8 Jun 2026 Current Affairs in Hindi: UPSC, SSC और बैंकिंग परीक्षाओं के लिए आज की सबसे महत्वपूर्ण खबरें

Economy Current Affairs

RBI MPC Review 2026 Monetary Policy Committee Repo Rate Updates

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने हाल ही में अपनी नई द्विमासिक नीति समीक्षा (Bi-monthly Policy Review) जारी की है। यह समीक्षा देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने और महंगाई को काबू में करने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। अगर आप UPSC या Banking Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो आप जानते ही होंगे कि मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले आपके एग्जाम के लिए हमेशा से हॉट टॉपिक रहे हैं। आज के इस Daily Current Affairs in Hindi अंक में हम इसका विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

RBI MPC Review 2026: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, e-Rupee को लेकर आए नए नियम

पिछले 24 घंटों के भीतर, रिज़र्व बैंक के गवर्नर की अगुवाई वाली 6 सदस्यों की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने इस नए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी ताजा रिपोर्ट सबके सामने रखी है। इस बार की बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) को बिना किसी बदलाव के अपनी पुरानी जगह पर ही रोक कर रखा गया है। इससे साफ पता चलता है कि हमारा केंद्रीय बैंक एक तरफ तो महंगाई (Inflation) को काबू में रखना चाहता है और दूसरी तरफ आर्थिक विकास (Economic Growth) को भी तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है।

यह फैसला बैंकिंग और SSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बहुत काम का है, क्योंकि इस बार डिजिटल रुपया (CBDC) के इस्तेमाल को लेकर कुछ नए और बड़े नियम जोड़े गए हैं। बाजार में कैश पर निर्भरता कम करने और हर व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने यानी Financial Inclusion को बढ़ावा देने के लिए अब e-Rupee का दायरा टियर-3 और टियर-4 शहरों तक बढ़ाया जा रहा है। आने वाले एग्जाम्स में आपसे Monetary Policy के अलग-अलग टूल्स और उनके फायदों के बारे में सीधे सवाल पूछे जा सकते हैं।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • रेपो रेट (Repo Rate) को पुराने स्तर पर ही बरकरार रखा गया है, ताकि बाजार में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव न आए और स्थिरता बनी रहे।
  • वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए देश की वास्तविक GDP वृद्धि (Real GDP Growth) का अनुमान काफी मजबूत और सकारात्मक जताया गया है।
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई दर को 4% के आसपास रोकने के लक्ष्य पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है।
  • आम लोगों के लिए रिटेल डिजिटल करेंसी (e-Rupee Retail) के ऑफलाइन लेन-देन (Offline Transactions) की लिमिट को बढ़ाने का एक शानदार प्रस्ताव भी रखा गया है।

रेपो रेट और महंगाई दर का मैनेजमेंट

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इस बात को पूरी तरह साफ कर दिया है कि दुनिया भर में चल रही आर्थिक उथल-पुथल और तनाव के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) मजबूती से डटी हुई है। रेपो रेट को स्थिर रखने की सबसे बड़ी वजह कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) को काबू में रखना है। RBI चाहता है कि महंगाई दर 2% से 6% के सुरक्षित दायरे (Tolerance Band) के बीच में रहे और आदर्श रूप से 4% पर टिकी रहे। इस काम को पूरा करने के लिए लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे बाजार में पैसों का फ्लो यानी Liquidity एकदम सही बनी रहे।

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का नया विस्तार

देश को डिजिटल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए, RBI ने e-Rupee को गांवों और छोटे कस्बों में पॉपुलर बनाने के लिए एक नया ब्लूप्रिंट तैयार किया है। सबसे अच्छी बात यह है कि अब बिना इंटरनेट के भी छोटे-मोटे डिजिटल लेन-देन को आसान बनाने के लिए नई टेक्नोलॉजी का ट्रायल चल रहा है। यह कोशिश भारत के पेमेंट इकोसिस्टम (Payment Ecosystem) को पूरी दुनिया में सबसे एडवांस बनाने की तरफ एक बड़ा कदम है। यह पूरा विषय UPSC Current Affairs मुख्य परीक्षा के GS Paper 3 (Economy) के लिहाज से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Static GK Connect

  • गठन: RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हिल्टन यंग कमीशन (Hilton Young Commission) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
  • अधिनियम: भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (RBI Act, 1934) के तहत यह काम करता है।
  • मुख्यालय: इसका हेडक्वार्टर मुंबई (महाराष्ट्र) में है, जबकि शुरुआत में यह कोलकाता में था।
  • MPC का गठन: RBI एक्ट की धारा 45ZB के तहत इस मौद्रिक नीति समिति का गठन किया जाता है। इसमें कुल 6 सदस्य होते हैं, जिनमें से 3 सदस्य RBI के होते हैं और बाकी 3 सदस्यों को भारत सरकार नियुक्त करती है।

Current Affairs MCQs

Q1. मौद्रिक नीति समिति (MPC) के बारे में नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसमें कुल 6 सदस्य होते हैं और इन सभी सदस्यों की नियुक्ति सीधे भारत सरकार द्वारा की जाती है。
2. इसका सबसे मुख्य काम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई को एक तय दायरे में बनाए रखना है。
नीचे दिए गए ऑप्शन्स में से कौन-सा कथन सही है?

a) केवल 1
✅ b) केवल 2
c) 1 और 2 दोनों
d) न तो 1, न ही 2

Q2. सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) या e-Rupee के बारे में कौन-सा कथन गलत है?

a) यह फिएट करेंसी (Fiat Currency) का ही एक digital रूप है。
b) इसे असली कैश की तरह ही बराबर वैल्यू पर आसानी से बदला जा सकता है。
✅ c) यह पूरी तरह से एक विकेंद्रीकृत (Decentralized) क्रिप्टोकरेंसी है。
d) इसे सिर्फ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ही जारी और कंट्रोल किया जाता है।

Q3. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अधिनियम, 1934 की किस धारा के तहत मौद्रिक नीति समिति (MPC) को बनाने का नियम है?

a) धारा 22
b) धारा 24
✅ c) धारा 45ZB
d) धारा 42(1)

Indices & Environment Current Affairs

Environmental Performance Index 2026 India Ranking India Green Growth

हाल ही में येल (Yale) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने मिलकर ‘पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक’ (Environmental Performance Index – EPI) की एक नई रिपोर्ट जारी की है। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े ये इंडेक्स प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण साबित होते हैं। आज के इस विशेष भाग में हम 8 Jun 2026 Current Affairs in Hindi के अंतर्गत पर्यावरण से जुड़े वैश्विक मानकों पर भारत की स्थिति की समीक्षा करेंगे।

Environmental Performance Index 2026: भारत की रैंकिंग में सुधार और क्लाइमेट को लेकर उठाए गए कदम

अभी हाल ही में सामने आई पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) की इस रिपोर्ट में दुनिया के 180 देशों के पर्यावरण की सेहत और वहां के इकोसिस्टम का बारीकी से टेस्ट किया गया है। इस नई रिपोर्ट से यह अच्छी खबर आई है कि भारत ने अपने पुराने रिकॉर्ड में सुधार किया है। भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) को अपनाने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन (GHG Emissions) को रोकने के मामले में काफी अच्छे और बड़े कदम उठाए हैं।

यह रिपोर्ट परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि यह सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रोग्रेस को दिखाती है। भारत ने पिछले कुछ समय में क्लाइमेट चेंज को रोकने, हवा की क्वालिटी (Air Quality) सुधारने और बायोडायवर्सिटी को बचाने के लिए ‘मिशन लाइफ’ (Mission LiFE) और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे जो बड़े प्रयास किए हैं, उनका अच्छा असर इस बार की रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहा है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • इस इंडेक्स के तहत कुल 180 देशों को पर्यावरण से जुड़े 50 से भी ज्यादा इंडिकेटर्स (समीक्षा मानकों) के आधार पर मापा और आंका जाता है।
  • भारत ने सोलर एनर्जी (Solar Energy) की क्षमता को तेजी से बढ़ाने के कारण एनर्जी ट्रांजिशन की कैटेगरी में बहुत बढ़िया स्कोर हासिल किया है।
  • हालांकि, हवा की शुद्धता (Air Quality) और कचरा प्रबंधन (Waste Management) अभी भी भारत के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।
  • हर बार की तरह इस बार भी नॉर्डिक देश (Nordic Countries) अपनी बेहतरीन और टिकाऊ पर्यावरण नीतियों के दम पर लिस्ट में सबसे ऊपर हैं।

भारत का स्कोर और कहां सुधार की है जरूरत

इस नई रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि भारत कार्बन उत्सर्जन को कम करने यानी Climate Change Mitigation के लिए बहुत तेजी से काम में जुटा है। भारत ने ‘पंचामृत’ (Panchamrit) लक्ष्यों के तहत साल 2070 तक नेट-जीरो (Net-Zero) का जो टारगेट रखा है, उसकी दुनिया भर में जमकर तारीफ हो रही है। लेकिन, भारी आबादी और लगातार बढ़ते उद्योगों के कारण हवा में पीएम 2.5 (PM 2.5) के लेवल को कम करना और शहरों के प्रदूषण को रोकना अब भी हमारी सरकार के लिए एक बड़ा टास्क है।

ग्लोबल ट्रेंड्स और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG)

पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) मुख्य रूप से इसी बात को ट्रैक करता है कि दुनिया के देश साल 2030 तक पूरे किए जाने वाले सतत विकास लक्ष्यों (SDG 2030) के कितने पास पहुंच पाए हैं। रिपोर्ट से साफ है कि सिर्फ अपनी इकोनॉमी को बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि आज के दौर में ‘ग्रीन ग्रोथ’ (Green Growth) सबसे ज्यादा जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (GBA) जैसी संस्थाएं, जिन्हें भारत ने शुरू किया है, वे आने वाले समय में पूरी दुनिया का पर्यावरण सुधारने में गेम-चेंजर साबित होने वाली हैं।

Static GK Connect

  • रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था: येल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल लॉ एंड पॉलिसी (Yale University) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी, इसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के साथ मिलकर तैयार करते हैं।
  • जुड़ी हुई मुख्य संस्था: यूनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP), जिसका हेडक्वार्टर नैरोबी (केन्या) में स्थित है।
  • संविधान से जुड़ाव: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48A (राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने की कोशिश करेगा) और अनुच्छेद 51A(g) (प्राकृतिक पर्यावरण को बचाना हर नागरिक की फंडामेंटल ड्यूटी है)।
  • पर्यावरण कानून: भारत सरकार ने साल 1986 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (Environment Protection Act, 1986) पास किया था।

Current Affairs MCQs

Q1. पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) के बारे में नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए:
1. यह इंडेक्स हर साल संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा अकेले ही तैयार और जारी किया जाता है。
2. यह अलग-अलग देशों को इस आधार पर परखता है कि वे 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को कितना पूरा कर पाए हैं。
इनमें से कौन-सा या से कथन बिल्कुल सही हैं?

a) केवल 1
✅ b) केवल 2
c) 1 और 2 दोनों
d) न तो 1, न ही 2

Q2. हमारे संविधान का कौन-सा आर्टिकल सीधे तौर पर राज्य सरकार को ‘पर्यावरण के संरक्षण और उसमें सुधार’ करने का आदेश देता है?

a) अनुच्छेद 21
b) अनुच्छेद 44
✅ c) अनुच्छेद 48A
d) अनुच्छेद 51A(g)

Q3. भारत ने अपने ‘पंचामृत’ (Panchamrit) वादे के तहत किस साल तक पूरी तरह से ‘नेट-जीरो’ (Net-Zero) carbon उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की बात कही है?

a) 2030
b) 2050
✅ c) 2070
d) 2100

Science & Technology Current Affairs

ISRO Shukrayaan 1 Venus Mission Space Technology Current Affairs

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने अगले बड़े मिशन ‘शुक्रयान-1’ (Shukrayaan-1) के फाइनल कॉन्फ़िगरेशन (अंतिम रूपरेखा) की जांच-परख पूरी कर ली है। साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Science & Tech) के सेक्शन में ISRO के डीप स्पेस मिशन हमेशा से ही UPSC, SSC और रेलवे के Exams में अच्छे अंक दिलाने वाले पसंदीदा टॉपिक्स रहे हैं।

ISRO का शुक्रयान-1 (Shukrayaan-1) मिशन: अब शुक्र ग्रह फतह करने की तैयारी में भारत

अभी हाल ही में ISRO के हेडक्वार्टर से यह बड़ी जानकारी आई है कि ‘शुक्रयान-1’ (Shukrayaan-1) मिशन के पेलोड्स और लॉन्च व्हीकल को आपस में जोड़ने (Integration) की आखिरी समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। यह भारत का अपनी तरह का पहला इंटरप्लेनेटरी मिशन होने जा रहा है, जिसे खास तौर पर शुक्र ग्रह (Venus) के खतरनाक वायुमंडल और उसकी जमीन की बनावट (Geological Structure) को समझने के लिए तैयार किया गया है।

स्पेस और टेक्नोलॉजी के करंट अफेयर्स के लिहाज से यह खबर बहुत बड़ी है। चंद्रयान की चांद पर लैंडिंग और गगनयान की तैयारियों के बाद अब पूरी दुनिया भारत के इस वीनस मिशन को कौतूहल से देख रही है। परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को इस मिशन के खास टूल्स जैसे कि सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और इसके लक्ष्यों को अच्छे से समझ लेना चाहिए। शुक्र ग्रह पर फैले सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों (Sulfuric Acid Clouds) और वहां सुलगते ज्वालामुखियों का राज खोजना ही इस मिशन का असली मकसद है, जिससे आने वाले एग्जाम्स में सीधे सवाल बन सकते हैं।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • इस शानदार शुक्रयान-1 मिशन को अंतरिक्ष में भेजने के लिए GSLV Mk II या फिर हमारे सबसे ताकतवर रॉकेट LVM3 (Launch Vehicle Mark 3) का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • इसका सबसे खास पेलोड एक हाई-रिज़ॉल्यूशन सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) है, जो शुक्र ग्रह के घने बादलों के पार झांककर उसकी सतह का नक्शा (Mapping) तैयार करेगा।
  • यह स्पेसक्राफ्ट शुक्र ग्रह के आसमान में तैर रहे सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों की केमिकल बनावट की भी जांच करेगा।
  • इस मिशन को और बेहतर बनाने के लिए भारत के साथ स्वीडन और फ्रांस (CNES) जैसे देशों की स्पेस एजेंसियां भी तकनीकी मदद दे रही हैं।

इस मिशन का साइंस कनेक्शन और पेलोड्स

वैसे तो शुक्र ग्रह को आकार के कारण पृथ्वी की ‘जुड़वां बहन’ (Twin Planet) कहा जाता है, लेकिन वहां का माहौल बहुत अलग है। वहां का वायुमंडल इतना घना है कि बेहिसाब ग्रीनहाउस इफेक्ट (Greenhouse Effect) के कारण वह एक भट्टी जैसा उबल रहा है। ‘शुक्रयान-1’ इसी बात का पता लगाएगा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पृथ्वी जैसा दिखने वाला यह ग्रह नरक जैसा गर्म हो गया। इसके पेलोड्स में वीनस के आयनोस्फीयर (Venusian Ionosphere) और खतरनाक सौर हवाओं (Solar Winds) के असर को मापने के लिए बेहद एडवांस सेंसर लगाए गए हैं।

स्पेस डिप्लोमेसी में भारत का बढ़ता कद

यह मिशन सिर्फ विज्ञान के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि ग्लोबल ‘स्पेस इकॉनमी’ (Space Economy) में भारत की धाक जमाने के लिए भी एक बड़ा माध्यम है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के आने वाले दाविंची (DAVINCI) और वेरिटας (VERITAS) मिशनों के मुकाबले भारत का यह मिशन बहुत ही कम बजट में और बेहद असरदार साबित होने वाला है। इस मिशन के जरिए भारत की अंतरिक्ष कूटनीति (Space Diplomacy) एक नए मुकाम पर पहुंच रही है, जो प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं के लिए एक शानदार विषय वस्तु है।

Static GK Connect

  • कंट्रोलिंग मिनिस्ट्री: यह मिशन अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के तहत आता है, जो सीधे देश के प्रधानमंत्री के अंडर काम करता है।
  • ISRO की शुरुआत: इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी और इसके जनक डॉ. विक्रम साराभाई थे।
  • मुख्यालय: इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु (कर्नाटक) में है।
  • दुनिया के अन्य वीनस मिशन: नासा का मैगेलन (Magellan), सोवियत संघ का वेनेरा (Venera) सीरीज और यूरोपियन स्पेस एजेंसी का वीनस एक्सप्रेस (Venus Express)।

Current Affairs MCQs

Q1. ISRO के इस नए ‘शुक्रयान-1’ मिशन को भेजने के पीछे सबसे मुख्य कारण क्या है?

a) शुक्र ग्रह पर इंसानों के रहने के लिए पानी की तलाश करना।
✅ b) शुक्र के वायुमंडल, वहां के तेजाबी बादलों और उसकी सतह की भूवैज्ञानिक संरचना की बारीकी से जांच करना।
c) शुक्र ग्रह के रास्ते में आने वाले खतरनाक एस्टेरॉयड्स का रास्ता बदलना।
d) शुक्र ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगा रहे चंद्रमाओं का एक नया नक्शा बनाना।

Q2. ‘शुक्रयान-1’ मिशन में इस्तेमाल होने वाले खास डिवाइस ‘SAR’ का पूरा नाम (Full Form) क्या है?

a) Space Application Radar
b) System Analysis Receiver
✅ c) Synthetic Aperture Radar
d) Solar Atmosphere Reflector

Q3. शुक्र ग्रह (Venus) के बारे में इनमें से कौन-sa कथन बिल्कुल सही है?

a) यह हमारे पूरे सोलर सिस्टम का सबसे ठंडा और बर्फीला ग्रह है।
✅ b) इसे पृथ्वी का ‘जुड़वां ग्रह’ कहा जाता है और यहां बहुत ही खतरनाक ग्रीनहाउस प्रभाव पाया जाता है।
c) शुक्र ग्रह बाकी ग्रहों की तरह सूर्य की परिक्रमा पश्चिम से पूर्व की तरफ ही करता है।
d) इस ग्रह के पास अपने खुद के दो प्राकृतिक उपग्रह (Moons) मौजूद हैं।

International Agreements Current Affairs

India Australia Critical Minerals Agreement Lithium Cobalt Supply Chain

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मरेल्स (Critical Minerals) की सप्लाई और मिलकर नए खदानों की खोज करने को लेकर एक बहुत बड़ा द्विपक्षीय समझौता (Bilateral Agreement) हुआ है। देश की ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण अपडेट है जिसे आज 8 Jun 2026 Current Affairs in Hindi के इस विशेष संकलन में स्थान दिया गया है।

India-Australia Critical Minerals Agreement: भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों और क्लीन एनर्जी सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार

हाल ही में भारत सरकार के खान मंत्रालय (Ministry of Mines) और ऑस्ट्रेलिया सरकार के बीच ‘क्रिटिकल मिनरल्स इन्वेस्टमेंट पार्टनरशिप’ के तहत एक बहुत बड़ी डील फाइनल हुई है। यह पूरा समझौता लिथियम (Lithium), कोबाल्ट (Cobalt) और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) जैसे उन कीमती खनिजों की सुरक्षित सप्लाई के लिए किया गया है, जिनकी जरूरत आधुनिक टेक्नोलॉजी को होती है।

आज के समय में जब पूरी दुनिया पेट्रोल-डीजल को छोड़कर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और क्लीन एनर्जी (Clean Energy) की तरफ बढ़ रही है, ऐसे में भारत के लिए यह समझौता किसी जैकपॉट से कम नहीं है। चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए भारत काफी समय से ‘चाइना प्लस वन’ (China Plus One) की रणनीति पर काम कर रहा है। इस समझौते से हमारे नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट को सीधा फायदा मिलेगा। यह टॉपिक SSC CGL और स्टेट पीसीएस के एग्जाम्स के लिए बेहद जरूरी है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • इस पार्टनरशिप के तहत भारत की सरकारी कंपनी काबिल यानी KABIL (Khanij Bidesh India Ltd) ऑस्ट्रेलिया की लिथियम और कोबाल्ट खदानों में सीधे पैसे इन्वेस्ट करेगी।
  • यह मजबूत साझेदारी भारत को साल 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का बड़ा लक्ष्य पूरा करने में बहुत मदद करेगी।
  • ‘क्वाड’ (QUAD) देशों के ग्रुप के बीच आपसी सप्लाई चेन को मजबूत और अटूट बनाने की दिशा में यह एक बहुत बड़ा कदम है।
  • इस डील के बाद भारत के अंदर ही एडवांस बैटरी विनिर्माण (Battery Manufacturing) और EV गाड़ियों की कीमतें काफी कम होने की उम्मीद है।

KABIL COMPANY और इसका रणनीतिक निवेश

खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) एक ऐसी जॉइंट वेंचर कंपनी है, जिसे खास तौर पर इसलिए बनाया गया था ताकि यह विदेशों में जाकर उन जरूरी खनिजों की खदानें तलाश सके और उन्हें खरीद सके जिनकी भारत में कमी है। KABIL और ऑस्ट्रेलिया के क्रिटिकल मिनरल्स ऑफिस (CMO) के बीच हुआ यह समझौता सिर्फ खनिजों के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए दोनों देश आपस में माइनिंग की नई टेक्नोलॉजी और पर्यावरण के अनुकूल काम करने के तरीकों (ESG Norms) को भी शेयर करेंगे। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति को बहुत मजबूत बनाता है।

चीन का दबदबा और ‘क्वाड’ देशों की नई प्लानिंग

अगर आज के ग्लोबल मार्केट को देखें, तो क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग और सप्लाई पर अकेले चीन का एकतरफा कब्जा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही ‘क्वाड’ (QUAD) संगठन के बड़े और एक्टिव मेंबर हैं, इसलिए वे इस समझौते के जरिए एक ऐसा सुरक्षित और भरोसेमंद रास्ता तैयार कर रहे हैं जहां चीन की मनमानी न चल सके। इस कूटनीतिक चाल का सीधा फायदा यह होगा कि आने वाले समय में हमारे हाई-टेक गैजेट्स और देश की सुरक्षा के लिए बनने वाले रक्षा उपकरणों (Defence Equipment) के लिए कच्चे माल की कभी कोई कमी नहीं होगी।

Static GK Connect

  • संबंधित मंत्रालय: यह पूरी डील भारत सरकार के खान मंत्रालय (Ministry of Mines) के तहत हुई है।
  • KABIL की कहानी: इस कंपनी को साल 2019 में देश की तीन बड़ी सरकारी कंपनियों (NALCO, HCL और MECL) को मिलाकर एक जॉइंट वेंचर के रूप में शुरू किया गया था।
  • माइनिंग कानून: भारत में खनन कार्यों को नियमित करने के लिए खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act, 1957) लागू है।
  • ऑस्ट्रेलिया की बेसिक बातें: इसकी राजधानी कैनबरा (Canberra) है और यहां की करेंसी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) है।

Current Affairs MCQs

Q1. भारत सरकार की कंपनी ‘KABIL’ (खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड) को बनाने के पीछे सबसे बड़ा मकसद क्या है?

a) भारत के ग्रामीण इलाकों में कोयले की नई खदानों को खोजना।
✅ b) भारत की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों में जाकर जरूरी खनिजों (Critical Minerals) की खोज और उनका अधिग्रहण करना।
c) विदेशों से आने वाले सोने और चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को तय करना।
d) भारत के सभी सरकारी खनन उद्योगों को प्राइवेट हाथों में सौंपना।

Q2. अभी हाल ही में भारत ने लिथियम और कोबाल्ट जैसे बेहद जरूरी ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की लगातार सप्लाई के लिए किस देश के साथ एक बड़ा ऐतिहासिक समझौता किया है?

a) दक्षिण अफ्रीका
✅ b) ऑस्ट्रेलिया
c) ब्राजील
d) चिली

Q3. नीचे दी गई धातुओं में से कौन-सी धातु मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में लगने वाली लिथियम-आयन बैटरी को बनाने के लिए सबसे जरूरी ‘क्रिटिकल मिनरल’ मानी जाती है?

a) एल्युमिनियम
b) यूरेनियम
✅ c) कोबाल्ट
d) टाइटेनियम

National & Government Schemes Current Affairs

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana 2026 Rooftop Solar Installation

केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ (PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana) ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस योजना के तहत देश भर में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने (Rooftop Solar Installation) का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। सरकारी योजनाएं (Government Schemes) हमेशा से ही हर सरकारी नौकरी के एग्जाम का सबसे जरूरी हिस्सा रही हैं।

PM Surya Ghar Yojana 2026: देश के 1 करोड़ घरों को मुफ्त बिजली देने की तरफ बढ़े कदम

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की तरफ से आई बिल्कुल नई रिपोर्ट के मुताबिक, ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से अब तक देश के लाखों परिवारों को जोड़ा जा चुका है और उनके घरों की छतों पर सोलर पैनल चमकने लगे हैं। सरकार ने इस स्कीम को 75,000 करोड़ रुपये के बड़े बजट के साथ लॉन्च किया था, ताकि देश के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह जीरो किया जा सके और वे बची हुई बिजली को बेचकर कुछ एक्स्ट्रा कमाई भी कर सकें।

UPSC और SSC की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह योजना बहुत ज्यादा मायने रखती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण को बचाने के लक्ष्यों से जुड़ी हुई है। इस स्कीम की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए बनाए गए नेशनल पोर्टल के जरिए सब्सिडी का पैसा सीधे लोगों के बैंक खातों में (DBT के जरिए) ट्रांसफर किया जा रहा है। सरकार ने अब गांवों में इस योजना को और तेज करने के लिए ग्राम पंचायतों को भी स्पेशल इंसेंटिव देने का फैसला किया है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • इस योजना का लाभ उठाने वाले हर परिवार को हर महीने 300 यूनिट तक की बिजली बिल्कुल मुफ्त देने का नियम है।
  • अगर कोई अपने घर पर 2 kW तक का सोलर सिस्टम लगवाता है, तो उसकी कुल लागत का 60% हिस्सा सरकार खुद सब्सिडी के तौर पर देती है।
  • अपनी जरूरत से ज्यादा पैदा हुई बिजली को लोग स्थानीय बिजली कंपनियों (DISCOMs) को बेचकर हर साल अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं।
  • घरों में सोलर पैनल लगने से देश में कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में भारी कमी आएगी।

सब्सिडी का पूरा स्ट्रक्चर और नेशनल पोर्टल

इस योजना में कोई धोखाधड़ी न हो और यह आसानी से सब तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने एक सिंगल ‘नेशनल पोर्टल’ बनाया है। सब्सिडी का गणित बहुत सीधा है—2 kW तक के सोलर प्लांट पर सरकार 60% की भारी सब्सिडी देती है, और अगर आप 2 से 3 kW के बीच का सिस्टम लगवाते हैं, तो ऊपर के 1 kW पर 40% की सब्सिडी मिलती है। पूरा का पूरा प्रोसेस ऑनलाइन और पेपरलेस है। इसके अलावा, अगर किसी के पास पैसों की कमी है, तो बैंक बहुत ही कम ब्याज दरों पर बिना गारंटी के (Collateral-free) लोन भी दे रहे हैं।

नए रोजगार के मौके और ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी

यह योजना सिर्फ लोगों का बिजली बिल ही कम नहीं कर रही है, बल्कि देश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर ‘ग्रीन जॉब्स’ (Green Jobs) के रास्ते भी खोल रही है। देश भर में सोलर पैनल फिट करने, उनकी रिपेयरिंग और देखरेख के लिए हजारों युवाओं को ट्रेनिंग देकर काम सिखाया जा रहा है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने शहरों के लोकल निकायों और गांवों की ग्राम पंचायतों को यह जिम्मेदारी दी है कि वे अपने इलाकों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को छत पर सोलर लगाने के लिए प्रेरित करें, जिसके बदले उन्हें सरकार से अलग से फंड मिलेगा।

Static GK Connect

  • मंत्रालय: इस योजना को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy – MNRE) संभाल रहा है।
  • शुरुआत: इस योजना की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा फरवरी 2024 में की गई थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव: इसी क्षेत्र में काम करने वाला एक बड़ा संगठन अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance – ISA) है, जिसे साल 2015 में भारत और फ्रांस ने मिलकर शुरू किया था।
  • ISA का मुख्यालय: इसका ग्लोबल मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा, भारत) में स्थित है।

Current Affairs MCQs

Q1. ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत फायदा पाने वाले परिवारों को हर महीने अधिकतम कितने यूनिट तक बिजली बिल्कुल मुफ्त देने का प्रावधान है?

a) 100 यूनिट
b) 200 UNIT
✅ c) 300 यूनिट
d) 500 यूनिट

Q2. इस योजना के तहत अगर कोई व्यक्ति अपने घर की छत पर 2 kW क्षमता तक का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाता है, तो केंद्र सरकार उसे कितने प्रतिशत की सब्सिडी देगी?

a) 30%
b) 40%
✅ c) 60%
d) 80%

Q3. भारत के अंदर सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को संभालने वाला देश का नोडल मंत्रालय कौन-सा है?

a) विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power)
b) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
✅ c) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)
d) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय

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