Daily Current Affairs 2026: PRAGATI, QUAD & Space Updates

🎖️ Defence Current Affairs

Exercise PRAGATI 2026 Meghalaya Indian Army Defence Current Affairs

📌 बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ (Exercise PRAGATI 2026) का मेघालय के उमरोई में सफल समापन

दोस्तों, Daily Current Affairs 2026 के लिहाज से रक्षा क्षेत्र (Defence Sector) से एक बहुत ही बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। हमारी भारतीय सेना (Indian Army) ने हाल ही में पहले बहुराष्ट्रीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI 2026’ का मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन पर सफलतापूर्वक समापन किया है।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि यह इस अभ्यास का पहला यानी Maiden Edition था। इसका पूरा नाम Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region है।

इसे कराने का मुख्य मकसद हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) के साथी देशों के बीच आपसी सैन्य तालमेल (Interoperability) और रणनीतिक भरोसे को गहराई से मजबूत करना है।

इस बड़े रक्षा युद्धाभ्यास में भारत के साथ कुल 13 मित्र देशों के 400 से ज्यादा जाबांज सैनिकों ने अपने युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।

अगर आप आगामी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC GS Paper 3 – राष्ट्रीय सुरक्षा) या किसी भी राज्य PCS की तैयारी कर रहे हैं, तो इसके रक्षा खंड (Defence Section) के लिए यह टॉपिक बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। आप हमारे UPSC Current Affairs सेक्शन में ऐसे और भी अपडेट्स पढ़ सकते हैं।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

अभ्यास मापदंड (Exercise Parameter)विस्तृत विवरण (Detailed Specifications)
पूरा नाम (Full Name)Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region
आयोजन स्थल (Venue)उमरोई मिलिट्री स्टेशन, मेघालय (Umroi Military Station, Meghalaya)
प्रतिभागी देश (Participating Nations)13 देश (भारत, भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम)
कुल सैन्य बल (Troop Strength)400 से अधिक सक्रिय सैनिक और छह सेना उप-प्रमुख (Army Vice Chiefs)
प्रमुख फोकस (Core Focus)अर्ध-पर्वतीय और घने जंगलों वाले इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान (Counter-Terrorism Operations)
  • 72 घंटे का कड़ा वैलिडेशन अभ्यास (Validation Exercise): इस अभ्यास का आखिरी चरण बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। सभी बलों के बीच असल मैदान पर आपसी तालमेल और संयुक्त परिचालन क्षमता को परखने के लिए 72 घंटे का एक कड़ा वैलिडेशन अभ्यास चलाया गया।
  • व्यावहारिक युद्ध कला का बेहतरीन प्रशिक्षण: युद्धाभ्यास के दौरान अलग-अलग देशों के सैनिकों को मिलाकर मिश्रित टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने रॉक क्राफ्ट, घात लगाना (Ambush), हेलीकॉप्टर से स्लिदरिंग (Slithering), जंगल लेन शूटिंग, आईईडी (IED) का पता लगाना और बंधक संकट (Hostage Crisis) से निपटने जैसी बेहद जटिल सामरिक कलाओं का एक साथ अभ्यास किया।
  • स्वदेशी सैन्य हथियारों का शानदार प्रदर्शन: क्या आप जानते हैं कि इस दौरान भारत ने अपनी स्वदेशी ताकत का भी लोहा मनवाया? भारतीय सेना के सेना डिजाइन ब्यूरो (Army Design Bureau) और फिक्की (FICCI) के सहयोग से यहाँ एक अत्याधुनिक रक्षा उपकरण प्रदर्शनी लगाई गई। इसने ‘Atmanirbhar Bharat’ के तहत तैयार हमारी सैन्य निर्यात (Defence Export) क्षमताओं को एक बड़ा वैश्विक मंच दिया।

✴️ क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य सहयोग का नया हिंद महासागर दृष्टिकोण

‘PRAGATI 2026’ सैन्य अभ्यास का आयोजन कोई साधारण घटना नहीं है। यह असल में भारत की “Neighborhood First” नीति और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए हमारे “SAGAR” (Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ठोस कदम है।

यह बहुराष्ट्रीय मंच समान विचारधारा वाली सेनाओं को अपने असल युद्धक अनुभवों, बेस्ट प्रैक्टिसेस और आपदा राहत रणनीतियों (Disaster Relief Strategies) को आपस में साझा करने का एक शानदार मौका देता है।

इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भविष्य में किसी भी संयुक्त शांति मिशन के दौरान ये देश तुरंत और बेहतर तालमेल के साथ मिलकर काम कर सकेंगे।

✴️ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निर्यात को बढ़ावा

इस अभ्यास के दौरान जो रक्षा प्रदर्शनी आयोजित की गई, उसने विदेशी सैन्य अधिकारियों को भारत की तेजी से बढ़ती स्वदेशी डिजाइन, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से रूबरू कराया।

भारत में बने नए जमाने के आधुनिक हथियार प्रणालियों, निगरानी ड्रोनों (Surveillance Drones) और उन्नत संचार प्रणालियों को जब मित्र देशों के सामने प्रदर्शित किया गया, तो इससे न केवल हमारे Defence Exports को एक नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में भारत एक भरोसेमंद और मजबूत तकनीकी सुरक्षा साझीदार बनकर उभरेगा।


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  • नोडल मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence, Government of India) और भारतीय थल सेना (Indian Army)।
  • उमरोई मिलिट्री स्टेशन (Umroi Joint Training Node): यह मेघालय में स्थित भारतीय सेना का एक वर्ल्ड-क्लास संयुक्त युद्ध प्रशिक्षण केंद्र है। यहाँ कई प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय (Bilateral) और बहुराष्ट्रीय अभ्यासों का नियमित तौर पर आयोजन किया जाता है।
  • संवैधानिक प्रावधान: आपको पता होना चाहिए कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) के तहत ‘रक्षा’ (Defence) और ‘विदेशी मामले’ (Foreign Affairs) संघ सूची (Union List) के विषय हैं, यानी इन पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है।

🎯 Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में आयोजित बहुराष्ट्रीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI 2026’ का पहला संस्करण निम्नलिखित में से किस सैन्य स्टेशन पर संपन्न हुआ?
a) रानीखेत मिलिट्री स्टेशन, उत्तराखंड
b) महाजन FIELD फायरिंग रेंज, राजस्थान
c) उमरोई मिलिट्री स्टेशन, मेघालय ✅
d) बकलोह स्पेशल फोर्सेज ट्रेनिंग स्कूल, हिमाचल प्रदेश

Q2. ‘PRAGATI’ सैन्य अभ्यास के संदर्भ में, इसके पूर्ण रूप ‘Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation…’ के आगे निम्नलिखित में से कौन सा भौगोलिक क्षेत्र जुड़ा हुआ है?
a) …in the South China Sea
b) …in the Indian Ocean Region ✅
c) …in the Pacific Islands Forum
d) …in the ASEAN Sector

Q3. सैन्य अभ्यास PRAGATI 2026 के दौरान स्वदेशी रक्षा उपकरणों की अत्याधुनिक प्रदर्शनी आयोजित करने के लिए भारतीय सेना ने किस औद्योगिक महासंघ के साथ सहयोग किया था?
a) भारतीय उद्योग परिसंघ (CII)
b) भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) ✅
c) एसोचैम (ASSOCHAM)
d) नीति आयोग (NITI Aayog)


🌐 International Relations Current Affairs

11th QUAD Foreign Ministers Meeting New Delhi Critical Minerals Framework

📌 11वीं क्वाड (QUAD) विदेश मंत्रियों की बैठक संपन्न: रणनीतिक खनिजों के लिए ‘$20 बिलियन क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क’ का अनावरण

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों (International Relations) के गलियारे से एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर आ रही है। हाल ही में भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में क्वाड (QUAD) देशों के विदेश मंत्रियों की 11वीं बेहद रणनीतिक बैठक आयोजित की गई।

इस अहम बैठक की कमान हमारे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के हाथों में थी। इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने हिस्सा लिया।

अब सवाल यह है कि इस बहुचर्चित बैठक का सबसे बड़ा नतीजा क्या निकला? इस बैठक का सबसे बड़ा नीतिगत परिणाम रहा ‘Quad Critical Minerals Initiative Framework’ का ऐतिहासिक ऐलान।

इसके तहत चारों सदस्य देशों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों से $20 बिलियन तक का भारी-भरकम निवेश जुटाने की ऐतिहासिक घोषणा की है।

यह विषय UPSC GS Paper 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के लिए सबसे ज्यादा प्रासंगिक है और मुख्य परीक्षा के उत्तर लेखन में बहुत काम आएगा।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

प्रमुख क्वाड पहल (Quad Initiative)प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य (Core Strategic Goal)
क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क (Critical Minerals Framework)खनन (Mining), प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए $20 बिलियन का सार्वजनिक-निजी निवेश जुटाना।
समुद्री सुरक्षा सर्विलांस (IPMSC)‘Indo-Pacific Maritime Surveillance Cooperation Initiative’ के जरिए रियल-टाइम डेटा साझा करना।
बंदरगाह बुनियादी ढांचा (Port Infrastructure)प्रशांत महासागर क्षेत्र की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए फिजी (Fiji) के साथ पहला संयुक्त पोर्ट प्रोजेक्ट विकसित करना।
ऊर्जा सुरक्षा पहल (Energy Security Initiative)बाजार विश्लेषण, आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास और नीति संरेखण के माध्यम से क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलापन (Resilience) बढ़ाना।
  • चीन के खनिज वर्चस्व को सीधी टक्कर: यह नई पहल महत्वपूर्ण खनिज बाजारों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स) पर किसी एक देश के दबदबे या एकाधिकार को कम करने का काम करेगी। साथ ही यह गैर-बाजार नीतियों (Non-market policies) और अनुचित व्यापार तौर-तरीकों से निपटने में भी मदद करेगी।
  • समुद्री संप्रभुता और नौवहन की आजादी (Freedom of Navigation): बैठक में क्वाड मंत्रियों ने वैश्विक व्यापार के लिए बेहद जरूरी होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) में बिना किसी बाधा के व्यापार प्रवाह सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके अलावा, ताकत के बल पर मौजूदा स्थिति (Status Quo) को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध किया।
  • कनेक्टिविटी और मजबूत साइबर सुरक्षा: चारों देशों ने दक्षिण-पूर्वी एशिया और प्रशांत द्वीपों में पैर पसार रहे साइबर घोटालों (Scam centres) पर लगाम लगाने तथा प्रशांत द्वीप देशों को सुरक्षित अंडरसी केबल्स (Undersea Cables) की सुविधा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

✴️ महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला का भू-राजनीतिक संरेखण

आज के समय में ग्रीन ट्रांजिशन (Green Transition), सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) और आधुनिक रक्षा उपकरण बनाने के लिए रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बन चुके हैं।

क्वाड का यह नया निवेश ढांचा यह पक्का करेगा कि सदस्य देशों की विनिर्माण इकाइयाँ (Manufacturing Units) किसी भी भू-राजनीतिक तनाव या अचानक लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों की वजह से ठप न पड़ें। यह दुनिया भर में एक संतुलित और टिकाऊ वैकल्पिक बाजार बनाने में सही मायनों में गेम-चेंजर साबित होगा।

✴️ ‘इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन इनिशिएटिव’ की सामरिक भूमिका

यह नई समुद्री पहल चारों लोकतांत्रिक देशों की निगरानी क्षमताओं को एक साथ जोड़ने का काम करेगी, जिससे समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness – MDA) को एक बिल्कुल नया आयाम मिलेगा।

इसके जरिए हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अवैध रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियों, संदिग्ध जहाजों की अनधिकृत आवाजाही और अन्य सुरक्षा खतरों की रियल-टाइम ट्रैकिंग बहुत आसानी से की जा सकेगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र को खुला, मुक्त और समृद्ध बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है।


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  • क्वाड (QUAD): यह भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का एक रणनीतिक और अनौपचारिक समूह है। इसकी शुरुआती परिकल्पना साल 2007 में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने की थी, जिसे आगे चलकर साल 2017 में औपचारिक रूप से दोबारा सक्रिय किया गया।
  • नोडल मंत्रालय: विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs – MEA), भारत सरकार।
  • यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS): यह साल 1982 में अपनाया गया एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जो दुनिया के महासागरों और समुद्री संसाधनों के इस्तेमाल को तय करने वाला एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

🎯 Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में किस शहर में आयोजित क्वाड (QUAD) विदेश मंत्रियों की 11वीं बैठक के दौरान ‘क्वाड क्रिटिकल Minerals इनिशिएटिव फ्रेमवर्क’ को अपनाया गया?
a) सिडनी, ऑस्ट्रेलिया
b) टोक्यो, जापान
c) नई दिल्ली, भारत ✅
d) वाशिंगटन डी.सी., अमेरिका

Q2. क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क के तहत सुरक्षित और लचीली आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए कुल कितनी निवेश राशि जुटाने का संकल्प लिया गया है?
a) $10 बिलियन तक
b) $20 बिलियन तक ✅
c) $30 बिलियन तक
d) $50 बिलियन तक

Q3. प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में बंदरगाह क्षमताओं के विस्तार के लिए क्वाड ने किस विशिष्ट देश के साथ अपनी पहली संयुक्त पोर्ट अवसंरचना परियोजना की घोषणा की है?
a) फिजी (Fiji) ✅
b) मार्शल द्वीप समूह
c) सोलोमन द्वीप समूह
d) पापुआ न्यू गिनी


🏥 Health & National Policy Current Affairs

10th National Health Accounts NHA Report 2022-23 Healthcare Expenditure India

📌 10वीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) रिपोर्ट जारी: देश के स्वास्थ्य क्षेत्र पर महत्वपूर्ण नीतिगत और वित्तीय विश्लेषण

आइए अब बात करते हैं हमारे देश की सेहत और सरकारी स्वास्थ्य नीतियों से जुड़ी एक बेहद गंभीर और आंखें खोलने वाली रिपोर्ट के बारे में।

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2022-23 (FY23) के लिए भारत के 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (National Health Accounts – NHA) अनुमान आधिकारिक तौर पर जारी किए हैं।

इस रिपोर्ट को गहराई से देखें तो पता चलता है कि देश में स्वास्थ्य निवेश का पूरा ढांचा धीरे-धीरे बदल रहा है।

एक अच्छी बात यह है कि लंबे समय के विश्लेषण में भारत का सरकारी स्वास्थ्य व्यय (Government Health Expenditure – GHE) साल 2013-14 के ₹1.30 लाख करोड़ से लगभग तीन गुना बढ़कर वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹3.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।

लेकिन, इसका एक दूसरा पहलू भी है जो चिंता पैदा करता है। इसी समय के दौरान आम नागरिकों को अपनी जेब से सीधे इलाज पर किए जाने वाले खर्च यानी Out-of-Pocket Expenditure (OOPE) में एक बार फिर से तेज बढ़त देखने को मिली है।

यह महत्वपूर्ण विषय सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 – शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य नीति) के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

स्वास्थ्य व्यय सूचक (Health Expenditure Metrics)वर्ष 2013-14 की स्थितिवित्तीय वर्ष 2022-23 (NHA FY23 Estimates)
कुल स्वास्थ्य व्यय (Total Health Expenditure – THE)₹4.53 लाख करोड़ (अनुमानित)₹8.81 लाख करोड़ (देश की जीडीपी का 3.37%)
सरकारी स्वास्थ्य व्यय (GHE)₹1.30 लाख करोड़₹3.85 लाख करोड़
जेब से प्रत्यक्ष खर्च (OOPE % of THE)लगभग 64.2%लगभग 44.0% (FY22 के 39.4% के मुकाबले तेज बढ़ोतरी)
वार्षिक सरकारी व्यय परिवर्तन (GHE Change)आधार वर्षपिछले वित्त वर्ष (FY22) की तुलना में ~11% की गिरावट
  • कोविड काल के बाद बजटीय तालमेल: महामारी के दौर में सरकार ने मुफ्त टीकाकरण, बड़े पैमाने पर टेस्टिंग सुविधाओं और आपातकालीन अस्पतालों के निर्माण पर उम्मीद से कहीं ज्यादा वित्तीय निवेश किया था। अब वित्तीय वर्ष 2022-23 में महामारी से जुड़े वे आपातकालीन आबंटन (Allocations) कम हो गए हैं, जिसकी वजह से कुल सरकारी खर्च की हिस्सेदारी में थोड़ी सी कमी दिखाई दे रही है।
  • निजी क्षेत्र पर लगातार निर्भरता: आज भी हमारे देश की एक बहुत बड़ी आबादी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों या आधुनिक मशीनों की कमी के चलते प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने को मजबूर है। इसका सीधा असर उनके घर के बजट और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
  • दवाओं की भारी लागत: क्या आप जानते हैं कि लोगों की जेब से होने वाले कुल खर्च (OOPE) का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी महंगी पेटेंट दवाओं को खरीदने और प्राइवेट लैब्स में होने वाले डायग्नोस्टिक टेस्ट्स पर ही खर्च हो जाता है।

✴️ जेब से होने वाले खर्च (OOPE) में वृद्धि के कारण और सामाजिक प्रभाव

भारत में इलाज पर होने वाला यह भारी-भरकम पारिवारिक खर्च (OOPE) हमारे देश के गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग को गरीबी के दलदल में धकेलने का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है।

सरकारी क्षेत्र में डॉक्टरों की समय पर उपलब्धता न होना और बुनियादी चिकित्सा ढांचे की कमियां आम लोगों को महंगे प्राइवेट डॉक्टरों के पास जाने पर मजबूर करती हैं। इससे कहीं न कहीं स्वास्थ्य सेवाओं की समान और सस्ती पहुंच का जो लोकतांत्रिक अधिकार है, उस पर सीधा असर पड़ता है।

✴️ राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) 2017 के लक्ष्य और सरकारी सुधारात्मक पहल

भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 (NHP 2017) में यह बड़ा लक्ष्य रखा गया था कि साल 2025 तक देश का सरकारी स्वास्थ्य खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 2.5% किया जाएगा।

इस सपने को सच करने के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) योजना शुरू की, जिसके तहत गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिलता है।

इसके अलावा पीएम-अभिम (PM-ABHIM) के जरिए मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारा जा रहा है और प्रधानमंत्री जन औषधि योजना (PMBJP) के माध्यम से बेहद सस्ती जेनेरिक दवाएं आम लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं।


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  • तैयारकर्ता निकाय (Preparing Body): ये राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) अनुमान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र’ (NHSRC) और ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा तकनीकी सचिवालय’ (NHATS) द्वारा मिलकर तैयार किए जाते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय लेखांकन मानक: इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और OECD द्वारा तय किए गए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य ‘सिस्टम ऑफ हेल्थ अकाउंट्स (2011)’ के मानकों पर तैयार किया जाता है।
  • संवैधानिक प्रावधान: हमारे संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का अनुच्छेद 47 (Article 47) साफ तौर पर यह कहता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) में सुधार करना राज्य के सबसे प्राथमिक और महत्वपूर्ण कर्तव्यों में से एक है।

🎯 Current Affairs MCQs

Q1. वित्तीय वर्ष 2022-23 (FY23) के लिए जारी 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) अनुमानों के अनुसार, भारत का कुल स्वास्थ्य व्यय (THE) देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कितना प्रतिशत आंका गया है?
a) 1.80%
b) 2.10%
c) 3.37% ✅
d) 4.50%

Q2. नवीनतम NHA रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल स्वास्थ्य व्यय में परिवारों द्वारा अपनी जेब से किया जाने वाला प्रत्यक्ष खर्च (Out-of-Pocket Expenditure – OOPE) वित्तीय वर्ष 2022-23 में बढ़कर कितना हो गया है?
a) लगभग 35.5%
b) लगभग 39.4%
c) लगभग 44.0% ✅
d) लगभग 52.0%

Q3. भारत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) अनुमानों को वैज्ञानिक पद्धति से तैयार करने वाला ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र’ (NHSRC) किस केंद्रीय मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है?
a) योजना और सांख्यिकी मंत्रालय
b) रसायन और उर्वरक मंत्रालय
c) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ✅
d) नीति आयोग


🚀 Science & Technology Current Affairs

IN-SPACe CTF Gujarat Tamil Nadu Private Space Industry India

📌 अंतरिक्ष विभाग ने गुजरात और तमिलनाडु में दो ‘कॉमन टेक्निकल फैसिलिटी’ (CTFs) की स्थापना को दी मंजूरी: निजी अंतरिक्ष उद्योग को मिलेगा बड़ा संबल

साइंस एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर (Private Space Industry) के लिए एक बहुत ही शानदार और बड़ी खुशखबरी है।

हमारे अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS) ने देश के घरेलू निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए गुजरात और तमिलनाडु में दो अत्याधुनिक ‘Common Technical Facilities’ (CTFs) बनाने का ऐतिहासिक फैसला किया है।

इन हाई-टेक केंद्रों को भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग से तैयार किया जाएगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि इन केंद्रों से हमारे स्टार्टअप्स को क्या फायदा होगा? दरअसल, जो नए स्टार्टअप्स सैटेलाइट, पेलोड और रॉकेट प्रणालियों के निर्माण में लगे हैं, उन्हें शुरुआत में भारी-भरकम पूंजी निवेश (Capex) करना पड़ता था।

ये केंद्र उन्हें एक शानदार “Plug-and-Play” इंफ्रास्ट्रक्चर देंगे, जिससे उनका शुरुआती खर्च बहुत कम हो जाएगा। यह टॉपिक आगामी UPSC GS Paper 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) और राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं के लिए बेहद उपयोगी है।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

अंतरिक्ष पार्क का नाम (Space Hub & Cluster)रणनीतिक अवस्थिति (Location)मुख्य कार्य और फोकस क्षेत्र (Core Focus)प्रमुख परीक्षण अवसंरचना (Testing Facilities)
स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क (Space Manufacturing Park)खोराज, अहमदाबाद के पास (गुजरात)अंतरिक्ष यान (Spacecraft) और उन्नत पेलोड प्रणालियांक्लीनरूम (Cleanrooms), इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन और स्ट्रक्चरल असेंबली
स्पेस व्हीकल्स क्लस्टर (Space Vehicles Cluster)थूथुकुडी (तमिलनाडु)रॉकेट और प्रक्षेपण वाहनों (Launch Vehicles) का विनिर्माण और एकीकरणकंपन एवं आघात (Vibration & Shock), थर्मल वैक्यूम और प्रोपल्शन टेस्टिंग
  • भारी पूंजीगत खर्च की समस्या का हल: अंतरिक्ष के क्षेत्र में कदम रखने के लिए पारंपरिक रूप से करोड़ों रुपये के निवेश और महंगी लैब की जरूरत होती है। ये साझा तकनीकी सुविधाएं निजी स्टार्टअप्स को बिना किसी भारी निवेश के, बहुत ही कम फीस पर वर्ल्ड-क्लास टेस्टिंग सेवाएं मुहैया कराएंगी।
  • कुलशेखरपट्टनम लॉन्च कॉम्प्लेक्स का फायदा: तमिलनाडु के थूथुकुडी में बनने वाला यह स्पेस क्लस्टर रणनीतिक रूप से इसरो (ISRO) के आगामी Small Satellite Launch Vehicle (SSLV) परिसर के बिल्कुल पास स्थित होगा। इससे सामान को लाने-ले जाने और परिचालन की लागत में भारी बचत होगी।
  • अंतरिक्ष उद्योग का तेजी से विकेंद्रीकरण: इस ऐतिहासिक कदम की सफलता को देखते हुए भारत के करीब 10 अन्य राज्यों ने भी अपने यहाँ इसी तरह के विशेष प्लग-एंड-प्ले विनिर्माण पार्कों को विकसित करने की गहरी इच्छा जताई है।

✴️ प्लग-एंड-प्ले मॉडल से भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र का लोकतंत्रीकरण

क्या आप जानते हैं कि सैटेलाइट और पेलोड में लगने वाले नाजुक उपकरणों को अंतरिक्ष के बेहद खराब मौसम, खतरनाक रेडिएशन और उतार-चढ़ाव वाले तापमान (Thermal Vacuum) से बचाना कितना मुश्किल होता है?

इन साझा केंद्रों पर थर्मल वैक्यूम टेस्टिंग (Thermal Vacuum Testing) और वाइब्रेशन एनालिसिस जैसी प्रणालियों के होने से फायदा यह होगा कि हमारे देश के युवा वैज्ञानिकों के स्टार्टअप्स अंतरराष्ट्रीय स्तर के सैटेलाइट्स का डिजाइन और निर्माण बेहद किफायती दरों पर भारत की ही धरती पर कर सकेंगे।

✴️ अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी और इन-स्पेस की भूमिका

भारत सरकार ने साल 2020 में अंतरिक्ष के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों की शुरुआत की थी। इसी के तहत IN-SPACe को एक स्वतंत्र नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था।

इसका मुख्य काम इसरो (ISRO) की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, रिसर्च संसाधनों और तकनीकों तक देश के निजी उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और इनोवेटिव स्टार्टअप्स की पहुंच को आसान बनाना है, ताकि भारत दुनिया की स्पेस इकोनॉमी में अपनी हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ा सके।


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  • इन-स्पेस (IN-SPACe): इसका पूरा नाम Indian National Space Promotion and Authorization Centre है। यह अंतरिक्ष विभाग (DoS) के तहत जून 2020 में बनाई गई एक स्वायत्त संस्था है, जिसका मुख्यालय बोपल, अहमदाबाद (गुजरात) में है।
  • नोडल मंत्रालय: अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS), जो सीधे हमारे देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।
  • इसरो (ISRO): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसके पहले अध्यक्ष डॉ. विक्रम साराभाई थे, जिन्हें बड़े सम्मान के साथ ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक’ कहा जाता है। अधिक जानकारी के लिए ISRO की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

🎯 Current Affairs MCQs

Q1. अंतरिक्ष विभाग (DoS) द्वारा स्वीकृत ‘कॉमन टेक्निकल फैसिलिटी’ (CTF) के तहत मुख्य रूप से अंतरिक्ष यान और पेलोड प्रणालियों के निर्माण के लिए ‘स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क’ कहाँ स्थापित किया जा रहा है?
a) कुलशेखरपट्टनम, तमिलनाडु
b) श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
c) खोराज (अहमदाबाद के निकट), गुजरात ✅
d) महेंद्रगिरि, तमिलनाडु

Q2. तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्थापित की जाने वाली साझा तकनीकी सुविधा रणनीतिक रूप से इसरो के किस आगामी प्रक्षेपण परिसर के निकट स्थित होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है?
a) सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
b) आगामी लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) परिसर, कुलशेखरपट्टनम ✅
c) विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, थुम्बा
d) मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी, हासन

Q3. भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को विनियमित और प्रोत्साहित करने वाली स्वायत्त संस्था ‘इन-स्पेस’ (IN-SPACe) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
a) वर्ष 2015
b) वर्ष 2018
c) वर्ष 2020 ✅
d) वर्ष 2022


⚔️ National Security & Defence Current Affairs

NDA 150th Passing Out Parade General Upendra Dwivedi Theaterisation

📌 राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की ऐतिहासिक 150वीं पासिंग आउट परेड: सैन्य आधुनिकीकरण और थियेटराइजेशन पर थल सेनाध्यक्ष की अहम घोषणाएं

डिफेंस की तैयारी करने वाले हर एक स्टूडेंट का यह सबसे बड़ा सपना होता है कि वह पुणे के खड़कवासला पहुंचे और सेना का हिस्सा बने।

हाल ही में वहाँ स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy – NDA) के ऐतिहासिक 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड (Passing Out Parade – POP) का बेहद भव्य और शानदार आयोजन किया गया।

इस ऐतिहासिक पल के मुख्य समीक्षा अधिकारी (Reviewing Officer) हमारे थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी थे। खास बात यह है कि वह खुद भी इसी शानदार अकादमी के 65वें कोर्स (चार्ली स्क्वाड्रन) के गौरवशाली पूर्व छात्र रह चुके हैं।

इस गौरवमयी परेड के दौरान 18 महिला कैडेटों सहित कुल 355 कैडेटों ने अपना कड़ा और अनुशासित सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में अफसर के रूप में कमीशन प्राप्त किया।

परेड को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने सेना के “Decade of Transformation” (रूपांतरण का दशक), ‘Operation Sindoor’ से मिले रणनीतिक सबक और आज के दौर की बहु-डोमेन युद्ध कला (Multi-Domain Warfare) पर कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

सैन्य आधुनिकीकरण पहल (Modernisation Initiative)प्रमुख रणनीतिक विवरण (Key Strategic Details)
रूपांतरण का दशक (Decade of Transformation)भारतीय थल सेना को आधुनिक, तकनीक से लैस और पूरी तरह डेटा-केंद्रित (Data-centric) बल में तब्दील करना।
नया संरचनात्मक ढांचा (New Tech Formations)आंतरिक संसाधनों का इस्तेमाल करके ‘दिव्यास्त्र बैटरी’, ‘शक्तिमान रेजिमेंट’ और ‘अश्वनी ड्रोन प्लेटून’ जैसी नई कमान का गठन।
थियेटराइजेशन रोडमैप (Theaterisation Roadmap)थियेटराइजेशन की पूरी रूपरेखा को अंतिम रूप देकर रक्षा मंत्री को सौंप दिया गया है, जो अगले 2-3 सालों में जमीनी स्तर पर दिखने लगेगी।
ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)भारतीय सेना के केवल प्रतिक्रिया देने वाले रुख से हटकर, तकनीक पर आधारित एक मजबूत और आक्रामक निवारक रुख की पुष्टि।
  • बहु-डोमेन और संज्ञानात्मक युद्ध (Cognitive Warfare): सेना प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा कि भविष्य के युद्ध अब केवल पारंपरिक सरहदों तक ही सीमित नहीं रहने वाले हैं। अब ये लड़ाई जमीन, हवा और पानी के अलावा अंतरिक्ष (Space), साइबर, इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक और इंसानी दिमाग को प्रभावित करने वाले संज्ञानात्मक क्षेत्रों (Cognitive Domains) में भी पूरी आक्रामकता से लड़ी जाएगी।
  • पारदर्शी युद्धक्षेत्र की नई चुनौतियां: आज के दौर में आधुनिक सैटेलाइट निगरानी और उन्नत तकनीकों के कारण युद्ध का मैदान चौबीसों घंटे (24/7) पूरी तरह से पारदर्शी हो चुका है। ऐसे में हमारे सैनिकों की सुरक्षा और सामरिक तैनाती के लिए पहले से कहीं ज्यादा सतर्कता और समझदारी की जरूरत है।
  • महिला कैडेटों का बढ़ता गौरव: एनडीए के इस ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह में 18 महिला कैडेटों की शानदार भागीदारी ने हमारी सशस्त्र सेनाओं में लैंगिक समानता (Gender Equality) और युद्धक भूमिकाओं में देश की नारी शक्ति के बढ़ते योगदान को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश किया है।

✴️ भारतीय सेना का डिजिटल और डेटा-केंद्रित कायाकल्प

“Decade of Transformation” के तहत हमारी भारतीय सेना अब केवल सैनिकों की संख्या बढ़ाने वाली पुरानी रणनीतियों से आगे बढ़कर पूरी तरह से मानव रहित प्रणालियों (Unmanned Systems), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और पलक झपकते ही कार्रवाई करने वाली चुस्त सामरिक इकाइयों (Tactical Units) की तरफ कदम बढ़ा चुकी है।

इसके लिए सेना ने बड़े पैमाने पर करीब ₹5,000 करोड़ के स्वदेशी ड्रोनों, लोइटरिंग म्यूनिशन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के ऑर्डर भी दे दिए हैं, जो भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हमारी ताकत को दोगुना कर देंगे। अधिक जानकारी के लिए Current Affairs MCQs पेज पर विजिट करें।

✴️ एकीकृत थिएटर कमांड (Integrated Theatre Commands) का महत्व

भारत के सैन्य थियेटराइजेशन (Theaterisation) की प्रक्रिया अब अपने बिल्कुल आखिरी पड़ाव पर है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने आपस में लंबी चर्चा के बाद एक व्यापक और सर्वसम्मत रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंप दी है।

यह एक ऐसा महत्वाकांक्षी सुधार है जो युद्ध के समय हमारी तीनों सेनाओं (जल, थल और नभ) के संसाधनों को एक ही एकीकृत कमान के तहत ले आएगा, जिससे दुश्मन पर तुरंत और सबसे घातक मार की जा सकेगी।


📚 Static GK Connect

  • राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA): महाराष्ट्र के पुणे के पास खड़कवासला में स्थित यह अकादमी दुनिया की सबसे पहली ऐसी विशिष्ट त्रि-सेवा (Tri-services) प्रशिक्षण अकादमी है जहाँ तीनों सेनाओं के कैडेट्स एक साथ ट्रेनिंग लेते हैं। इसकी स्थापना 7 दिसंबर 1954 को हुई थी।
  • थल सेना प्रमुख (COAS): वर्तमान में हमारे थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी हैं। वह भारतीय सेना के 30वें प्रमुख के रूप में 30 जून 2024 से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
  • नोडल मंत्रालय: रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence, Government of India)।

🎯 Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के ऐतिहासिक 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड (POP) के मुख्य समीक्षा अधिकारी (Reviewing Officer) कौन थे?
a) चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान
b) थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ✅
c) भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
d) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Q2. सेना प्रमुख द्वारा एनडीए दीक्षांत समारोह के अवसर पर घोषित आधुनिक ‘रूपांतरण दशक’ (Decade of Transformation) के तहत भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए किस नई बैटरी संरचना को लागू कर रही है?
a) रुद्र बैटरियां
b) दिव्यास्त्र बैटरियां ✅
c) अग्निबाण बैटरियां
d) शौर्य बैटरियां

Q3. विश्व की पहली त्रि-सेवा प्रशिक्षण अकादमी, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) महाराष्ट्र के किस विशिष्ट स्थान पर स्थित है?
a) देवलाली, नासिक
b) कोलाबा, मुंबई
c) खड़कवासला, पुणे ✅
d) लोनावला, पुणे

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