कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
इसका फायदा यह है कि अगर दुश्मन का विमान रडार को धोखा देने की कोशिश भी करता है, तब भी यह मिसाइल अपनी दिशा बदलकर एकदम सटीक लक्ष्य (Pin-point Interception) को भेद सकती है।
आपको जानकर खुशी होगी कि इसकी ‘Single-shot Kill Probability’ 90% से भी ज्यादा बताई गई है।
आत्मनिर्भर भारत और S-400 का स्वदेशी विकल्प
अभी तक हम अपनी वायु रक्षा के लिए मुख्य रूप से रूस से मंगवाए गए S-400 ट्राइंफ (Triumf) सिस्टम पर निर्भर थे।
लेकिन Project Kusha का यह सफल परीक्षण हमें आयात पर निर्भर रहने से आज़ाद करने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है।
रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) का कहना है कि इस स्वदेशी प्रणाली को 2028-29 तक भारतीय वायुसेना में पूरी तरह तैनात कर दिया जाएगा।
Static GK Connect
- Nodal Body: Defence Research and Development Organisation (DRDO)
- Nodal Ministry: Ministry of Defence (MoD)
- Headquarters: DRDO Bhavan, New Delhi
- Historical Fact: DRDO की स्थापना 1958 में भारतीय सेना के तकनीकी विकास प्रतिष्ठान और रक्षा विज्ञान संगठन के विलय से हुई थी।
- Motto: “बलस्य मूलं विज्ञानम्” (Strength’s Origin is in Science)
Current Affairs MCQs
Q1. रक्षा क्षेत्र में चर्चा में रहे ‘Project Kusha’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) भारतीय नौसेना के लिए नई पनडुब्बियों का निर्माण
b) लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (LR-SAM) वायु रक्षा प्रणाली का विकास ✅
c) सीमा सुरक्षा के लिए स्वदेशी ड्रोन (UAV) का विकास
d) हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण
Q2. ‘Project Kusha’ के तहत विकसित LR-SAM प्रणाली की अधिकतम मारक क्षमता (Range) लगभग कितनी है?
a) 100 किलोमीटर
b) 250 किलोमीटर
c) 350 किलोमीटर ✅
d) 500 किलोमीटर
Q3. DRDO का आदर्श वाक्य (Motto) क्या है, जो विज्ञान और शक्ति के संबंध को दर्शाता है?
a) शं नो वरुणः
b) नभः स्पृशं दीप्तम्
c) बलस्य मूलं विज्ञानम् ✅
d) सेवा अस्माकं धर्मः
Indices & Reports Current Affairs

अगर हम दुनिया भर में गरीबी खत्म करने और लोगों का जीवन स्तर सुधारने की बात करें, तो एक बहुत ही अहम रिपोर्ट सामने आई है।
यह रिपोर्ट हमें बताती है कि विकासशील देश स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के पैमानों पर कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं।
भारत के नजरिए से देखा जाए तो, यह डेटा हमारी सरकारी योजनाओं की सफलता और नीतियां बनाने की दिशा को समझने का एक बहुत बड़ा टूल है।
परीक्षाओं में, खास तौर पर नीति आयोग (NITI Aayog) से जुड़े सवालों के लिए, यह रिपोर्ट सीधे तौर पर आधार बन सकती है।
Global Multidimensional Poverty Index (MPI) 2026 जारी: भारत ने दर्ज की ऐतिहासिक गिरावट
आज की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव (OPHI) ने मिलकर ‘Global Multidimensional Poverty Index (MPI) 2026’ जारी किया है।
इस इंडेक्स में भारत ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। बहुआयामी गरीबी में जीने वाले लोगों की संख्या में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली है।
हाल ही में आई यह रिपोर्ट Banking, State PCS और UPSC मुख्य परीक्षा (GS Paper 2) के लिए एकदम पॉइंट-टू-पॉइंट काम आने वाली है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
भारत में गरीबी में भारी कमी
2026 की लेटेस्ट MPI रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक दशक में भारत में 40 करोड़ से भी ज्यादा लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) के जाल से बाहर निकल चुके हैं।
खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में, पोषण (Nutrition), स्वच्छता (Sanitation) और खाना पकाने के ईंधन (Cooking Fuel) की सुविधाओं में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है।
सरकार की उज्ज्वला योजना और जल जीवन मिशन जैसी शानदार पहलों ने इस पॉजिटिव बदलाव में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
तीन मुख्य आयाम और दस संकेतक
MPI की सबसे अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ आय (Income) को गरीबी का पैमाना नहीं मानता। इसके बजाय, यह तीन मुख्य आयामों — स्वास्थ्य (Health), शिक्षा (Education) और जीवन स्तर (Standard of Living) पर फोकस करता है।
इन तीन आयामों को आगे 10 अलग-अलग संकेतकों (Indicators) में बांटा गया है, जिनमें बाल मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा के साल, बिजली और पीने के पानी तक पहुंच शामिल हैं।
अच्छी बात यह है कि भारत ने इन सभी 10 संकेतकों में बेहतरीन सुधार दिखाया है।
NITI Aayog और राष्ट्रीय MPI का जुड़ाव
ग्लोबल MPI रिपोर्ट के साथ-साथ, हमारा नीति आयोग (NITI Aayog) भी अपना खुद का ‘National MPI’ जारी करता है।
आपको याद रखना चाहिए कि भारत में बहुआयामी गरीबी को मापने के लिए नीति आयोग ही नोडल एजेंसी (Nodal Agency) के रूप में काम करता है।
वैश्विक डेटा इस बात पर मुहर लगाता है कि भारत 2030 से पहले ही संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) 1.2 — “सभी आयु के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के गरीबी अनुपात को आधा करना” — को हासिल करने की सही राह पर है।
Static GK Connect
- Publishing Bodies: UNDP (United Nations Development Programme) & OPHI
- Nodal Agency in India: NITI Aayog (National Institution for Transforming India)
- UNDP Headquarters: New York, USA
- Constitutional Link: Article 39(a) & Article 47 (Directive Principles of State Policy) जो नागरिकों के लिए पर्याप्त आजीविका और पोषण स्तर बढ़ाने का निर्देश देते हैं।
Current Affairs MCQs
Q1. Global Multidimensional Poverty Index (MPI) निम्नलिखित में से किन संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है?
a) World Bank और IMF
b) World Economic Forum (WEF)
c) UNDP और OPHI ✅
d) NITI Aayog और UNCTAD
Q2. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) मुख्य रूप से किन तीन आयामों (Dimensions) पर आधारित होता है?
a) आय, रोजगार और स्वास्थ्य
b) स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर ✅
c) शिक्षा, प्रति व्यक्ति आय और सुरक्षा
d) पोषण, आवास और स्वच्छता
Q3. भारत में राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) तैयार करने के लिए कौन सी संस्था नोडल एजेंसी (Nodal Agency) है?
a) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)
b) वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance)
c) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
d) नीति आयोग (NITI Aayog) ✅
Environment & Ecology Current Affairs

हमारे देश में जैव विविधता (Biodiversity) और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने की जो कोशिशें चल रही हैं, उन्हें वैश्विक स्तर पर एक और बहुत बड़ी पहचान मिली है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आर्द्रभूमियों (Wetlands) को पृथ्वी की “किडनी” (Kidneys) क्यों कहा जाता है? क्योंकि ये पानी को साफ करने (Water Purification) में बहुत मदद करती हैं।
यह नया फैसला जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता (Commitment) को और भी मजबूत करता है।
यूपीएससी और राज्य स्तरीय (State PCS) परीक्षाओं में पर्यावरण (Environment) से जुड़े सवालों के लिए यह टॉपिक बहुत ज्यादा काम आने वाला है।
भारत के आर्द्रभूमि संरक्षण में बड़ी उपलब्धि, 2 नए ‘Ramsar Sites’ घोषित
पिछले 24 घंटों की सबसे खास पर्यावरणीय घटनाओं की बात करें तो, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने घोषणा की है कि भारत की दो नई आर्द्रभूमियों (Wetlands) को अंतर्राष्ट्रीय महत्व के ‘Ramsar Sites’ का दर्जा दे दिया गया है।
इस नई घोषणा के बाद, हमारे देश में रामसर स्थलों की कुल संख्या और बढ़ गई है।
फिलहाल में पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से देखा जाए, तो यह यूपीएससी और राज्य स्तरीय (State PCS) परीक्षाओं में मैप (Map) और इकोलॉजी पर आधारित प्रश्नों के लिए बेहद प्रासंगिक (highly relevant) है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
नए जोड़े गए स्थलों का महत्व
हाल ही में मान्यता प्राप्त इन दो नए रामसर स्थलों में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की बहुत ही अहम आर्द्रभूमियां शामिल हैं।
ये इलाके न सिर्फ स्थानीय वनस्पतियों (Flora) और जीवों (Fauna) को एक बढ़िया आवास (Habitat) देते हैं, बल्कि हर साल साइबेरिया और मध्य एशिया से उड़कर आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों (Migratory Birds) के लिए सर्दियों का एक सुरक्षित ठिकाना भी बनते हैं।
‘अमृत धरोहर’ योजना का प्रभाव
आपको याद होगा कि भारत सरकार ने बजट में ‘अमृत धरोहर’ (Amrit Dharohar) योजना की घोषणा की थी, और अब इसके बेहतरीन नतीजे सामने आने लगे हैं।
इस योजना का मुख्य मकसद स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर आर्द्रभूमियों का सही इस्तेमाल (Optimal Use) और उनका संरक्षण करना है।
इससे इको-टूरिज्म (Eco-tourism) को तो बढ़ावा मिल ही रहा है, साथ ही स्थानीय लोगों के लिए कार्बन क्रेडिट और रोजगार के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।
रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) की भूमिका
अगर आप नहीं जानते, तो बता दूं कि रामसर कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसका काम दुनिया भर में महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को बचाना है।
भारत में रामसर स्थलों की लगातार बढ़ती संख्या यह साबित करती है कि हमारा देश अपने स्थलों को ‘Montreux Record’ (जो कि संकटग्रस्त आर्द्रभूमियों का रजिस्टर है) से बाहर रखने और उनके पारिस्थितिक स्वरूप (Ecological Character) को सुरक्षित रखने में पूरी तरह सफल हो रहा है।
Static GK Connect
- Nodal Ministry: Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC)
- Treaty Background: Ramsar Convention पर 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किए गए थे। इसीलिए हर साल 2 फरवरी को World Wetlands Day मनाया जाता है।
- Constitutional Link: Article 48A – राज्य देश के पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।
- India’s Entry: भारत ने 1982 में रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए थे। चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) भारत के पहले रामसर स्थल थे।
Current Affairs MCQs
Q1. आर्द्रभूमियों के संरक्षण से संबंधित ‘रामसर कन्वेंशन’ (Ramsar Convention) पर किस वर्ष हस्ताक्षर किए गए थे?
a) 1965
b) 1971 ✅
c) 1982
d) 1992
Q2. भारत सरकार की ‘अमृत धरोहर’ (Amrit Dharohar) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) पुरानी ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण
b) नदियों को आपस में जोड़ना
c) आर्द्रभूमियों (Wetlands) का संरक्षण और इष्टतम उपयोग ✅
d) देश में नए राष्ट्रीय उद्यानों का निर्माण
Q3. संकटग्रस्त या खतरे में पड़ी आर्द्रभूमियों (Wetlands under threat) को सूचीबद्ध करने वाले अंतर्राष्ट्रीय रजिस्टर को क्या कहा जाता है?
a) रेड डेटा बुक (Red Data Book)
b) मॉन्ट्रो रिकॉर्ड (Montreux Record) ✅
c) क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol)
d) ग्रीन वॉच लिस्ट (Green Watch List)