Indices Current Affairs

नमस्ते दोस्तों! अगर हम पिछले कुछ घंटों की सबसे बड़ी खबरों पर नज़र डालें, तो नीति आयोग (NITI Aayog) की नई रिपोर्ट सबसे ज्यादा चर्चा में है।
यह इंडेक्स सीधे तौर पर हमारी अर्थव्यवस्था के भविष्य और Viksit Bharat 2047 के विज़न से जुड़ा है।
यह रिपोर्ट हमें बताती है कि भारत के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निवेश (investment) का माहौल कैसा है।
आप भी जानते हैं कि UPSC Current Affairs या State PCS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऐसे सूचकांक कितने अहम होते हैं, क्योंकि ये सीधे गवर्नेंस और पॉलिसी-मेकिंग का हिस्सा हैं।
NITI Aayog का Investment Friendliness Index 2026: निवेश अनुकूलता में गुजरात शीर्ष पर
हाल ही में NITI Aayog ने अपनी तरह का पहला Investment Friendliness Index 2026 (IFI) जारी किया है।
आसान भाषा में समझें तो यह इंडेक्स मापता है कि कौन से राज्य निवेशकों को लुभाने, एक बेहतरीन Business Climate देने और निवेश को लंबे समय तक टिकाए रखने में सबसे आगे हैं।
यह कोई हवा-हवाई बात नहीं है, बल्कि पूरी तरह से डेटा पर आधारित (Data-driven) फ्रेमवर्क है।
इसका असल मकसद राज्यों के बीच एक हेल्दी कॉम्पिटिशन (Competitive and Cooperative Federalism) को बढ़ावा देना है।
UPSC, SSC और Banking एग्जाम्स की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह Current Affairs रिपोर्ट एक खजाना है।
यह बताती है कि हमारे देश में FDI (Foreign Direct Investment) का ट्रेंड क्या है और राज्यों का बुनियादी ढांचा कैसा परफॉर्म कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भारत की कुल निवेश दर GDP का लगभग 25% है, जिसे हमें अपनी हाई ग्रोथ रेट बनाए रखने के लिए और बढ़ाना होगा।
इस बड़ी सी रिपोर्ट में 84 अलग-अलग इंडिकेटर्स (Indicators) और 8 पिलर्स के आधार पर बड़े राज्यों की लिस्ट में गुजरात ने 56.6 अंकों के साथ बाजी मारी है।
इसके बाद महाराष्ट्र (53.7) और तमिलनाडु (53.3) का नंबर आता है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- सूचकांक का कवरेज: इस रिपोर्ट में पूरे भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों को परखा गया है। इसमें 8 पिलर्स, 84 इंडिकेटर्स और सबसे खास बात 1,850 एक्टिव निवेशकों का फीडबैक (Perception Survey) भी शामिल है।
- राज्यों की श्रेणियां (Categorization): परफॉरमेंस के आधार पर राज्यों को चार कैटेगरी में बांटा गया है— Top Performers, Frontrunners, Emerging Performers, और Aspiring States।
- टॉप परफॉर्मर्स (Top Performers): बड़े राज्यों में गुजरात (इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे आगे), महाराष्ट्र (बिजनेस क्लाइमेट में नंबर वन), और तमिलनाडु टॉप पर हैं। इनके अलावा गोवा और ओडिशा ने भी Top Performers की लिस्ट में अपनी जगह बनाई है।
- पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्य: इस खास कैटेगरी में उत्तराखंड ने पहला मुकाम हासिल किया है, जिसके बाद असम और हिमाचल प्रदेश का नंबर है।
- केंद्र शासित प्रदेश: UTs और सिटी स्टेट्स की बात करें तो गोवा सबसे आगे है, जिसके पीछे दिल्ली और चंडीगढ़ हैं।
सूचकांक के प्रमुख स्तंभ और राज्यों का प्रदर्शन
NITI Aayog ने इस इंडेक्स को तैयार करने के लिए 8 ऐसे पिलर्स का इस्तेमाल किया है जो निवेश पर सीधा असर डालते हैं।
क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया गया? क्योंकि सिर्फ पैसे या सब्सिडी से निवेशक नहीं आते, बल्कि उन्हें एक मजबूत इकोसिस्टम (Ecosystem) चाहिए होता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure): सर्वश्रेष्ठ राज्य – गुजरात (वेटेज: 25%)
- व्यापारिक माहौल (Business Climate): सर्वश्रेष्ठ राज्य – महाराष्ट्र (वेटेज: 20%)
- संसाधन (Resources): सर्वश्रेष्ठ राज्य – ओडिशा (वेटेज: 15%)
- विनियामक सुगमता (Regulatory Ease): सर्वश्रेष्ठ राज्य – छत्तीसगढ़ (वेटेज: 12%)
- सरकारी नीतियां (Government Policy): सर्वश्रेष्ठ राज्य – मध्य प्रदेश (वेटेज: 10%)
- वित्तीय स्वास्थ्य (Financial Health): सर्वश्रेष्ठ राज्य – गुजरात (वेटेज: 7%)
- संस्थागत वातावरण (Institutional Environment): सर्वश्रेष्ठ राज्य – छत्तीसगढ़ (वेटेज: 6%)
- पर्यावरणीय लचीलापन (Environmental Resilience): सर्वश्रेष्ठ राज्य – तमिलनाडु (वेटेज: 5%)
इस डेटा को गहराई से देखें तो एक बात साफ हो जाती है—अगर राज्यों को लंबे समय तक निवेश चाहिए, तो उन्हें अपनी संस्थागत क्षमता (Institutional Capability) और फाइनेंस को दुरुस्त करना ही होगा।
मिसाल के तौर पर, गुजरात इसलिए टॉप पर है क्योंकि वहां पोर्ट ऑपरेशंस कमाल के हैं, Dholera SIR और GIFT City जैसे प्लग-एंड-प्ले (Plug-and-play) हब हैं, और इंडस्ट्रियल बिजली भी नेशनल एवरेज से 29% सस्ती है।
वहीं दूसरी तरफ, महाराष्ट्र ने Private Equity और Venture Capital (PE/VC) का पैसा खींचने में बाजी मार ली है।
रिपोर्ट का आर्थिक, सामरिक महत्व और क्षेत्रीय असंतुलन
यह रिपोर्ट एक कड़वी सच्चाई भी सामने लाती है—FDI का क्षेत्रीय असंतुलन।
डेटा से पता चलता है कि भारत का 85% से ज्यादा FDI सिर्फ 5 राज्यों (महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली और तमिलनाडु) में ही सिमटा हुआ है।
वहीं, हमारे पूरे नॉर्थ-ईस्ट को मिलाकर भी 1% से कम विदेशी निवेश मिलता है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने बहुत सही बात कही है कि निवेश सिर्फ फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन नहीं बढ़ाता, बल्कि यह मार्केट में डिमांड (Demand) भी पैदा करता है, जो लंबे समय की Economic Growth के लिए बहुत जरूरी है।
अगर हम ऐतिहासिक मॉडल से तुलना करें, तो अपनी पीक ग्रोथ के दौरान चीन की निवेश दर लगभग 40% थी, जबकि हम अभी 25% पर हैं।
Make in India और Viksit Bharat 2047 जैसे बड़े सपनों को सच करने के लिए भारत को अपने Incremental Capital-Output Ratio (ICOR) को सुधारना होगा और प्राइवेट कैपेक्स (Private Capex) बढ़ाना होगा।
यह इंडेक्स कम औद्योगीकरण वाले राज्यों को अपनी कमियां पहचानने, ‘Single Window Clearance’ सिस्टम को मजबूत करने और नियमों की अड़चनें दूर करने के लिए एक शानदार फ्रेमवर्क देता है। इसी से भारत एक असली Global Manufacturing Hub बन पाएगा।
Static GK Connect
- NITI Aayog: इसकी शुरुआत 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग (Planning Commission) को हटाकर की गई थी। ध्यान रहे, इसके पदेन अध्यक्ष हमेशा भारत के प्रधानमंत्री होते हैं।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism): हमारे संविधान का अनुच्छेद 263 (Article 263) ‘अंतर-राज्यीय परिषद’ (Inter-State Council) की व्यवस्था देता है। यही केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बैठाने का सबसे बड़ा लीगल तरीका है।
- Foreign Direct Investment (FDI): भारत में FDI का कामकाज DPIIT देखता है, जो सीधे Ministry of Commerce and Industry के तहत आता है।
Current Affairs MCQs
चलिए अब आपकी तैयारी परखने के लिए कुछ MCQs सॉल्व करते हैं:
Q1. हाल ही में जारी NITI Aayog के ‘Investment Friendliness Index 2026’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस सूचकांक में 8 मुख्य स्तंभों का उपयोग किया गया है, जिसमें सबसे अधिक वेटेज ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ को दिया गया है。
2. पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में असम को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है。
दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 ✅
b) केवल 2
c) 1 और 2 दोनों
d) न तो 1, न ही 2
Q2. ‘Investment Friendliness Index 2026’ के अनुसार, बड़े राज्यों की श्रेणी में किस राज्य ने ‘बिजनेस क्लाइमेट’ (Business Climate) स्तंभ में सर्वोच्च प्रदर्शन किया है?
a) गुजरात
b) तमिलनाडु
c) महाराष्ट्र ✅
d) ओडिशा
Q3. NITI Aayog द्वारा राज्यों को उनके प्रदर्शन के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। 50 से अधिक स्कोर प्राप्त करने वाले राज्यों को किस श्रेणी में रखा गया है?
a) Frontrunners
b) Top Performers ✅
c) Emerging Performers
d) Aspiring States
Economy Current Affairs

दोस्तों, हमारी पूरी इकॉनमी (GDP) में 50% से भी ज्यादा योगदान सर्विस सेक्टर का होता है।
लेकिन क्या आपको पता है कि इतने बड़े सेक्टर के मंथली परफॉरमेंस को मापने के लिए हमारे पास कोई फास्ट और सटीक इंडिकेटर नहीं था?
पॉलिसी मेकर्स के लिए यह हमेशा से सिरदर्द रहा है।
लेकिन अब भारत ने अपने स्टैटिस्टिकल सिस्टम में एक ऐसा बदलाव किया है जो वाकई काबिले-तारीफ है।
MoSPI ने लॉन्च किया देश का पहला Index of Services Production
हाल ही में भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स (MoSPI) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए फॉर्मल सर्विस सेक्टर (Formal Services Sector) में हो रहे शॉर्ट-टर्म प्रोडक्शन को मापने के लिए देश का पहला Index of Services Production (ISP) लॉन्च कर दिया है।
इसे आप IIP (Index of Industrial Production) का जुड़वा भाई मान सकते हैं।
अभी इसके ट्रायल वर्जन का बेस ईयर (Base Year) 2024-25 तय किया गया है।
अगर आप UPSC, Banking या SSC की तैयारी कर रहे हैं, तो Economy Section के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक है। आने वाले एग्जाम्स में इससे सवाल जरूर बनेंगे।
पहली रिपोर्ट में 19 सब-सेक्टर्स के डेटा जारी किए गए हैं, जो हमारे सर्विस सेक्टर का करीब 60% हिस्सा कवर करते हैं।
ISP के आने से अब सरकार को तुरंत पता चल जाएगा कि सर्विस सेक्टर के किस हिस्से में बूम आ रहा है और कहां मंदी है।
सबसे मजे की बात यह है कि इस इंडेक्स को बनाने में पहली बार GST (Goods and Services Tax) डेटा, एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा और ASISSE का सीधा इस्तेमाल हुआ है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- उप-क्षेत्रों का समावेश: इस नए इंडेक्स में टेलीकॉम, रिटेल ट्रेड, रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट, होटल, बैंकिंग और IT जैसी 19 अहम सेवाओं को शामिल किया गया है।
- प्रकाशन की आवृत्ति (Frequency): बेस ईयर 2024-25 के साथ, अब से ISP को हर महीने की 29 तारीख को (60 दिनों के गैप पर) जारी किया जाएगा।
- शानदार वृद्धि दर्ज: पहली रिपोर्ट के आंकड़े काफी अच्छे हैं। 19 में से 14 सेक्टर्स ने डबल-डिजिट (Double-digit) ग्रोथ दिखाई है। इसमें ‘Accommodation and Food’ सेक्टर ने सबसे ज्यादा 37.2% की ग्रोथ दर्ज की है।
- नकारात्मक वृद्धि: सिर्फ दो सेक्टर्स ऐसे रहे जहां ग्रोथ निगेटिव रही—हवाई परिवहन (Air Transport: -13.9%) और रेलवे परिवहन (-0.4%)।
- अनौपचारिक क्षेत्र बाहर: ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह इंडेक्स सिर्फ फॉर्मल इकॉनमी को ट्रैक करता है। इसमें पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, डिफेंस और पूरी तरह से इनफॉर्मल सेक्टर को नहीं रखा गया है।
डेटा स्रोत, डिफ्लेटर्स और ISP की कार्यप्रणाली
Index of Services Production (ISP) तैयार करना एक जटिल प्रक्रिया है। सर्विस सेक्टर का डेटा अक्सर हमें ‘Nominal Value’ यानी रेवेन्यू में मिलता है, जिसमें महंगाई (Inflation) का असर भी छिपा होता है।
अब असली ग्रोथ (Real Growth) निकालने के लिए MoSPI ने खास Deflators का इस्तेमाल किया है।
चूंकि भारत में अभी भी SPPI (Service Producer Price Indices) पूरी तरह से नहीं हैं, इसलिए महंगाई का असर हटाने के लिए अलग-अलग प्राइस इंडेक्स यूज़ किए जा रहे हैं। आइए इसे आसानी से समझें:
- GST डेटा (GSTR-1 Outward Supplies): थोक व खुदरा व्यापार, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, आवास, आईटी सेवाएँ। (Deflator: Wholesale Trade के लिए WPI; अन्य सेवाओं के लिए CPI Non-Food)
- प्रशासनिक / द्वितीयक डेटा (Administrative Data): हवाई परिवहन, रेलवे, बैंकिंग, बीमा। (Deflator: बैंकिंग और बीमा के लिए CPI General)
- ASISSE (वार्षिक सर्वेक्षण): गैर-सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएँ भविष्य में शामिल की जाएंगी। (Deflator: आवश्यकतानुसार विशिष्ट CPI)
यह भारतीय सांख्यिकी के इतिहास में पहली बार है जब GST रिटर्न के डेटा का सीधा इस्तेमाल नेशनल इंडेक्स बनाने में हो रहा है।
ISP एक Fixed-weight Laspeyres volume index तरीके पर काम करता है, जो GVA (Gross Value Added) के हिसाब से अलग-अलग सेक्टर्स को वेटेज देता है。
ISP का महत्व और IIP से इसकी तुलनात्मक प्रासंगिकता
इसे थोड़ा ऐसे समझिए—जैसे 1950 के दशक से IIP हमारी मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली सेक्टर का बुखार मापता आ रहा है, वैसे ही अब ISP सर्विस सेक्टर का थर्मामीटर बनेगा।
हमारे GVA में सर्विस सेक्टर का योगदान 53-55% है और यह 30% से ज्यादा लोगों को रोज़गार देता है।
हमारे मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) ने बिल्कुल सटीक बात कही है कि अब तक हमारे पास सिर्फ इंडस्ट्रियल ग्रोथ मापने का टूल था, लेकिन इतने बड़े सर्विस सेक्टर के लिए कोई फास्ट ट्रैकर नहीं था।
अब अगर किसी सेक्टर में मंदी आती है, तो सरकार को महीनों बाद नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में ही पता चल जाएगा।
इस इंडेक्स के आने से RBI और वित्त मंत्रालय को अपनी पॉलिसी बनाने के लिए एकदम रियल-टाइम और हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा मिलेगा।
इससे हमारा डेटा सिस्टम अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे विकसित देशों की कतार में आकर खड़ा हो जाएगा।
Static GK Connect
- MoSPI: यह मंत्रालय 15 अक्टूबर 1999 को सांख्यिकी विभाग और कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग को मिलाकर बनाया गया था।
- NSO (National Statistical Office): यह संस्था MoSPI के अंडर काम करती है और हमारे देश के IIP, CPI और GDP/GVA के आंकड़े यही जारी करती है।
- IIP (Index of Industrial Production): एग्जाम्स में अक्सर पूछा जाता है—इसका Base Year 2011-12 है और इसे NSO हर महीने जारी करता है।
Current Affairs MCQs
Q1. सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए ‘Index of Services Production (ISP)’ का आधार वर्ष (Base Year) क्या तय किया गया है?
a) 2011-12
b) 2015-16
c) 2021-22
d) 2024-25 ✅
Q2. ‘Index of Services Production (ISP)’ के संबंध में इन कथनों पर विचार करें:
1. यह सूचकांक केवल भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र (Formal Services Sector) को मापता है。
2. इसमें डेटा इकट्ठा करने के लिए पहली बार GST डेटा का उपयोग किया जा रहा है。
3. पहले ट्रायल इंडेक्स में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और रक्षा सेवाओं को भी शामिल किया गया है。
दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2 ✅
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3
Q3. ISP को महंगाई-समायोजित (Inflation-adjusted) वास्तविक उत्पादन में बदलने के लिए किन ‘Deflators’ का इस्तेमाल किया जा रहा है?
a) थोक व्यापार के लिए केवल CPI का उपयोग
b) थोक व्यापार के लिए WPI और बैंकिंग व बीमा के लिए CPI का उपयोग ✅
c) सभी 19 उप-क्षेत्रों के लिए GDP Deflator का उपयोग
d) सेवा क्षेत्र के लिए IIP का उपयोग
Science & Technology Current Affairs

आज के इस साइंस और टेक्नोलॉजी के दौर में, बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) एक ऐसा गेम-चेंजर बनकर उभर रही है जो हमारी हेल्थ, एग्रीकल्चर और क्लाइमेट चेंज जैसी बड़ी चुनौतियों का अचूक समाधान दे सकती है।
भारत ने भी इस मौके को लपकते हुए खुद को एक ग्लोबल ‘Bioeconomy Powerhouse’ बनाने का जबरदस्त ब्लूप्रिंट तैयार किया है।
NITI Aayog का Bioeconomy Roadmap 2035: भारत का 691 बिलियन डॉलर का लक्ष्य
हाल ही में नीति आयोग ने “Roadmap for Building India as a Leading BioEconomy Powerhouse by 2035” नाम से एक विज़न डॉक्युमेंट पेश किया है।
इस ऐतिहासिक रोडमैप को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉन्च किया।
टारगेट बहुत ही क्लियर और बड़ा है—2035 तक भारत की Bioeconomy को वर्तमान 195.3 बिलियन डॉलर (2025 का आंकड़ा) से बढ़ाकर सीधे 691 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है!
और जब 2047 में हम आज़ादी के 100 साल मनाएंगे, तब तक इसे 2.6 ट्रिलियन डॉलर का रूप देना है।
UPSC (GS Paper 3: Science & Tech, Indian Economy) और State PCS वालों के लिए यह Current Affairs टॉपिक बहुत अहम है।
यह रोडमैप सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह क्लाइमेट-प्रूफ खेती (Climate-resilient agriculture), एडवांस्ड हेल्थकेयर (जैसे Gene Therapy) और पर्यावरण को बचाने का मास्टरप्लान है।
सरकार का अनुमान है कि इस मिशन से भारत में 3 करोड़ (30 मिलियन) से ज्यादा हाई-वैल्यू जॉब्स (High-value jobs) पैदा होंगी।
सोचिए, जब AI और बायोटेक्नोलॉजी मिल जाएंगे, तो हमारे R&D की ताकत कितनी बढ़ जाएगी!
मुख्य बातें (Key Highlights)
- 50,000 करोड़ का फंड: सबसे बड़ी बात! 2026 से 2035 तक के लिए 50,000 करोड़ रुपये का ‘BioEconomy Growth Fund’ बनाने का प्रपोजल रखा गया है। इससे हमारे स्टार्टअप्स और साइंटिस्ट्स को अच्छी खासी फंडिंग मिल सकेगी।
- राष्ट्रीय बायोमिशन (BioMissions): इस प्लान के तहत 6 नए ‘National BioMissions’ शुरू किए जाएंगे जो जीन थेरेपी, मरीन बायोटेक्नोलॉजी और क्लाइमेट-फ्रेंडली एग्रीकल्चर जैसे मुद्दों पर फोकस करेंगे।
- PLI योजना की सिफारिश: देश में ही मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और आयात (imports) कम करने के लिए एक अलग से PLI (Production Linked Incentive) स्कीम लाने की बात कही गई है।
- इंजीनियरिंग बायोलॉजी: फ्यूचर की डिमांड को देखते हुए, भारत जल्द ही अपना पहला ‘Engineering Biology’ एकेडमिक प्रोग्राम भी शुरू करेगा ताकि हमारे युवाओं को सही ट्रेनिंग मिल सके।
- GDP में योगदान: एक बड़ा लक्ष्य यह भी है कि 2047 तक हमारी नेशनल GDP में बायोइकॉनमी का हिस्सा 8 से 10 परसेंट तक हो जाए।
प्रमुख राष्ट्रीय बायोमिशन (Six National BioMissions)
नीति आयोग ने जिन 6 मिशनों का खाका खींचा है, वे हमारे साइंस और इंडस्ट्री की सूरत बदलने वाले हैं। आइए इन्हें आसान बिंदु में देखते हैं:
- GeneIndia: किफायती जीन और सेल थेरेपी (Cell Therapies), जीनोमिक हेल्थकेयर और प्रिसिजन मेडिसिन।
- AgriBio 2.0: क्लाइमेट-प्रूफ जीन-संपादित (Gene-edited) फसलें, बायोफर्टिलाइजर और ऑर्गेनिक फसल सुरक्षा।
- BioX Foundry: सिंथेटिक बायोलॉजी के नए आविष्कारों को बाजार तक लाना और बायो-मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म बनाना।
- One Health Grid: संक्रामक बीमारियों पर नज़र रखना, AMR (Antimicrobial Resistance) को कंट्रोल करना, और इंसान-जानवर-पर्यावरण की हेल्थ को एक साथ जोड़ना।
- Marine Biotechnology: समुद्री शैवाल (Seaweed) की खेती बढ़ाना, ब्लू इकोनॉमी और मरीन बायो-प्रोडक्ट्स।
- Advanced Biopharmaceuticals: एडवांस्ड बायोलॉजिकल दवाओं को देश में ही बनाना और बीमारियों की निगरानी करना।
ये मिशन सिर्फ हमें आत्मनिर्भर (Self-reliant) ही नहीं बनाएंगे, बल्कि भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बना देंगे।
विनियामक सुधार, आईपीआर सुरक्षा और भविष्य की राह
किसी भी तकनीक का असली फायदा तब है जब वह लैब से निकलकर जल्द से जल्द बाजार तक पहुंचे।
इसीलिए इस रोडमैप में CDSCO (Central Drugs Standard Control Organisation) को मॉडर्न बनाने पर जोर दिया गया है।
जीन थेरेपी या AI-बेस्ड दवाओं के लिए अब फास्ट-ट्रैक अप्रूवल (Fast-track approval) सिस्टम बनेगा।
एक और बहुत अच्छी पहल है—BioIP and Innovation Evaluation Agency बनाने का सुझाव। इससे क्या होगा?
हमारे साइंटिस्ट और स्टार्टअप्स अपने आविष्कारों का पेटेंट (IPR) आसानी से करवा सकेंगे और उसका कमर्शियल फायदा उठा सकेंगे।
आज भारत में 11,000 से ज्यादा बायोटेक स्टार्टअप काम कर रहे हैं, और यकीन मानिए, ये नई नीतियां उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं होंगी।
Static GK Connect
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT): मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के तहत DBT की स्थापना 1986 में हुई थी। यह भारत में बायो-रिसर्च की नोडल एजेंसी है।
- BIRAC: Biotechnology Industry Research Assistance Council (BIRAC) एक नॉन-प्रॉफिट पब्लिक सेक्टर कंपनी है, जिसे बायोटेक स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने के लिए DBT ने बनाया था।
- One Health Concept: यह एक ऐसी अप्रोच है जो मानती है कि इंसान, जानवर और पर्यावरण की सेहत आपस में जुड़ी हुई है (खासकर ज़ूनोटिक और फैलने वाली बीमारियों के मामले में)।
Current Affairs MCQs
Q1. नीति आयोग द्वारा जारी ‘Bioeconomy Roadmap 2035’ के अनुसार, 2035 तक भारत की बायोइकॉनमी का लक्ष्य क्या तय किया गया है?
a) $100 बिलियन
b) $250 बिलियन
c) $691 बिलियन ✅
d) $2.6 ट्रिलियन
Q2. ‘Bioeconomy Roadmap 2035’ के तहत प्रपोज़ किए गए ‘BioEconomy Growth Fund’ (2026-2035) का कुल आकार कितना है?
a) 10,000 करोड़ रुपये
b) 25,000 करोड़ रुपये
c) 50,000 करोड़ रुपये ✅
d) 1,00,000 करोड़ रुपये
Q3. इस रोडमैप में प्रस्तावित ‘6 National BioMissions’ में से ‘One Health Grid’ मिशन का मुख्य मकसद क्या है?
a) समुद्री शैवाल (Seaweed) की खेती को बढ़ावा देना
b) संक्रामक रोगों की निगरानी और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को नियंत्रित करना ✅
c) जीन-संपादित (Gene-edited) फसलों का व्यावसायिक उत्पादन
d) सिंथेटिक बायोलॉजी प्लेटफॉर्म का निर्माण करना
Environment Current Affairs

दिल्ली-NCR का प्रदूषण (Pollution) आज के समय में सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह एक सीरियस पब्लिक हेल्थ क्राइसिस बन चुका है।
इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने एक बहुत ही शानदार और बड़ी योजना को हरी झंडी दिखाई है, ताकि धुआं उगलने वाले पुराने ट्रकों और बसों को सड़कों से हटाया जा सके।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए PARIVARTAN Scheme के दिशानिर्देशों को मंजूरी
हाल ही में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने एक नई स्कीम—PARIVARTAN (Programme for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions) के नियमों को ऑफिशियल तौर पर मंजूरी दे दी है।
आपको बता दें, इस कमाल की योजना को केंद्रीय कैबिनेट ने 3 जून 2026 को ही पास कर दिया था।
इसका कुल बजट 9,585 करोड़ रुपये है, जिसमें से 5,041 करोड़ रुपये सीधे केंद्र सरकार अपने बजट से देगी।
अगर आप UPSC Civil Services (GS Paper 3) की तैयारी कर रहे हैं, तो इस योजना को अच्छे से रट लीजिए।
इसका मेन टारगेट दिल्ली-NCR में चल रहे पुराने और भारी प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों (Commercial Vehicles) को हटाकर उनकी जगह इको-फ्रेंडली BS-VI या पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को लाना है।
इस योजना को जमीन पर उतारने का काम सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) करेगा, जबकि फंडिंग NCRPB (National Capital Region Planning Board) के जरिए की जाएगी।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- योजना का विस्तार (Coverage): यह स्कीम खास तौर पर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और यूपी के NCR इलाकों में लागू होगी। अच्छी खबर यह है कि यहां की राज्य सरकारों ने नई गाड़ियां खरीदने पर रोड टैक्स में 10 साल की छूट और रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने का नोटिफिकेशन भी निकाल दिया है।
- वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Support): जो लोग अपनी पुरानी गाड़ी बदलेंगे, उन्हें नए लोन पर 5% की ब्याज छूट (Interest subvention) मिलेगी। इसके अलावा, अगर आप EV खरीदते हैं तो एकमुश्त तगड़ी वित्तीय मदद भी मिलेगी।
- OEM डिस्काउंट की बाध्यता: भारत के कमर्शियल गाड़ियों के मार्केट पर राज करने वाली 11 प्रमुख कंपनियों (OEMs) ने सरकार के साथ समझौता किया है। इसके तहत वे इस योजना के लाभार्थियों को नई गाड़ी खरीदने पर कम से कम 8% का डिस्काउंट जरूर देंगी।
- पूरी तरह से डिजिटल: इस स्कीम में कोई कागजी झंझट नहीं है। यह पूरा सिस्टम VAHAN, V-Scrap, DigiELV और PFMS जैसे पोर्टल्स से जुड़ा होगा।
- फ्यूल वाउचर सहायता: अगर कोई फ्लीट ऑपरेटर अपनी पुरानी गाड़ी स्क्रैप करके नई BS-VI (डीजल या CNG) लेता है, तो उसे हर महीने फ्यूल वाउचर की मदद भी दी जाएगी।
PARIVARTAN योजना के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
आखिर यह सब हो क्यों रहा है? इसका सीधा मकसद है NCR की हवा से खतरनाक PM 2.5 और Nitrogen Oxides (NOx) को कम करना।
पुराने ट्रकों के इंजन बहुत खराब हो चुके होते हैं और वे BS-VI के मुकाबले कई गुना ज्यादा धुआं फेंकते हैं।
इस ‘Fleet Modernisation’ से न सिर्फ हमारा AQI (Air Quality Index) सुधरेगा, बल्कि अस्थमा जैसी बीमारियों पर खर्च होने वाला लोगों का पैसा भी बचेगा।
इसके अलावा, नई गाड़ियां माइलेज अच्छा देती हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्चा (Operational costs) भी कम आएगा।
स्क्रैपेज नीति (Vehicle Scrapping Policy) के साथ डिजिटल कनेक्शन
कोई भी योजना तब तक सफल नहीं होती जब तक उसमें ट्रांसपेरेंसी न हो। इसीलिए PARIVARTAN Scheme को सीधे ‘Vehicle Scrapping Policy’ से लिंक कर दिया गया है।
जब पुरानी गाड़ी ‘V-Scrap’ पोर्टल के जरिए साइंटिफिक तरीके से कबाड़ में जाएगी, तो उसके पुराने पुर्जों का कोई गलत इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
सबसे मजे की बात—जब गाड़ी का मालिक अपनी गाड़ी स्क्रैप करेगा, तो उसे एक ‘Certificate of Deposit (CoD)’ मिलेगा।
यह सर्टिफिकेट एक तरह का कीमती कूपन है जिसे दिखाकर वह नई गाड़ी पर डिस्काउंट ले सकता है। सच में, यह राज्यों के बीच तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण है!
Static GK Connect
- NCRPB (National Capital Region Planning Board): इसे 1985 में एक एक्ट के जरिए बनाया गया था। इसके अध्यक्ष हमेशा MoHUA के केंद्रीय मंत्री होते हैं।
- BS-VI (Bharat Stage Emission Standards): क्या आपको पता है भारत ने BS-IV से सीधे BS-VI में छलांग लगाई थी? हमने BS-V को पूरी तरह से स्किप कर दिया था। BS-VI नियम 1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में लागू हैं।
- वायु प्रदूषण अधिनियम: भारत में हवा को साफ रखने के लिए ‘Air (Prevention and Control of Pollution) Act’ साल 1981 में पास किया गया था।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में चर्चा में रही ‘PARIVARTAN Scheme’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) कृषि क्षेत्र में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को बढ़ावा देना
b) NCR में पुराने और प्रदूषणकारी ट्रकों/बसों को BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना ✅
c) पूरे भारत में रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण करना
d) अंतर्देशीय जलमार्गों (Inland Waterways) पर हाइड्रोजन ईंधन वाले जहाजों का संचालन
Q2. ‘PARIVARTAN Scheme’ के कार्यान्वयन और वित्तपोषण के संबंध में कौन सा जोड़ा (pair) सही है?
a) क्रियान्वयन: पर्यावरण मंत्रालय, वित्तपोषण: विश्व बैंक
b) क्रियान्वयन: MoRTH (सड़क परिवहन मंत्रालय), वित्तपोषण: NCRPB (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड) ✅
c) क्रियान्वयन: MoHUA, वित्तपोषण: नीति आयोग
d) क्रियान्वयन: भारी उद्योग मंत्रालय, वित्तपोषण: PM-CARES फंड
Q3. PARIVARTAN योजना के तहत दिए जा रहे फायदों के मामले में, इनमें से कौन सा कथन गलत (सत्य नहीं) है?
a) नए वाहन के ऋण पर 5% ब्याज सबवेंशन (Interest Subvention)
b) राज्य सरकारों द्वारा वाहन पंजीकरण शुल्क (Registration fee) में छूट
c) पात्र डीजल और CNG प्रतिस्थापन वाहनों के लिए मासिक ईंधन वाउचर
d) पुराने वाहन को कबाड़ में देने पर आजीवन निःशुल्क टोल (Toll-free) यात्रा ✅
National Current Affairs

दोस्तों, आज हम जिस डिजिटल दुनिया में जी रहे हैं, वहां समय की कीमत पैसे से भी ज्यादा है।
क्या आप सोच सकते हैं कि शेयर मार्केट, पावर ग्रिड या टेलीकॉम नेटवर्क में अगर एक मिलीसेकंड (Millisecond) की भी देरी हो जाए, तो क्या होगा?
करोड़ों का नुकसान या बड़ा क्रैश! अभी तक हम ‘सटीक समय’ के लिए अमेरिका के GPS जैसे विदेशी सिस्टम पर निर्भर थे।
लेकिन अब भारत ने अपनी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए एक स्वदेशी टाइम नेटवर्क बना लिया है।
One Nation, One Time: White Rabbit Technology आधारित नेटवर्क का उद्घाटन
बीते 24 घंटों की सबसे शानदार टेक-न्यूज़ यह है कि केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने बेंगलुरु के ‘RRSL’ (Regional Reference Standard Laboratory) में एक खास नेटवर्क का उद्घाटन किया है।
यह नेटवर्क White Rabbit Technology पर आधारित है और इसे नाम दिया गया है ‘IST Dissemination Demonstration Network’
यह सरकार के “One Nation, One Time” विज़न का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, जिसका मकसद पूरे देश में एक ही, बिल्कुल सटीक और पूरी तरह से सुरक्षित टाइम सिस्टम लागू करना है।
UPSC, SSC और Defence एग्जाम्स के लिए यह टेक्नोलॉजी बहुत ही जरूरी टॉपिक बन गई है।
इसे हमारे Legal Metrology Division ने CSIR-NPL, ISRO, BSNL और SEBI के साथ मिलकर तैयार किया है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब हमारे बैंक, टेलीकॉम और डिफेंस सिस्टम विदेशी नेविगेशन पर निर्भर नहीं रहेंगे, और साइबर अटैक या डेटा स्पूफिंग (Data Spoofing) से भी बचे रहेंगे।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- स्वदेशी नेटवर्क और सटीकता: यह सिस्टम हमारे भारतीय मानक समय (IST) को ‘सब-नैनोसेकंड’ (एक सेकंड के अरबवें हिस्से से भी कम समय) की एक्यूरेसी के साथ भेजता है। इसे CSIR-NPL की एटॉमिक घड़ियों (Atomic Clocks) से लिंक किया गया है।
- सफल परीक्षण: इसका सक्सेसफुल ट्रायल बेंगलुरु की प्रयोगशाला और चेन्नई के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बीच सिक्योर टाइम भेजने के लिए किया जा चुका है।
- सामरिक स्वायत्तता (Digital Sovereignty): इससे विदेशी GPS पर हमारी निर्भरता खत्म हो जाएगी, जो युद्ध या इमरजेंसी के समय हमारी नेशनल सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी है।
- कहां होगा इस्तेमाल?: डिजिटल बैंकिंग, 5G/6G नेटवर्क, हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और डिफेंस सिस्टम के लिए यह तकनीक एक मजबूत ढाल का काम करेगी।
White Rabbit Technology क्या है और यह कैसे काम करती है?
व्हाइट रैबिट (White Rabbit – WR) असल में एक इथरनेट-बेस्ड हाई-प्रिसिजन टाइम सिंक्रोनाइज़ेशन तकनीक है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे मूल रूप से CERN (यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन) ने अपनी बहुत बड़ी वैज्ञानिक परियोजनाओं के लिए बनाया था।
यह तकनीक फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए हजारों किलोमीटर तक एकदम सटीक समय पहुंचा सकती है।
भारत ने इस ओपन-सोर्स तकनीक को अपने हिसाब से मोल्ड करके अपना खुद का सिक्योर नेटवर्क बना लिया है।
इसमें हमारे देश की इन बड़ी संस्थाओं ने मिलकर काम किया है, जिनके बारे में आप नीचे जान सकते हैं:
- Legal Metrology Division: यह नोडल एजेंसी है जो पूरे प्रोजेक्ट को लीड और मैनेज कर रही है।
- CSIR-NPL: भारत का आधिकारिक ‘Timekeeper’, जो हमारे IST को बनाता है।
- ISRO: सैटेलाइट और कम्युनिकेशन का टेक्निकल सपोर्ट देना इनका मुख्य कार्य है।
- BSNL: अपने फाइबर नेटवर्क के जरिए पूरे देश में सुरक्षित ट्रांसमिशन देना।
- SEBI / NSE: शेयर मार्केट की हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में नेटवर्क को टेस्ट करना।
One Nation, One Time पहल का सामरिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा महत्व
इस पहल का सीधा सा विज़न है—देश के सारे सर्वर, गैजेट्स और नेटवर्क एक ही ऑफिशियल टाइम (IST) पर चलें।
जब कोई डिजिटल पेमेंट होता है या स्टॉक मार्केट में ट्रेड होता है, तो सटीक ‘Time Stamping’ बहुत जरूरी है।
अगर हम विदेशी GPS पर टिके रहेंगे, तो कोई भी हैकर उसे जाम या हैक (Spoofing) कर सकता है। सोचिए अगर ऐसा हुआ तो बैंकिंग सिस्टम क्रैश हो जाएगा!
White Rabbit Network इस बात की गारंटी देता है कि हमारी डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) सलामत रहे और हम ग्लोबल टाइम (UTC) के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें।
Static GK Connect
- CSIR-NPL (National Physical Laboratory): नई दिल्ली में स्थित NPL को हम भारत का ‘Timekeeper’ कहते हैं। भारत में जो भी ऑफिशियल समय (IST) चलता है, वह यहीं से तय होता है।
- भारतीय मानक समय (IST): हमारा समय 82.5° पूर्वी देशांतर (Longitude) पर आधारित है, जो यूपी के मिर्जापुर से गुजरता है। यह ग्लोबल टाइम (UTC) से 5:30 घंटे आगे चलता है।
- Legal Metrology Act, 2009: यह कानून देश में बाट और माप (Weights and Measures) के स्टैंडर्ड तय करता है, और उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय इसी के तहत काम करता है।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में बेंगलुरु में उद्घाटित ‘White Rabbit Technology’ का मुख्य इस्तेमाल किस क्षेत्र में किया जाता है?
a) क्वांटम कंप्यूटिंग चिप्स का निर्माण
b) लंबी दूरी पर फाइबर नेटवर्क के माध्यम से अत्यधिक सटीक ‘टाइम सिंक्रोनाइज़ेशन’ (Time Synchronisation) ✅
c) डीप-फेक वीडियो की पहचान
d) उपग्रहों के लिए उन्नत प्रोपल्शन सिस्टम
Q2. भारत सरकार की “One Nation, One Time” पहल के तहत IST के सटीक वितरण के लिए किन संस्थाओं ने मिलकर तकनीकी सपोर्ट दिया है?
a) DRDO, IIT Delhi, और RBI
b) CSIR-NPL, ISRO, BSNL, और SEBI ✅
c) नीति आयोग, C-DAC, और वित्त मंत्रालय
d) भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और HAL
Q3. भारत का आधिकारिक समय (IST) बनाए रखने और उसे ग्लोबल टाइम (UTC) के साथ सिंक करने के लिए कौन सी संस्था अधिकृत (Timekeeper of India) है?
a) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
b) राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) ✅
c) भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
d) भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC)