🏛️ राष्ट्रीय एवं सुशासन – National & Governance

📌 ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव: अब MGNREGA की जगह लेगा ‘VB–G RAM G’ मिशन
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में आज एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। भारत सरकार ने पिछले दो दशकों से चल रहे ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम‘ (MGNREGA) को पूरी तरह से बदलने का ऐतिहासिक फैसला किया है।
इसकी जगह अब ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB–G RAM G अधिनियम, 2025 लागू किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने इसके कार्यान्वयन की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है।
यह नया और उन्नत कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, सरकार का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण भारत को केवल ‘मजदूरी’ तक सीमित न रखकर, उन्हें ‘विकसित भारत @2047’ के बड़े विजन से जोड़ना है। यह मिशन न केवल रोजगार देगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी पक्की संपत्तियां (Assets) तैयार करेगा जो लंबे समय तक काम आ सकें।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- 125 दिनों के काम की गारंटी: अब तक मनरेगा में साल में 100 दिन का काम मिलता था, लेकिन इस नए कानून के तहत अब हर पात्र परिवार को साल में कम से कम 125 दिन का काम मिलना तय हुआ है। यानी अब सीधे 25% अधिक काम की गारंटी मिलेगी।
- भारी-भरकम बजट: सरकार ने इस मिशन की गंभीरता को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹95,692.31 करोड़ का विशाल बजट रखा है। ग्रामीण विकास के किसी भी प्रोग्राम के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है।
- पैसों का भुगतान अब और भी तेज: काम पूरा होने के बाद मजदूरों को अपने पैसों का लंबा इंतजार नहीं करना होगा। Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में आएगा और सरकार ने इसके लिए अधिकतम 15 दिनों की समयसीमा तय की है।
- काम नहीं मिला तो मुआवजा: अगर आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार को ‘बेरोजगारी भत्ता’ देना अनिवार्य होगा। पहले महीने यह मजदूरी का एक-चौथाई होगा और उसके बाद बढ़कर आधा हो जाएगा।
✴️ रोजगार के साथ-साथ गांव का विकास भी
VB–G RAM G का असली मकसद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जड़ से मजबूत करना है। पुराने सिस्टम में अक्सर यह शिकायत रहती थी कि काम तो हुआ लेकिन उससे गांव को कोई पक्का फायदा नहीं मिला। लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं होगा।
इस नए मिशन के तहत चार खास क्षेत्रों पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाएगा: पानी की सुरक्षा (चेक डैम और नहरें), गांव का पक्का इन्फ्रास्ट्रक्चर (सड़कें), किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं (कोल्ड स्टोरेज) और आपदा से निपटने की तैयारी।
मतलब यह कि अब गांव का मजदूर केवल गड्ढे नहीं खोदेगा, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण में एक सक्रिय भागीदार की तरह काम करेगा। इससे किसानों की आय भी तेजी से बढ़ेगी क्योंकि उन्हें अपनी फसल सुरक्षित रखने के लिए बेहतर स्टोरेज और बाजार की सुविधाएं गांव में ही मिल सकेंगी। अधिक जानकारी के लिए आप हमारी डेली करंट अफेयर्स (Daily Current Affairs) सीरीज़ से जुड़े रहें।
✴️ भ्रष्टाचार पर लगाम और नई तकनीक का इस्तेमाल
प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने इसमें ‘Viksit Bharat National Rural Infrastructure Stack’ नाम का एक अत्याधुनिक डिजिटल ढांचा तैयार किया है। अब गांव में जो भी काम होगा, उसकी जियो-टैगिंग (Geo-tagging) अनिवार्य होगी, ताकि सटीक पता चल सके कि काम जमीन पर हुआ है या सिर्फ कागजों में।
साथ ही, अब सभी पंजीकृत मजदूरों के लिए e-KYC आधारित नए ‘ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड’ जारी किए जाएंगे।
एक और बड़ी राहत की बात यह है कि खेती के सीजन (बुवाई और कटाई) के दौरान लेबर की कमी न हो, इसके लिए राज्य सरकारों को 60 दिनों तक इस काम को रोकने की विशेष छूट दी गई है, ताकि खेती-किसानी पर कोई बुरा असर न पड़े।
📚 Static GK Connect
- नोडल मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development)।
- इतिहास की बात: MGNREGA को 2005 में पास किया गया था और यह 2 फरवरी 2006 से पूरे देश में लागू हुआ था।
- संविधान का लिंक: हमारे भारतीय संविधान का अनुच्छेद 41 (काम का अधिकार) और अनुच्छेद 43 (मजदूरी का अधिकार) ऐसी कल्याणकारी योजनाओं का मुख्य आधार हैं।
- समिति: इस बड़े बदलाव के पीछे ‘अमरजीत सिन्हा समिति’ की सिफारिशों का सबसे बड़ा हाथ है।
| मुख्य अंतर | MGNREGA (2005) | VB–G RAM G (2025) |
|---|---|---|
| काम की गारंटी | 100 दिन | 125 दिन |
| मुख्य फोकस | गरीबी दूर करना | पक्की संपत्ति और विकसित भारत |
| बजट (BE) | कम | ₹95,692 करोड़ (ऐतिहासिक) |
| डिजिटल सिस्टम | बेसिक | बहुत उन्नत (Infrastructure Stack) |
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के बारे में इनमें से कौन सा कथन सही है?
1. यह 1 जुलाई 2026 से लागू होगा और मनरेगा की जगह लेगा। ✅
2. इसके तहत साल में 150 दिन के काम की गारंटी दी गई है。
3. खेती के व्यस्त समय में इसे 60 दिनों के लिए रोका जा सकता है। ✅
सही विकल्प चुनें:
a) केवल 1
b) केवल 1 और 2
c) केवल 1 और 3 ✅
d) उपरोक्त सभी
🤔 Q2. इस नए कानून के तहत मजदूरों को कितने दिनों के भीतर पेमेंट करना अनिवार्य है?
a) 7 दिन
b) 15 दिन ✅
c) 21 दिन
d) 30 दिन
🤔 Q3. ‘बेरोजगारी भत्ता’ देने की मुख्य जिम्मेदारी किसकी होगी?
a) केंद्र सरकार की
b) संबंधित राज्य सरकार की ✅
c) ग्राम पंचायत की
d) जिला कलेक्टर की
💰 अर्थव्यवस्था – Economy

📌 सोना-चांदी खरीदना हुआ महंगा: सरकार ने बढ़ाया Import Duty, जानिए क्या है असली वजह?
क्या आप निकट भविष्य में सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं? तो आपको थोड़ा ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है। हाल ही में भारत सरकार ने सोने और चांदी के आयात (Import) पर लगने वाले टैक्स को लगभग दोगुना कर दिया है।
वित्त मंत्रालय की नई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, सोने पर प्रभावी कुल आयात कर अब 9.2% से बढ़कर सीधे 18.4% हो गया है। अब आप सोच रहे होंगे कि सरकार ने अचानक ऐसा क्यों किया?
इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है—देश की मजबूत अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना। दरअसल, पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव की वजह से हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर काफी दबाव बढ़ रहा है।
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% सोना बाहर से खरीदता है, जिससे बहुत सारा विदेशी पैसा बाहर चला जाता है। इसी ‘चालू खाता घाटे’ (Current Account Deficit – CAD) को कंट्रोल करने के लिए ही सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- BCD में भारी उछाल: बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (Basic Customs Duty) को 5% से बढ़ाकर सीधा 10% कर दिया गया है।
- खेती के विकास के लिए उपकर: एग्रिकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया है।
- कुल टैक्स का गणित: 10% BCD, 5% AIDC और अन्य टैक्स मिलाकर अब आपको सोने पर कुल 18.4% कर देना होगा।
- बाजार की चिंता: ज्वेलरी इंडस्ट्री का कहना है कि टैक्स बढ़ने से बाजार में सोने की तस्करी (Smuggling) बढ़ सकती है और भारतीय गहने विदेशों में महंगे हो जाएंगे।
✴️ विदेशी मुद्रा बचाना क्यों जरूरी है?
आजकल दुनिया के हालात थोड़े नाजुक बने हुए हैं, खासकर पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति की वजह से तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। भारत को अपनी जरूरत का तेल बाहर से खरीदना पड़ता है जिसके लिए बहुत सारी विदेशी मुद्रा चाहिए।
सोना कोई अनिवार्य वस्तु नहीं है, बल्कि एक विलासिता (Luxury) है। इसलिए सरकार चाहती है कि लोग भौतिक सोना खरीदने के बजाय कागजी सोने यानी ‘डिजिटल गोल्ड’ में निवेश करें। इससे देश का पैसा देश में ही रहेगा और अर्थव्यवस्था पूरी तरह स्थिर बनी रहेगी।
✴️ विकल्प क्या है? सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)
सरकार चाहती है कि लोग घरों में सोना जमा करने के बजाय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) या गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की तरफ अपना रुख बढ़ाएं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय घरों में करीब 25,000 टन सोना बेकार पड़ा है।
अगर यह सोना बैंकों के जरिए हमारे वित्तीय सिस्टम में आ जाए, तो हमें विदेशों से सोना मंगाने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इससे न केवल आपको बेहतर सुरक्षा मिलेगी, बल्कि देश की करेंसी भी मजबूत होगी। ऐसी ही आर्थिक खबरों के लिए हमारी अर्थव्यवस्था (Economy) कैटेगरी को फॉलो करें।
📚 Static GK Connect
- AIDC क्या है?: इसे 2021-22 के केंद्रीय बजट में शुरू किया गया था ताकि खेती के ढांचे को बेहतर सुधारा जा सके।
- GJEPC: यह भारत में रत्नों और आभूषणों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली मुख्य संस्था है (इसकी स्थापना 1966 में हुई थी)।
- CAD (चालू खाता घाटा): जब देश के निर्यात की तुलना में आयात बहुत ज्यादा हो जाता है, तो उसे अर्थशास्त्र में CAD कहते हैं।
- SGB: इसमें आपको फिजिकल गोल्ड नहीं मिलता, बल्कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ओर से एक सर्टिफिकेट मिलता है जिसकी कीमत सोने के भाव से जुड़ी होती है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. सोने पर हाल ही में बढ़ाए गए टैक्स में ‘AIDC’ का मतलब क्या है?
a) Agricultural Import Duty Cess
b) Agriculture Infrastructure and Development Cess ✅
c) All India Duty Cess
d) Automated Infrastructure Cess
🤔 Q2. सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी क्यों बढ़ाई है?
a) एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए
b) चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने के लिए ✅
c) सोने की खदानें खोजने के लिए
d) अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए
🤔 Q3. अब सोने पर कुल प्रभावी आयात शुल्क कितना हो गया है?
a) 12%
b) 15%
c) 18.4% ✅
d) 20%
⚔️ रक्षा एवं सामरिक मामले – Defence & Strategic

📌 ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ: भारत की नई सैन्य ताकत का जश्न
आज का दिन भारत की रक्षा तैयारियों और सैन्य इतिहास के लिए बहुत गर्व का दिन है। पिछले साल मई के महीने में भारतीय सेना ने एक बहुत ही साहसिक और सफल मिशन को अंजाम दिया था, जिसका नाम था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor)।
आज उसकी पहली वर्षगांठ के खास मौके पर नई दिल्ली में ‘कलाम और कवच 3.0’ नाम की एक बड़ी उच्च-स्तरीय मीटिंग हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान साफ कहा कि यह ऑपरेशन ‘नए भारत’ की उस ताकत का सबूत है, जो आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की सख्त नीति पर चलता है।
इस बार की चर्चा का मुख्य विषय (Theme) ‘Taking JAI Forward With I²’ रखा गया है। यहाँ JAI का मतलब है—Jointness (तीनों सेनाओं का बेहतरीन तालमेल), Atmanirbharta (आत्मनिर्भरता) और Innovation (नवाचार)।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- क्या था ऑपरेशन सिंदूर?: 7 मई 2025 को शुरू हुआ यह मिशन सिर्फ 88 घंटों तक चला था। इसमें भारतीय सेना ने बिना सीमा पार किए दुश्मन के आतंकी ठिकानों को पूरी सटीकता के साथ तबाह कर दिया था।
- रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड तोड़ बढ़त: भारत अब केवल हथियार खरीदता नहीं है, बल्कि दुनिया को बेचता भी है। पिछले 10 सालों में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट ₹686 करोड़ से बढ़कर रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ पहुंच गया है।
- स्वदेशी उत्पादन: भारत ने इस साल ₹1.54 लाख करोड़ के आधुनिक रक्षा उपकरण खुद बनाए हैं। हमारा अगला लक्ष्य इसे ₹3 लाख करोड़ तक ले जाना है।
- भविष्य के हथियार: अब भविष्य के युद्ध केवल बंदूकों से नहीं, बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), हाइपरसोनिक मिसाइल और अत्याधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी से लड़े जाएंगे।
✴️ ‘कलाम’ और ‘कवच’ का अनोखा संगम
माननीय रक्षा मंत्री ने समझाया कि ‘कलाम’ का मतलब है ज्ञान और विज्ञान, जबकि ‘कवच’ का सीधा मतलब है सुरक्षा। जब विज्ञान और सुरक्षा एक साथ हाथ मिलाते हैं, तभी देश पूरी तरह सुरक्षित रहता है। ‘I²’ (इंडिजेनाइजेशन और इंटरनेशनल कोलैबोरेशन) के जरिए भारत अब दुनिया की बड़ी डिफेंस कंपनियों के साथ मिलकर भारत में ही हथियार बना रहा है।
इससे न केवल हमें सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि हमारे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिलेगा। iDEX जैसी शानदार योजनाओं की मदद से आज देश के स्टार्टअप्स भी हमारी सेना के लिए नए-नए गैजेट्स बना रहे हैं।
✴️ मिशन सुदर्शन चक्र और राफेल की ताकत
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बड़ी सफलता के बाद भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को और पुख्ता किया है। हाल ही में 114 नए राफेल विमानों की डील को हरी झंडी मिली है। इसके अलावा, भारत अपना खुद का ‘एयर डिफेंस शील्ड’ बना रहा है जिसका नाम है ‘मिशन सुदर्शन चक्र’。
यह इजरायल के मशहूर आयरन डोम जैसा होगा, जो आसमान में ही दुश्मन की मिसाइल को सटीक मार गिराएगा। साथ ही, हमारी तीसरी परमाणु पनडुब्बी ‘INS अरिदमन’ भी अब पूरी तरह से तैयार है।
📚 Static GK Connect
- नोडल बॉडी: रक्षा मंत्रालय और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)।
- INS अरिदमन: यह भारत की तीसरी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो नौसेना की ताकत बढ़ाएगी।
- CDS का पद: तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बिठाने के लिए 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद बनाया गया था। पहले CDS जनरल बिपिन रावत थे।
- निर्यात लक्ष्य: भारत सरकार 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ के हथियार निर्यात करने का बड़ा लक्ष्य लेकर चल रही है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. ‘कलाम और कवच 3.0’ रक्षा संवाद की थीम क्या रखी गई है?
a) सशक्त भारत 2026
b) Taking JAI Forward With I² ✅
c) आत्मनिर्भर सेना
d) मिशन सुरक्षा
🤔 Q2. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
a) समुद्र में खोज अभियान
b) आतंकवाद के खिलाफ सैन्य जवाबी कार्रवाई ✅
c) अंतरिक्ष मिशन
d) टीकाकरण अभियान
🤔 Q3. भारत ने 2029-30 तक कितना रक्षा उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है?
a) ₹1 लाख करोड़
b) ₹2 लाख करोड़
c) ₹3 लाख करोड़ ✅
d) ₹5 लाख करोड़
🏗️ अर्थव्यवस्था एवं ऊर्जा – Economy & Energy

📌 कोयले से बनेगा ईंधन: सरकार ने मंजूर किया ₹37,500 करोड़ का मेगा प्लान
ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में ‘कोयला गैसीकरण’ (Coal Gasification) के लिए ₹37,500 करोड़ के भारी-भरकम पैकेज को मंजूरी दी गई है।
यह महत्वपूर्ण कदम ‘राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन’ का एक बड़ा हिस्सा है। अब आप सोच रहे होंगे कि यह गैसीकरण क्या बला है? आसान भाषा में कहें तो कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे एक विशेष गैस (Syngas) में बदल दिया जाता है।
इस गैस का इस्तेमाल खाद (Urea), केमिकल और क्लीन फ्यूल बनाने में आसानी से किया जा सकता है। इससे हमें विदेशों से महंगी गैस और खाद बिल्कुल नहीं मंगानी पड़ेगी।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- सिनगैस (Syngas) की ताकत: गैसीकरण से निकलने वाली गैस को सिनगैस कहते हैं, जो हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का बेहतरीन मिश्रण होती है। यह नेचुरल गैस का एक शानदार विकल्प है।
- पैसों की बड़ी बचत: भारत अभी अपनी जरूरत का बहुत सारा यूरिया और मेथनॉल विदेशों से भारी कीमत पर खरीदता है। इस नई स्कीम से हम हर साल करीब ₹2.77 ट्रिलियन का विदेशी पैसा बचा सकते हैं।
- नया निवेश और नौकरियां: इस महत्वाकांक्षी योजना से देश में ₹3 लाख करोड़ के निवेश आने की उम्मीद है और 25 नए बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे, जिससे हजारों युवाओं को नया काम मिलेगा।
- प्रोत्साहन राशि: सरकार इस दिशा में हर एक बड़े प्रोजेक्ट को ₹5,000 करोड़ तक की आर्थिक मदद (Incentive) भी देगी।
✴️ कोयले का सही इस्तेमाल: प्रदूषण कम, फायदा ज्यादा
भारत के पास कोयले का इतना विशाल भंडार है कि वह अगले 200 सालों तक खत्म नहीं होगा। लेकिन पारंपरिक तरीके से कोयला जलाने से प्रदूषण बहुत होता है। गैसीकरण तकनीक इसका एक साफ-सुथरा और वैज्ञानिक समाधान है।
इसमें कोयले को सीधे हवा में जलाने के बजाय उसे बहुत हाई टेंपरेचर पर गैस में बदला जाता है, जिससे हानिकारक कचरा और धुआं बहुत कम निकलता है। इस गैस से हम ‘ब्लू हाइड्रोजन’ भी बना सकते हैं, जो भविष्य का सबसे साफ ईंधन माना जा रहा है।
✴️ ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी संकट
पश्चिम एशिया में जब भी कोई तनाव या युद्ध होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस (LNG) की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। इससे भारत के घरेलू बजट पर बहुत बुरा असर पड़ता है। अगर हम अपने ही कोयले से गैस बनाने लगेंगे, तो दुनिया में चाहे कोई भी संकट आए, हमारी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) बनी रहेगी।
यह मास्टर प्लान खासकर उन राज्यों के लिए संजीवनी है जहां कोयला प्रचुर मात्रा में मिलता है, जैसे झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़।
📚 Static GK Connect
- सिनगैस का फॉर्मूला: CO + H₂ (कार्बन मोनोऑक्साइड + हाइड्रोजन का मिश्रण)।
- नोडल मंत्रालय: कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal)।
- पहला बड़ा प्लांट: ओडिशा के तलचर में भारत का पहला सबसे बड़ा कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया प्लांट लगाया जा रहा है।
- क्लीन कोल: इसे दुनिया भर में ‘क्लीन कोल टेक्नोलॉजी’ भी कहा जाता है क्योंकि यह पारंपरिक बिजली घरों के मुकाबले बेहद कम प्रदूषण फैलाती है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. कोयला गैसीकरण योजना के लिए सरकार ने कितने करोड़ का पैकेज दिया है?
a) ₹15,000 करोड़
b) ₹37,500 करोड़ ✅
c) ₹45,000 करोड़
d) ₹60,000 करोड़
🤔 Q2. सिनगैस (Syngas) में मुख्य रूप से कौन सी गैसें होती हैं?
a) ऑक्सीजन और नाइट्रोजन
b) हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड ✅
c) हीलियम और नियोन
d) मीथेन और इथेन
🤔 Q3. भारत ने किस साल तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण का लक्ष्य रखा है?
a) 2026
b) 2030 ✅
c) 2035
d) 2047
🔬 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – Science & Tech

📌 मौसम की सटीक जानकारी अब आपके गांव तक: IMD का नया ‘मिथुन’ मॉडल
अक्सर हमारे किसान भाई शिकायत करते हैं कि मौसम का अनुमान शहर के लिए तो ठीक होता है, लेकिन उनके गांव में वास्तविक स्थिति अलग होती है। इसी बड़ी समस्या को दूर करने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में एक खास पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
इसके लिए ‘मिथुन’ (Mithuna) नाम का एक एकदम नया वेदर मॉडल लॉन्च किया गया है। यह मॉडल इतना सटीक है कि यह 1 किलोमीटर के बेहद छोटे से दायरे में अगले 10 दिनों की बारिश का सही हाल बता सकता है।
पहले यह जानकारी 12.5 किलोमीटर के बड़े स्तर पर दी जाती थी। अब ब्लॉक और गांव के स्तर पर भी पता चल सकेगा कि बारिश होगी या नहीं।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- डाउनस्केलिंग तकनीक: इसमें बड़े डेटा को मशीन लर्निंग (Machine Learning) के जरिए बहुत छोटे और सटीक डेटा में बदला गया है।
- हाइपर-लोकल अनुमान: अब केवल जिले का हाल नहीं, बल्कि आपके अपने ब्लॉक का हाल पता चलेगा। यह खासकर उन किसानों के लिए बेहद जरूरी है जिनकी खेती पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर है।
- यूपी से शुरुआत: फिलहाल इसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लिए शुरू किया गया है, लेकिन जल्द ही इसे 15 और राज्यों में लागू किया जाएगा।
- AI का जादू: इस मॉडल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का आधुनिक इस्तेमाल हुआ है, जो पिछले 100 सालों के मौसम डेटा का विश्लेषण करके सटीक नतीजा निकालता है।
✴️ किसानों के लिए क्यों है यह जरूरी?
भारत की आधी से ज्यादा खेती आज भी बारिश के ही भरोसे है। कभी अचानक बादल फट जाता है, तो कभी भयंकर सूखा पड़ जाता है। ‘मिथुन’ मॉडल के आने से किसान यह जान सकेंगे कि कल उनके खेत में बारिश होगी या नहीं।
इससे वे आसानी से तय कर पाएंगे कि आज खेत में खाद डालनी है या नहीं, या पकी हुई फसल की कटाई कब करनी है। इससे उनकी मेहनत और पैसा दोनों बचेंगे। यह न केवल खेती के लिए बल्कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भी एक बहुत बड़ा हथियार साबित होगा।
✴️ कैसे काम करता है यह सिस्टम?
इस उन्नत मौसम मॉडल को पुणे स्थित ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरोलॉजी’ (IITM) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। उत्तर प्रदेश में जगह-जगह ‘ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन’ (AWS) लगाए गए हैं, जो हर पल की खबर सीधे मुख्य सेंटर तक पहुंचाते हैं।
यह पूरी तरह ‘भारत पूर्वानुमान प्रणाली’ का अभिन्न हिस्सा है, जो भारत को मौसम विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का लीडर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम है।
📚 Static GK Connect
- IMD: इसकी स्थापना ब्रिटिश काल में 1875 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन आता है।
- IITM: यह पुणे में स्थित है और पूरे एशिया में उन्नत मौसम मॉडल बनाने के लिए जाना जाता है।
- AWS: यह एक ऐसी स्मार्ट मशीन है जो बिना किसी इंसान की मदद के खुद-ब-खुद बारिश, हवा की गति और तापमान को रिकॉर्ड करती है।
- मिशन मौसम: यह भारत सरकार का एक बहुत बड़ा मिशन है जिसके तहत पूरे देश में मौसम की भविष्यवाणी को डिजिटल और आधुनिक बनाया जा रहा है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में चर्चा में रहा ‘Mithuna’ मॉडल किससे जुड़ा है?
a) शेयर बाजार से
b) मानसून की भविष्यवाणी से ✅
c) मोबाइल नेटवर्क से
d) पशुपालन से
🤔 Q2. IMD के इस नए मॉडल की खासियत क्या है?
a) यह 100 किमी का डेटा देता है
b) यह 1 किमी के स्तर पर सटीक जानकारी देता है ✅
c) यह केवल शहरों के लिए है
d) यह केवल बाढ़ रोकता है
🤔 Q3. ‘Mithuna’ मॉडल को किस संस्थान ने तैयार किया है?
a) ISRO
b) IITM, पुणे ✅
c) CSIR
d) DRDO
आज का विशेष दिन (Important Day)

📅 15 मई: अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस (International Day of Families)
- थीम 2026: “Demographic Trends and Families: Navigating a Changing World” (बदलती दुनिया और परिवार)
- महत्व: परिवार समाज की सबसे छोटी और सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य पूरी दुनिया में परिवारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इसकी शुरुआत 1994 में की थी।
उम्मीद है कि आज का यह विस्तृत विश्लेषण आपकी आगामी परीक्षा की तैयारी में काफी मददगार साबित होगा। आप अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए हमारे डेली करंट अफेयर्स सेक्शन पर नियमित रूप से विजिट करते रहें। पढ़ते रहिए और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहिए!