Economy Current Affairs

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय संस्थानों के लिए जारी किए नए Climate Risk & Sustainable Finance Guidelines
दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि बदलते मौसम, बेमौसम बाढ़ या सूखे का हमारे देश के बैंकों पर क्या असर पड़ सकता है?
सुनने में यह भले ही अजीब लगे, लेकिन यह एक बहुत बड़ा सच है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हमारी वित्तीय प्रणाली को पर्यावरण के खतरों से सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा ‘Climate Risk & Sustainable Finance Framework’ जारी किया है।
26 May 2026 Daily Current Affairs की सबसे महत्वपूर्ण खबरों में शामिल यह निर्देश देश के सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (AIFIs) पर तुरंत लागू कर दिया गया है।
इस नए विनियामक ढांचे का सीधा उद्देश्य बैंकों को यह समझाना है कि वे अपने लोन पोर्टफोलियो (Loan Portfolio) में छिपे पर्यावरणीय खतरों को समय रहते पहचानें और एक पारदर्शी सिस्टम तैयार करें।
अगर आप UPSC, Banking या State PCS परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह टॉपिक आपके लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह भारत के साल 2070 तक के नेट-जीरो (Net-Zero) उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम है। (अधिक जानकारी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक वेबसाइट देखें)।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- अब से सभी विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities) के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे जलवायु परिवर्तन से जुड़े आर्थिक नुकसानों से निपटने के लिए बोर्ड से मंजूर की गई एक मजबूत आंतरिक नीति बनाएं।
- बैंकों को अब यह साफ-साफ बताना होगा कि वे ‘Green Deposits’ के जरिए जो पैसा इकट्ठा कर रहे हैं, उसे असल में कहाँ और कैसे निवेश कर रहे हैं। इसके लिए हर तीन महीने में रिपोर्ट (Quarterly Disclosures) देना जरूरी होगा।
- रिजर्व बैंक की यह नई नीति मुख्य रूप से दो तरह के जोखिमों को समझने और उन्हें दूर करने पर टिकी है: पहला है भौतिक जोखिम (Physical Risks) और दूसरा है संक्रमण जोखिम (Transition Risks)।
- इस पूरी कसरत का अंतिम लक्ष्य भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को दुनिया के सस्टेनेबल फाइनेंसिंग (Sustainable Financing) मानकों के बराबर खड़ा करना है। (आप हमारी पिछली रिपोर्ट हाल ही में RBI द्वारा जारी अन्य महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी पढ़ सकते हैं)।
जलवायु जोखिम और वित्तीय स्थिरता (Climate Risk and Financial Stability)
▪️ जब भी अचानक कोई प्राकृतिक आपदा जैसे चक्रवात या भयंकर सूखा आता है, तो बड़े-बड़े उद्योगों और किसानों को भारी नुकसान होता है।
ऐसे में बैंकों से लिया गया उनका बड़ा कर्ज डूबने की कगार पर आ जाता है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में एनपीए (NPA – Non-Performing Assets) बढ़ने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
अब सवाल यह है कि इस संकट से कैसे बचा जाए? तो इसका जवाब इस नई गाइडलाइन में है।
इसके तहत अब बैंकों को बड़े लोन देने से पहले सामने वाली कंपनी के कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) का अच्छे से विश्लेषण करना होगा, ताकि हमारा पूरा बैंकिंग सिस्टम किसी भी बड़े आर्थिक संकट से सुरक्षित रह सके।
ग्रीन फाइनेंसिंग को प्रोत्साहन (Incentivizing Green Financing)
▪️ रिजर्व बैंक का यह नया फ्रेमवर्क सिर्फ नुकसान से बचने का रास्ता नहीं दिखाता, बल्कि बैंकों को एक नई राह भी देता है।
यह वित्तीय संस्थानों को इस बात के लिए प्रेरित करता है कि वे देश में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण के अनुकूल खेती (Sustainable Agriculture) जैसी अच्छी परियोजनाओं के लिए कम ब्याज दरों पर लोन दें।
यानी अब बैंकों को अपनी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा ऐसे सस्टेनेबल एसेट्स में लगाने के लिए बढ़ावा मिलेगा, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था को एक नई और साफ-सुथरी रफ्तार मिल सके।
Static GK Connect
- स्थापना एवं अधिनियम: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (RBI Act, 1934) के तहत 1 अप्रैल, 1935 को की गई थी। इसके गठन के लिए हिल्टन यंग कमीशन (Hilton Young Commission) ने सिफारिश की थी।
- मुख्यालय एवं विनियामक निकाय: इसका मुख्य कार्यालय देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (महाराष्ट्र) में स्थित है। यह भारत का केंद्रीय बैंक है, जो देश की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) को तय करता है और पूरे बैंकिंग ढांचे को नियंत्रित करने वाले सबसे बड़े विनियामक (Regulator) के तौर पर काम करता है।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में जारी ‘Climate Risk & Sustainable Finance Guidelines’ निम्नलिखित में से किस संस्था द्वारा जारी किए गए हैं?
a) नीति आयोग
b) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ✅
c) सेबी (SEBI)
d) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
Q2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना किस वर्ष और किस समिति की सिफारिश पर की गई थी?
a) 1935, हिल्टन यंग कमीशन ✅
b) 1947, गोर्वाला समिति
c) 1950, नरसिम्हन समिति
d) 1921, चेम्सफोर्ड आयोग
Q3. RBI के नए क्लाइमेट रिस्क फ्रेमवर्क के अंतर्गत बैंकों को किस प्रकार के वित्तीय जोखिमों का मूल्यांकन करना अनिवार्य है?
a) केवल भौतिक जोखिम (Physical Risks)
b) केवल संक्रमण जोखिम (Transition Risks)
c) भौतिक जोखिम और संक्रमण जोखिम दोनों ✅
d) केवल अल्पकालिक बाजार जोखिम
Science & Technology Current Affairs

इसरो (ISRO) ने अगली पीढ़ी के अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 का किया सफल प्रक्षेपण
अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से आज हमारे देश के लिए एक बहुत ही गर्व की बात सामने आई है।
आज की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर दुनिया में अपना लोहा मनवाते हुए अपने सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी (PSLV-C60) की मदद से नई जनरेशन के पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-09 (Earth Observation Satellite) को अंतरिक्ष में उसकी सही जगह पर पहुंचा दिया है।
पिछले 24 घंटों में मिली इस शानदार कामयाबी ने दुनिया के कमर्शियल स्पेस मार्केट में भारत की साख को और मजबूत कर दिया है।
यह नया सैटेलाइट एडवांस रिमोट सेंसिंग (Advanced Remote Sensing) और थर्मल इमेजिंग कैमरों से लैस है, जिसका सीधा फायदा हमारे देश के किसानों को सटीक मौसम और फसल के अनुमान में मिलेगा।
इसके साथ ही यह समुद्र के बदलते मिजाज और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) में भी रीयल-टाइम डेटा देगा, जो आगामी UPSC Current Affairs और SSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए साइंस एंड टेक के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक है। (विस्तृत जानकारी के लिए ISRO आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं)।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- इस हाई-टेक EOS-09 सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) के पहले लॉन्च पैड से बिल्कुल सटीक समय पर अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया।
- यह उपग्रह समंदर की लहरों के तापमान, तटीय हवाओं के रुख और समुद्री पर्यावरण में आ रहे बदलावों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने की काबिलियत रखता है।
- इस मिशन की खास बात यह भी है कि इसके साथ विदेशी ग्राहकों के दो छोटे माइक्रो-सैटेलाइट्स (Micro-satellites) को भी न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के कमर्शियल एग्रीमेंट के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया है।
- यह नया सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहले से काम कर रहे और अब बूढ़े हो चुके कार्टोसैट और ओशनसैट सीरीज के उपग्रहों की जगह संभालेगा।
थर्मल इमेजिंग पेलोड की उपयोगिता (Utility of Thermal Imaging Payload)
▪️ इस सैटेलाइट में जो सबसे खास चीज लगी है, वह है इसका अत्याधुनिक थर्मल इमेजिंग कैमरा।
इसकी खूबी यह है कि यह रात के घने अंधेरे में या आसमान में छाए घने बादलों के पार भी धरती की बेहद साफ और हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें खींच सकता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि इसका फायदा क्या होगा? दरअसल, इस डेटा की मदद से हमारे कृषि वैज्ञानिक और किसान भाई मिट्टी की नमी का सही अंदाजा लगा सकेंगे, फसलों की बीमारियों को समय रहते पहचान सकेंगे और जमीन के नीचे घटते पानी के स्तर का बेहतर प्रबंधन कर पाएंगे। (आप ISRO के हालिया चंद्रयान और अन्य अंतरिक्ष मिशनों के बारे में पढ़ें)।
आपदा प्रबंधन में गेम-चेंजर (Game-Changer in Disaster Management)
▪️ जब भी समंदर में कोई खतरनाक चक्रवात, सुनामी या तटीय इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी आफत आती है, तब सबसे बड़ी चुनौती होती है सही समय पर सटीक जानकारी मिलना।
यह उपग्रह इस समस्या को दूर करेगा और सीधे कंट्रोल रूम को रीयल-टाइम डेटा भेजेगा।
इससे हमारी अर्ली वार्निंग प्रणालियां मजबूत होंगी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के जांबाज सैनिकों को राहत और बचाव के काम पहले से प्लान करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
Static GK Connect
- नोडल विभाग एवं स्थापना: इसरो (ISRO) की नींव 15 अगस्त, 1969 को भारत में अंतरिक्ष विज्ञान के जनक डॉ. विक्रम साराभाई ने रखी थी। यह संस्था भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के तहत काम करती है और इसकी सीधी रिपोर्टिंग सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को होती है।
- मुख्यालय एवं वाणिज्यिक शाखा: इसरो का मुख्यालय बेंगलुरु (कर्नाटक) में है। इसकी एक पूरी तरह से व्यापारिक विंग भी है जिसका नाम न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) है। इसकी स्थापना साल 2019 में की गई थी और इसका मुख्य काम दुनिया के दूसरे देशों के सैटेलाइट्स को भारत के रॉकेट से लॉन्च करने की डील करना है।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में खबरों में रहा पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-09 किस प्रक्षेपण यान द्वारा लॉन्च किया गया है?
a) GSLV-MkIII
b) PSLV-C60 ✅
c) SSLV-D3
d) LVM3
Q2. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सीधे तौर पर निम्नलिखित में से किसके प्रति जवाबदेह है?
a) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
b) रक्षा मंत्रालय
c) प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) / अंतरिक्ष विभाग ✅
d) नीति आयोग
Q3. ISRO की वाणिज्यिक शाखा ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (NSIL) का मुख्यालय कहाँ स्थित है और इसकी स्थापना कब हुई थी?
a) मुंबई, 2015
b) नई दिल्ली, 2017
c) बेंगलुरु, 2019 ✅
d) हैदराबाद, 2021
National Current Affairs

शिक्षा मंत्रालय ने ‘वन नेशन, One Student ID’ (APAAR) के राष्ट्रव्यापी पूर्ण एकीकरण की घोषणा की
हमारे देश के एजुकेशन सिस्टम को अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत ही क्रांतिकारी प्रशासनिक सुधार को अमलीजामा पहनाया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल में देश के सभी मान्यता प्राप्त कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज और स्कूलों में ‘अपेर आईडी’ (APAAR ID – Automated Permanent Academic Account Registry) को पूरी तरह से लागू करने का आदेश दे दिया है।
आज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस डिजिटल मुहिम का सीधा मतलब यह है कि अब देश के हर स्टूडेंट के पास आधार कार्ड की तरह अपनी एक अनूठी और लाइफटाइम काम आने वाली पहचान संख्या होगी।
इस एक आईडी के अंदर छात्र के स्कूल बदलने के रिकॉर्ड, कॉलेज की डिग्रियां, एग्जाम के नंबर्स और खेलकूद में जीते गए सर्टिफिकेट्स सब कुछ एक जगह डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे।
इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत एक बड़े डिजिटल हथियार के रूप में तैयार किया गया है, जो गवर्नेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- हर एक छात्र के लिए बनने वाली यह APAAR ID 12 अंकों की एक यूनिक डिजिटल पहचान संख्या होगी, जिसे सुरक्षा के लिहाज से सीधे उनके आधार कार्ड के साथ लिंक किया जाएगा।
- यह पूरा डिजिटल सिस्टम छात्रों के पसंदीदा डिजिलॉकर (DigiLocker) और ‘अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स’ (Academic Bank of Credits – ABC) के साथ मिलकर काम करेगा।
- इस आईडी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब भी कोई छात्र एक स्कूल से दूसरे स्कूल या एक राज्य से दूसरे राज्य के कॉलेज में एडमिशन लेगा, तो उसे कागजात ट्रांसफर करने के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
- यह पूरा डेटाबेस बेहद सुरक्षित रखा गया है और इसका मुख्य काम छात्रों की शैक्षणिक प्रगति को ट्रैक करना और उसे आसान बनाना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल बदलाव (NEP 2020 and Digital Transformation)
▪️ यह शानदार डिजिटल पहल असल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस सपने को पूरा करती है जिसमें पढ़ाई को लचीला बनाने की बात कही गई थी।
इसका मतलब यह है कि अगर आप कॉलेज की रेगुलर पढ़ाई के साथ-साथ कोई ऑनलाइन कोर्स (जैसे SWAYAM प्लेटफॉर्म से) या कोई शॉर्ट-टर्म स्किल डेवलपमेंट कोर्स (Skill Development Courses) करते हैं, तो उस कोर्स से मिलने वाले पॉइंट्स या क्रेडिट्स भी सीधे आपकी इसी एक आईडी में जुड़ जाएंगे, जिससे पूरी शिक्षा व्यवस्था में गजब की पारदर्शिता आएगी।
धोखाधड़ी और फर्जी डिग्रियों पर सख्त लगाम (Curbing Fraud and Fake Degrees)
▪️ हमारे देश में फर्जी मार्कशीट और नकली डिग्रियों का कारोबार एक बहुत बड़ी समस्या रहा है।
लेकिन अब इस केंद्रीयकृत APAAR रजिस्ट्री के कड़ाई से लागू होने के बाद इस तरह की धोखाधड़ी पर पूरी तरह से ताला लग जाएगा।
जब भी आप किसी सरकारी या प्राइवेट नौकरी के लिए अप्लाई करेंगे, तो कंपनियां और विभाग बिना समय गंवाए आपके सारे क्रेडेंशियल्स का ऑनलाइन और सुरक्षित तरीके से वेरिफिकेशन कर सकेंगे, जिससे समय और भागदौड़ दोनों की भारी बचत होगी।
Static GK Connect
- नोडल मंत्रालय और पृष्ठभूमि: इस पूरे प्रोजेक्ट की कमान केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के हाथों में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले इस मंत्रालय को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD Ministry) कहा जाता था, लेकिन नई शिक्षा नीति 2020 के आने के बाद इसका नाम बदलकर फिर से शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया।
- संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के मुताबिक, शिक्षा हमारे संविधान की 7वीं अनुसूची (7th Schedule) के तहत समवर्ती सूची (Concurrent List) का हिस्सा है। इसका मतलब है कि इस पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के जरिए राज्य सूची से निकालकर इस सूची में डाला गया था।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में शिक्षा मंत्रालय द्वारा पूर्ण रूप से एकीकृत की गई ‘APAAR ID’ में कुल कितने अंक (Digits) होते हैं?
a) 10 अंक
b) 12 अंक ✅
c) 14 अंक
d) 16 अंक
Q2. शिक्षा को किस संविधान संशोधन अधिनियम के तहत राज्य सूची से समवर्ती सूची (Concurrent List) में स्थानांतरित किया गया था?
a) 44वां संविधान संशोधन
b) 42वां संविधान संशोधन ✅
c) 86वां संविधान संशोधन
d) 73वां संविधान संशोधन
Q3. APAAR ID का पूर्ण रूप (Full Form) निम्नलिखित में से क्या है?
a) Academic Permanent Account and Academic Registry
b) Automated Permanent Academic Account Registry ✅
c) Advanced Permanent Academic Alliance Record
d) All-India Permanent Academic Account Record
Defence Current Affairs

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी लाइट टैंक ‘जोरावर’ के उच्च-ऊंचाई वाले रेगिस्तानी और पहाड़ी परीक्षण किए पूरे
भारतीय सेना को आत्मनिर्भर बनाने और सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य करने की दिशा में हमारे वैज्ञानिकों ने एक और बहुत बड़ी जंग जीत ली है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हमारी सेना के साथ मिलकर पूरी तरह से भारत में बने हल्के टैंक ‘जोरावर’ (Zorawar Light Tank) का पहाड़ों की ऊंचाइयों और मुश्किल इलाकों में होने वाला फाइनल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
पिछले 24 घंटों में रक्षा मंत्रालय की तरफ से आई इस खबर ने देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
इस हल्के टैंक को खास तौर पर चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) जैसे पथरीले, ऊंचे और जमा देने वाली ठंड वाले इलाकों में तुरंत तैनात करने के लिए देश के भीतर ही डिजाइन किया गया है।
रक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी हथियारों के लिहाज से यह सफलता यूपीएससी (GS-3), सीडीएस और SSC GK Updates जैसी परीक्षाओं के लिए एक हॉट टॉपिक है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- ‘जोरावर’ टैंक का वजन मात्र 25 टन है, जो कि पारंपरिक टैंकों से बहुत कम है। कम वजन के कारण ही हमारी वायुसेना के मालवाहक विमान इसे आसानी से उड़ाकर सीधे बॉर्डर पर पहुंचा सकते हैं।
- वजन में हल्का होने के बावजूद इसके पास अचूक आर्टिलरी गन, एंटी-टैंक मिसाइलें दागने की ताकत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाला ड्रोन-रोधी सुरक्षा कवच मौजूद है।
- इसे डीआरडीओ ने भारत की जानी-मानी प्राइवेट कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ मिलकर बहुत ही कम समय में तैयार किया है।
- यह जांबाज टैंक सियाचिन या लद्दाख जैसी हाड़ कंपाने वाली माइनस 30 डिग्री की ठंड में भी बिना रुके अपना काम बखूबी कर सकता है। (डिफेंस सेक्टर की अन्य न्यूज़ के लिए भारतीय रक्षा क्षेत्र (DRDO) के नवीनतम करंट अफेयर्स देखें)।
पहाड़ी युद्ध कौशल में रणनीतिक बढ़त (Strategic Edge in Mountain Warfare)
▪️ अब आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि जब हमारे पास पहले से ही भीष्म और अर्जुन जैसे भारी-भरकम टैंक मौजूद हैं, तो हमें इस नए टैंक की जरूरत क्यों पड़ी?
असल में लद्दाख जैसी दुर्गम और ऊंची पहाड़ियों पर 50-60 टन वजनी भारी टैंकों को ले जाना और वहां की पतली हवा (कम ऑक्सीजन) में उन्हें चलाना लोहे के चने चबाने जैसा है।
ऐसे में 25 टन का फुर्तीला ‘जोरावर’ अपने दमदार पहाड़ी इंजन के दम पर दुश्मन की चौकियों के पास तेजी से पहुंच सकता है और भारतीय सेना को पहाड़ों पर अजेय बढ़त दिला सकता है।
अत्याधुनिक एम्फीबियस और तकनीकी विशेषताएं (Cutting-Edge Amphibious Features)
▪️ इस टैंक के अंदर एक स्मार्ट कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (Combat Management System) फिट किया गया है, जो जंग के मैदान की पल-पल की लाइव जानकारी कमांडर तक पहुंचाता है।
इसके अलावा, इस टैंक के पास एक जादुई खूबी भी है, यानी यह एक एम्फीबियस (Amphibious) टैंक है।
इसका मतलब यह हुआ कि यह जमीन पर दौड़ने के साथ-साथ पूर्वी लद्दाख की बर्फीली पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) जैसी गहरी झीलों और नदियों की लहरों को तैरकर भी पार कर सकता है, जो दुश्मन के होश उड़ाने के लिए काफी है।
Static GK Connect
- नोडल एजेंसी एवं स्थापना: डीआरडीओ (DRDO) यानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की स्थापना साल 1958 में की गई थी। इसके लिए तत्कालीन तकनीकी विकास प्रतिष्ठानों और रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) को आपस में मिलाया गया था। यह सीधे हमारे रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के अंतर्गत काम करता है।
- मुख्यालय एवं ध्येय वाक्य: डीआरडीओ का मुख्यालय देश की राजधानी नई दिल्ली में है। इसका बेहद प्रेरणादायक ध्येय वाक्य है “बलस्य मूलं विज्ञानम्” (यानी शक्ति का असली आधार विज्ञान है)।
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में भारतीय सेना और DRDO द्वारा सफलतापूर्वक परीक्षित ‘जोरावर’ (Zorawar) मुख्य रूप से क्या है?
a) एक स्वदेशी स्टील्थ ड्रोन
b) एक स्वदेशी लाइट टैंक (Light Tank) ✅
c) एक एंटी-सबमरीन टॉरपीडो
d) एक उन्नत रडार प्रणाली
Q2. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की स्थापना किस वर्ष हुई थी और यह किस मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?
a) 1969, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
b) 1958, रक्षा मंत्रालय ✅
c) 1962, गृह मंत्रालय
d) 1947, प्रधान मंत्री कार्यालय
Q3. ‘जोरावर’ लाइट टैंक का कुल वजन लगभग कितना है, जो इसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एयरलिफ्ट करने के लिए उपयुक्त बनाता है?
a) 45 टन
b) 35 टन
c) 25 टन ✅
d) 15 टन
Environment Current Affairs

पर्यावरण मंत्रालय ने National Clean Air Programme (NCAP) के तहत वायु गुणवत्ता सुधार के लिए जारी किए कड़े मानदंड
बढ़ते वायु प्रदूषण और जहरीली हवाओं की समस्या आज के समय की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।
इसी संकट को दूर करने के लिए हमारे केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (National Clean Air Programme – NCAP) के तहत एक बड़ा कदम उठाया है।
आज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने देश के उन 130 से ज्यादा शहरों के लिए नए और बेहद सख्त नियम जारी किए हैं, जो हवा की गुणवत्ता के मामले में फिसड्डी रहे हैं।
इन शहरों को सरकार की भाषा में ‘नॉन-अटेनमेंट सिटीज’ (Non-attainment Cities) कहा जाता है।
इस नए फैसले का अंतिम लक्ष्य साल 2026 के खत्म होने तक इन शहरों की हवा में मौजूद हानिकारक पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) के स्तर को 40% तक कम करना है।
पर्यावरण सुरक्षा और यूनाइटेड नेशंस के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़ा होने के कारण यह टॉपिक सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए बहुत मायने रखता है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- इन नए कड़े नियमों के तहत अब लोकल नगर निगमों और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड्स को यह खुली छूट दे दी गई है कि वे शहर में गंदगी फैलाने वाले उद्योगों और बिना नियमों के धूल उड़ाने वाले कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सीधे बड़ा जुर्माना ठोक सकें।
- अब हर शहर के लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि वे अपने कंक्रीट के जंगलों के बीच ‘ग्रीन बफर ज़ोन’ (Green Buffer Zones) (यानी पेड़ों की घनी बेल्ट) तैयार करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रिक बसों (EVs) को तेजी से शामिल करें।
- हवा कितनी साफ है, इसकी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और जनता की शिकायतों के तुरंत निपटारे के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एक हाई-टेक पोर्टल लाने जा रहा है।
- इस नए सिस्टम में ‘प्रदूषक भुगतान करे’ (Polluter Pays Principle) के कड़े नियम को आधार बनाया गया है, यानी जो प्रदूषण फैलाएगा, जेब से भारी हर्जाना भी वही भरेगा।
गैर-प्राप्ति वाले शहरों पर विशेष ध्यान (Special Focus on Non-attainment Cities)
▪️ अब आपके दिमाग में यह बात आ सकती है कि यह ‘गैर-प्राप्ति वाले शहर’ (Non-attainment Cities) क्या होते हैं?
तो सरल शब्दों में समझें, यह उन शहरों की ब्लैक लिस्ट है जो पिछले लगातार पांच सालों से केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (NAAQS) को हासिल करने में नाकाम रहे हैं।
नए सख्त नियमों के मुताबिक, इन सभी शहरों को अब अपने इलाके का नया ‘एयर एक्शन प्लान’ (Air Action Plan) बनाकर देना होगा और हर छह महीने में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार के टेबल पर रखनी होगी।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव (Public Health and Economic Impact)
▪️ प्रदूषित हवा में सांस लेने से न केवल लोगों को फेफड़ों और दिल की गंभीर बीमारियां होती हैं, बल्कि इसका सीधा असर हमारे देश की आर्थिक तरक्की पर भी पड़ता है।
जब देश के लोग बीमार होंगे, तो फैक्ट्रियों और दफ्तरों में काम प्रभावित होगा और इलाज पर भी मोटा खर्च होगा जो हमारी जीडीपी (GDP) को भारी नुकसान पहुंचाता है।
सरकार के इन सख्त कदमों से न केवल हमारे स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च बचेगा, बल्कि हम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-3 (SDG-3: Good Health and Well-being) को भी समय पर हासिल कर पाएंगे।
Static GK Connect
- लॉन्च और रणनीति: केंद्र सरकार ने देश से प्रदूषण भगाने के इरादे से पहली बार जनवरी 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) की शुरुआत की थी। यह हमारे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक बहुत ही महत्वाकांक्षी और समयबद्ध योजना है।
- वैधानिक निकाय: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एक वैधानिक (Statutory) संस्था है। इसका गठन सबसे पहले जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत हुआ था, लेकिन आगे चलकर जब वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 बना, तो इसे हवा को साफ रखने के लिए भी सारी जरूरी शक्तियां और काम सौंप दिए गए।
Current Affairs MCQs
Q1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को केंद्र सरकार द्वारा पहली बार किस वर्ष लॉन्च किया गया था?
a) 2014
b) 2016
c) 2019 ✅
d) 2021
Q2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को निम्नलिखित में से किस अधिनियम के तहत अपनी शक्तियां और कार्य प्राप्त होते हैं?
a) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
b) वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 ✅
c) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
d) राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010
Q3. NCAP के तहत ‘गैर-प्राप्ति वाले शहर’ (Non-attainment Cities) मुख्य रूप से किन्हें संदर्भित करते हैं?
a) जो पांच वर्षों से राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं ✅
b) जहाँ केवल औद्योगिक प्रदूषण होता है
c) जहाँ वनों का आवरण 10% से कम है
d) जो तटीय क्षेत्रों में स्थित प्रदूषित शहर हैं