21 July 2026 Daily Current Affairs for UPSC, SSC & Bank Exams

Science & Technology Current Affairs

India First Quantum Communication Network QKD Science Current Affairs 21 July 2026

दोस्तों, अगर हम आज के डिजिटल युग की बात करें, तो राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षित संचार हमारी सबसे बड़ी जरूरत बन गए हैं।

साइबर खतरों (Cyber Threats) से निपटने के लिए भारत अब पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकों पर दांव लगा रहा है।

इसी कड़ी में, हमारे वैज्ञानिकों ने एक ऐसा हैकिंग-प्रूफ नेटवर्क तैयार किया है, जिसे भेदना लगभग नामुमकिन है।

भारत का पहला क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क (QKD) सफलतापूर्वक लॉन्च

पिछले 24 घंटों की सबसे बड़ी अपडेट यह है कि भारत सरकार ने देश के पहले क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD – Quantum Key Distribution) नेटवर्क का सफल परीक्षण कर लिया है।

यह सिर्फ एक नेटवर्क नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा ‘गेम-चेंजर’ है।

हाल ही में संचार मंत्रालय, DRDO और C-DAC ने मिलकर इस अत्याधुनिक तकनीक को डेवलप किया है।

अगर आप UPSC या SSC की तैयारी कर रहे हैं, तो Science and Technology सेक्शन के लिए इसे जरूर नोट कर लें।

यह सीधे तौर पर भारत के ‘National Quantum Mission’ की सफलता का सबूत है, जो आगे चलकर हमारे डिफेंस और बैंकिंग डेटा को 100% सुरक्षित बनाएगा।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • भारत का यह पहला क्वांटम नेटवर्क नई दिल्ली और एक अन्य बड़े शहर के बीच सफलतापूर्वक सेट किया गया है।
  • मजेदार बात यह है कि यह तकनीक ‘क्वांटम मैकेनिक्स’ (Quantum Mechanics) के भौतिक नियमों पर काम करती है।
  • डेटा ट्रांसफर को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए इसमें एन्क्रिप्शन के रूप में ‘फोटॉन’ (Photons) का इस्तेमाल होता है।
  • सबसे गर्व की बात है कि यह 100% स्वदेशी तकनीक (Indigenous Technology) है, जिसे पूरी तरह से भारत में ही बनाया गया है।

नेशनल क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) का महत्व

क्या आप जानते हैं कि भारत सरकार ने ‘नेशनल क्वांटम मिशन’ के तहत रिसर्च के लिए 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट रखा है?

इसका सीधा सा लक्ष्य भारत को क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing), सुरक्षित संचार और सटीक नेविगेशन में ग्लोबल लीडर बनाना है।

इस मिशन के सही तरह से लागू होने के बाद, भारत अब अमेरिका, चीन और यूरोप के उन गिने-चुने देशों की लिस्ट में आ गया है, जिनके पास अपनी खुद की इतनी एडवांस क्वांटम तकनीक है।

QKD तकनीक आखिर काम कैसे करती है?

क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) असल में एक बहुत ही एडवांस सुरक्षा प्रोटोकॉल है। यह डेटा एन्क्रिप्शन (Data Encryption) के लिए क्वांटम यांत्रिकी का इस्तेमाल करता है।

अब सवाल यह है कि यह हैकिंग-प्रूफ कैसे है? दरअसल, अगर कोई हैकर इस नेटवर्क में सेंध लगाने की कोशिश करता है, तो फोटॉन का ‘क्वांटम स्टेट’ (Quantum State) तुरंत बदल जाता है।

इससे भेजने वाले (Sender) और प्राप्त करने वाले (Receiver) दोनों को तुरंत अलर्ट मिल जाता है और डेटा ट्रांसफर वहीं रुक जाता है। रक्षा संचार (Defence Communication) के लिए यह एक अभेद्य दीवार की तरह काम करता है।

Static GK Connect

  • C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing) की स्थापना: 1988
  • C-DAC का मुख्यालय (Headquarters): पुणे, महाराष्ट्र
  • नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
  • National Quantum Mission की मंजूरी: अप्रैल 2023

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में लॉन्च किए गए भारत के पहले क्वांटम नेटवर्क में डेटा सुरक्षा के लिए किस सिद्धांत का उपयोग किया गया है?
a) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
b) ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी
c) क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) ✅
d) क्लाउड कंप्यूटिंग

Q2. ‘नेशनल क्वांटम मिशन’ (NQM) को किस नोडल मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा है?
a) रक्षा मंत्रालय
b) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ✅
c) गृह मंत्रालय
d) शिक्षा मंत्रालय

Q3. C-DAC (सी-डैक) का मुख्यालय भारत में कहाँ स्थित है?
a) नई दिल्ली
b) बेंगलुरु
c) हैदराबाद
d) पुणे ✅

Economy Current Affairs

RBI Sustainable Green Financing Framework Economy Current Affairs

हम सभी जानते हैं कि आज के समय में क्लाइमेट चेंज कितनी बड़ी समस्या है।

इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हमारी अर्थव्यवस्था को टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रहा है।

सच कहा जाए तो, ग्रीन फाइनेंसिंग (Green Financing) और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना आज के समय की सबसे बड़ी आर्थिक जरूरत बन चुकी है।

RBI द्वारा ‘सस्टेनेबल ग्रीन फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क 2026’ जारी

हाल ही में RBI ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और इको-फ्रेंडली विकास को बढ़ावा देने के लिए अपना नया ‘सस्टेनेबल ग्रीन फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क’ (Sustainable Green Financing Framework) जारी किया है।

पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंताओं और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यह एक बहुत ही सख्त और जरूरी कदम है।

Banking Exams और UPSC की Economy के नजरिए से यह टॉपिक काफी महत्वपूर्ण है।

इस नए नियम के तहत, अब भारत के सभी कमर्शियल बैंकों (Commercial Banks) और NBFCs को अपने कुल लोन का एक तय हिस्सा अनिवार्य रूप से ग्रीन प्रोजेक्ट्स को देना ही होगा।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • इस पूरे फ्रेमवर्क का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत को 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ (Net Zero) कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुँचाना है।
  • अब बैंकों को रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कम ब्याज दरों पर लोन देना होगा।
  • RBI ने ग्रीन बॉन्ड्स (Green Bonds) में निवेश करने वालों को टैक्स में एक्स्ट्रा छूट देने का प्रस्ताव भी रखा है।
  • इसके साथ ही, ग्रीन वाशिंग (Greenwashing – यानी पर्यावरण के नाम पर फर्जी दावे) को रोकने के लिए सख्त ऑडिट नियम बनाए गए हैं।

सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bond) क्या है?

साधारण शब्दों में समझें तो, सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड सरकार द्वारा जारी किए गए एक खास तरह के डेट इंस्ट्रूमेंट (Debt Instruments) होते हैं।

इन बॉन्ड्स के जरिए बाजार से जो भी पैसा उठाया जाता है, उसका इस्तेमाल सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं (Eco-friendly projects) में होता है— जैसे कि सौर ऊर्जा पार्क, पवन ऊर्जा या फिर टिकाऊ जल प्रबंधन।

विदेशी निवेशक भी इन बॉन्ड्स में काफी दिलचस्पी दिखाते हैं, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) बढ़ता है और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

फ्रेमवर्क में ‘ग्रीन वाशिंग’ को रोकने के उपाय

ग्रीन वाशिंग एक तरह का धोखा है, जहां कंपनियां अपने उत्पादों को पर्यावरण के अनुकूल बताकर ग्राहकों को गुमराह करती हैं।

RBI के नए निर्देशों के मुताबिक, अब सभी बैंकों को किसी भी कंपनी को ‘ग्रीन लोन’ पास करने से पहले एक स्वतंत्र थर्ड-पार्टी एनवायरनमेंटल ऑडिट (Environmental Audit) करवाना जरूरी होगा।

अगर कोई कंपनी फंड का गलत इस्तेमाल करती पकड़ी जाती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगेगा और उसे ग्रीन फाइनेंसिंग योजना से हमेशा के लिए बाहर कर दिया जाएगा।

Static GK Connect

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना: 1 अप्रैल 1935 (RBI Act 1934 के तहत)
  • RBI का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation): 1 जनवरी 1949
  • भारत का ‘नेट जीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन लक्ष्य वर्ष: 2070
  • वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) का उल्लेख: बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949, धारा 24

Current Affairs MCQs

Q1. RBI के नए ‘सस्टेनेबल ग्रीन फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क’ के तहत बैंकों को किस क्षेत्र में अनिवार्य रूप से ऋण देना होगा?
a) केवल कृषि क्षेत्र
b) रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन प्रोजेक्ट्स ✅
c) भारी उद्योग
d) विदेशी व्यापार

Q2. ‘ग्रीन वाशिंग’ (Greenwashing) शब्द का अर्थ वित्तीय मामलों में क्या है?
a) पर्यावरण के अनुकूल झूठे दावे करना ✅
b) पुराने नोटों को नष्ट करना
c) पर्यावरण को साफ करने का अभियान
d) कृषि के लिए दिया गया मुफ्त फंड

Q3. भारत सरकार ने किस वर्ष तक ‘नेट ज़ीरो’ (Net Zero) कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है?
a) 2030
b) 2047
c) 2050
d) 2070 ✅

Environment & Indices Current Affairs

Global Climate Resilience Index 2026 India Ranking Environment Current Affairs

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से आज पूरी दुनिया जूझ रही है। ऐसे में देशों की वैश्विक रैंकिंग्स भी तेजी से बदल रही हैं।

लेकिन अच्छी खबर यह है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौर ऊर्जा (Solar Energy) और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कुछ बेहतरीन नीतियां अपनाई हैं, जिनका शानदार रिजल्ट अब साफ दिखने लगा है।

ग्लोबल क्लाइमेट रेजिलिएंस इंडेक्स (GCRI) 2026 में भारत शीर्ष 10 में शामिल

हाल ही में जारी हुई बहुचर्चित ‘ग्लोबल क्लाइमेट रेजिलिएंस इंडेक्स 2026’ (Global Climate Resilience Index) में भारत ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है और दुनिया के टॉप 10 देशों में अपनी मजबूत जगह बना ली है।

पिछले कुछ सालों में रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy), इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के विस्तार और ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) मिशन में भारत के भारी निवेश का ही यह नतीजा है।

सूचकांक (Indices) से जुड़े ऐसे सवाल State PCS, SSC और Railway परीक्षाओं के फेवरेट होते हैं। यह रैंकिंग साफ तौर पर बताती है कि भारत जलवायु आपदाओं से लड़ने में कितना तैयार और सक्षम है। आप हमारी Daily Current Affairs की अन्य पोस्ट में भी ऐसे महत्वपूर्ण इंडेक्स पढ़ सकते हैं।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • इस इंडेक्स को मशहूर अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था ‘जर्मनवॉच’ (Germanwatch) और UNEP ने मिलकर पब्लिश किया है।
  • इस लिस्ट में कुल 180 देशों का मूल्यांकन किया गया, जिसमें हमारे प्यारे भारत ने 8वां स्थान हासिल किया है।
  • वहीं, डेनमार्क और स्वीडन (Denmark and Sweden) इस सूची में पहले और दूसरे स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए हैं।
  • भारत की रैंकिंग में इस सुधार का मुख्य कारण हमारा आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और पूर्व चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) में हुआ तेज तकनीकी विकास है।

भारत की क्लाइमेट रेजिलिएंस नीतियां

भारत सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था को जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभावों से बचाने के लिए कई बेहतरीन कदम उठाए हैं।

उदाहरण के लिए, ‘राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना’ (NAPCC) के तहत आठ प्रमुख मिशन चलाए जा रहे हैं।

इसके अलावा, तटीय इलाकों में मैंग्रोव (Mangroves) वनों को बचाने के लिए ‘मिष्टी योजना’ (MISHTI Scheme) लागू की गई है। यह योजना समुद्री तूफानों और चक्रवातों से एक प्राकृतिक ढाल का काम करती है।

इन्हीं नीतियों ने भारत की ग्लोबल रैंकिंग सुधारने में सबसे बड़ा रोल प्ले किया है।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की भूमिका

इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भारत और फ्रांस की एक साझा पहल है। इसका सीधा सा मकसद सौर ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ाना और जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर हमारी निर्भरता को कम करना है।

हाल ही में कई अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देश भी ISA से जुड़े हैं।

इसके जरिए भारत ने ना सिर्फ अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम किया है, बल्कि खुद को विकासशील देशों के लिए एक मजबूत ‘क्लाइमेट लीडर’ (Climate Leader) के रूप में भी स्थापित किया है।

Static GK Connect

  • इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) का मुख्यालय: गुरुग्राम, हरियाणा
  • UNEP (United Nations Environment Programme) का मुख्यालय: नैरोबी, केन्या
  • ‘जर्मनवॉच’ (Germanwatch) का मुख्यालय: बॉन (Bonn), जर्मनी
  • मिष्टी (MISHTI) योजना का संबंध: मैंग्रोव वृक्षारोपण और संरक्षण

Current Affairs MCQs

Q1. ग्लोबल क्लाइमेट रेजिलिएंस इंडेक्स 2026 में भारत को कौन सा स्थान प्राप्त हुआ है?
a) 5वां
b) 8वां ✅
c) 12वां
d) 20वां

Q2. ‘ग्लोबल क्लाइमेट रेजिलिएंस इंडेक्स’ मुख्य रूप से किस संस्था द्वारा जारी किया जाता है?
a) विश्व बैंक (World Bank)
b) विश्व आर्थिक मंच (WEF)
c) जर्मनवॉच (Germanwatch) ✅
d) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

Q3. भारत सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मिष्टी’ (MISHTI) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) नदियों की सफाई
b) मैंग्रोव वनों का संरक्षण ✅
c) सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना
d) इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना

Defence Current Affairs

DRDO Agni Prime Missile Test Defence Current Affairs 2026

देश की रक्षा की बात हो और DRDO का नाम ना आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) लगातार हमारी सैन्य ताकत को आधुनिक और आत्मनिर्भर बना रहा है।

पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनी बैलिस्टिक मिसाइलों (Ballistic Missiles) का सफल परीक्षण, भारत की बढ़ती सामरिक और रणनीतिक शक्ति का जीता-जागता सबूत है।

DRDO द्वारा ‘अग्नि-प्राइम’ (Agni-Prime) मिसाइल का नवीनतम उन्नत परीक्षण सफल

पिछले 24 घंटों में रक्षा क्षेत्र (Defence Sector) से जो सबसे बड़ी खबर आई है, वह यह है कि हाल ही में DRDO ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-प्राइम’ (Agni-Prime) के उन्नत संस्करण का सफलतापूर्वक नाइट-ट्रायल (रात्रि परीक्षण) किया है।

यह नई मिसाइल पुरानी अग्नि-1 और अग्नि-2 की जगह लेगी, क्योंकि यह वजन में काफी हल्की है, स्पीड बहुत तेज है और अपने टारगेट को अचूक तरीके से भेदती है।

UPSC और SSC एग्जाम्स के नजरिए से इसकी मारक क्षमता और नेविगेशन सिस्टम बहुत ज्यादा इम्पोर्टेन्ट हैं।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • ‘अग्नि-प्राइम’ असल में एक टू-स्टेज (Two-stage) सॉलिड-प्रोपेलेंट पर आधारित बैलिस्टिक मिसाइल है।
  • इसकी मारक क्षमता (Strike Range) 1000 किलोमीटर से लेकर 2000 किलोमीटर के बीच तय की गई है।
  • इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कनस्तर (Canister) में रखा जा सकता है, जिससे इसे ट्रेन या सड़क के रास्ते कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।
  • इस मिसाइल में काफी एडवांस डुअल रिडंडेंट नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम (Dual Redundant Navigation System) का इस्तेमाल किया गया है।

कनस्तरीकरण (Canisterisation) तकनीक का महत्व

क्या आप जानते हैं कि मिसाइलों के मामले में कनस्तरीकरण (Canisterisation) कितनी महत्वपूर्ण तकनीक है? इसका सीधा सा मतलब है मिसाइल को एक खास तरह के सीलबंद कैप्सूल या ट्यूब में सुरक्षित रखना।

इससे मिसाइल सालों तक खराब नहीं होती और आपात स्थिति में इसे लॉन्च करने में लगने वाले समय (Preparation time) में भारी कमी आती है।

‘अग्नि-प्राइम’ की इसी खूबी के चलते हमारी सेना इसे किसी भी मौसम या भौगोलिक परिस्थिति में तुरंत फायर करने के लिए हमेशा तैयार रहती है, जो हमें दुश्मनों पर एक बड़ी बढ़त दिलाता है।

इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP)

भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने का सपना हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने देखा था। उन्हीं के नेतृत्व में 1983 में IGMDP की शुरुआत हुई थी।

इस बेहतरीन प्रोग्राम के तहत पांच मुख्य मिसाइलें विकसित की गईं, जिन्हें हम शॉर्ट में ‘PATNA’ (Prithvi, Agni, Trishul, Nag, Akash) कहते हैं।

अग्नि सीरीज भी इसी प्रोग्राम की एक बहुत सफल देन है, जो आज भारत के परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Deterrence) की सबसे मजबूत रीढ़ बन चुकी है।

Static GK Connect

  • DRDO (Defence Research and Development Organisation) की स्थापना: 1958
  • DRDO का मुख्यालय (Headquarters): नई दिल्ली
  • व्हीलर द्वीप (Wheeler Island) का नया नाम: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा)
  • भारत का नो-फर्स्ट-यूज (No First Use) परमाणु सिद्धांत: 2003 में अपनाया गया

Current Affairs MCQs

Q1. हाल ही में परीक्षण की गई ‘अग्नि-प्राइम’ (Agni-Prime) मिसाइल की मारक क्षमता (Range) लगभग कितनी है?
a) 500 – 1000 किमी
b) 1000 – 2000 किमी ✅
c) 3000 – 4000 किमी
d) 5000 किमी से अधिक

Q2. मिसाइलों के संदर्भ में ‘कनस्तरीकरण’ (Canisterisation) का मुख्य लाभ क्या है?
a) मिसाइल की मारक क्षमता को बढ़ाना
b) मिसाइल को तुरंत और आसानी से लॉन्च करने योग्य बनाना ✅
c) मिसाइल को अदृश्य (Stealth) बनाना
d) मिसाइल को पानी के अंदर दागने में सक्षम बनाना

Q3. IGMDP (इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम) के तहत विकसित मिसाइलों में कौन शामिल नहीं है?
a) पृथ्वी (Prithvi)
b) ब्रह्मोस (BrahMos) ✅
c) नाग (Nag)
d) आकाश (Akash)

Judiciary & Polity Current Affairs

Supreme Court Digital Assets Article 300A Judiciary Polity Current Affairs

दोस्तों, जब भी भारतीय संविधान में ‘संपत्ति के अधिकार’ (Right to Property) की बात आती है, तो हमने कई बड़े कानूनी बदलाव देखे हैं।

लेकिन अब हम एक डिजिटल युग में जी रहे हैं, जहाँ ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी जैसी चीजें तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में संपत्ति की पुरानी परिभाषा और उसका स्वरूप, दोनों ही पूरी तरह से बदल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘डिजिटल संपत्ति’ (Digital Assets) भी अनुच्छेद 300A के तहत सुरक्षित

हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक बेहद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि अब क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency), नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs) और डिजिटल संपत्ति भी संविधान के अनुच्छेद 300A (Article 300A) के तहत कानूनी सुरक्षा की पूरी हकदार हैं।

मतलब यह कि बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के, सरकार मनमाने ढंग से आपकी डिजिटल संपत्ति जब्त नहीं कर सकती।

UPSC Polity और SSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह एक ‘माइलस्टोन’ जजमेंट है। यह फैसला दिखाता है कि कैसे टेक्नोलॉजी के विकास के साथ हमारे संवैधानिक अधिकारों (Constitutional Rights) का दायरा भी बढ़ रहा है।

मुख्य बातें (Key Highlights)

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह क्लियर किया कि “संपत्ति” (Property) का मतलब अब सिर्फ आपकी जमीन, मकान या बैंक बैलेंस तक सीमित नहीं है।
  • अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी जांच एजेंसियों को किसी भी डिजिटल संपत्ति को जब्त करने से पहले कोर्ट को एक बहुत ही ठोस और उचित कारण बताना होगा।
  • यह फैसला हमारे ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000’ (IT Act 2000) और ‘संविधान’ के बीच एक बेहतरीन बैलेंस बनाता है।
  • डिजिटल इन्वेस्टर्स (Digital Investors) के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए इसे एक बहुत बड़ा और मजबूत कानूनी कवच माना जा रहा है।

अनुच्छेद 300A (Article 300A) का इतिहास

अगर हम थोड़ा इतिहास में जाएं, तो मूल संविधान में ‘संपत्ति का अधिकार’ अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 के तहत एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) हुआ करता था।

लेकिन विकास कार्यों और भूमि सुधारों में बार-बार आ रही कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए, 1978 में 44वें संविधान संशोधन (44th Amendment Act) के जरिए इसे मौलिक अधिकारों की लिस्ट से हटा दिया गया।

इसके बाद इसे संविधान के भाग XII में अनुच्छेद 300A के तहत सिर्फ एक कानूनी और संवैधानिक अधिकार (Constitutional Right) बना दिया गया।

डिजिटल एसेट्स पर कराधान (Taxation on Digital Assets)

एक तरफ जहाँ डिजिटल एसेट्स को कानूनी सुरक्षा मिली है, वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार पहले से ही इन पर कड़े टैक्स नियम लागू कर चुकी है।

बजट में लाए गए नए नियमों के मुताबिक, किसी भी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी को बेचने या ट्रांसफर करने से होने वाली कमाई पर सीधा 30% टैक्स (Tax) लगता है।

इसके अलावा 1% TDS (Tax Deducted at Source) भी काटा जाता है। याद रखें, सुप्रीम कोर्ट का यह नया फैसला टैक्स लगाने से नहीं रोकता, बल्कि सिर्फ बिना मतलब की जब्ती (Arbitrary Seizure) पर रोक लगाता है।

Static GK Connect

  • संपत्ति का अधिकार किस संशोधन द्वारा मौलिक अधिकार से हटाया गया: 44वां संविधान संशोधन (1978)
  • अनुच्छेद 300A संविधान के किस भाग में है: भाग XII (Part XII)
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act): वर्ष 2000
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) की स्थापना: 1956 (मुख्यालय – नई दिल्ली)

Current Affairs MCQs

Q1. सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार, ‘डिजिटल संपत्ति’ (Digital Assets) को किस अनुच्छेद के तहत संरक्षण प्राप्त है?
a) अनुच्छेद 19
b) अनुच्छेद 21
c) अनुच्छेद 31
d) अनुच्छेद 300A ✅

Q2. ‘संपत्ति का अधिकार’ (Right to Property) वर्तमान में भारतीय संविधान के तहत किस प्रकार का अधिकार है?
a) मौलिक अधिकार
b) संवैधानिक / कानूनी अधिकार ✅
c) प्राकृतिक अधिकार
d) राज्य का नीति निर्देशक तत्व

Q3. भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के हस्तांतरण से होने वाली आय पर वर्तमान में कितना आयकर (Tax) देय है?
a) 10%
b) 20%
c) 30% ✅
d) 18%


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