5 Jun 2026 Daily Current Affairs: Exam-Oriented Deep Dive for UPSC, SSC & State PCS

Economy Current Affairs

Indian Economy Current Affairs 5 June 2026 WPI Base Year Revision DPIIT

दोस्तों, जब बात भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की आती है, तो मुद्रास्फीति (Inflation) यानी महंगाई को सही तरीके से मापना बहुत जरूरी हो जाता है।

आप सभी जानते हैं कि UPSC, SSC, या बैंकिंग परीक्षाओं में इकोनॉमिक इंडेक्स और उनके आधार वर्ष (Base Year) से जुड़े सवाल हर साल प्रीलिम्स और मेन्स में गेम-चेंजर साबित होते हैं।

हाल ही में भारत सरकार ने महंगाई मापने के तरीके में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है, जो डेटा एनालिसिस की दुनिया में एक शानदार कदम है। अगर आप हमारे डेली करंट अफेयर्स (Daily Current Affairs) को फॉलो करते हैं, तो आपको इसके महत्व का अंदाजा जरूर होगा।

अब सवाल यह है कि इसका फायदा क्या होगा? दरअसल, इस अपडेट से सिर्फ सरकार को ही सटीक डेटा नहीं मिलेगा, बल्कि यह RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) को ब्याज दरें तय करने में भी बहुत मदद करेगा।

इसके अलावा, ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के हिसाब से नए इंडेक्स आने से हमारा स्टैटिस्टिकल सिस्टम और भी ज्यादा भरोसेमंद और पारदर्शी हो जाएगा।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का आधार वर्ष 2022-23 में संशोधित और नए PPI की शुरुआत

हाल ही में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के तहत DPIIT ने ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (Wholesale Price Index – WPI) की नई सीरीज को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

इस नए अपडेट के बाद, WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर अब 2022-23 कर दिया गया है। ध्यान दें, यह नई सीरीज 15 जून 2026 से लागू हो जाएगी।

यह बदलाव सिर्फ बेस ईयर तक सीमित नहीं है! भारतीय आंकड़ों के इतिहास में पहली बार ‘उत्पादक मूल्य सूचकांक’ (Producer Price Index – PPI) को भी पेश किया गया है।

नई WPI सीरीज के बास्केट (Basket) में शामिल चीजों की कुल संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है।

यह बड़ा फैसला इसलिए लिया गया है ताकि अर्थव्यवस्था में आ रहे बदलावों खासकर डिजिटल सेवाओं (Digital Services) और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के बढ़ते प्रभाव को बिलकुल सटीक तरीके से मापा जा सके।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • आधार वर्ष और बदलाव का समय: WPI का नया बेस ईयर 2022-23 तय किया गया है। अगले 5 सालों तक पुरानी (2011-12) और नई सीरीज साथ-साथ चलेंगी, और उसके बाद पुरानी सीरीज को पूरी तरह से बंद (Phase out) कर दिया जाएगा।
  • बास्केट का विस्तार: पुरानी सीरीज की 697 वस्तुओं के मुकाबले नई WPI बास्केट में 260 नई चीजों को जोड़ा गया है, यानी इसमें लगभग 37% की बढ़ोतरी हुई है।
  • उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) की एंट्री: ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को अपनाते हुए तीन नए PPI Output PPI, Input PPI, और Service PPI शुरू किए गए हैं।
  • ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव: सौर ऊर्जा (Solar Power) और पवन ऊर्जा (Wind Energy) को पहली बार ‘इलेक्ट्रिसिटी ग्रुप’ (Electricity Group) में जगह मिली है। वहीं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को ‘प्राथमिक वस्तुएं’ (Primary Articles) से हटाकर ‘ईंधन और बिजली’ (Fuel and Power) कैटेगरी में डाल दिया गया है।
  • कैलकुलेशन के तरीके में सुधार: WPI के लिए भार (Weights) तय करने के लिए ‘Net Traded Value’ की जगह अब ‘Gross Value of Output’ (GVO) का इस्तेमाल किया गया है।

आर्थिक संरचना में बदलाव और WPI का नया बास्केट

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के बेस ईयर में बदलाव करना हमारी बदलती हुई अर्थव्यवस्था की एक सच्ची तस्वीर दिखाता है। 2011-12 के बाद से हमारे देश के प्रोडक्शन और सप्लाई चेन (Supply Chain) में बहुत सारे तकनीकी बदलाव आए हैं। कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) के बाद जो बदलाव हुए, उन्हें पुराने तरीके से मापना काफी मुश्किल हो रहा था।

WPI पैरामीटर (Parameter) और उनका प्रभाव:

  • कुल वस्तुएं (Total Items): पुरानी श्रृंखला (Base Year 2011-12) में 697 थीं, जबकि नई श्रृंखला (Base Year 2022-23) में 957 हैं। यह अर्थव्यवस्था के नए सेक्टर्स की बिलकुल सही तस्वीर दिखाता है।
  • ऊर्जा का वर्गीकरण (Energy): पहले यह सीमित पारंपरिक ऊर्जा तक था, लेकिन अब इसमें सौर (Solar) और पवन ऊर्जा (Wind) को शामिल किया गया है। यह हरित ऊर्जा (Green Energy) को लेकर भारत के कमिटमेंट को दिखाता है।
  • कच्चे तेल का स्थान: इसे प्राथमिक वस्तुएं (Primary Articles) से निकालकर ईंधन और बिजली (Fuel and Power) में रखा गया है। इससे ग्लोबल एनर्जी प्राइस के झटकों (Global Price Shocks) को सही से मापा जा सकेगा।
  • भार पद्धति (Weight Methodology): पहले Net Traded Value का इस्तेमाल होता था, अब Gross Value of Output (GVO) अपनाया गया है, जो प्रोडक्शन की असली कीमत को ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से मापता है।

क्या आप जानते हैं कि इसका सबसे बड़ा असर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP – Index of Industrial Production) पर पड़ेगा? सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) अब नए WPI डिफ्लेटर (Deflator) का इस्तेमाल करेगा, जिससे इंडस्ट्रियल ग्रोथ की असली तस्वीर सामने आएगी। सीधे शब्दों में कहें तो, जब बास्केट में चीजें बढ़ती हैं, तो महंगाई का उतार-चढ़ाव (Volatility) कम हो जाता है क्योंकि कीमतों के बढ़ने का असर ज्यादा चीजों पर बंट जाता है।

उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) का रणनीतिक महत्व

भारत में पहली बार उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) की शुरुआत को हम एक ‘गेम-चेंजर’ पॉलिसी कह सकते हैं। जहाँ WPI थोक बाजार में चीजों की कीमतों में बदलाव को मापता है (जिसमें टैक्स और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी शामिल होता है), वहीं PPI सीधे प्रोडक्शन के लेवल पर कीमतों का हिसाब रखता है। इससे सरकार को यह समझने में आसानी होती है कि फैक्ट्रियों और उत्पादकों पर लागत का कितना बोझ पड़ रहा है, जो आगे चलकर खुदरा महंगाई (Retail Inflation) का रूप ले सकता है।

विभिन्न प्रकार के PPI और उनकी विशेषताएं:

  • Output PPI: इसका मूल्य निर्धारण बेसिक मूल्य (Basic Price – बिना टैक्स के) पर आधारित होता है और इसे मासिक (Monthly) आधार पर जारी किया जाएगा।
  • Input PPI: यह खरीद मूल्य (Purchaser’s Price – टैक्स के साथ) पर आधारित होता है और विनिर्माण क्षेत्र के लिए प्रयोगात्मक (Experimental) रूप से हर महीने आएगा।
  • Service PPI: यह सर्विस प्रोवाइडर को मिलने वाली कीमत को मापता है। पहले चरण में 7 प्रमुख सेवाएं (बैंकिंग, रेलवे, एयर पैसेंजर, टेलीकॉम, बीमा आदि) शामिल हैं और इसे त्रैमासिक (Quarterly) आधार पर लाया जाएगा।

इन नए इंडेक्स से हमारे MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर को बहुत फायदा होगा। लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स (Long-term Contracts) में WPI का काफी इस्तेमाल होता है। PPI के आ जाने से कच्चे माल (Raw Material) की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को साइंटिफिक तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। यानी महंगाई को एकदम शुरुआत में ही पकड़ने से RBI को ‘प्रिवेंटिव मौद्रिक नीति’ (Preventive Monetary Policy) बनाने में बहुत मदद मिलेगी।

Static GK Connect

  • नोडल मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) के तहत ‘आर्थिक सलाहकार का कार्यालय’ (Office of Economic Adviser – OEA), DPIIT।
  • WPI का इतिहास: हमारे देश में WPI के आंकड़े दूसरे विश्व युद्ध के समय से आ रहे हैं। आजादी से पहले भारत सरकार के पहले आर्थिक सलाहकार ‘सर थियोडोर ई.जी. ग्रेगरी’ (Sir Theodore E.G. Gregory) ने 1939 को बेस ईयर मानकर पहली सीरीज शुरू की थी।
  • CPI बनाम WPI: खुदरा महंगाई (Consumer Price Index – CPI) ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय’ (NSO) जारी करता है, जबकि WPI को OEA जारी करता है। ‘उर्जित पटेल समिति’ (Urjit Patel Committee) की सलाह पर RBI महंगाई को कंट्रोल करने के लिए मुख्य रूप से CPI का ही इस्तेमाल करता है।
  • कानूनी आधार: महंगाई का लक्ष्य तय करने (Inflation Targeting) का अधिकार ‘भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934’ (RBI Act 1934) की धारा 45ZA में दिया गया है।

Current Affairs MCQs

Q1. भारत में ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (WPI) की नई श्रृंखला और ‘उत्पादक मूल्य सूचकांक’ (PPI) के संदर्भ में नीचे दिए गए कथनों पर विचार करें:
1. WPI का नया आधार वर्ष 2022-23 कर दिया गया है, जिसमें कुल 957 वस्तुओं को शामिल किया गया है।
2. नई श्रृंखला में वस्तुओं के भारांक (Weights) का निर्धारण ‘Net Traded Value’ के आधार पर किया गया है।
3. Output PPI की गणना बेसिक प्राइस (Basic Price) पर की जाएगी, जिसमें अप्रत्यक्ष कर शामिल नहीं होते हैं।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

a) केवल 1 और 2
b) केवल 1 और 3 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

 

Q2. DPIIT द्वारा जारी की गई नई WPI और PPI प्रणाली के बारे में इनमें से कौन सा बदलाव गलत (असत्य) है?

a) कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को ‘प्राथमिक वस्तुएं’ (Primary Articles) श्रेणी से हटाकर ‘ईंधन और बिजली’ (Fuel and Power) श्रेणी में डाल दिया गया है।
b) नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन ऊर्जा) को पहली बार ‘इलेक्ट्रिसिटी ग्रुप’ में जगह मिली है।
c) Service PPI के पहले चरण में सिर्फ कृषि और निर्माण क्षेत्र की सेवाओं को ट्रैक किया जाएगा। ✅
d) WPI की पुरानी (2011-12) और नई (2022-23) सीरीज अगले 5 सालों तक एक साथ चलेंगी।

 

Q3. इतिहास के पन्नों में देखें, तो भारत में ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (WPI) की कैलकुलेशन सबसे पहले किस ब्रिटिश आर्थिक सलाहकार के निर्देशन में शुरू की गई थी?

a) जॉन मेनार्ड कीन्स (John Maynard Keynes)
b) सर थियोडोर ई.जी. ग्रेगरी (Sir Theodore E.G. Gregory) ✅
c) एडम स्मिथ (Adam Smith)
d) दादाभाई नौरोजी (Dadabhai Naoroji)

 

International Appointments Current Affairs

UNGA President 81st Session Khalilur Rahman 5 Jun 2026 Current Affairs

इंटरनेशनल लेवल पर जब भी संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की किसी बड़ी संस्था में कोई नियुक्ति या चुनाव होता है, तो वह UPSC और State PCS एग्जाम्स का फेवरेट सवाल बन जाता है।

ग्लोबल पॉलिटिक्स (Multilateral Diplomacy) के नजरिए से देखा जाए तो संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के अध्यक्ष का पद बहुत ही सम्मानीय और ताकतवर माना जाता है।

खासकर जब बात ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) या हमारे पड़ोसी दक्षिण एशिया की हो, तो भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय भू-राजनीति (Regional Geopolitics) के लिहाज से यह टॉपिक और भी जरूरी हो जाता है। इंटरनेशनल रिलेशंस (IR) के पेपर में इस टॉपिक से सवाल आना लगभग तय मानिए।

खलीलुर रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के अध्यक्ष निर्वाचित

हाल ही में कूटनीति की दुनिया से एक बड़ी खबर आई है। बांग्लादेश के मौजूदा विदेश मंत्री ‘खलीलुर रहमान’ (Khalilur Rahman) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly – UNGA) के 81वें सत्र का अध्यक्ष (President) चुन लिया गया है।

एक बेहद कड़े गुप्त मतदान (Secret Ballot) में उन्होंने साइप्रस (Cyprus) के एंड्रियास काकोरिस को पीछे छोड़ दिया।

आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के रोटेशन सिस्टम (Regional Rotation System) के तहत इस 81वें सत्र की अध्यक्षता ‘एशिया-प्रशांत समूह’ (Asia-Pacific Group) के हिस्से में आई थी।

यह चुनाव ऐसे समय पर हुआ है जब दुनिया जलवायु संकट और कई ग्लोबल झगड़ों से जूझ रही है। 1979 बैच के एक बेहद अनुभवी राजनयिक खलीलुर रहमान, 8 सितंबर 2026 से अपना एक साल का कार्यकाल शुरू करेंगे।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • वोटिंग के आंकड़े: खलीलुर रहमान को कुल 190 में से 99 वोट मिले, जबकि उनके सामने खड़े काकोरिस को 91 वोट मिले। दिलचस्प बात यह है कि इस चुनाव में एक भी वोट खारिज (Invalid) नहीं हुआ।
  • 40 साल का लंबा इंतजार: बांग्लादेश को यह मौका 40 साल बाद मिला है। इससे पहले 1986-87 (41वें सत्र) में बांग्लादेश के तत्कालीन विदेश मंत्री हुमायूँ रशीद चौधरी (Humayun Rasheed Chowdhury) UNGA के अध्यक्ष बने थे।
  • UNSG चुनाव का समय: रहमान साहब का कार्यकाल एक और बहुत बड़े इवेंट के साथ क्लैश करेगा वो है संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UN Secretary-General) एंटोनियो गुटेरेस के उत्तराधिकारी का चुनाव, जिनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है।
  • डबल ड्यूटी: डॉ. रहमान ने इशारा किया है कि वे बांग्लादेश के विदेश मंत्री और UNGA अध्यक्ष, दोनों पदों को एक साथ संभाल सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे उनसे पहले हुमायूँ रशीद चौधरी ने किया था।
  • प्रमुख एजेंडा (Priorities): उनकी छह बड़ी प्राथमिकताओं में शांति व सुरक्षा, SDGs, क्लाइमेट एक्शन, मानवाधिकार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशासन और UN में सुधार शामिल हैं।

चुनाव के आंकड़े, रोटेशन प्रणाली और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अध्यक्ष का चुनाव कोई मनमानी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक पारदर्शी ‘भौगोलिक रोटेशन नीति’ (Geographical Rotation Policy) पर आधारित है। यह पद हर साल पाँच क्षेत्रीय समूहों के बीच घूमता रहता है: अफ्रीकी, एशिया-प्रशांत, पूर्वी यूरोपीय, लैटिन अमेरिकी-कैरेबियाई, और पश्चिमी यूरोपीय समूह। इस बार बारी एशिया-प्रशांत समूह की थी।

UNGA अध्यक्षों का ऐतिहासिक संदर्भ:

  • विजया लक्ष्मी पंडित (भारत): इन्होंने 8वें सत्र (1953) की अध्यक्षता की थी। यह UNGA के इतिहास की पहली महिला अध्यक्ष (First Woman President) थीं।
  • हुमायूँ रशीद चौधरी (बांग्लादेश): 41वें सत्र (1986-87) के अध्यक्ष बने। ये दक्षिण एशिया से 5वें और बांग्लादेश से पहले व्यक्ति थे।
  • खलीलुर रहमान (बांग्लादेश): 81वें सत्र (2026-27) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष, जो रोहिंग्या मुद्दे पर उच्च प्रतिनिधि और अनुभवी राजनयिक रहे हैं।

आज की दुनिया का भू-राजनीतिक माहौल (Geopolitical Landscape) काफी उलझा हुआ है। 80वें सत्र की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, दोनों ही मान चुके हैं कि देशों का एक-दूसरे पर भरोसा बहुत कम हो गया है। इसलिए रहमान ने अपनी अध्यक्षता की थीम ही रखी है “Restoring Trust, Managing Transformation: A United Nations that Delivers for All”, ताकि दुनिया भर के देशों को एक साथ लाया जा सके।

छह प्रमुख प्राथमिकताएं और भारत के लिए इसके मायने

रहमान के एजेंडे में एक बहुत ही खास बात है ‘ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट’ (Global Digital Compact) को लागू करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई टेक्नोलॉजी को सही दिशा में कंट्रोल (Governance) करना। इससे विकासशील देशों को बहुत फायदा होगा। साथ ही, शांति बनाए रखने (Peacekeeping) में बांग्लादेश का पुराना अनुभव भी काम आएगा।

अब अगर भारत के नजरिए से देखें, तो बांग्लादेश का UNGA की कुर्सी पर बैठना हमारे लिए कूटनीतिक रूप से बहुत अच्छी खबर है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी (Neighborhood First Policy) और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) का लीडर बनने की हमारी कोशिशों को इस मंच से अच्छा सपोर्ट मिलेगा। जब रहमान साहब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की बात करेंगे, तो भारत की स्थायी सदस्यता (Permanent Membership) की दावेदारी को भी ताकत मिलेगी।

Static GK Connect

  • UNGA का गठन और मुख्यालय: यह संस्था 1945 में बनी थी और यह संयुक्त राष्ट्र का मुख्य पॉलिसी-मेकिंग अंग है। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क (New York) में है।
  • संवैधानिक/चार्टर लिंक: ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर’ (UN Charter) के चैप्टर IV (Chapter IV), अनुच्छेद 9 से 22 के तहत UNGA के काम और शक्तियों के बारे में बताया गया है। इसी के ‘अनुच्छेद 21’ (Article 21) के तहत महासभा अपने अध्यक्ष का चुनाव करती है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UNSG): इस पद पर अभी पुर्तगाल के एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) बैठे हैं।
  • भारत और UNGA: भारत UNGA का एक संस्थापक (Founding) सदस्य है और आतंकवाद के खिलाफ ‘व्यापक सम्मेलन’ (CCIT) लागू करवाने के लिए लगातार आवाज उठाता रहा है।

Current Affairs MCQs

Q1. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के लिए चुने गए अध्यक्ष खलीलुर रहमान के बारे में नीचे दिए गए कथनों पर विचार करें:
1. वे UNGA की अध्यक्षता करने वाले बांग्लादेश के पहले व्यक्ति हैं।
2. 81वें सत्र के लिए अध्यक्षता का पद भौगोलिक रोटेशन प्रणाली के तहत ‘एशिया-प्रशांत समूह’ (Asia-Pacific Group) को दिया गया था।
3. उन्होंने जो 6 प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं, उनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती टेक्नोलॉजी का प्रशासन भी शामिल है।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

a) केवल 1 और 2
b) केवल 2 और 3 ✅
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3

(व्याख्या: पहला कथन गलत है क्योंकि 1986 में हुमायूँ रशीद चौधरी UNGA के अध्यक्ष बनने वाले पहले बांग्लादेशी थे, खलीलुर रहमान दूसरे हैं।)

 

Q2. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के ऐतिहासिक तथ्यों के संबंध में इनमें से कौन सा जोड़ा सही नहीं मिलाया गया है?

a) विजया लक्ष्मी पंडित – UNGA की पहली महिला अध्यक्ष (1953)
b) हुमायूँ रशीद चौधरी – UNGA के 41वें सत्र के अध्यक्ष
c) एंटोनियो गुटेरेस – संयुक्त राष्ट्र महासभा के वर्तमान महासचिव ✅
d) संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 21 – UNGA अध्यक्ष के चुनाव का प्रावधान

(व्याख्या: एंटोनियो गुटेरेस पूरे ‘संयुक्त राष्ट्र’ (United Nations) के महासचिव हैं, न कि केवल महासभा के। महासभा के मुखिया को ‘अध्यक्ष’ (President) कहा जाता है।)

 

Q3. खलीलुर रहमान ने चुनाव में किस देश के उम्मीदवार को हराकर 81वें UNGA सत्र की अध्यक्षता जीती है, जिसका कार्यकाल 8 सितंबर 2026 से शुरू होगा?

a) तुर्की (Turkey)
b) मालदीव (Maldives)
c) साइप्रस (Cyprus) ✅
d) नेपाल (Nepal)

 

National Schemes Current Affairs

Mission Senehjori Assam Muga Silk USP Scheme 5 Jun 2026 Current Affairs

पूर्वोत्तर भारत (North East Region) का विकास हमेशा से हमारी सरकार के विजन का अहम हिस्सा रहा है।

जब भी हम सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो क्लस्टर-आधारित विकास (Cluster-based Development), आत्मनिर्भर भारत पहल, और भौगोलिक संकेतक (GI Tags) जैसी सरकारी योजनाएं सीधे तौर पर पूछी जाती हैं।

पूर्वोत्तर के कल्चर और उसकी अर्थव्यवस्था को पूरी दुनिया में एक पहचान दिलाने के लिए हाल ही में एक बहुत ही शानदार मिशन शुरू किया गया है। इसका मकसद सिर्फ वहां के लोगों की आमदनी बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारत के पारंपरिक कपड़ों (Textile Industry) को दुनिया के बड़े लक्ज़री ब्रांड्स की टक्कर में खड़ा करना है। चलिए इसे विस्तार से समझते हैं।

असम के मुगा सिल्क को वैश्विक पहचान दिलाने हेतु ‘मिशन स्नेहजोरी’ (Mission Senehjori) का शुभारंभ

हाल ही में, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (Ministry of Development of North Eastern Region – MDoNER) के केंद्रीय मंत्री और असम के मुख्यमंत्री ने मिलकर भारत सरकार की पहल के रूप में ‘मिशन स्नेहजोरी – असम मुगा सिल्क USP’ (Mission Senehjori) की शानदार शुरुआत की है।

प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर’ (Atmanirbhar North East) सपने को सच करने के लिए, यह मिशन असम के मशहूर ‘मुगा सिल्क’ (Muga Silk) को ग्लोबल लेवल पर एक लक्ज़री टेक्सटाइल इकोसिस्टम (Luxury Textile Ecosystem) में बदलने की पहल है।

इस मिशन में अगले 3 सालों में लगभग ₹396–411 करोड़ का भारी निवेश किया जाएगा, जिससे मुगा रेशम की पूरी वैल्यू चेन (Value Chain) को मजबूत बनाया जाएगा। इसमें रेशम के कीड़ों को पालने से लेकर बुनाई, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट और डिजिटल ट्रेसबिलिटी (Digital Traceability) तक सब कुछ शामिल है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसका सीधा फायदा मुगा रेशम से जुड़े 2.6 लाख से ज्यादा किसानों और बुनकरों को मिलेगा, जिनकी आमदनी कई गुना बढ़ जाएगी।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • निवेश और बजट: इस 3 साल के मिशन में कुल ₹396–411 करोड़ खर्च होंगे, जिसमें से ₹136–151 करोड़ सीधे MDoNER द्वारा दिए जाएंगे।
  • कहां-कहां होगा काम?: यह मिशन असम के उन खास जिलों पर फोकस करेगा जहाँ मुगा रेशम बनता है जैसे जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची (Sualkuchi)।
  • 2028 तक के बड़े लक्ष्य: योजना के तहत 5 मॉर्डन मुगा रीलिंग यूनिट्स, एक मुगा स्पन मिल (Spun Mill) लगाई जाएगी और किसानों के 30 संगठन (FPOs) बनाए जाएंगे।
  • ब्रांडिंग और GI टैग: ‘स्नेहजोरी’ (Senehjori) नाम को एक बड़े ब्रांड के रूप में प्रमोट किया जाएगा और यह पक्का किया जाएगा कि मार्केट में बिकने वाला 80% मुगा सिल्क GI (Geographical Indication) प्रमाणित हो।
  • ‘संपूर्ण सरकार’ मॉडल: यह प्रोजेक्ट ‘Whole-of-Government’ अप्रोच पर चल रहा है, मतलब MDoNER, कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles), असम सरकार और केंद्रीय रेशम बोर्ड सब मिलकर एक टीम की तरह काम कर रहे हैं।

मुगा सिल्क की खासियत और इसमें छुपा आर्थिक गैप (Value Gap)

क्या आप जानते हैं कि भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जहाँ रेशम की सभी पाँच कमर्शियल वैरायटी (मलबरी, ओक तसर, ट्रॉपिकल तसर, एरी और मुगा) पैदा होती हैं! इनमें से मुगा रेशम सबसे खास है। इसकी कुदरती सुनहरी चमक (Golden Shine) और मजबूती इसे पूरी दुनिया में अलग बनाती है। यह रेशम ‘अंथेरिया असामेंसिस’ (Antheraea assamensis) नाम के एक खास कीड़े से मिलता है, जो सिर्फ और सिर्फ असम में ही पाया जाता है और ‘सोम’ व ‘सुआलु’ (Som and Soalu) पेड़ों के पत्ते खाता है।

विभिन्न प्रकार के रेशम और उनकी खासियतें:

  • मलबरी (Mulberry): यह मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में होता है। यह भारत के कुल सिल्क प्रोडक्शन का लगभग 92% है।
  • मुगा (Muga): यह असम में होता है (दुनिया का 90% उत्पादन)। इसकी कुदरती सुनहरी चमक होती है और यह भारत का पहला GI-टैग पाने वाला रेशम (2007) है।
  • एरी (Eri): यह असम और मेघालय में पाया जाता है। इसे ‘अहिंसा रेशम’ भी कहते हैं क्योंकि यह कैस्टर (Castor) के पत्ते खाता है।
  • तसर (Tasar – Tropical): झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में होने वाला यह तांबे (Copper) जैसे रंग का रेशम होता है।

पूरी दुनिया में जितना भी मुगा सिल्क बनता है, उसका लगभग 90% हिस्सा अकेले असम से आता है। इतना रेयर होने के बाद भी, हमारे बुनकरों को इसकी सही कीमत नहीं मिल पाती थी। आज भी मुगा सिल्क के किसानों और बुनकरों की औसत कमाई सिर्फ ₹18,000–21,000 सालाना है।

मिशन स्नेहजोरी इसी ‘वैल्यू गैप’ (Value Gap) को खत्म करने के लिए लाया गया है। 2028 तक इसके एक्सपोर्ट को 2,000 किलोग्राम हर साल से ऊपर ले जाने का टारगेट है, ताकि विदेशी मार्केट का भारी मुनाफा सीधे हमारे किसानों की जेब में जाए।

क्लस्टर अप्रोच, ट्रेसबिलिटी और सिल्क टूरिज्म (Silk Tourism)

इस मिशन का सबसे शानदार हिस्सा है ‘डिजिटल ट्रेसबिलिटी’ (Digital Traceability)। लक्ज़री फैशन (Luxury Fashion Industry) की दुनिया में ओरिजिनल चीजों की बहुत कद्र होती है। ब्लॉकचेन या बारकोड के जरिए अब दुनिया भर के ग्राहकों को पता चल जाएगा कि यह सिल्क असम के किस बुनकर ने बनाया है। इससे न सिर्फ नकली (Counterfeit) सिल्क का बाजार खत्म होगा, बल्कि ग्राहकों का भरोसा भी जीतेगा।

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा एरिया में ‘सोम’ और ‘सुआलु’ (Som and Soalu) पेड़ों को फिर से लगाया जाएगा। इसके अलावा, असम को सिल्क टूरिज्म का हब बनाने के लिए ‘मुगा सिल्क ट्रेल’ (Muga Silk Trail), एक ‘सिल्क टूरिज्म पार्क’ और हर साल ‘मुगा उत्सव’ मनाने की भी तैयारी है।

Static GK Connect

  • नोडल मंत्रालय: पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles), और असम सरकार का रेशम उत्पादन विभाग (Sericulture Department)।
  • केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB): यह ‘केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948’ (Central Silk Board Act, 1948) के तहत बनी एक वैधानिक (Statutory) बॉडी है। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु (कर्नाटक) में है।
  • GI टैग का कानून: यह ‘वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत दिया जाता है, जो WTO के नियमों से जुड़ा है। मुगा सिल्क को साल 2007 में ही GI टैग मिल गया था।
  • असम का राज्य प्रतीक: मुगा सिल्क और एक सींग वाला गैंडा (One-horned Rhino) असम की संस्कृति और पहचान के सबसे बड़े प्रतीक माने जाते हैं।

Current Affairs MCQs

Q1. ‘मिशन स्नेहजोरी’ (Mission Senehjori) के संबंध में नीचे दिए गए कथनों पर विचार करें:
1. यह मुख्य रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और असम सरकार की एक संयुक्त पहल है, जो ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण पर आधारित है।
2. इस मिशन के तहत 2028 तक 5 आधुनिक मुगा रीलिंग इकाइयाँ स्थापित करने और मुगा रेशम का निर्यात 2,000 किलोग्राम प्रति वर्ष से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
3. इस योजना के तहत केवल उन बुनकरों को सहायता मिलेगी जो एरी (Eri) और तसर (Tasar) रेशम का उत्पादन करते हैं।
इनमें से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

a) केवल 1
b) केवल 1 और 2 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

 

Q2. ‘मुगा सिल्क’ (Muga Silk) के इकोसिस्टम और खासियतों के बारे में इनमें से कौन-सा कथन गलत (असत्य) है?

a) मुगा रेशम का कीड़ा ‘अंथेरिया असामेंसिस’ मुख्य रूप से ‘सोम’ और ‘सुआलु’ पौधों की पत्तियों को खाता है।
b) विश्व के कुल मुगा सिल्क उत्पादन का 90% से अधिक हिस्सा भारत (मुख्यतः असम) से आता है।
c) वर्ष 2007 में इसे GI टैग प्राप्त हुआ था, लेकिन यह भारत का पहला GI-टैग वाला रेशम नहीं है। ✅
d) भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जो रेशम की सभी पाँच प्रमुख व्यावसायिक किस्मों का उत्पादन करता है。

(व्याख्या: कथन ‘c’ गलत है क्योंकि मुगा सिल्क ही भारत का सबसे पहला रेशम है जिसे GI-टैग का सम्मान मिला था।)

 

Q3. ‘केंद्रीय रेशम बोर्ड’ (Central Silk Board – CSB), जो मिशन स्नेहजोरी को लागू करने में अहम भूमिका निभा रहा है, किस मंत्रालय के प्रशासनिक कंट्रोल में काम करता है?

a) कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय
b) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME)
c) वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
d) कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) ✅

 

Environment & Awards Current Affairs

Food Planet Prize 2026 APCNF Natural Farming Environmental Conservation

पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) और एग्रीकल्चर में सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) जैसे टॉपिक आज के समय में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

आप पुराने पेपर्स उठाकर देखिए, UPSC और SSC जैसी परीक्षाओं में पर्यावरण से जुड़े इंटरनेशनल अवॉर्ड्स, क्लाइमेट-फ्रेंडली (Climate-resilient) खेती और कार्बन एमिशन कम करने वाले प्रोजेक्ट्स पर जमकर सवाल पूछे जाते हैं।

हाल ही में भारत के एक छोटे से जमीनी स्तर के खेती मॉडल ने कमाल कर दिया है! इस मॉडल ने दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया है। यह जीत न सिर्फ हमारे देसी ज्ञान को सही साबित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अगर हम अपनी पुरानी तकनीक और नई कम्युनिटी मैनेजमेंट को मिला दें, तो पूरी दुनिया के खाद्य संकट (Global Food Crisis) को हल किया जा सकता है।

भारत के APCNF मॉडल ने जीता 1.5 मिलियन डॉलर का ‘फूड प्लैनेट प्राइज 2026’

स्वीडन के बोस्टाड (Båstad) में हुए एक बेहद शानदार इवेंट में भारत की ‘आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक खेती’ (Andhra Pradesh Community Managed Natural Farming – APCNF) को बहुत ही प्रतिष्ठित ‘फूड प्लैनेट प्राइज 2026’ (Food Planet Prize 2026) से नवाजा गया है।

आपको बता दें कि यह पुरस्कार दुनिया भर के फूड सिस्टम (Global Food Systems) को सस्टेनेबल बनाने के लिए दिया जाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार है।

इस ऐतिहासिक जीत पर APCNF को 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 14 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम इनाम मिला है। सोचिए, इस मॉडल ने छह महाद्वीपों के 1,000 से ज्यादा ग्लोबल नॉमिनेशंस को पछाड़कर यह पहला मुकाम हासिल किया है।

2016 में ‘रयथू साधिकार संस्था’ (Rythu Sadhikara Samstha) द्वारा शुरू किया गया यह आंदोलन आज 1.8 मिलियन किसान परिवारों (8,000 से ज्यादा गांवों में) और 3.4 लाख महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राकृतिक खेती से जोड़ चुका है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • पुरस्कार की अहमियत: ‘फूड प्लैनेट प्राइज’ दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण अवॉर्ड है, जिसे 2019 में स्वीडन के ‘कर्ट बर्गफोर्स फाउंडेशन’ (Curt Bergfors Foundation) ने शुरू किया था।
  • कड़ी टक्कर: APCNF ने चार ग्लोबल फाइनलिस्ट्स को हराकर यह अवॉर्ड जीता। बाकी तीन फाइनलिस्ट्स कॉन्शियस किचन (US), नोपाम इंग्रीडिएंट्स (Netherlands), और सवाना इंस्टीट्यूट (US) को भी सांत्वना के तौर पर इनाम मिले।
  • महिलाओं का कमाल: APCNF के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन टी. विजय कुमार ने इस जीत का पूरा क्रेडिट महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को दिया है। उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि “जादू महिलाओं में है” (The magic is in the women)।
  • पर्यावरण को फायदे: यह मॉडल खेती में केमिकल का इस्तेमाल बिल्कुल जीरो कर देता है, पानी की बचत 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ाता है, और ग्रीनहाउस गैस (GHG) को 23 से 60 प्रतिशत तक कम कर देता है।
  • 2047 का विजन: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसे “भारत के लिए एक बड़ी जीत” बताया है और कसम खाई है कि 2047 तक पूरे राज्य को ‘100% प्राकृतिक खेती वाला राज्य’ (100% Natural Farming State) बना दिया जाएगा।

APCNF: एग्रोइकोलॉजी का दुनिया का सबसे बड़ा बदलाव

आंध्र प्रदेश का यह नेचुरल फार्मिंग मॉडल (APCNF) सिर्फ खेती का तरीका नहीं है, यह एक बहुत बड़ा सामाजिक आंदोलन बन चुका है। ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) की वजह से आज जो मिट्टी की ताकत कम हो गई है और भूजल सूख रहा है, उन समस्याओं के लिए यह मॉडल एक संजीवनी बूटी है।

इस तरीके में महंगे और जहरीले कीटनाशकों (Synthetic Fertilizers) की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती। हमारे किसान गाय के गोबर, मूत्र, गुड़ और मिट्टी से बने ‘घन जीवामृत’ (Ghana Jeevamrutham) और ‘द्रव जीवामृत’ जैसी पारंपरिक, प्रकृति-सकारात्मक (Nature-Positive) तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।

पर्यावरणीय एवं आर्थिक प्रभाव (Impact Metrics) और परिणाम:

  • जल संरक्षण (Water Usage): पानी की खपत में 50% से 60% की कमी आती है, जो सूखे वाले (Drought-prone) इलाकों में भी खेती को मजबूत (Resilient) बनाता है।
  • कार्बन फुटप्रिंट (GHG Emissions): गैस उत्सर्जन में 23% से 60% तक की कटौती होती है। यह भारत के ‘नेट ज़ीरो’ (Net Zero 2070) जलवायु लक्ष्यों (Panchamrit) को पाने में बहुत मददगार है।
  • रासायनिक इनपुट (Chemical Inputs): यह प्रक्रिया 100% केमिकल-मुक्त (Zero Chemicals) है, जो मिट्टी के जरूरी सूक्ष्मजीवों (Microbiomes) को बचाता है और खाने के जहर (Food Toxicity) को कम करता है।
  • आर्थिक लाभ (Economic Gain): खेती की लागत में भारी गिरावट से किसानों को कर्ज के जाल (Debt Trap) से निकाला जा सकता है और उनका सीधा मुनाफा (Net Profit) बढ़ता है।

यह तरीका किसानों का खर्चा तो बचाता ही है, साथ ही हमारी बायोडायवर्सिटी (Biodiversity) को भी वापस जिंदा करता है। यह सरकार की ‘PM-PRANAM’ योजना के बिलकुल कदम से कदम मिलाकर चलता है। इस बड़ी कामयाबी को देखते हुए, अब इस मॉडल को भारत के 22 और राज्यों के साथ-साथ श्रीलंका और जाम्बिया जैसे देशों (Global South) में भी अपनाया जा रहा है।

‘फूड प्लैनेट प्राइज’ का ग्लोबल सिस्टम और नीतियों का तालमेल

‘फूड प्लैनेट प्राइज’ का मकसद सिर्फ पुरानी सफलताओं को अवॉर्ड देना नहीं है, बल्कि यह ऐसे नए और पावरफुल प्रोजेक्ट्स को फंडिंग (Fund) देता है, जो पूरी दुनिया की फूड वैल्यू चेन (Food Value Chain) को बदल सकें।

इस अवॉर्ड की जूरी (Jury) बहुत खास होती है इसमें 50-50 का रेश्यो होता है, यानी आधे बड़े-बड़े साइंटिस्ट (Academic Researchers) होते हैं और आधे वो लोग जो जमीन पर उतरकर काम करते हैं (Field Practitioners)। इससे थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों को बराबर महत्व मिलता है।

APCNF की जीत यह साबित करती है कि जब सरकारी नीति (Government Policy), वैज्ञानिक ज्ञान (Scientific Knowledge), और गांव की संस्थाएं (खासकर महिला SHGs) एक साथ मिलकर किसी लक्ष्य पर काम करती हैं, तो नतीजे कितने शानदार हो सकते हैं!

Static GK Connect

  • नोडल संस्था (भारत): रयथू साधिकार संस्था (Rythu Sadhikara Samstha – RySS), जो आंध्र प्रदेश कृषि विभाग के तहत काम करने वाली एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी (Section 8 Company) है।
  • प्राकृतिक खेती और संविधान (DPSP): हमारे संविधान के ‘राज्य के नीति निदेशक तत्व’ (DPSP) में अनुच्छेद 48 (Article 48) कहता है कि राज्य को खेती और पशुपालन को मॉडर्न और साइंटिफिक तरीके से ऑर्गनाइज करना चाहिए और पर्यावरण को बचाना चाहिए।
  • जीरो बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF): भारत में प्राकृतिक खेती की शुरुआत करने का श्रेय सुभाष पालेकर (Subhash Palekar) जी को जाता है, जिन्होंने ‘जीवामृत’ के कॉन्सेप्ट को फेमस किया।
  • ग्लोबल टारगेट्स: सतत विकास लक्ष्य 2 (SDG 2 – Zero Hunger) और SDG 12 (Responsible Consumption and Production) सीधे तौर पर इस प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं।

Current Affairs MCQs

Q1. ग्लोबल ‘फूड प्लैनेट प्राइज 2026’ (Food Planet Prize 2026) जीतने वाले ‘आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक खेती’ (APCNF) प्रोजेक्ट के बारे में इन कथनों पर विचार करें:
1. यह पुरस्कार वैश्विक खाद्य प्रणालियों को स्थायी रूप से बदलने पर केंद्रित है और इसकी पुरस्कार राशि 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर है।
2. APCNF मॉडल जल के उपयोग को 50 से 60 प्रतिशत तक कम करता है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 23 से 60 प्रतिशत की कटौती करता है।
3. इस पुरस्कार की स्थापना संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा 2019 में की गई थी।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

a) केवल 1 और 3
b) केवल 1 और 2 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

(व्याख्या: तीसरा कथन गलत है क्योंकि इस पुरस्कार को स्वीडन के ‘कर्ट बर्गफोर्स फाउंडेशन’ (Curt Bergfors Foundation) ने शुरू किया था, न कि UNEP ने।)

 

Q2. ‘फूड प्लैनेट प्राइज 2026’ की जूरी (Jury Architecture) और उसके काम करने के तरीके के बारे बारे में कौन सा कथन सबसे सही है?

a) यह केवल उन परियोजनाओं को सम्मानित करता है जो पूरी तरह से प्रयोगशाला-आधारित वैज्ञानिक शोध (Lab-based Research) पर केंद्रित हों।
b) इसकी जूरी में 50-50 का अनुपात होता है, जिसमें अकादमिक वैज्ञानिक शोधकर्ता और ज़मीनी स्तर के फील्ड प्रैक्टिशनर्स दोनों शामिल होते हैं, जो सिद्धांत और निष्पादन को समान महत्व देते हैं। ✅
c) यह पुरस्कार विशेष रूप से उन देशों को दिया जाता है जो ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) के तहत रासायनिक उर्वरकों के उत्पादन में शीर्ष पर हैं।
d) विजेता का चयन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाता है。

 

Q3. APCNF की इस जबरदस्त कामयाबी के बाद, आंध्र प्रदेश सरकार ने किस साल तक पूरे राज्य को ‘100% प्राकृतिक खेती वाला राज्य’ (100% Natural Farming State) बनाने का टारगेट रखा है?

a) 2030 (सतत विकास लक्ष्यों की समय सीमा)
b) 2035
c) 2047 (भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष) ✅
d) 2050 (ग्लोबल नेट ज़ीरो टारगेट)

 

Economy & Technology Current Affairs

UPI in Cambodia Launch 2026 NPCI ACLEDA Bank Current Affairs

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Public Infrastructure – DPI) की बात हो, तो भारत आज पूरी दुनिया का लीडर (Global Leader) बन चुका है।

हमारा अपना ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) जिस रफ्तार से दुनिया भर में फैल रहा है, वह हमारी अर्थव्यवस्था, फाइनेंसियल इंक्लूजन (Financial Inclusion) और विदेश नीति (कूटनीति) के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

दोस्तों, बैंकिंग (IBPS, SBI, RBI Grade B) हो या UPSC, डिजिटल पेमेंट (Digital Payments) और फिनटेक (FinTech) से जुड़े सवाल एग्जाम्स की टॉप प्रायोरिटी होते हैं। जब विदेशी धरती पर भारत की पेमेंट सिस्टम को अपनाया जाता है, तो यह सीधा-सीधा भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) की ताकत को दिखाता है。

डिजिटल कूटनीति: कंबोडिया में भारतीय UPI भुगतान सेवा की ऐतिहासिक शुरुआत

हाल ही में, भारत ने अपने डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ाते हुए दक्षिण पूर्व एशिया के देश कंबोडिया (Cambodia) में ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) से होने वाले क्रॉस-बॉर्डर (Cross-border) मर्चेंट पेमेंट (Merchant Payment) सेवा को शानदार तरीके से लॉन्च कर दिया है। कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह (Phnom Penh) में हुए एक बड़े इवेंट में इस ऐतिहासिक कनेक्शन का ऐलान किया गया।

यह कमाल की सुविधा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की इंटरनेशनल ब्रांच ‘NIPL’ (NPCI International Payments Limited) और कंबोडिया के बड़े बैंक ‘ACLEDA Bank Plc.’ की पार्टनरशिप से मुमकिन हो पाई है।

इसके पहले फेज (Phase 1) में, कंबोडिया घूमने गए भारतीय टूरिस्ट्स या बिज़नेसमैन को अब कैश या महंगे इंटरनेशनल कार्ड्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे कंबोडिया के 4.5 मिलियन (45 लाख) से ज्यादा दुकानों पर अपने मोबाइल ऐप से ही पेमेंट कर सकेंगे। उन्हें बस कंबोडिया का नेशनल QR कोड (National QR Code System) जिसे ‘KHQR’ कहते हैं, उसे स्कैन करना होगा!

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • पहला चरण (Phase 1): भारतीय यूजर्स कंबोडिया के KHQR कोड्स को स्कैन करके तुरंत (Real-time) में P2M (Person-to-Merchant) यानी दुकानदारों को पेमेंट कर सकते हैं।
  • अगला चरण (Phase 2): आने वाले समय में इसे टू-वे (Two-way interoperable corridor) बना दिया जाएगा, मतलब कंबोडिया के लोग भी जब भारत आएंगे, तो वो अपने ऐप से हमारे लाखों UPI मर्चेंट्स को पेमेंट कर सकेंगे।
  • किसका सपोर्ट है?: यह पूरा प्रोजेक्ट भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और नेशनल बैंक ऑफ कंबोडिया (NBC) की सीधी निगरानी और गाइडेंस में तैयार किया गया है।
  • G20 के विजन से जुड़ाव: यह पहल इंटरनेशनल पेमेंट्स को सस्ता, तेज, और आसान बनाने के G20 लक्ष्यों और रोडमैप के बिलकुल साथ चलती है।
  • पार्टनर बैंक की ताकत: कंबोडिया का ACLEDA Bank 6.2 मिलियन से ज्यादा ग्राहकों और लगभग 11.85 बिलियन डॉलर की संपत्ति वाला एक बहुत बड़ा बैंक है, जो इस सिस्टम को भरपूर लिक्विडिटी (Liquidity) देगा।

क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स कैसे काम करता है और इसका फायदा

NPCI इंटरनेशनल (NIPL) का मेन काम ही भारत के डिजिटल पेमेंट इनोवेशन को दुनिया के बाकी देशों तक ले जाना है। कंबोडिया के साथ यह पार्टनरशिप सिर्फ टूरिज्म के लिए ही नहीं, बल्कि बिज़नेस और जियो-इकोनॉमिक (Geo-economic) लेवल पर भी बहुत मायने रखती है।

अब तक होता यह था कि कंबोडिया जाने वाले भारतीयों को डॉलर (USD) या वहां की करेंसी ‘रील’ (Riel) बदलवाने के लिए भारी एक्सचेंज फीस (Currency Exchange Fees) देनी पड़ती थी। पुराने SWIFT या वीज़ा/मास्टरकार्ड (Visa/Mastercard) से इंटरनेशनल पेमेंट बहुत धीमा और महंगा होता है। लेकिन अब UPI-KHQR लिंकेज से यह फ्रिक्शन (Transaction Friction) लगभग जीरो हो जाएगा और पेमेंट एकदम सेफ और ट्रांसपेरेंट होगा।

भारतीय UPI का वैश्विक विस्तार और प्रमुख लिंकेज:

  • दक्षिण पूर्व एशिया (ASEAN): कंबोडिया (Cambodia) में KHQR प्रणाली (ACLEDA Bank के साथ) का इस्तेमाल शुरू हुआ है।
  • आसियान (ASEAN): सिंगापुर (Singapore) में PayNow – UPI लिंकेज (सफल P2P मॉडल) पहले से लागू है।
  • मिडिल ईस्ट (Middle East): संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में NIPL और Mashreq Bank (NeoPay QR) की साझेदारी चल रही है।
  • यूरोप (Europe): फ्रांस (France) में एफिल टॉवर (Eiffel Tower) पर UPI से टिकट बुकिंग (Lyra Network के जरिये) की जा सकती है।

आजकल यही ‘डिजिटल कूटनीति’ (Digital Diplomacy) भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे बड़ा हथियार बन गई है। यह RBI के ‘पेमेंट सिस्टम विज़न’ (Payment Systems Vision) और “Make in India, Made for the World” वाले सपने को सच कर रहा है।

भू-राजनीति (Geopolitics) और भारत की ‘सॉफ्ट पावर’

अगर आप ध्यान दें, तो आसियान (ASEAN) रीजन में डिजिटल दबदबे की एक साइलेंट लड़ाई चल रही है। चीन बहुत समय से अपने ‘WeChat Pay’ और ‘Alipay’ के जरिए वहां अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे माहौल में, कंबोडिया जैसे देश में भारत के अपने (Indigenous) UPI का एक्सेप्ट होना, चीन के वित्तीय प्रभाव को काउंटर (Counter) करने का काम करता है।

इससे दो देशों के बैंकिंग सिस्टम्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) बढ़ती है, डॉलर (De-dollarization) पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होती है और लोकल करेंसी में व्यापार मजबूत होता है। भारत अपने DPI (आधार, UPI, डिजीलॉकर) को एक ‘ग्लोबल पब्लिक गुड’ (Global Public Good) के तौर पर दुनिया के सामने रख रहा है, जो डिजिटल साम्राज्यवाद (Digital Imperialism) का एक बेहतरीन और लोकतांत्रिक विकल्प है।

Static GK Connect

  • NPCI (National Payments Corporation of India): भारत में सभी तरह के रिटेल पेमेंट्स (Retail Payment Systems) को चलाने वाली यह एक ‘अम्ब्रेला बॉडी’ (Umbrella Organisation) है। इसे 2008 में RBI और IBA (Indian Banks’ Association) ने मिलकर बनाया था।
  • कानूनी आधार: NPCI ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007’ (Payment and Settlement Systems Act, 2007) के सख्त नियमों के तहत काम करता है।
  • कंबोडिया (Cambodia): यह दक्षिण पूर्व एशिया (South East Asia) का एक अहम देश है। इसकी राजधानी ‘नोम पेन्ह’ (Phnom Penh) है और करेंसी ‘कंबोडियन रील’ (Riel) है। दुनिया का सबसे मशहूर ‘अंकोरवाट’ (Angkor Wat) मंदिर यहीं है!
  • NIPL: यह NPCI की इंटरनेशनल ब्रांच (International Arm) है, जिसे 2020 में बनाया गया था, ताकि रूपे (RuPay) और UPI को ग्लोबल लेवल पर फैलाया जा सके।

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में कंबोडिया में भारतीय UPI सेवा के सफल और ऐतिहासिक शुभारंभ के संदर्भ में, भारत के NIPL (NPCI International Payments Limited) ने क्रॉस-बॉर्डर इंटरऑपरेबिलिटी स्थापित करने के लिए किस कंबोडियन वित्तीय संस्थान के साथ पार्टनरशिप की है?

a) नेशनल बैंक ऑफ कंबोडिया (National Bank of Cambodia)
b) ACLEDA Bank Plc. ✅
c) कैनडिया बैंक (Canadia Bank)
d) कंबोडियन पब्लिक बैंक (Cambodian Public Bank)

 

Q2. भारत और कंबोडिया के बीच हुए डिजिटल पेमेंट लिंकेज के संबंध में नीचे दिए गए कथनों पर विचार करें:
1. इस सुविधा के पहले चरण (Phase 1) में, भारतीय उपयोगकर्ता कंबोडिया के राष्ट्रीय QR कोड सिस्टम ‘KHQR’ को स्कैन करके बड़ी आसानी से पेमेंट कर सकेंगे।
2. इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ाना और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स को सस्ता व पारदर्शी बनाने के G20 रोडमैप को फॉलो करना है।
3. यह प्रणाली अभी केवल ‘Person-to-Person’ (P2P) लेनदेन को सपोर्ट करती है और मर्चेंट पेमेंट्स (P2M) की परमिशन नहीं देती।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

a) केवल 1
b) केवल 1 और 2 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

(व्याख्या: तीसरा कथन गलत है क्योंकि यह पहल खास तौर पर ‘Person-to-Merchant’ (P2M) लेनदेन के लिए ही डिजाइन की गई है, जिससे हमारे टूरिस्ट्स सीधे दुकानदारों को पेमेंट कर सकें।)

 

Q3. ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (UPI) का मैनेजमेंट देखने वाले ‘NPCI’ का वैधानिक आधार इनमें से कौन सा कानून (अधिनियम) प्रदान करता है, जिसके तहत भारत में खुदरा भुगतान प्रणालियों को चलाया जाता है?

a) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000)
b) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (RBI Act, 1934)
c) बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (Banking Regulation Act, 1949)
d) भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) ✅

 

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