Daily Current Affairs: NFHS-6, CDS, IIP Base Year & PAI 2.0

National & Health Current Affairs

NFHS-6 Report 2024 India Health Nutrition Data and TFR Statistics

📌 राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के मुख्य आंकड़े जारी: स्वास्थ्य और पोषण संकेतकों में ऐतिहासिक सुधार

हेलो दोस्तों! चलिए आज की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खबर से शुरुआत करते हैं। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के बहुप्रतीक्षित परिणाम जारी कर दिए हैं. यह कोई मामूली रिपोर्ट नहीं है, बल्कि देश के 715 जिलों के

लगभग 6.790 लाख परिवारों के बीच किया गया एक बेहद गहरा और साक्ष्य-आधारित अध्ययन है, जो हमारे भारत की सेहत और पोषण का असली हाल बताता है.

अगर अच्छी खबरों की बात करें, तो हमारी कुल प्रजनन दर (TFR) प्रतिस्थापन स्तर से नीचे 2.0 पर बनी हुई है, अस्पतालों में होने वाले सुरक्षित प्रसव

(Institutional Deliveries) की दर काफी बढ़ गई है, और बच्चों में कुपोषण के आंकड़ों में भी गिरावट देखी गई है. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है!

इस रिपोर्ट ने निजी अस्पतालों में बिना जरूरत के होने वाले सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) की बढ़ती होड़ और वयस्कों में बढ़ते मोटापे

गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसी गंभीर जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों की तरफ भी हमारा ध्यान खींचा है. आइए इस पूरी करंट अफेयर्स (Current Affairs) रिपोर्ट को आसान शब्दों में और गहराई से समझते हैं।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (2023-24) के महत्वपूर्ण संकेतकों के बीच तुलनात्मक प्रगति को दर्शाने वाला डेटा निम्नलिखित तालिका में प्रस्तुत किया गया है :

संकेतक / मीट्रिकNFHS-5 (2019-21)NFHS-6 (2023-24)रुझान / प्रभाव
कुल प्रजनन दर (TFR)2.02.0प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से नीचे स्थिर
संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries)88.6%90.6%सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा
सिजेरियन (C-Section) प्रसव21.5%27.2%चिंताजनक वृद्धि (विशेषकर निजी क्षेत्र में)
बच्चों में नाटापन (Stunting – 5 वर्ष से कम)35.5%29.3%दीर्घकालिक पोषण स्तर में सुधार
गंभीर दुबलापन (Severe Wasting – 5 वर्ष से कम)7.7%5.2%कुपोषण निवारण अभियानों की सफलता
पूर्ण बाल टीकाकरण (12-23 महीने)83.8%87.1%मिशन इंद्रधनुष का सकारात्मक प्रभाव
घरेलू स्वास्थ्य बीमा कवरेज41.0%60.2%आयुष्मान भारत (PM-JAY) का विस्तार
महिलाओं द्वारा इंटरनेट का उपयोग33.3%64.3%डिजिटल समावेशन और सशक्तिकरण
सक्रिय बैंक खाते वाली महिलाएं78.6%89.0%वित्तीय समावेशन में ऐतिहासिक छलांग

✴️ सुरक्षित मातृत्व, सार्वभौमिक टीकाकरण (Universal Immunization) और स्वास्थ्य कवरेज में बड़ी सफलता

▪️ प्यारे साथियों, अगर हम इन आंकड़ों को ध्यान से देखें तो पता चलता है कि सरकारी योजनाएं ज़मीनी स्तर पर सचमुच कमाल का असर दिखा रही हैं.

उदाहरण के लिए, गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव पूर्व देखभाल (Antenatal Care – ANC) का दायरा अब बढ़कर 95.9% हो गया है,

यानी लगभग हर गर्भवती महिला तक बुनियादी जांच सुविधाएं पहुंच रही हैं. यही नहीं, पहले तीन महीनों में ही अपना रजिस्ट्रेशन कराने वाली

माताओं का प्रतिशत भी 70% से सुधरकर 76.2% हो चुका है. बच्चों के टीकाकरण की बात करें, तो वहां भी एक बड़ी कामयाबी मिली है;

रोटावायरस वैक्सीन (Rotavirus Vaccine) का कवरेज जो पहले सिर्फ 36.4% था, वह अब सीधे उछलकर 85.4% पर पहुंच गया है!

इसका सीधा मतलब है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों का भरोसा बहुत बढ़ा है. इसके साथ ही, ‘आयुष्मान भारत’ (PM-JAY) जैसी

शानदार पॉलिसियों के दम पर अब देश के 60.2% परिवारों के पास अपना हेल्थ इंश्योरेंस या सुरक्षा कवच है, जो पहले सिर्फ 41% हुआ करता था.

इससे गरीब परिवारों को इलाज के भारी-भरकम खर्च (Out of Pocket Expenditure) से बहुत बड़ी राहत मिली है.

✴️ निजी क्षेत्र में प्रसव का व्यवसायीकरण और गैर-संचारी रोगों (NCDs) का नया स्वास्थ्य संकट

▪️ लेकिन क्या सब कुछ अच्छा ही है? नहीं, इस रिपोर्ट में कुछ गंभीर चिंताएं भी उठाई गई हैं, जिन्हें हमें परीक्षा और समाज दोनों के लिहाज से समझना होगा.

सबसे बड़ी चिंता है निजी अस्पतालों में बिना ज़रूरत के होने वाले सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) की बढ़ती संख्या.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कहता है कि सी-सेक्शन की आदर्श दर केवल 10 से 15% होनी चाहिए, पर भारत में यह औसत 27.2% तक जा पहुंचा है.

चौंकाने वाली बात यह है कि निजी अस्पतालों में यह आंकड़ा 54.1% है, यानी आधे से भी ज़्यादा प्रसव ऑपरेशन से हो रहे हैं,

जो इसके बढ़ते व्यवसायीकरण और प्रसव प्रक्रियाओं के बढ़ते वित्तीय दोहन की ओर साफ इशारा करता है.

दूसरी ओर, भारत आज ‘दोहरे पोषण संकट’ (Double Burden of Nutrition) से जूझ रहा है; एक तरफ जहां बच्चों का कुपोषण धीरे-धीरे कम हो रहा है,

वहीं वयस्कों में मोटापा (Obesity) बड़ी तेज़ी से बढ़ रहा है. आज देश की लगभग 30.7% महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की शिकार हैं,

जो आगे चलकर सीधे तौर पर मधुमेह (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) के जोखिम को बढ़ा रही हैं.

📚 Static GK Connect

  • नोडल संस्थान और मंत्रालय (Nodal Body & Ministry): परीक्षा के लिए याद रखिएगा कि इसके लिए नोडल संस्थान इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (International Institute for Population Sciences – IIPS), मुंबई है. यह केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के तहत काम करने वाला एक स्वायत्त संस्थान है, जो इस पूरे सर्वेक्षण की टेक्निकल देखरेख करता है.
  • संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Linkage): हमारे संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के तहत प्रविष्टि 6 में ‘लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता, अस्पताल और औषधालय’ को राज्य का विषय माना गया है, जबकि समवर्ती सूची की प्रविष्टि 20A के तहत ‘जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन’ पर केंद्र और राज्य दोनों ही कानून बना सकते हैं।
  • सम्बद्ध सतत विकास लक्ष्य (SDG Linkage): इस रिपोर्ट के निष्कर्ष और आंकड़े सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-3 (SDG 3: Good Health and Well-being) और लक्ष्य-5 (SDG 5: Gender Equality) की प्रगति को मापने और उनका मूल्यांकन करने में काम आते हैं.

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के अनुसार, भारत में संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries) की दर वर्तमान में किस स्तर पर पहुंच गई है?
a) 85.3%
b) 88.6%
c) 90.6% ✅
d) 95.9%

 

🤔 Q2. NFHS-6 की रिपोर्ट के अनुसार, निजी अस्पतालों में होने वाले प्रसवों में सिजेरियन सेक्शन (C-Section) का प्रतिशत कितना दर्ज किया गया है, जो एक गंभीर नीतिगत चुनौती है?
a) 16.9%
b) 27.2%
c) 41.0%
d) 54.1% ✅

 

🤔 Q3. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) श्रृंखला के आयोजन और समन्वय के लिए भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित में से किसे नोडल एजेंसी नामित किया गया है?
a) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)
b) इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (IIPS), मुंबई ✅
c) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली
d) राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC)


Economy Current Affairs

IIP Base Year Change 2022-23 Indian Economy Index of Industrial Production

📌 औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार वर्ष में बदलाव: नया आधार वर्ष 2022-23 घोषित

प्यारे साथियों, हमारी अर्थव्यवस्था का थर्मामीटर यानी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production – IIP) अब बिल्कुल नए और सटीक अंदाज़ में हमारे सामने आने वाला है!

हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने देश की औद्योगिक विकास दर को अधिक सटीक, प्रासंगिक और आधुनिक वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए

IIP की गणना के लिए इसके पुराने आधार वर्ष (Base Year) 2011-12 को बदलकर नया आधार वर्ष 2022-23 घोषित कर दिया है.

अब सवाल यह है कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी? असल में, पिछले दस सालों में हमारी अर्थव्यवस्था का ढांचा पूरी तरह बदल गया है।

नई तकनीकें आ गई हैं, नए उत्पाद बाजार में आ चुके हैं और हमारी विनिर्माण प्रणालियां काफी आधुनिक हो चुकी हैं.

यह नया आधार वर्ष राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (National Accounts Statistics) और हमारी GDP की डेटा श्रृंखला के साथ पूरी तरह से मेल खाता है,

जिससे देश की आर्थिक नीतियों को बनाने में सरकार को बिल्कुल सटीक और वास्तविक आंकड़े मिल सकेंगे.

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

IIP श्रृंखला के आधार वर्ष में पुराने (2011-12) और नए (2022-23) ढांचे के तहत किए गए संरचनात्मक बदलाव और मद समूहों (Item Groups) के वितरण को नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है :

औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Sector)IIP 2011-12 श्रृंखला (मद समूह)IIP 2022-23 श्रृंखला (मद समूह)नई श्रृंखला में मुख्य परिवर्तन और प्रभाव
खनन एवं उत्खनन (Mining & Quarrying)1 (29 उप-मद)3 (44 उप-मद)प्रमुख खनिजों के साथ दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth) का समावेश.
विनिर्माण (Manufacturing)405455डिजिटल विनिर्माण, सीसीटीवी कैमरा, स्मार्ट कार्ड, टीके और नवीन दवाओं को स्थान.
बिजली एवं गैस आपूर्ति (Electricity & Gas)13नवीकरणीय (Renewable) और गैर-नवीकरणीय बिजली उत्पादन का पृथक मूल्यांकन.
जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन— (शामिल नहीं)2बुनियादी ढांचागत सुधारों और सर्कुलर इकोनॉमी का सटीक मूल्यांकन.
कुल मद समूहों की संख्या (Total Item Groups)407463कुल 120 नए उत्पाद समूहों के जुड़ने से सूचकांक का दायरा व्यापक हुआ.

✴️ औद्योगिक टोकरी (Item Basket) का आधुनिकीकरण और नए क्षेत्रों का प्रवेश

▪️ दोस्तों, इस नए बदलाव के तहत IIP की पूरी ‘प्रोडक्ट बास्केट’ को आज के दौर के हिसाब से अपग्रेड किया गया है.

पुरानी 2011-12 वाली लिस्ट आज के डिजिटल और हाई-टेक भारत की तस्वीर दिखाने में अधूरी साबित हो रही थी.

इसीलिए, अब इस नई बास्केट में सीसीटीवी कैमरे, डेबिट और क्रेडिट कार्ड जैसे मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड, जीवन रक्षक मेडिकल स्टेंट,

आधुनिक टीकों (Vaccines) और यहां तक कि एयरक्राफ्ट व स्पेसक्राफ्ट के पुर्जों जैसे अत्याधुनिक उत्पादों को भी शामिल कर लिया गया है.

इसके साथ ही विनिर्माण के उन छोटे-मोटे क्षेत्रों (n.e.c.) की भी पहचान की गई है जो पहले छूट जाते थे,

ताकि हमारे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSMEs) भी इस मूल्यांकन में अपनी सही जगह पा सकें और कोई महत्वपूर्ण पहलू उपेक्षित न रहे.

✴️ वैज्ञानिक डेटा संकलन दृष्टिकोण और व्यावहारिक सांख्यिकीय पद्धति

▪️ इस नई श्रृंखला को तैयार करने के लिए सांख्यिकीविदों ने बहुत ही वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीकों का इस्तेमाल किया है.

उदाहरण के लिए, पुराने आंकड़ों को नए बेस ईयर के साथ सिंक करने के लिए ज्यामितीय माध्य (Geometric Mean) पर आधारित एप्रोच को अपनाया गया है.

एक और बेहतरीन और व्यावहारिक सुधार यह किया गया है कि यदि इस श्रृंखला के दौरान कोई चुनी हुई फैक्ट्री हमेशा के लिए बंद हो जाती है,

तो डेटा कलेक्शन को रोकने के बजाय उसकी जगह उसी स्तर की दूसरी चालू फैक्ट्री को तुरंत शामिल कर लिया जाएगा.

इससे औद्योगिक डेटा की निरंतरता और विश्वसनीयता बनी रहेगी और हमारे रिजर्व बैंक (RBI) को मौद्रिक नीतियां बनाने के लिए बिल्कुल सही और ताजा आंकड़े मिलते रहेंगे.

📚 Static GK Connect

  • संकलनकर्ता निकाय (Nodal Body): इसे अच्छी तरह याद कर लीजिए—IIP को संकलित और जारी करने का काम सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत आने वाला राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office – NSO) करता है.
  • संशोधन इतिहास (Revision History): यह ऑल इंडिया IIP के आधार वर्ष का 10वां संशोधन है। क्या आप जानते हैं कि देश का पहला IIP सूचकांक साल 1937 को आधार वर्ष मानकर तैयार किया गया था?
  • आठ कोर उद्योग (Eight Core Industries): IIP सूचकांक में शामिल सभी चीजों में से करीब 40.27% भारांश (Weight) हमारे 8 प्रमुख बुनियादी उद्योगों (कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली) का होता है। यानी ये 8 उद्योग ही मुख्य रूप से हमारी औद्योगिक वृद्धि की दिशा तय करते हैं।

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. IIP की नई श्रृंखला का आधार वर्ष 2011-12 से संशोधित कर 2022-23 किया गया है。
2. इस नई श्रृंखला में जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों को पहली बार शामिल किया गया है。
3. IIP का संकलन और प्रकाशन प्रतिवर्ष नीति आयोग द्वारा किया जाता है。
उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

a) केवल 1 और 2 ✅
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3

 

🤔 Q2. IIP की नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) के तहत कुल कितने नए उत्पाद समूहों (Item Groups) को सूचकांक में जोड़ा गया है?
a) 85
b) 100
c) 120 ✅
d) 150

 

🤔 Q3. वर्तमान में अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में शामिल बुनियादी क्षेत्रों के आठ कोर उद्योगों (Core Industries) का कुल भारांश लगभग कितना है?
a) 25.15%
b) 32.40%
c) 40.27% ✅
d) 50.50%


Defence & Security Current Affairs

General N S Raja Subramani Appointed 3rd Chief of Defence Staff CDS India

📌 जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम ने भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पदभार संभाला

साथियों, देश की सुरक्षा और तीनों सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए

जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम (General N. S. Raja Subramani) ने आज आधिकारिक तौर पर भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है.

इसके साथ ही, वह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs – DMA) के सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं देंगे.

उन्होंने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जिनका साढ़े तीन साल का शानदार कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ है.

चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के बेहद अनुभवी और माहिर रणनीतिकार माने जाने वाले जनरल सुब्रमण्यम के कंधों पर

हमारे रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े सुधार यानी थियेटराइजेशन मॉडल (Theaterisation Model) को जमीन पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी होगी.

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद और वर्तमान रक्षा नेतृत्व के संरचनात्मक विवरण को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है :

पद / कमान विवरणअधिकारी का नामविशिष्टता / परिचालन अनुभवरणनीतिक दायित्व
वर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यमचीन व पाकिस्तान सीमा के विशेषज्ञ; पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सैन्य सलाहकार.सैन्य थियेटराइजेशन का क्रियान्वयन और त्रि-सेवा एकीकरण सुनिश्चित करना.
पूर्व सेना उप-प्रमुख (Vice Chief of Army Staff)जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम (31 जुलाई 2025 तक कार्यरत)गढ़वाल राइफल्स (8th Battalion) में 1985 में कमीशन.सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण योजनाओं का नेतृत्व.
सैन्य पुरस्कार एवं पदकPVSM, AVSM, SM, VSM40 वर्षों का उत्कृष्ट सैन्य करियर.उच्च रणनीतिक और नीतिगत निर्णय लेने की क्षमता.
सैन्य मामलों का विभाग (DMA)चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पदेन सचिव के रूप मेंनागरिक-सैन्य एकीकरण का सुदृढ़ीकरण.रक्षा बजट, संयुक्त प्रशिक्षण और त्रि-सेवा खरीद का प्रबंधन.

✴️ सैन्य थियेटराइजेशन (Theaterisation) और एकीकरण का ऐतिहासिक रोडमैप

▪️ नए CDS के रूप में जनरल राजा सुब्रमण्यम के सामने जो सबसे बड़ी और ऐतिहासिक चुनौती है, वह है हमारे सशस्त्र बलों में एकीकृत थिएटर कमान (Integrated Theatre Commands) प्रणाली को लागू करना.

आज के आधुनिक युद्धों में केवल अकेले थल सेना, नौसेना या वायु सेना के दम पर जीत हासिल नहीं की जा सकती; इसके लिए तीनों अंगों के बीच पल-पल का तालमेल जरूरी है.

वर्तमान में अलग-अलग काम कर रहे कमानों की जगह ‘थिएटर कमान’ बनाए जाएंगे, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में हमारी सेनाएं तुरंत प्रतिक्रिया दे सकेंगी

और देश के सैन्य संसाधनों का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल (Resource Optimization) सुनिश्चित हो सकेगा. इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए नए CDS तीनों सेना प्रमुखों के साथ मिलकर काम करेंगे.

✴️ रक्षा निर्माण में ‘आत्मनिर्भरता’ और नवाचार का विजन

▪️ अपना पदभार संभालते ही जनरल सुब्रमण्यम ने प्रधानमंत्री के ‘JAI’ (Jointness, Atmanirbharta, Innovation) विजन को अपनी मुख्य प्राथमिकता बताया है.

उनका साफ मानना है कि यदि हमें अपनी सेनाओं को लंबे समय तक मजबूत रखना है, तो देश के भीतर ही हथियारों के रिसर्च और डेवलपमेंट को तेजी से बढ़ाना होगा.

इसके लिए वह सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ देश के निजी रक्षा उद्योगों, बड़े शैक्षणिक संस्थानों और युवा स्टार्टअप्स के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण करेंगे.

भारत में ही बनने वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA और स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को जल्द से जल्द सेनाओं में शामिल करना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेगा.

📚 Static GK Connect

  • पद की उत्पत्ति और सिफारिश (Kargil Review Committee): परीक्षा की दृष्टि से याद रखिएगा कि भारत में पहली बार CDS पद बनाने की सिफारिश साल 1999 की ऐतिहासिक कारगिल समीक्षा समिति (Kargil Review Committee) ने की थी।
  • पद का स्वरूप और संरचना (Structure of CDS): CDS एक चार-सितारा (4-Star) जनरल रैंक का अधिकारी होता है, जो रक्षा मंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार के रूप में काम करता है। वह चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) के स्थायी अध्यक्ष भी होते हैं।
  • विशिष्ट विभाग (Department of Military Affairs – DMA): साल 2020 में रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक बिल्कुल नए विभाग ‘सैन्य मामलों के विभाग’ (DMA) का गठन किया गया था, और CDS ही इस विभाग के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं.

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. भारत के नवनियुक्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम थल सेना की किस विशिष्ट रेजीमेंट से संबंधित हैं?
a) महार रेजीमेंट
b) गढ़वाल राइफल्स ✅
c) राजपूताना राइफल्स
d) डोगरा रेजीमेंट

 

🤔 Q2. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
a) वह थल सेना के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं।
b) वह रक्षा मंत्रालय के तहत स्थापित ‘सैन्य मामलों के विभाग’ (DMA) के सचिव के रूप में कार्य करते हैं। ✅
c) वह देश के सैन्य बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।
d) उनका कार्यकाल अधिकतम 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक होता है।

 

🤔 Q3. भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) कौन थे, जिन्होंने सेनाओं के बीच एकीकरण के प्रयासों की शुरुआत की थी?
a) जनरल मनोज मुकुंद नरवणे
b) जनरल अनिल चौहान
c) जनरल बिपिन रावत ✅
d) एडमिरल करमबीर सिंह


Agriculture & Government Schemes

Mission for Cotton Productivity 2024 Indian Agriculture Textile Sector Scheme

📌 केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹5,659.22 करोड़ के ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ को दी मंजूरी: टेक्सटाइल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

प्यारे विद्यार्थियों, देश के किसानों और कपड़ा उद्योग दोनों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में

₹5,659.22 करोड़ के बड़े बजट के साथ ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ (Mission for Cotton Productivity) को मंजूरी दे दी है!

वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यानी अगले पांच सालों के लिए शुरू किया गया यह मिशन सीधे तौर पर भारत सरकार के

प्रसिद्ध “5F” विजन (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) पर आधारित है. इस मिशन का असली मकसद क्या है?

असल में, हमारे देश में कपास की खेती में कम उत्पादकता और कीड़ों के बढ़ते हमलों जैसी कई बड़ी रुकावटें आ रही थीं.

यह मिशन इन्हीं मुश्किलों को दूर करके हमारे कपड़ा क्षेत्र को दुनिया भर के बाजारों में नंबर वन बनाने

और हमारे कपास उगाने वाले किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है.

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

इस नए कपास मिशन के तहत निर्धारित किए गए प्रमुख लक्ष्यों और परिचालन मापदंडों का सांख्यिकीय ब्यौरा नीचे दी गई तालिका में संकलित किया गया है :

मिशन घटक / मीट्रिकवर्तमान स्थितिलक्षित स्तर (2031 तक)रणनीतिक प्रभाव
लिंट उत्पादकता (Lint Yield)440 किग्रा / हेक्टेयर755 किग्रा / हेक्टेयरप्रति हेक्टेयर कपास के उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि.
कुल राष्ट्रीय उत्पादन297 lakh bales498 lakh balesभारत वैश्विक कपास आपूर्ति श्रृंखला का शीर्ष केंद्र बनेगा.
प्रत्यक्ष लाभार्थी किसान32 lakh farmersछोटे एवं सीमांत किसानों की आय में प्रत्यक्ष सुधार.
प्राथमिक भौगोलिक दायरा14 राज्यों के 140 जिलेदेश के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों का सघन विकास.
कपास गांठ मानक वजन170 kg (प्रति गांठ)भारतीय व्यापारिक मानकीकरण के अनुरूप.
कचरा स्तर (Trash Content)3% से अधिक2% से कम‘कस्तूरी कॉटन भारत’ के तहत प्रीमियम वैश्विक गुणवत्ता.

✴️ उन्नत बीज अनुसंधान, गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) प्रतिरोध और तकनीक का प्रसार

▪️ साथियों, भारत दुनिया में कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक तो है, लेकिन जब बात प्रति हेक्टेयर पैदावार की आती है, तो हम कई देशों से पीछे रह जाते हैं.

इसका मुख्य कारण अच्छे बीजों की कमी और फसलों में कीड़ों का लगना है. इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के

10 चुनिंदा संस्थान मिलकर ऐसी एडवांस बीज किस्में (HYV) विकसित करेंगे जो बदलते मौसम को सह सकें और कपास की फसल को बर्बाद करने वाली

खतरनाक ‘गुलाबी सुंडी’ (Pink Bollworm) नामक कीट से पूरी तरह सुरक्षित रहें. कृषि और कपड़ा मंत्रालय मिलकर इन शानदार बीजों को कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाएंगे.

✴️ हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) और टिकाऊ सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy)

▪️ इस मिशन के तहत खेती के पुराने तौर-तरीकों को बदलकर एक नई तकनीक ‘हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम’ (HDPS) और ‘क्लोजर स्पेसिंग’ को बढ़ावा दिया जाएगा,

जिससे कम जमीन पर भी बहुत घनी और अधिक पैदावार ली जा सकेगी. इसके साथ ही किसानों को डिजिटल मंडियों से जोड़ा जाएगा ताकि वे बिना किसी बिचौलिए के अपनी फसल की सही और पारदर्शी कीमत (Price Discovery) पा सकें.

पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए इस योजना में ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (Circular Economy) के सिद्धांतों को अपनाया जाएगा, जिसके तहत कपास के कचरे को रीसायकल किया जाएगा

और बांस, केला, सन (Flax) तथा सिसल (Sisal) जैसे प्राकृतिक रेशों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा.

📚 Static GK Connect

  • कपास के लिए भौगोलिक आवश्यकताएं (Geographical Requirements): यह तो आपकी भूगोल की किताबों का पसंदीदा सवाल है! कपास मूल रूप से एक खरीफ की फसल है। इसे उगाने के लिए कम से कम 210 पाला-मुक्त दिन (Frost-Free Days), बढ़िया तापमान (21°C से 30°C), हल्की बारिश (50-100 सेमी) और सबसे जरूरी—काली मिट्टी जिसे हम ‘रेगुर मिट्टी’ (Regur Soil) भी कहते हैं, की जरूरत होती है।
  • कपास व्यापार इकाइयां (Trading Units): याद रखिएगा कि भारत में कपास के व्यापार के लिए ‘गांठ’ (Bale) और ‘कैंडी’ (Candy) जैसी पारंपरिक इकाइयों का उपयोग किया जाता है। भारत में कपास की एक मानक गांठ का वजन 170 किलोग्राम होता है, जबकि 1 कैंडी में लगभग 356 किलोग्राम (यानी लगभग 2.09 गांठें) कपास होती है.
  • कस्तूरी कॉटन भारत (Kasturi Cotton Bharat): यह दुनिया के बाजारों में भारतीय कपास को एक खास और प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई एक बेहतरीन पहल है, जिससे हमारे कपास की शुद्धता की पहचान वैश्विक स्तर पर हो सकेगी.

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. हाल ही में स्वीकृत ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ (2026-27 से 2030-31) का कुल वित्तीय परिव्यय कितना निर्धारित किया गया है?
a) ₹3,500.50 करोड़
b) ₹4,200.00 करोड़
c) ₹5,659.22 करोड़ ✅
d) ₹6,100.80 करोड़

 

🤔 Q2. भारत सरकार के किस विजन के तहत इस कपास मिशन को लागू किया जा रहा है, जो कृषि से निर्यात तक की मूल्य श्रृंखला को जोड़ता है?
a) “3C” विजन
b) “5F” विजन ✅
c) “4D” विजन
d) “6S” विजन

 

🤔 Q3. भारतीय कपास संघ (CAI) के मानकों के अनुसार, भारत में बेचे जाने वाले कपास की एक मानक गांठ (Standard Bale of Cotton) का वजन कितना होता है?
a) 150 किलोग्राम
b) 170 किलोग्राम ✅
c) 190 किलोग्राम
d) 220 किलोग्राम


Polity, Governance & State Schemes

PAI 2.0 Report Panchayat Development Index Kerala Tripura Top States

📌 पंचायत विकास सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी: त्रिपुरा और केरल बने सर्वश्रेष्ठ शासित पंचायत वाले राज्य

प्यारे दोस्तों, हमारे गांवों में लोकतंत्र कितना मजबूत हो रहा है और वहां विकास किस रफ्तार से चल रहा है, इसे मापने के लिए

पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) ने पंचायत विकास सूचकांक (PAI 2.0) की अपनी दूसरी ताजा रिपोर्ट जारी कर दी है!

वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों पर आधारित यह सूचकांक हमारे देश की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों के कामकाज का पूरा कच्चा चिट्ठा (रिपोर्ट कार्ड) दिखाता है.

इस बार की रिपोर्ट में पूर्वोत्तर के खूबसूरत राज्य त्रिपुरा और दक्षिण के जागरूक राज्य केरल ने सुशासन के मामले में बाजी मारते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है.

त्रिपुरा की करीब 80.2% और केरल की 10.1% पंचायतों ने इस सूचकांक में सबसे बेहतरीन ‘कैटेगरी-ए’ (Front Runner) का दर्जा पाया है,

जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे बड़े राज्य इस दौड़ में काफी पीछे छूट गए हैं.

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

PAI 2.0 सूचकांक के तहत पंचायतों के राष्ट्रीय वितरण और विभिन्न ग्रेड श्रेणियों में उनके प्रदर्शन के आंकड़ों को निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है :

ग्रेड / श्रेणी का नामस्कोर रेंज (0-100)ग्राम पंचायतों की संख्याराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति और महत्व
अचीवर (Achiever – A+)90 और अधिक0 (शून्य)कोई भी पंचायत इस कठिन ग्रेड के मापदंडों को पार नहीं कर सकी.
फ्रंट रनर (Front Runner – A)75 से <903,635त्रिपुरा (943 पंचायतें) और केरल (95 पंचायतें) इस श्रेणी में अग्रणी हैं.
परफॉर्मर (Performer – B)60 से <751,18,824देश की लगभग 45.72% ग्रामीण पंचायतें इस संतोषजनक श्रेणी में हैं.
एस्पिरेंट (Aspirant – C)40 से <601,23,719विकासात्मक कार्यों में मध्यम प्रदर्शन; नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता.
बिगिनर (Beginner – D)40 कम13,689मणिपुर, मेघालय और नागालैंड के कई निकाय इस श्रेणी में सर्वाधिक हैं.
कुल भागीदार पंचायतें2,59,867राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड 97.30% भागीदारी दर्ज की गई.

✴️ एसडीजी के स्थानीयकरण (Localization of SDGs) का विषयगत ढांचा और त्रि-स्तरीय प्रणाली

▪️ दोस्तों, अब सवाल यह है कि इस सूचकांक का आधार क्या है? दरअसल, PAI 2.0 की पूरी सोच संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को

गांवों के स्तर पर लागू करने यानी ‘लोकल गवर्नेंस’ से जुड़ी है. इसके लिए कुल 17 वैश्विक लक्ष्यों को समेटकर गांवों के अनुकूल 9 मुख्य विषय (LSDG Themes) बनाए गए हैं.

इनमें ‘गरीबी मुक्त और आत्मनिर्भर पंचायत’, ‘स्वस्थ पंचायत’, ‘महिला-अनुकूल पंचायत’ और ‘बाल-अनुकूल पंचायत’ जैसे बहुत ही जमीनी मुद्दे शामिल हैं.

इस सूचकांक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि राज्य सरकारें अब आसानी से देख सकती हैं कि उनके किस गांव में पानी, स्वास्थ्य या स्कूल के लिए

अतिरिक्त पैसों की जरूरत है, जिससे बजट का बिल्कुल सही इस्तेमाल हो सकेगा.

✴️ प्रशासनिक सुगमता, ग्राम सभा का अनिवार्य सत्यापन और डेटा की सटीकता

▪️ क्या आप जानते हैं कि पहले संस्करण (PAI 1.0) की तुलना में इस नए वर्जन में बहुत ही क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं?

पंचायतों के ऊपर से कागजी काम का बोझ कम करने के लिए मूल्यांकन के मानकों को 516 से घटाकर केवल 150 कर दिया गया है!

साथ ही, डेटा में कोई हेराफेरी न हो, इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों के ऑनलाइन पोर्टल से सीधे आंकड़ों को ऑटो-पोर्ट (Auto-Porting) करने की प्रणाली लागू की गई है.

और सबसे लाजवाब बात यह है कि अब किसी भी पंचायत के डेटा को तब तक फाइनल नहीं माना जाएगा, जब तक कि वहां की ‘ग्राम सभा’ (Gram Sabha Validation) इसकी पुष्टि नहीं कर देती।

यही तो है जमीनी स्तर पर सच्चा और मजबूत प्रत्यक्ष लोकतंत्र!

📚 Static GK Connect

  • संवैधानिक ढांचा और अनुच्छेद (Constitutional Linkage): इसे तो अपनी पॉलिटी की कॉपियों में नोट ही कर लीजिए—भारतीय संविधान के भाग IX के तहत अनुच्छेद 243G पंचायतों की शक्तियों और जिम्मेदारियों से संबंधित है। इसके अंतर्गत संविधान की 11वीं अनुसूची में कुल 29 विषयों को रखा गया है जिन पर हमारी पंचायतों को काम करने का पूरा अधिकार है।
  • नोडल मंत्रालय (Nodal Ministry): इस सूचकांक को तैयार करने और जारी करने की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) की होती है.
  • राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (National Panchayati Raj Day): देश में हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन साल 1993 में ऐतिहासिक 73वां संविधान संशोधन अधिनियम पूरे देश में लागू हुआ था.

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी ‘पंचायत विकास सूचकांक (PAI 2.0)’ मुख्य रूप से किस अवधारणा के कार्यान्वयन का मूल्यांकन करता है?
a) डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA)
b) सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण (Localization of SDGs) ✅
c) प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का विस्तार
d) राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP)

 

🤔 Q2. PAI 2.0 रिपोर्ट (FY 2023-24) के अनुसार, किस राज्य की ग्राम पंचायतों ने सर्वाधिक 80.2% फ्रंट रनर (Category A) का दर्जा प्राप्त कर सुशासन का प्रदर्शन किया है?
a) केरल
b) गुजरात
c) ओडिशा
d) त्रिपुरा ✅

 

🤔 Q3. पंचायत विकास सूचकांक (PAI) की नई ग्रेडिंग प्रणाली के अनुसार, यदि किसी ग्राम पंचायत का स्कोर 75 से 90 के बीच आता है, तो उसे निम्नलिखित में से किस श्रेणी में रखा जाता है?
a) अचीवर (Achiever)
b) फ्रंट रनर (Front Runner) ✅
c) परफ़ॉर्मर (Performer)
d) एस्पिरेंट (Aspirant)

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