National Current Affairs

📌 ‘राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क नीति’ (National Data Governance Framework Policy) का नया प्रारूप जारी
दोस्तों, आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के डिजिटल एडमिनिस्ट्रेशन (Digital Administration) से जुड़े एक बहुत ही बड़े और ऐतिहासिक बदलाव के बारे में।
हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने देश के डिजिटल गवर्नेंस इकोसिस्टम को पूरी तरह से बदलने और मजबूत करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
इसके तहत, केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क नीति’ (National Data Governance Framework Policy – NDGFP) के नए और पहले से अधिक एडवांस दिशानिर्देश (Guidelines) आधिकारिक रूप से जारी किए हैं।
अब मुख्य सवाल यह उठता है कि आखिर इस नई नीति की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? दरअसल, इसका प्राथमिक मकसद भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) की गति को और अधिक तेज करना है।
साथ ही, यह उन्नत नीति सरकारी सेवाओं (Government Services) को आम लोगों के लिए और भी ज्यादा असरदार व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लाई गई है।
इस नई पॉलिसी के जरिए गैर-व्यक्तिगत डेटा (Non-Personal Data) को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टार्टअप्स और युवा रिसर्चर्स तक आसानी से पहुँचाया जाएगा।
डिजिटल इंडिया (Digital India) विज़न के तहत उठाया गया यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रिसर्च के क्षेत्र में एक वास्तविक गेम-चेंजर साबित होगा।
अगर आप आगामी UPSC या राज्य PCS की तैयारी कर रहे हैं, तो यह राष्ट्रीय मुद्दा आपके लिए परीक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- डेटा साझाकरण तंत्र: इस नई नीति के तहत अलग-अलग सरकारी विभागों से गैर-व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रूप से शेयर करने के लिए एक ‘इंडिया डेटा ऑफिस’ (India Data Office – IDO) बनाया जाएगा।
- स्टार्टअप्स को बढ़ावा: नए इनोवेटर्स और शोधकर्ताओं को बढ़ावा देने के लिए उन्हें बिना किसी पहचान के पूरी तरह सुरक्षित डेटासेट (Anonymized Datasets) दिए जाएंगे ताकि वे नए-नए प्रयोग कर सकें।
- डेटा सुरक्षा मानक: लोगों की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखते हुए एडवांस एन्क्रिप्शन और सख्त सुरक्षा नियमों का पालन करना हर विभाग के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
✴️ इंडिया डेटासेट प्लेटफॉर्म (India Datasets Platform – IDP) का विकास
▪️ क्या आप जानते हैं कि इस नीति के तहत केंद्र सरकार एक खास राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है? इसका आधिकारिक नाम है ‘इंडिया डेटासेट प्लेटफॉर्म’ (India Datasets Platform)।
यह प्लेटफॉर्म सिर्फ सरकारी मंत्रालयों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें अलग-अलग सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के गैर-संवेदनशील डेटा को भी एक जगह एकीकृत किया जाएगा।
इसका असली और सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए बेहतरीन क्वालिटी का डेटा आसानी से मिल सकेगा।
इससे हमारे देश में तकनीकी नवाचार (Innovation) को एक नई रफ्तार मिलेगी और डेटा-संचालित शासन (Data-driven Governance) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा।
✴️ गोपनीयता और सुरक्षा का कड़ा ढांचा (Privacy and Security Framework)
▪️ अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ सकता है कि क्या इस नीति से हमारी प्राइवेसी को कोई खतरा है? तो इसका सीधा जवाब है—बिल्कुल नहीं।
इस एडवांस पॉलिसी के तहत नागरिकों की व्यक्तिगत प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जो भी डेटा साझा किया जाएगा, उसे पहले पूरी तरह से अनॉनिमाइज (Anonymize) किया जाएगा।
यानी उस डेटा में से नाम और निजी जानकारियां पूरी तरह हटा दी जाएंगी जिससे किसी की भी व्यक्तिगत पहचान उजागर न हो सके। यह सुरक्षित सिस्टम ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम’ के कड़े नियमों के हिसाब से काम करेगा।
डेटा नियमों को तोड़ने वालों पर कड़े कानूनी और भारी वित्तीय जुर्माने का भी सख्त प्रावधान किया गया है ताकि लोगों का सरकार पर भरोसा कायम रहे।
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- नोडल मंत्रालय/संस्था: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology – MeitY)।
- संवैधानिक/सांविधिक जुड़ाव: यह नीति ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023’ (DPDP Act 2023) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act 2000) के कानूनी सिद्धांतों पर आधारित है। इसके साथ ही, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 ‘गोपनीयता के अधिकार’ (Right to Privacy) को हमारे मौलिक अधिकार के रूप में सुरक्षा देता है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में चर्चा में रही ‘राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क नीति’ (NDGFP) किस मंत्रालय द्वारा जारी की गई है?
a) गृह मंत्रालय
b) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ✅
c) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
d) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
🤔 Q2. राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क नीति के तहत गैर-व्यक्तिगत डेटा के प्रबंधन के लिए किस निकाय की स्थापना का प्रस्ताव है?
a) नेशनल डेटा बैंक
b) डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी
c) इंडिया डेटा ऑफिस (IDO) ✅
d) डिजिटल गवर्नेंस Council
🤔 Q3. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘गोपनीयता के अधिकार’ (Right to Privacy) को मौलिक अधिकार के रूप में गारंटी देता है?
a) अनुच्छेद 14
b) अनुच्छेद 19
c) अनुच्छेद 21 ✅
d) अनुच्छेद 32
Economy Current Affairs

📌 आरबीआई द्वारा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के ऑफलाइन और प्रोग्रामेबल फीचर्स का राष्ट्रव्यापी विस्तार
चलिए अब इकोनॉमी की तरफ चलते हैं और बात करते हैं हमारी भारतीय करेंसी के डिजिटल अवतार की, जिसने बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ी हलचल मचा दी है।
हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपया (e-Rupee) को लेकर एक बहुत ही बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है।
आरबीआई ने अपनी इस डिजिटल करेंसी के ऑफलाइन और प्रोग्रामेबल फीचर्स (Programmable Features) को अब पूरे देश में व्यापक स्तर पर लागू करने का एक बेहद सराहनीय फैसला लिया है।
अब आप सोच रहे होंगे कि इस आधुनिक फीचर की भला क्या जरूरत थी? सीधे और सरल शब्दों में कहें तो, इसका सबसे बड़ा फायदा हमारे ग्रामीण इलाकों को मिलेगा।
खासकर उन दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में यह तकनीक एक वरदान साबित होगी जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी बहुत खराब है या इंटरनेट की सुविधा बिल्कुल है ही नहीं।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की महत्वपूर्ण परीक्षाओं (जैसे SBI, IBPS, RBI Grade B) की तैयारी करने वाले सभी स्टूडेंट्स के लिए यह फाइनेंशियल इंक्लूजन (Financial Inclusion) का एक बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- ऑफलाइन लेनदेन क्षमता: अब बिना इंटरनेट के भी साधारण फीचर फोन और विशेष कार्ड्स की मदद से डिजिटल रुपये का सुरक्षित लेन-देन बड़े आराम से किया जा सकेगा।
- प्रोग्रामेबल मनी: इसका सीधा मतलब है कि सरकारी एजेंसियां या कंपनियां जिस विशेष काम के लिए पैसा भेजेंगी, वह सिर्फ उसी काम पर खर्च हो सकेगा, जिससे पैसों की धोखाधड़ी पूरी तरह रुक जाएगी।
- वित्तीय समावेशन को बढ़ावा: देश के उन गांवों और जनजातीय इलाकों को डिजिटल बैंकिंग से जोड़ा जा सकेगा जो अब तक इंटरनेट न होने की वजह से बैंकिंग मुख्यधारा से पीछे छूटे हुए थे।
✴️ प्रोग्रामेबिलिटी फीचर की महत्ता और कार्यप्रणाली (Programmability Feature)
▪️ डिजिटल रुपये में नया जुड़ा यह ‘प्रोग्रामेबिलिटी’ का शानदार विकल्प हमारे देश में सरकारी योजनाओं और सब्सिडी (Subsidies) के वितरण के पुराने तरीके को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।
इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं—मान लीजिए सरकार ने किसी किसान को खाद (Fertilizer) खरीदने के लिए ई-रुपया भेजा है।
तो उस सुरक्षित डिजिटल टोकन का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अधिकृत रजिस्टर्ड खाद की दुकान पर ही किया जा सकेगा, किसी और जगह नहीं।
यानी किसान उसे किसी दूसरी चीज को खरीदने में खर्च नहीं कर पाएगा। यह पारदर्शी सिस्टम सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार और ‘लीकेज’ को रोकने में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा।
✴️ ऑफलाइन मोड की तकनीकी व्यवहार्यता (Offline Mode Technology)
▪️ इंटरनेट के बिना पैसे का लेन-देन आखिर कैसे मुमकिन होगा? यह एडवांस तकनीक विशेष रूप से हमारे देश के पहाड़ी, दुर्गम और सुदूर सीमावर्ती इलाकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इसके लिए ‘नियर फील्ड कम्युनिकेशन’ (Near Field Communication – NFC) और ब्लूटूथ तकनीक पर आधारित सुरक्षित हार्डवेयर वॉलेट का बेहतरीन इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके सटीक इस्तेमाल के जरिए ग्राहक और दुकानदार बिना किसी नेटवर्क के भी आपस में पूरी तरह सुरक्षित तरीके से डिजिटल टोकन का लेन-देन कर सकेंगे।
बाद में जब भी वह डिवाइस दोबारा इंटरनेट नेटवर्क के संपर्क में आएगा, तो सारा खाता और डेटा अपने आप सुरक्षित तरीके से सिंक और अपडेट हो जाएगा।
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- मुख्यालय और स्थापना: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का मुख्यालय मुंबई में स्थित है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हिल्टन यंग कमीशन (Hilton Young Commission) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
- वैधानिक प्रावधान: आरबीआई अधिनियम, 1934 (RBI Act, 1934) की धारा 22 के तहत रिज़र्व बैंक के पास भारत में करेंसी नोट जारी करने का एकमात्र कानूनी अधिकार सुरक्षित है। केंद्रीय बजट 2022-23 में भारत का पहला डिजिटल रुपया लाने के लिए इस एक्ट में जरूरी बदलाव किए गए थे।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में आरबीआई द्वारा विस्तारित ‘डिजिटल रुपया’ (e₹) किस प्रकार की मुद्रा का एक उदाहरण है?
a) क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency)
b) सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) ✅
c) फिएट पेपर करेंसी (Fiat Paper Currency)
d) कमोडिटी मनी (Commodity Money)
🤔 Q2. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना किस आयोग की सिफारिशों के आधार पर की गई थी?
a) हिल्टन यंग कमीशन ✅
b) गोइपोरिया समिति
c) नरसिम्हन समिति
d) चक्रवर्ती आयोग
🤔 Q3. आरबीआई अधिनियम, 1934 की कौन सी धारा रिज़र्व बैंक को मुद्रा नोट जारी करने का विशेष अधिकार प्रदान करती है?
a) धारा 18
b) धारा 20
c) धारा 22 ✅
d) धारा 24
Science & Technology Current Affairs

📌 इसरो (ISRO) द्वारा अगली पीढ़ी के नौवहन उपग्रह NVS-02 का सफल प्रक्षेपण
साइंस और टेक्नोलॉजी की मेहनत से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए इसरो (ISRO) की तरफ से एक और शानदार और देशवासियों को गर्व करने वाली खबर आई है!
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने सबसे ताकतवर और भारी रॉकेट LVM3 के जरिए एक नया इतिहास रच दिया है।
इसरो ने अगली पीढ़ी के इस बेहद उन्नत नौवहन उपग्रह NVS-02 (Next-Generation Navigation Satellite) को अंतरिक्ष में उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है।
यह हमारे लिए सिर्फ एक सामान्य सैटेलाइट लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि भारत के अपने स्वदेशी जीपीएस यानी ‘नाविक’ (NavIC) सिस्टम को और भी ज्यादा सटीक और मजबूत बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
जैसा कि हमने पिछले डेली करंट अफेयर्स में भी देखा था, इसरो लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आगामी SSC, रेलवे और UPSC सिविल सेवा परीक्षा के साइंस एंड टेक (Science & Tech) सेक्शन के लिए यह महत्वपूर्ण टॉपिक बहुत ज्यादा मायने रखता है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- नाविक (NavIC) का विस्तार: इस ऐतिहासिक और सफल मिशन के पूरा होने से भारत और उसके आस-पास के समुद्री इलाकों में हमारी खुद की नेविगेशन प्रणाली की सटीकता काफी ज्यादा बढ़ जाएगी।
- स्वदेशी परमाणु घड़ी: नेविगेशन के लिए विदेशी निर्भरता को पूरी तरह से खत्म करते हुए इस शक्तिशाली सैटेलाइट में स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद द्वारा बनाई गई स्वदेशी परमाणु घड़ी का पहली बार सफल इस्तेमाल हुआ है।
- L-5 और S बैंड सिग्नल्स: आम नागरिकों के कमर्शियल इस्तेमाल के साथ-साथ हमारी सेना और रणनीतिक विभागों के लिए अब और भी ज्यादा सुरक्षित और बिना रुकावट वाले नेविगेशन सिग्नल्स मिल सकेंगे।
✴️ नाविक (NavIC) प्रणाली की विशेषताएं और उपयोग
▪️ ‘नाविक’ (NavIC – Navigation with Indian Constellation) असल में भारत का अपना क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन सिस्टम (Regional Satellite Navigation System) है, जो पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ है।
इसे विशेष रूप से भारत की मुख्य भूमि और हमारी सीमाओं के चारों तरफ लगभग 1500 किलोमीटर तक के विस्तृत दायरे में बिल्कुल सटीक लोकेशन की लाइव जानकारी देने के लिए वैज्ञानिक रूप से बनाया गया है।
यह उन्नत प्रणाली आम लोगों के लिए सामान्य नेविगेशन सेवाएं और हमारी भारतीय सेना के लिए खास ‘रेस्ट्रिक्टेड’ सुरक्षित सेवाएं प्रदान करती है, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था काफी पुख्ता होती है।
NVS-02 उपग्रह के शामिल होने से अब बड़े स्तर पर आपदा प्रबंधन, कमर्शियल गाड़ियों की लाइव ट्रैकिंग, समुद्री जहाजों के रास्तों की रियल-टाइम निगरानी और हमारे-आपके मोबाइल फोन में भी इसका कमर्शियल इस्तेमाल काफी बढ़ जाएगा।
✴️ रूबिडियम परमाणु घड़ी (Rubidium Atomic Clock) का महत्व
▪️ अब आपके मन में यह जिज्ञासा आ सकती है कि अंतरिक्ष के सैटेलाइट में ‘घड़ी’ का क्या काम होता है? असल में, स्पेस में नेविगेशन प्रणालियों के लिए सबसे सटीक समय की गणना करना सबसे जरूरी काम होता है।
अगर समय की गणना में एक सेकंड के छोटे से हिस्से (नैनोसेकंड) की भी तकनीकी चूक हो जाए, तो धरती पर लोकेशन का अंदाजा कई किलोमीटर तक गलत साबित हो सकता है।
भारत की अपनी खुद की बनाई रूबिडियम परमाणु घड़ी (Rubidium Atomic Clock) का NVS-02 में पूरी तरह से सफल होना यह साबित करता है कि हम अंतरिक्ष तकनीक के सबसे जटिल उपकरणों में भी आत्मनिर्भर हो चुके हैं।
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- नोडल विभाग व मुख्यालय: इसरो (ISRO) का मुख्यालय अंतरिक्ष शहर बेंगलुरु (कर्नाटक) में स्थित है। यह सीधे भारत सरकार के ‘अंतरिक्ष विभाग’ (Department of Space – DoS) के तहत काम करता है, जिसकी कमान सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के हाथ में सुरक्षित होती है।
- ऐतिहासिक तथ्य व स्थापना: इसरो की आधिकारिक स्थापना 15 अगस्त 1969 को डॉ. विक्रम साराभाई (Dr. Vikram Sarabhai) के अथक प्रयासों से हुई थी, जिन्हें हम पूरे सम्मान के साथ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी कहते हैं। भारत का पहला ऐतिहासिक सैटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ साल 1975 में अंतरिक्ष में भेजा गया था।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में इसरो द्वारा प्रक्षेपित NVS-02 उपग्रह किस स्वदेशी प्रणाली का हिस्सा है?
a) गगन (GAGAN)
b) नाविक (NavIC) ✅
c) इनसैट (INSAT)
d) आईआरएस (IRS)
🤔 Q2. भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक (Father of the Indian Space Programme) के रूप में किसे जाना जाता है?
a) डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
b) डॉ. सतीश धवन
c) डॉ. विक्रम साराभाई ✅
d) डॉ. के. सिवन
🤔 Q3. ‘नाविक’ (NavIC) प्रणाली भारत की मुख्य भूमि के अलावा लगभग कितने किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करती है?
a) 500 किमी
b) 1000 किमी
c) 1500 किमी ✅
d) 2500 किमी
Environment Current Affairs

📌 संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण संधि के ऐतिहासिक मसौदे को सहमति
पर्यावरण यानी एनवायरनमेंट से जुड़े गंभीर मुद्दों पर आजकल पूरी दुनिया में बहुत गहन चर्चाएं हो रही हैं, जो हमारी आने वाली भावी पीढ़ी के भविष्य के लिए बेहद अहम है।
इसी बीच संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अंतरराष्ट्रीय मंच से एक बेहद ऐतिहासिक और हमारी दुनिया को कचरे से बचाने वाली बहुत बड़ी खबर सामने आई है।
हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक के दौरान दुनिया के 150 से ज्यादा सदस्य देशों ने मिलकर ‘वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण संधि’ (Global Plastics Treaty) के अंतिम कानूनी मसौदे पर अपनी सर्वसम्मति दे दी है।
यह कोई छोटा-मोटा जलवायु समझौता नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया से प्लास्टिक कचरे के विशाल संकट को हमेशा के लिए जड़ से खत्म करने का अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रयास है।
इस संधि का सबसे बड़ा और प्राथमिक लक्ष्य यह रखा गया है कि साल 2040 तक हमारी हरी-भरी धरती को प्लास्टिक प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए।
UPSC, State PCS और SSC परीक्षाओं के एनवायरनमेंट और इकोलॉजी (Environment & Ecology) सेक्शन के लिए यह एक बहुत ही अनिवार्य और हाई-स्कोरिंग टॉपिक बन गया है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- कानूनी रूप से बाध्यकारी: यह वैश्विक संधि सिर्फ एक सामान्य सलाह नहीं है, बल्कि इस पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देशों के लिए प्लास्टिक कचरे को कम करना और रीसाइक्लिंग के नए नियमों को मानना कानूनी रूप से अनिवार्य (Legally Binding) होगा।
- सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध: हमारे नाजुक पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाने वाले सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (Single-use Plastics) के प्रोडक्शन को पूरी दुनिया में धीरे-धीरे पूरी तरह से प्रतिबंधित और बंद कर दिया जाएगा।
- वित्तीय सहायता कोष: गरीब और विकासशील देशों को इस बदलाव में मदद करने के लिए प्लास्टिक के नए और सुरक्षित विकल्प ढूंढने तथा बड़े रीसाइक्लिंग प्लांट लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष वित्तीय मदद दी जाएगी।
✴️ संधि का वैश्विक प्रभाव और भारत का रुख
▪️ इस अंतरराष्ट्रीय संधि के आधिकारिक रूप से लागू होने के बाद पूरी दुनिया के पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बहुत बड़े और बेहद सकारात्मक ढांचागत बदलाव देखने को मिलेंगे।
अगर हम मुख्य रूप से भारत की बात करें, तो हमारे देश ने पहले ही 1 जुलाई 2022 से कई तरह की हानिकारक सिंगल-यूज़ प्लास्टिक चीजों पर पूरी तरह से कड़ा बैन लगा दिया है।
इसलिए वैश्विक मंच पर भारत का स्पष्ट रुख इस नई वैश्विक संधि के साथ बिल्कुल अच्छी तरह मेल खाता है। हालांकि, भारत ने विकासशील देशों के व्यापारिक और आर्थिक हितों को भी पूरी तरह ध्यान में रखा है।
भारत ने इस मंच पर ‘विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व’ (Extended Producer Responsibility – EPR) के सख्त नियमों को व्यावहारिक रूप से लागू करने और विकसित देशों द्वारा नई सुरक्षित टेक्नोलॉजी साझा करने की बात मजबूती से उठाई है।
✴️ माइक्रोप्लास्टिक का खतरा और समाधान (Microplastics Threat)
▪️ इस नई और ऐतिहासिक वैश्विक प्लास्टिक संधि में पहली बार माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics) के उस अदृश्य खतरे को बेहद गंभीरता से शामिल किया गया है जो पर्यावरण के लिए सबसे अधिक जानलेवा है।
ये प्लास्टिक के बिल्कुल बारीक और सूक्ष्म कण हमारे विशाल समुद्रों, ताजे पानी की नदियों, मछलियों और यहाँ तक कि रोजमर्रा के खाने के जरिए इंसानों के शरीर तक आसानी से पहुँच कर बहुत भारी नुकसान कर रहे हैं।
इस नई संधि के कड़े प्रावधानों के तहत गहरे समुद्रों में प्लास्टिक कचरा फेंकने पर सख्त अंतरराष्ट्रीय नियम बनाने और आधुनिक सैटेलाइट के जरिए इस पर चौबीसों घंटे नजर रखने की ठोस व्यवस्था बनाई जा रही है।
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- मुख्यालय और स्थापना: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना 5 जून 1972 को प्रसिद्ध स्टॉकहोम सम्मेलन (Stockholm Conference) के तुरंत बाद की गई थी। इसका मुख्यालय नैरोबी, केन्या (Nairobi, Kenya) में है। यही कारण है कि हम हर साल 5 जून को पूरे उत्साह के साथ ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (World Environment Day) मनाते हैं।
- राष्ट्रीय पर्यावरण कानून: भारत में पर्यावरण की उचित सुरक्षा के लिए ‘पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986’ (Environment Protection Act, 1986) बनाया गया है। यह सख्त कानून हमारे संविधान के अनुच्छेद 48A (राज्य के नीति निदेशक तत्व) और अनुच्छेद 51A(g) (मौलिक कर्तव्य) में दिए गए पर्यावरण रक्षा के महान संकल्प को पूरा करने में सीधा मदद करता है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
a) जिनेवा, स्विट्जरलैंड
b) नैरोबी, केन्या ✅
c) पेरिस, फ्रांस
d) न्यूयॉर्क, यूएसए
🤔 Q2. वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण संधि का प्राथमिक लक्ष्य किस वर्ष तक प्लास्टिक प्रदूषण को पूरी तरह समाप्त करना है?
a) 2030
b) 2035
c) 2040 ✅
d) 2050
🤔 Q3. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य को पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन का निर्देश देता है?
a) अनुच्छेद 39A
b) अनुच्छेद 43
c) अनुच्छेद 48A ✅
d) अनुच्छेद 50
Defence Current Affairs

📌 डीआरडीओ (DRDO) और भारतीय नौसेना द्वारा VL-SRSAM मिसाइल प्रणाली का सफल परीक्षण
देश की मजबूत सुरक्षा और एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हमारे भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित करते हुए भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है।
हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने एक साथ मिलकर ओडिशा के चांदीपुर तट पर एक बहुत बड़ा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परीक्षण किया है।
इस आधुनिक एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से एक स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत के जरिए वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (VL-SRSAM) का एक बेहद शानदार और सफल उड़ान टेस्ट किया गया।
यह अत्याधुनिक और स्वदेशी मिसाइल सिस्टम हमारी साहसी नौसेना के युद्धपोतों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा दीवार की तरह काम करेगा, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा और भी ज्यादा सुनिश्चित होगी।
चाहे दुश्मन के कितने भी तेज लड़ाकू विमान हों, खतरनाक सर्विलांस ड्रोन्स हों या फिर समुद्र की सतह के बिल्कुल करीब से आने वाली घातक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें, यह अत्याधुनिक सिस्टम उन्हें आसानी से खोज कर नष्ट कर सकता है।
यह तेज-तर्रार मिसाइल पलक झपकते ही आने वाले सभी हवाई खतरों को हवा में ही नष्ट करने की पूरी ताकत रखती है। आपकी आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के डिफेंस और सिक्योरिटी (Defence Section) के लिए यह टॉपिक बहुत काम का है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- वर्टिकल लॉन्च क्षमता: युद्धपोत के डेक से सीधे ऊपर की तरफ वर्टिकल लॉन्च होने की वजह से यह मिसाइल चारों तरफ यानी 360-डिग्री तेजी से घूमकर किसी भी दिशा से आ रहे खतरे को तुरंत खत्म कर सकती है।
- समुद्री परीक्षणों में सफलता: इस कठिन टेस्ट के दौरान मिसाइल ने समुद्र की सतह के बिल्कुल करीब, बहुत कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ रहे एक नकली इलेक्ट्रॉनिक टारगेट को बिल्कुल अचूक निशाने के साथ तबाह कर दिया।
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बल: पूरी तरह से भारत में स्वदेशी रूप से डिजाइन और डेवलप होने के कारण अब हमें भविष्य में इस तरह की जटिल सुरक्षा प्रणालियों के लिए दूसरे देशों पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
✴️ VL-SRSAM मिसाइल की मारक क्षमता और विशेषताएं
▪️ VL-SRSAM एक बेहद आधुनिक और तेज तर्रार मिसाइल हथियार सिस्टम है, जिसकी प्रभावी मारक क्षमता लगभग 40 से 50 किलोमीटर तक सटीक मापी गई है।
यह स्वदेशी मिसाइल ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) के एडवांस और घातक सिद्धांत पर काम करती है, यानी एक बार टारगेट को कंप्यूटर पर लॉक करके छोड़ने के बाद यह अपना रास्ता खुद ढूंढ लेती है।
ऐसा इसलिए मुमकिन हो पाता है क्योंकि इसके अगले हिस्से में एक एडवांस सक्रिय रडार होमिंग सीकर (Active Radar Homing Seeker) लगा हुआ है। इसका मुख्य और सबसे अहम काम हमारे नौसैनिक जहाजों के ऊपर एक मजबूत और अभेद्य सुरक्षा छतरी बनाना है।
✴️ चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) का सामरिक महत्व
▪️ ओडिशा राज्य के बालासोर जिले में स्थित इस चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) को अगर हम भारतीय मिसाइल विकास कार्यक्रम का ‘दिल’ कहें, तो यह बिल्कुल भी गलत नहीं होगा।
यहाँ का अनोखा और शांत समुद्र तट तथा इसकी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति मिसाइलों के सुरक्षित परीक्षण और उनकी रडार द्वारा सटीक ट्रैकिंग के लिए पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन मानी जाती है।
भारत की विश्व प्रसिद्ध मिसाइलें जैसे कि शक्तिशाली पृथ्वी, अग्नि, आकाश और सुपरसोनिक ब्रह्मोस के शुरुआती ऐतिहासिक और सफल टेस्ट भी इसी चांदीपुर के तट से सफलतापूर्वक किए गए थे।
📚 Static GK Connect
- स्थापना और नोडल मंत्रालय: डीआरडीओ (DRDO) की आधिकारिक स्थापना साल 1958 में की गई थी। यह महत्वपूर्ण संगठन हमारे ‘रक्षा मंत्रालय’ (Ministry of Defence) के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अंतर्गत प्रमुखता से काम करता है। इसका मुख्य कार्यालय देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित है।
- ऐतिहासिक मिसाइल कार्यक्रम: भारत को मिसाइल तकनीक के मामले में दुनिया में आत्मनिर्भर बनाने के लिए साल 1983 में हमारे प्रिय और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सफल नेतृत्व में ‘एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम’ (IGMDP) की शुरुआत की गई थी। इसी ऐतिहासिक प्रोग्राम के तहत देश को अपनी पांच बेहतरीन मिसाइलें—पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, नाग और आकाश मिली थीं।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में सुर्खियों में रही VL-SRSAM मिसाइल प्रणाली किस प्रकार की मारक क्षमता रखती है?
a) सतह से सतह (Surface-to-Surface)
b) हवा से हवा (Air-to-Air)
c) सतह से हवा (Surface-to-Air) ✅
d) हवा से सतह (Air-to-Surface)
🤔 Q2. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
a) 1950
b) 1958 ✅
c) 1969
d) 1975
🤔 Q3. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम’ (IGMDP) के तहत कौन सी मिसाइल शामिल नहीं थी?
a) निर्भय (Nirbhay) ✅
b) आकाश (Akash)
c) नाग (Nag)
d) अग्नि (Agni)