Science & Technology Current Affairs

चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर खोजी भूमिगत बर्फ की मौजूदगी
दोस्तों, हाल ही में हमारे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक ऐसी ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।
हुआ यह है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (Moon’s South Pole) के पास जो गहरे क्रेटर (गड्ढे) हैं, उनके नीचे भारी मात्रा में भूमिगत बर्फ (subsurface ice) छिपी होने के पक्के सबूत मिले हैं।
अहमदाबाद की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से मिले रडार डेटा का गहराई से अध्ययन करके यह बड़ी जानकारी निकाली है।
अब सवाल यह है कि यह खोज इतनी खास क्यों है? असल में यह खोज भविष्य के इंसानी मिशनों (manned lunar missions) और चांद पर इंसानी बस्तियां यानी lunar bases बनाने के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
अंतरिक्ष में पानी की तलाश से जुड़ी पिछले 24 घंटों की यह सबसे बड़ी खबर है, जो आपकी आने वाली UPSC, SSC और राज्य PCS परीक्षाओं के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। तो चलिए इसके मुख्य बिंदुओं को अच्छे से समझ लेते हैं।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- चंद्रयान-2 के डूअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (DFSAR) ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद ‘फाउस्टिनी’ (Faustini) नाम के एक विशाल क्रेटर के भीतर एक छोटे से गड्ढे में बर्फ होने के मजबूत संकेत पकड़े हैं।
- आपको बता दें कि यह पूरी खोज पोलारिमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार तकनीक की मदद से संभव हो पाई है, जो चांद की ऊपरी रेजोलिथ सतह को चीरकर उसके नीचे छिपे राज देख सकती है।
- दिलचस्प बात यह है कि जिन क्रेटरों में यह बर्फ मिली है, वे पूरी तरह से परमानेंट शैडो रीजन (PSR) यानी हमेशा अंधेरे में रहने वाले इलाके हैं, जहां सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंचती।
- सूरज की रोशनी न पहुंचने के कारण इन इलाकों का तापमान करोड़ों सालों से लगभग 25 केल्विन (-248°C) तक जमा हुआ है, जो पानी की बर्फ को सुरक्षित रखने के लिए एकदम परफेक्ट माहौल देता है।
सिंथेटिक अपर्चर रडार (DFSAR) की उन्नत कार्यप्रणाली
क्या आप जानते हैं कि चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में लगा यह DFSAR उपकरण काम कैसे करता है? दरअसल, यह एल-बैंड (L-band) और एस-बैंड (S-band) दोनों फ्रीक्वेंसी पर काम करने वाला दुनिया का पहला पूर्णतः पोलारिमेट्रिक रडार है।
यह चांद की सतह के नीचे घुसकर वहां से टकराकर लौटने वाले सिग्नलों को रिकॉर्ड करता है। जब हमारे वैज्ञानिकों ने इसके रडार मापदंडों, जैसे कि ‘सर्कुलर पोलराइजेशन रेशियो’ (CPR) की जांच की, तो उन्हें एक खास तरह का वॉल्यूमेट्रिक स्कैटरिंग पैटर्न दिखाई दिया।
विज्ञान की भाषा में इसका मतलब यह हुआ कि ऐसा पैटर्न सिर्फ और सिर्फ बर्फ या बर्फ मिले मलबे से ही बन सकता है। इसी वजह से इस खोज पर अब कोई शक नहीं रह गया है।
फाउस्टिनी क्रेटर और भविष्य के लूनर एक्सप्लोरेशन पर प्रभाव
अब थोड़ा बात करते हैं फाउस्टिनी क्रेटर (Faustini Crater) के बारे में। यह चांद का एक ऐसा बेहद ठंडा और डरावना इलाका है जहां पहुंचना नामुमकिन जैसा लगता है।
रडार से मिली तस्वीरों में इस क्रेटर के किनारों पर लोबेट-रिम मॉर्फोलॉजी देखी गई है, जिसका सीधा मतलब यह है कि पुराने जमाने में जब यहां उल्कापिंड टकराए होंगे, तो बर्फ और मलबे का एक धीमा बहाव पैदा हुआ होगा।
आने वाले समय में नासा के आर्टेमिस (Artemis) मिशन और खुद इसरो के गगनयान या चंद्रयान के अगले चरणों के लिए यह पानी किसी खजाने से कम नहीं होगा।
चांद पर पानी मिलने का फायदा सिर्फ पीने के लिए नहीं है, बल्कि इस पानी को तोड़कर लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन बनाई जा सकती है, जो रॉकेट का ईंधन बनकर अंतरिक्ष जहाजों को मंगल और उससे भी आगे ले जाने में मदद करेगी।
Static GK Connect
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO): इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु (कर्नाटक) में है। यह सीधे हमारे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के तहत अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के अंतर्गत काम करता है।
- भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL): इसकी शुरुआत साल 1947 में भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई ने की थी। यह गुजरात के अहमदाबाद में स्थित है और यह भी अंतरिक्ष विभाग का ही एक स्वायत्त संस्थान है।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भूमिगत बर्फ (Subsurface Ice) की खोज के लिए किस भारतीय अंतरिक्ष यान के DFSAR रडार डेटा का उपयोग किया गया है?
a) चंद्रयान-1
b) चंद्रयान-2 ✅
c) चंद्रयान-3
d) मंगलयान-1
Q2. चंद्रमा पर खोजे गए ‘फाउस्टिनी क्रेटर’ (Faustini Crater) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर स्थित एक गर्म क्रेटर है。
2. यह एक स्थायी रूप से छाया वाला क्षेत्र (PSR) है जहां तापमान लगभग 25 केल्विन (-248°C) रहता है。
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1
b) केवल 2 ✅
c) 1 और 2 दोनों
d) न तो 1 और न ही 2
Q3. चंद्रयान-2 का DFSAR उपकरण किन दो विशिष्ट फ्रीक्वेंसी बैंड्स पर काम करने वाला पहला पूर्णतः पोलारिमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार है?
a) X-band और K-band
b) L-band और S-band ✅
c) C-band और Ku-band
d) S-band और X-band
National & Infrastructure Current Affairs

भारतीय रेलवे ने जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) को दी मंजूरी
भारत को प्रदूषण मुक्त बनाने और पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार करने की दिशा में एक बहुत ही क्रांतिकारी कदम उठाया गया है।
हमारी भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट (Jind–Sonipat section) पर देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल पर चलने वाली (Hydrogen Fuel Cell-based) 10-कार ट्रेन को चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
यह कोई आम प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ (National Green Hydrogen Mission) के सपनों को सच करने वाला एक बड़ा कदम है।
आज की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि इस हाई-टेक पहल का असली मकसद रेलवे से कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह खत्म करना और विदेशों से आने वाले महंगे डीजल-पेट्रोल पर हमारी निर्भरता को कम करना है।
रेलवे, बैंकिंग और SSC की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह टॉपिक परीक्षा के लिहाज से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- इस 10-कार वाली हाइड्रोजन ट्रेन का पूरा डिजाइन और तकनीक पूरी तरह से भारत में बनी है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक बेहतरीन उदाहरण है।
- पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने इस प्रोजेक्ट के लिए हाइड्रोजन को स्टोर करने और गैस भरने वाली सुविधाओं को जरूरी सुरक्षा लाइसेंस दे दिए हैं।
- रेलवे के बड़े रिसर्च विंग यानी RDSO ने इस पूरे हाइड्रोजन सिस्टम को चलाने के लिए कड़े नियम, मेंटेनेंस गाइडलाइंस और सुरक्षा प्रोटोकॉल को अपनी मंजूरी दे दी है।
- आपके मन में आ सकता है कि जींद-सोनीपत रूट को ही क्यों चुना गया? दरअसल, भारतीय पटरियों और यहां के मौसम में यह नई तकनीक कितनी कामयाब रहती है, इसका टेस्ट करने के लिए यह रूट एकदम सही पाया गया।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और ऊर्जा सुरक्षा
यह स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन प्रोजेक्ट सीधे तौर पर हमारे नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को बहुत मजबूत बनाता है। भारत का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हम दुनिया को स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) बेचने वाले सबसे बड़े देश बनें।
क्या आप जानते हैं कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है? इससे हमारा बहुत सारा पैसा बाहर चला जाता है।
अगर हम अपनी ट्रेनों को हाइड्रोजन जैसी क्लीन एनर्जी से चलाने में कामयाब हो जाते हैं, तो विदेशों पर हमारी यह निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था दोनों को बहुत बड़ा फायदा पहुंचेगा।
तकनीकी नवाचार, सुरक्षा मानक और विनियामक चुनौतियां
हाइड्रोजन गैस को कंप्रेस करके ट्रेन में सुरक्षित रखना और उसका इस्तेमाल करना कोई बच्चों का खेल नहीं है, यह तकनीकी रूप से बेहद जटिल काम है। यही वजह है कि इसके लिए PESO जैसी सख्त संस्था से लाइसेंस लेना पड़ा है।
हालांकि, अगर हम आज की बात करें तो रिन्यूएबल एनर्जी से बनने वाली ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ की लागत सामान्य डीजल या बिजली के मुकाबले थोड़ी ज्यादा बैठती है।
लेकिन इस पायलट प्रोजेक्ट का बड़ा फायदा यह होगा कि इससे हमारे घरेलू उद्योगों को नए फ्यूल सेल, इलेक्ट्रोलाइज़र और स्पेशल टैंक बनाने का अनुभव मिलेगा, जो आगे चलकर इस तकनीक को सस्ता बना देगा।
यह ट्रेन उन इलाकों के लिए वरदान बनेगी जहां पहाड़ों या जंगलों की वजह से बिजली के तार बिछाना बहुत मुश्किल होता है।
Static GK Connect
- अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO): यह रेल मंत्रालय के तहत काम करने वाली भारत की सबसे बड़ी रिसर्च और तकनीकी संस्था है। इसका मुख्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में है और यही तय करता है कि भारतीय रेलवे में कौन सी तकनीक इस्तेमाल होगी।
- पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO): यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DPIIT विभाग का एक मुख्य वैधानिक अंग है। इसका हेडक्वार्टर नागपुर (महाराष्ट्र) में है और देश में गैस, पेट्रोल और विस्फोटकों की सुरक्षा से जुड़े नियम यही बनाता है।
Current Affairs MCQs
Q1. भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल-आधारित 10-कार ट्रेन (Hydrogen Train) का परिचालन पायलट आधार पर किस रेलवे खंड पर किया जाएगा?
a) कालका-हिमशिला पहाड़ी खंड
b) जींद-सोनीपत खंड ✅
c) मुंबई-पुणे सेंट्रल खंड
d) अहमदाबाद-गांधीनगर खंड
Q2. हाइड्रोजन भंडारण और डिस्पेंसिंग सुविधाओं को सुरक्षा मंजूरी देने वाला निकाय ‘PESO’ किस केंद्रीय मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?
a) रेल मंत्रालय
b) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
c) वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ✅
d) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
Q3. भारतीय रेलवे का एकमात्र तकनीकी सलाहकार और मानक निर्धारक संगठन ‘RDSO’ किस शहर में स्थित है?
a) नई दिल्ली
b) बेंगलुरु
c) लखनऊ ✅
d) हैदराबाद
National & Governance Current Affairs

खेल मंत्रालय ने ‘खेल शासन अधिनियम, 2025’ के तहत नए NSB और NST नियम, 2026 किए अधिसूचित
दोस्तों, हमारे देश के खेल जगत और उसके प्रशासन (Sports Administration) को साफ-सुथरा, पारदर्शी और विवादों से दूर रखने के लिए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (MYAS) ने एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
मंत्रालय ने अभी हाल ही में पारित हुए ‘स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025’ के तहत दो नए नियमों – राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) और राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (NST) को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है।
अक्सर हम खबरों में देखते हैं कि अलग-अलग खेल संघों (Sports Federations) में आपसी लड़ाई, पैसों की हेराफेरी या खिलाड़ियों के गलत चयन को लेकर विवाद होते रहते हैं। अब इन नए नियमों की मदद से ऐसे तमाम विवादों को बहुत ही कम समय में सुलझाया जा सकेगा।
यह बड़ा प्रशासनिक सुधार UPSC के GS पेपर-2 (गवर्नेंस) और SSC जैसी परीक्षाओं के लिए एक बेहद जरूरी टॉपिक है, तो आइए इसे गहराई से समझते हैं।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- इन नए नियमों के आने से अब देश में एक पूरी तरह स्वतंत्र संस्था के रूप में राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (NST) के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
- यह न्यायाधिकरण (Tribunal) मुख्य रूप से खिलाड़ियों के गलत चयन, खेल संघों के चुनावों में होने वाली गड़बड़ी और डोपिंग जैसे गंभीर मामलों की सुनवाई करने वाली एक स्पेशल कोर्ट की तरह काम करेगा।
- इन नियमों को इस तरह बनाया गया है कि खेल संस्थाओं की आजादी (autonomy) भी बनी रहे और साथ ही सरकार उन पर आर्थिक पारदर्शिता के लिए नजर भी रख सके।
- वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) देश में खेलों के विकास की योजनाएं बनाने, मिलने वाले सरकारी पैसों (grants) को बांटने और खेल संघों को मान्यता देने वाली सबसे बड़ी संस्था होगी।
राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (NST) की विशिष्ट भूमिका और आवश्यकता
अब तक हमारे देश में खेल से जुड़े झगड़ों को निपटाने के लिए कोई अलग या स्वतंत्र कानूनी व्यवस्था नहीं थी। जब भी कोई विवाद होता था, तो बेचारे खिलाड़ियों या खेल संघों को सीधे नॉर्मल कोर्ट या हाई कोर्ट जाना पड़ता था।
वहां केस सालों-साल चलते रहते थे, जिससे कई बार होनहार खिलाड़ियों के करियर का सबसे अच्छा समय अदालतों के चक्कर काटने में ही बर्बाद हो जाता था।
अब यह राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (NST) अपनी फास्ट-ट्रैक व्यवस्था और मध्यस्थता के जरिए इन मामलों को एक तय समय के भीतर निपटा देगा, जिससे हमारे खिलाड़ियों के हकों की रक्षा होगी और अदालतों का समय भी बचेगा।
खेल शासन में स्वायत्तता और विनियामक नियंत्रण का संतुलन
इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) और दुनिया के अन्य बड़े खेल संगठन हमेशा इस बात के खिलाफ रहते हैं कि किसी देश की सरकार उनके खेल संघों के काम में कोई सीधा राजनीतिक दखल दे।
इसी बात का ध्यान रखते हुए इन नए नियमों को बहुत ही समझदारी से तैयार किया गया है। यह नियम खेल संघों के पैसों का हिसाब-किताब और ऑडिट करना तो अनिवार्य बनाता है, लेकिन उनके रोजमर्रा के खेल फैसलों या खिलाड़ियों की ट्रेनिंग में कोई दखल नहीं देता।
यानी सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे – यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए हमारे खेल सिस्टम को एकदम साफ और पारदर्शी बनाएगी।
Static GK Connect
- युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (MYAS): यह मंत्रालय भारत में खेल संस्कृति को आगे बढ़ाने, नेशनल स्पोर्ट्स कोड को लागू करने और खेल रत्न जैसे बड़े राष्ट्रीय खेल पुरस्कार देने के लिए जिम्मेदार मुख्य सरकारी संस्था है।
- भारतीय ओलंपिक संघ (IOA): इसकी स्थापना साल 1927 में हुई थी और इसके पहले प्रेसिडेंट सर दोराबजी टाटा थे। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और यही भारत में ओलंपिक से जुड़े सभी कामों को संभालता है।
Current Affairs MCQs
Q1. खेल मंत्रालय द्वारा हाल ही में अधिसूचित ‘NST नियम, 2026’ के तहत स्थापित होने वाले राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण का प्राथमिक कार्य क्या है?
a) ग्रामीण क्षेत्रों में खेल अकादमियों के लिए धन जारी करना
b) एथलीट चयन और खेल महासंघों के आंतरिक विवादों का त्वरित न्यायिक समाधान ✅
c) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल महिला खेलों को बढ़ावा देना
d) विदेशी कोचों की भर्ती प्रक्रिया का संचालन करना
Q2. राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (National Sports Tribunal) की स्थापना भारत सरकार के किस वैधानिक अधिनियम के तहत की गई है?
a) राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011
b) खेल शासन अधिनियम, 2025 ✅
c) भारतीय खेल प्राधिकरण अधिनियम, 1984
d) राष्ट्रीय युवा और खेल अधिकार कानून, 2018
Q3. खेल शासन के ऐतिहासिक संदर्भ में, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
a) 1927 ✅
b) 1947
c) 1951
d) 1982
Social Justice & Welfare Schemes Current Affairs

सामाजिक न्याय मंत्रालय ने अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं के डिजिटलीकरण के लिए लॉन्च किया PM-AJAY पोर्टल
प्यारे दोस्तों, हमारे देश के अनुसूचित जाति (SC) समुदायों को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के लिए चल रही सरकारी योजनाओं को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) ने हाल ही में ‘PM-AJAY पोर्टल’ और इसके साथ काम करने वाला ‘AJAY मोबाइल ऐप’ लॉन्च किया है।
आज की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (PM-AJAY) के तहत होने वाले सभी कामों से कागजी झंझट और अफसरों की लालफीताशाही खत्म हो जाएगी।
अब सब कुछ रीयल-टाइम में ट्रैक किया जा सकेगा। सरकारी योजनाओं (Welfare Schemes) से जुड़ा यह टॉपिक आपकी UPSC, SSC और स्टेट PCS परीक्षाओं के लिए बहुत ज्यादा काम का है, तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- PM-AJAY एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका असली उद्देश्य कौशल विकास और नए रोजगार देकर अनुसूचित जाति बहुल गांवों का कायाकल्प करना है।
- यह नया पोर्टल इस योजना के तीनों बड़े हिस्सों – ‘आदर्श ग्राम’, स्किल डेवलपमेंट के लिए मिलने वाली ‘अनुदान सहायता’ (Grant-in-Aid), और छात्रों के ‘हॉस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर’ को एक ही जगह पर जोड़ता है।
- इस डिजिटल बदलाव के बाद अब पुरानी फाइलों की जगह गांवों के विकास का पूरा खाका यानी ‘डिजिटल ग्राम विकास योजना’ सीधे ऑनलाइन ही तैयार की जाएगी।
- इन गांवों में क्या काम हो रहा है और कितनी प्रगति हुई है, इसकी पूरी निगरानी 50 अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक मानकों और 10 मुख्य विकास क्षेत्रों के आधार पर लाइव की जाएगी।
डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) और अंतिम मील तक समावेशन
यह PM-AJAY पोर्टल और मोबाइल ऐप हमारे देश के मजबूत होते डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) की एक बेहतरीन मिसाल है। इसकी मदद से सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और ट्रेनिंग के फायदों को समाज के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी बिचौलिए के पहुंचाया जा सकेगा।
जब सारा डेटा लाइव मॉनिटर होगा, तो पैसों की हेराफेरी या काम में देरी होने की गुंजाइश अपने आप खत्म हो जाएगी। जिले के बड़े अधिकारियों से लेकर दिल्ली में बैठे मंत्रालय तक सबको एक क्लिक पर पता रहेगा कि कितने युवाओं को रोजगार की ट्रेनिंग मिल चुकी है।
योजना के प्रमुख घटक और ‘आदर्श ग्राम’ का कायाकल्प
आपको बता दें कि इस योजना के तहत ‘आदर्श ग्राम’ बनाने के लिए उन गांवों को सबसे पहले चुना जाता है जहां अनुसूचित जाति की आबादी 50% से ज्यादा है।
अब इन गांवों में साफ पानी, शौचालय, स्कूल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े जितने भी काम होंगे, उनका पूरा ब्योरा इस पोर्टल पर आम जनता के देखने के लिए खुला रहेगा।
इसके साथ ही, एससी वर्ग के छात्रों को पढ़ाई में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए देश भर में नए हॉस्टल बनाने और पुराने हॉस्टलों को आधुनिक रूप देने के काम को भी इस ऐप से आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
Static GK Connect
- केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE): यह भारत सरकार का वह मुख्य मंत्रालय है जो अनुसूचित जातियों, पिछड़ें वर्गों, दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के कल्याण और उनके अधिकारों के लिए कानून और नीतियां बनाता है।
- संवैधानिक प्रावधान (Article 46): हमारे संविधान के भाग 4 में दिए गए राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का अनुच्छेद 46 साफ तौर पर कहता है कि सरकार समाज के कमजोर वर्गों, खासकर अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के शिक्षा और आर्थिक हितों का विशेष ध्यान रखेगी और उन्हें हर तरह के सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाएगी।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए ‘PM-AJAY पोर्टल’ और मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है?
a) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
b) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ✅
c) ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय
d) जनजातीय कार्य मंत्रालय
Q2. ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (PM-AJAY) के प्रशासनिक और वित्तीय स्वरूप के संबंध में कौन सा कथन पूरी तरह सत्य है?
a) यह 100% केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) की योजना है।
b) यह एक केंद्र प्रायोजित (Centrally Sponsored) योजना है जिसके तहत राज्यों के सहयोग से अनुसूचित जाति समुदायों का कल्याण किया जाता है। ✅
c) यह योजना केवल शहरी मलिन बस्तियों के पुनर्विकास के लिए काम करती है。
d) इसके तहत केवल विदेशी छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं।
Q3. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य को अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य कमजोर वर्गों को सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाने का संवैधानिक निर्देश देता है?
a) अनुच्छेद 40
b) अनुच्छेद 44
c) अनुच्छेद 46 ✅
d) अनुच्छेद 51
Economy & Global Trade Current Affairs

भारत के समुद्री खाद्य निर्यात (Seafood Exports) ने रचा इतिहास, ₹72,325 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा
दोस्तों, हमारी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे से पिछले 24 घंटों के भीतर एक बहुत ही शानदार और गर्व करने वाली खबर सामने आई है।
अभी हाल ही में खत्म हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात (Seafood Exports), दुनिया भर में चल रही मंदी की आशंकाओं को धता बताते हुए अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
इस पूरे साल में भारत ने कुल ₹72,325.82 करोड़ (यानी लगभग 8.28 बिलियन डॉलर) के मरीन प्रोडक्ट्स का रिकॉर्ड तोड़ एक्सपोर्ट किया है। समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस बार निर्यात की गई मात्रा भी रिकॉर्ड 19.32 लाख मीट्रिक टन रही है।
यह बड़ी कामयाबी दिखाती है कि दुनिया के बाजारों में भारत के सी-फूड की क्वालिटी का सिक्का जम चुका है। बैंकिंग, SSC और UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इकोनॉमी के नजरिए से यह डेटा बेहद जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- कमाई और मात्रा दोनों ही मामलों में यह भारत के पूरे समुद्री खाद्य निर्यात के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और शानदार रिकॉर्ड है।
- हमारे निर्यात होने वाले सामानों में फ्रोजन झींगा (Frozen Shrimp) यानी जमी हुई चिंगड़ी मछली हमेशा की तरह सबसे बड़ा खिलाड़ी बनी हुई है, जिसकी दुनिया में सबसे ज्यादा डिमांड है।
- अगर देशों की बात करें तो अमेरिका (USA) और चीन हमारे समुद्री खाने के सबसे बड़े खरीदार रहे हैं, और इनके बाद यूरोपीय संघ (EU) का नंबर आता है।
- इस रिकॉर्ड तोड़ निर्यात का सबसे ज्यादा फायदा हमारे तटीय राज्यों (coastal states) के लाखों गरीब मछुआरों और झींगा पालन करने वाले किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है।
निर्यात वृद्धि के प्रमुख चालक और वैश्विक बाजार की प्राथमिकताएं
भारत से बाहर भेजे जाने वाले सी-फूड बास्केट में सिर्फ झींगा ही नहीं, बल्कि फ्रोजन फिश, स्क्विड और कटलफिश की भी भारी मांग रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाने-पीने की चीजों को लेकर बहुत कड़े नियम होते हैं, जिन्हें हम ‘फाइटोसैनिटरी स्टैंडर्ड्स’ कहते हैं।
भारत ने इन नियमों का पूरी सख्ती से पालन किया, जिससे दुनिया का भरोसा हम पर बढ़ा है। साथ ही, हमारे तटीय इलाकों में नए कोल्ड स्टोरेज और अत्याधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट लगाने से भी सामान खराब होने की समस्या खत्म हुई है, जिसने इस एक्सपोर्ट को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
‘मेक इन इंडिया’ और मत्स्य पालन क्षेत्र का आधुनिक कायाकल्प
क्या आप जानते हैं कि इस सफलता के पीछे सरकार की कौन सी योजना काम कर रही है? साल 2020 में शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) ने इस पूरे सेक्टर की तस्वीर बदल कर रख दी है।
किसानों को आधुनिक तकनीक देना, नई लैब बनाना और मरीन क्लस्टर तैयार करने जैसी मदद मिलने से ही आज भारत दुनिया के टॉप 3 मछली उत्पादक देशों में शामिल हो पाया है।
यह रिकॉर्ड तोड़ कमाई न केवल हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करती है, बल्कि हमारे गांवों और तटीय इलाकों की अर्थव्यवस्था को भी एक नई उड़ान देती है।
Static GK Connect
- समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA): इसकी स्थापना संसद के एक कानून के जरिए साल 1972 में की गई थी। इसका मुख्यालय कोच्चि (केरल) में है और यह केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एक सरकारी संस्था है।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): इस योजना को मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत शुरू किया गया था ताकि देश में मछली पालन का सही और सुरक्षित विकास हो सके। इसका नोडल मंत्रालय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय है।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात (Seafood Exports) कितने करोड़ रुपये के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है?
a) ₹55,120.45 करोड़
b) ₹62,400.00 करोड़
c) ₹72,325.82 करोड़ ✅
d) ₹81,150.90 करोड़
Q2. भारत में समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और विनियमित करने वाला वैधानिक निकाय ‘MPEDA’ का मुख्यालय किस तटीय शहर में स्थित है?
a) चेन्नई (तमिलनाडु)
b) विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
c) कोच्चि (केरल) ✅
d) मुंबई (महाराष्ट्र)
Q3. भारत के कुल समुद्री खाद्य निर्यात बास्केट में मूल्य (Value) के मामले में सबसे बड़ी हिस्सेदारी निम्नलिखित में से किस विशिष्ट उत्पाद की है?
a) फ्रोजन मकरैल मछली
b) फ्रोजन झींगा (Frozen Shrimp) ✅
c) जीवित केकड़े (Live Crabs)
d) प्रसंस्कृत समुद्री शैवाल (Processed Seaweed)