⚓ Appointments Current Affairs

📌 वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन बने भारत के नए नौसेना प्रमुख (Chief of the Naval Staff)
क्या आप जानते हैं कि हमारे देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने वाली भारतीय नौसेना को जल्द ही एक नया नेतृत्व मिलने जा रहा है?
जी हाँ, परीक्षा की दृष्टि से यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हाल ही में भारत सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, PVSM, AVSM, VSM को देश का अगला नौसेना प्रमुख (Chief of the Naval Staff) नियुक्त करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है ।
यह रणनीतिक नियुक्ति आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC Civil Services, NDA, CDS, SSC, और राज्य PCS के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में एक नए युग की शुरुआत को रेखांकित करती है।
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन 31 मई 2026 को आधिकारिक रूप से कार्यभार ग्रहण करेंगे। वह वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लेंगे जो इसी तारीख को अपनी सेवानिवृत्ति पूरी कर रहे हैं ।
‘Communication and Electronic Warfare’ के इस प्रख्यात विशेषज्ञ का कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक जारी रहने की संभावना है, जो देश के समुद्री हितों और नौसैनिक आधुनिकीकरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा ।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारत का 27वां नौसेना प्रमुख नियुक्त किया गया है, जो 31 मई 2026 को कार्यभार ग्रहण करेंगे ।
- वह 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन किए गए थे और उन्हें ‘Communication and Electronic Warfare’ का विशेषज्ञ माना जाता है ।
- उन्होंने भारतीय नौसेना के सबसे बड़े विमान वाहक पोत (Aircraft Carrier) INS Vikramaditya सहित कई अग्रणी युद्धपोतों की कमान संभाली है ।
- उनके असाधारण कमान और रणनीतिक नेतृत्व के सम्मान में उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से अलंकृत किया गया है ।
✴️ शानदार कमान और परिचालन पृष्ठभूमि (Distinguished Command and Operational Profile)
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का नौसैनिक करियर लगभग चार दशकों के असाधारण और समर्पित सेवा इतिहास से समृद्ध है ।
उन्होंने अपने कमान करियर के दौरान प्रमुख मिसाइल जहाजों INS Vidyut और INS Vinash, मिसाइल कार्वेट INS Kulish, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS Mysore और विमान वाहक पोत INS Vikramaditya का अत्यंत सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है ।
रियर एडमिरल के रूप में उन्होंने दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में मुख्य स्टाफ अधिकारी (प्रशिक्षण) के रूप में कार्य किया। वहां उन्होंने पूरी नौसेना की प्रशिक्षण प्रणाली को आधुनिक और कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
इसके अलावा, उन्होंने ‘Indian Naval Safety Team’ की स्थापना की जो आज नौसेना के सभी कार्यक्षेत्रों में परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित करती है ।
✴️ शैक्षणिक उत्कृष्टता और सैन्य प्रशिक्षण (Outstanding Academic and Training Credentials)
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन की शैक्षणिक योग्यता और बहु-विषयक विशेषज्ञता अत्यधिक प्रभावशाली है। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र हैं ।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से BSc डिग्री प्राप्त की है । इसके अतिरिक्त, उन्होंने कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ Science and Technology (CUSAT) से टेलीकम्यूनिकेशन में MSc किया है।
उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से डिफेंस स्टडीज में MA, मुंबई विश्वविद्यालय से रणनीतिक अध्ययन में MPhil और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में PhD की मानद उपाधि हासिल की है ।
उन्होंने यूके के जॉइंट सर्विसेज कमान एंड स्टाफ कॉलेज और यूएस नेवल वॉर कॉलेज से भी उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है ।
| श्रेणी (Category) | विवरण और संस्थान / जहाजों के नाम (Details & Names) |
|---|---|
| शैक्षणिक योग्यता (Academic Degrees) | JNU (BSc), CUSAT (MSc Telecommunications), King’s College London (MA), Mumbai University (MPhil & PhD) |
| सैन्य प्रशिक्षण संस्थान (Alumni Details) | NDA (Khadakvasla), JSCSC (Shrivenham, UK), US Naval War College (Newport, USA) |
| कमांड किए गए प्रमुख युद्धपोत (Commanded Ships) | INS Vidyut, INS Vinash, INS Kulish, INS Mysore, INS Vikramaditya |
| शीर्ष कमान नियुक्तियां (Top Assignments) | Western Naval Command (FOC-in-C), Vice Chief of the Naval Staff, Chief of Personnel |
📚 Static GK Connect
- भारतीय नौसेना की स्थापना: भारतीय नौसेना की आधुनिक शुरुआत औपनिवेशिक काल में रॉयल इंडियन नेवी के रूप में हुई थी, जिसे स्वतंत्रता के उपरांत 26 जनवरी 1950 को ‘भारतीय नौसेना’ (Indian Navy) के रूप में पुनर्गठित किया गया ।
- संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 53(2) के तहत भारत के राष्ट्रपति तीनों सशस्त्र सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के सर्वोच्च सेनापति (Supreme Commander) होते हैं।
- कमान संरचना (Command Structure): भारतीय नौसेना के पास तीन प्रमुख परिचालन कमानें हैं: पश्चिमी नौसेना कमान (मुख्यालय: मुंबई) , पूर्वी नौसेना कमान (मुख्यालय: विशाखापत्तनम), और दक्षिणी नौसेना कमान (मुख्यालय: कोच्चि) ।
- नौसेना दिवस (Navy Day): भारत में प्रतिवर्ष 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ (Operation Trident) के तहत कराची बंदरगाह पर किए गए साहसिक हमले की याद में मनाया जाता है।
🎯 Current Affairs MCQs
a) एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी
b) वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ✅
c) वाइस एडमिरल आरती सरीन
d) जनरल अनिल चौहान
🤔 Q2. नए नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन निम्नलिखित में से किस सैन्य क्षेत्र के विशेषज्ञ (Specialist) हैं?
a) Gunnery and Missile Warfare
b) Hydrography and Navigation
c) Communication and Electronic Warfare ✅
d) Submarine and Anti-Submarine Warfare
🤔 Q3. वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने निम्नलिखित में से किस विमान वाहक पोत (Aircraft Carrier) की कमान संभाली है?
a) INS Vikrant
b) INS Vikramaditya ✅
c) INS Viraat
d) INS Vishal
🚀 Science & Technology Current Affairs

📌 भारत ने उन्नत अग्नि (Agni) मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ किया सफल उड़ान परीक्षण
जरा सोचिए, एक ही मिसाइल हवा में ऊपर जाए और एक साथ कई अलग-अलग ठिकानों पर सटीक निशाना लगा दे! विज्ञान की भाषा में इसे ‘MIRV’ तकनीक कहते हैं।
भारत ने इस क्षेत्र में एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। हाल ही में भारत ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle’ (MIRV) तकनीक से लैस एक उन्नत अग्नि (Advanced Agni) मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है ।
यह परीक्षण भारतीय सामरिक रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह आगामी सिविल सेवा (UPSC) और अन्य राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं के मुख्य पाठ्यक्रम (GS Paper 3: Science & Tech and Defence) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस उड़ान परीक्षण के दौरान मिसाइल ने बहु-पेलोड (Multiple Payloads) को सफलतापूर्वक वहन किया। इन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में अलग-अलग भौगोलिक दूरियों पर स्थित विभिन्न लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता के साथ नष्ट कर दिया ।
यह प्रणाली भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Nuclear Deterrence) को मजबूत करते हुए देश की संप्रभुता सुनिश्चित करती है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- यह सफल परीक्षण 8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से रक्षा मंत्रालय और सेना की संयुक्त निगरानी में आयोजित किया गया था ।
- यह उन्नत अग्नि मिसाइल MIRV प्रणाली से सुसज्जित है, जो एक एकल मिसाइल के माध्यम से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर अचूक और सटीक प्रहार कर सकती है ।
- परीक्षण के दौरान विभिन्न ग्राउंड और शिप-आधारित रडार और टेलीमेट्री ट्रैकिंग स्टेशनों ने मिसाइल के लॉन्च से लेकर पेलोड्स के गिरने तक के पूरे प्रक्षेपवक्र (Trajectory) की निगरानी की ।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण की सफलता पर डीआरडीओ और सेना को बधाई देते हुए इसे देश की सुरक्षा तैयारियों के लिए क्रांतिकारी बताया ।
✴️ क्या है MIRV तकनीक और इसकी मारक क्षमता? (Understanding MIRV Technology and Lethality)
‘Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle’ (MIRV) तकनीक के तहत किसी बैलिस्टिक मिसाइल के अग्रभाग (Nose Cone) पर एक के बजाय कई परमाणु या पारंपरिक हथियार (Warheads) लगाए जा सकते हैं ।
अंतरिक्ष से वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते समय ये हथियार मुख्य मिसाइल से अलग होकर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर फैले विभिन्न सामरिक लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हैं ।
यह तकनीक शत्रु देश की ‘Anti-Missile Air Defence Shield’ को पूरी तरह भ्रमित और अप्रभावी कर देती है, जिससे हमले की सफलता दर बहुत बढ़ जाती है ।
✴️ आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र और सामरिक लाभ (Self-reliant Defence Ecosystem & Strategic Advantage)
इस उन्नत मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की प्रमुख प्रयोगशालाओं द्वारा भारतीय सार्वजनिक और निजी रक्षा उद्योगों के सक्रिय सहयोग से पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है ।
सामरिक विश्लेषकों के अनुसार, यह उन्नत संस्करण भारत की परमाणु “नो फर्स्ट यूज” (No First Use) नीति के तहत द्वितीय प्रहार क्षमता (Second Strike Capability) को अभूतपूर्व शक्ति और विश्वसनीयता प्रदान करता है। इससे क्षेत्र में सामरिक स्थिरता और संतुलन सुनिश्चित होता है।
| मिसाइल प्रणाली (Missile System) | मुख्य तकनीक (Core Technology) | मारक क्षमता / विशेषता (Operational Advantage) | विकासकर्ता (Developer) |
|---|---|---|---|
| उन्नत अग्नि (Advanced Agni) | MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल) | एक ही प्रक्षेपण से विभिन्न स्थानों पर कई लक्ष्यों को नष्ट करना | DRDO प्रयोगशालाएं और भारतीय उद्योग |
| अग्नि-V (Agni-V) | ICBM (अंतःमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल) | 5,000 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता, सॉलिड प्रोपेलेंट | रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) |
📚 Static GK Connect
- डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप: इसे पहले ‘व्हीलर द्वीप’ (Wheeler Island) के नाम से जाना जाता था, जो ओडिशा के भद्रक जिले के तट पर बंगाल की खाड़ी में स्थित है । सितंबर 2015 में भारत के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम के सम्मान में इसका नाम बदला गया था।
- DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन): इसकी स्थापना 1958 में रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) और अन्य तकनीकी संस्थानों को मिलाकर की गई थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और वर्तमान अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत हैं ।
- एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP): इस कार्यक्रम की शुरुआत 1983 में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में की गई थी, जिसके तहत पांच प्रमुख मिसाइल प्रणालियों (पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश, और नाग) का विकास सुनिश्चित किया गया था।
🎯 Current Affairs MCQs
a) श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)
b) डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा) ✅
c) बैरन द्वीप (अंडमान)
d) अमीनीदेवी द्वीप (लक्षद्वीप)
🤔 Q2. मिसाइल रक्षा प्रणाली के संदर्भ में ‘MIRV’ का मुख्य सामरिक कार्य क्या है?
a) मिसाइल की गति को प्रकाश की गति के करीब लाना
b) एक ही बैलिस्टिक मिसाइल से अलग-अलग स्थानों पर कई हथियार (Warheads) दागना ✅
c) मिसाइल को रडार के लिए पूरी तरह से अदृश्य बनाना
d) केवल मौसम संबंधी डेटा एकत्र करना
🤔 Q3. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के वर्तमान अध्यक्ष (Chairman) कौन हैं?
a) डॉ. जी. सतीश रेड्डी
b) डॉ. समीर वी. कामत ✅
c) श्री एस. सोमनाथ
d) डॉ. वी. कामकोटी
💼 Economy & Polity Current Affairs

📌 केंद्र सरकार ने नियमों को अधिसूचित कर चारों नए श्रम कोड (Four Labour Codes) पूरी तरह लागू किए
दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि हमारे देश के श्रम कानूनों में अब तक का सबसे बड़ा सुधार पूरी तरह से लागू हो चुका है?
यह खबर न केवल देश के करोड़ों कामगारों के जीवन को प्रभावित करेगी बल्कि आपकी परीक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है।
हाल ही में भारत सरकार ने पांच वर्षों से अधिक की लंबी प्रतीक्षा और कानूनी समीक्षा के बाद चारों नए श्रम कोड (Four Labour Codes) के संबंधित नियमों को आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचित कर दिया है।
इससे देश का अब तक का सबसे बड़ा श्रम कानून सुधार पूरी तरह से क्रियान्वित (Operationalised) हो गया है । यह व्यापक नीतिगत बदलाव यूपीएससी (GS Paper 2: Polity & Governance, GS Paper 3: Indian Economy) और एसएससी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस ऐतिहासिक कदम के तहत सरकार ने लगभग 29 पुराने, जटिल और विखंडित केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर उन्हें केवल 4 आधुनिक और सरल संहिताओं में समाहित कर दिया है ।
इन श्रम संहिताओं का मूल उद्देश्य देश में ‘Ease of Doing Business’ (व्यापार सुगमता) को बढ़ावा देना है। इसके साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग वर्कर्स (Gig Workers) को सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देना भी है ।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- इन चार संहिताओं में वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाएं संहिता 2020 शामिल हैं ।
- ये कोड मूल रूप से 21 नवंबर 2025 से लागू हुए थे, लेकिन नियमों की अनुपस्थिति के कारण कुछ परिचालन पहलू रुके हुए थे, जो अब राजपत्र में प्रकाशन के बाद पूरी तरह चालू हो चुके हैं ।
- इन नए नियमों के तहत साप्ताहिक कार्य घंटों को कड़ाई से अधिकतम 48 घंटों पर सीमित (Cap) कर दिया गया है ।
- नौकरी गंवाने वाले श्रमिकों के पुनर्कौशल और सहायता के लिए एक समर्पित ‘National Reskilling Fund’ (राष्ट्रीय पुनर्कौशल कोष) स्थापित किया गया है ।
✴️ वेतन संरचना और गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा (Wages Structure and Social Security Extension)
वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019) के तहत वेतन की परिभाषा को संशोधित किया गया है। इसके अनुसार मूल वेतन (Basic Pay), महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) और रिटेनिंग भत्ता कर्मचारी के कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए ।
इसके अतिरिक्त, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत भारत में पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे ओला, उबर, जोमैटो के डिलीवरी कर्मी) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत एग्रीगेटर्स को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1% से 2% योगदान देना होगा ।
✴️ कार्यस्थल सुरक्षा, health और महिलाओं के लिए समान अवसर (Workplace Safety and Gender Equality)
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाएं संहिता, 2020 (OSH Code, 2020) के तहत 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए नियोक्ताओं द्वारा मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच (Free Annual Health Check-ups) कराना अनिवार्य किया गया है ।
महिलाओं को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सभी पालियों (Night Shifts सहित) में काम करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते नियोक्ता उनकी पूर्ण सुरक्षा, परिवहन और सहमति सुनिश्चित करें ।
प्रत्येक कर्मचारी को नियुक्ति के समय एक औपचारिक लिखित नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना भी अब अनिवार्य कानूनी प्रावधान है ।
| नया श्रम कोड (New Labour Code) | समाहित किए गए केंद्रीय अधिनियम (Consolidated Legacy Acts) | प्रमुख क्रांतिकारी सुधार (Key Progressive Reforms) |
|---|---|---|
| वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages) | 4 अधिनियम (जैसे Minimum Wages Act, 1948) | सभी क्षेत्रों में लिंग-तटस्थ न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना और समय पर भुगतान |
| औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code) | 3 अधिनियम (जैसे Industrial Disputes Act, 1947) | फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट की शुरुआत, विवादों के त्वरित निपटान हेतु न्यायाधिकरण |
| सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security) | 9 अधिनियम (जैसे EPF Act, 1952) | पहली बार गिग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भविष्य निधि और मातृत्व लाभ का विस्तार |
| व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य… संहिता, 2020 (OSH Code) | 13 अधिनियम (जैसे Factories Act, 1948) | काम के घंटे प्रति सप्ताह 48 पर सीमित, महिलाओं को नाइट शिफ्ट सुरक्षा, नियुक्ति पत्र |
📚 Static GK Connect
- समवर्ती सूची का विषय: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) के तहत ‘श्रम’ (Labour) एक समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है (प्रविष्टि 22, 23, 24), जिसका अर्थ है कि केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं ।
- संवैधानिक प्रावधान: राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) के तहत अनुच्छेद 39(d) ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ की वकालत करता है, और अनुच्छेद 42 काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा मातृत्व राहत सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO): यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की एकमात्र त्रिपक्षीय एजेंसी है जो वैश्विक श्रम मानक निर्धारित करती है। इसकी स्थापना 1919 में वर्साय की संधि (Treaty of Versailles) के तहत की गई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।
🎯 Current Affairs MCQs
a) कुल पारिश्रमिक का 30%
b) कुल पारिश्रमिक का 40%
c) कुल पारिश्रमिक का 50% ✅
d) कुल पारिश्रमिक का 60%
🤔 Q2. नए व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संहिता (OSH Code) के तहत किस आयु वर्ग के श्रमिकों के लिए मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है?
a) 30 वर्ष या उससे अधिक
b) 35 वर्ष या उससे अधिक
c) 40 वर्ष या उससे अधिक ✅
d) 45 वर्ष या उससे अधिक
🤔 Q3. भारतीय संविधान की किस अनुसूची के तहत ‘श्रम’ (Labour) को समवर्ती सूची (Concurrent List) में स्थान दिया गया है?
a) पांचवीं अनुसूची
b) सातवीं अनुसूची ✅
c) नौवीं अनुसूची
d) ग्यारहवीं अनुसूची
🚀 Defence & Technology Current Affairs

📌 डीआरडीओ (DRDO) और वायुसेना ने स्वदेशी ग्लाइड हथियार ‘टारा’ (TARA) का किया सफल उड़ान परीक्षण
कल्पना कीजिए कि हमारे लड़ाकू विमानों से गिराए जाने वाले साधारण ‘डम्ब बम’ (Dumb Bombs) भी अब बिना किसी अतिरिक्त इंजन के हवा में तैरते हुए सीधे दुश्मन के ठिकाने पर अचूक वार कर सकें!
जी हाँ, भारत ने ऐसा कर दिखाया है। हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) ने संयुक्त रूप से ओडिशा के तट पर एक ऐतिहासिक परीक्षण किया है।
यह भारत के पहले पूरी तरह से स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली ‘टारा’ (Tactical Advanced Range Augmentation – TARA) का पहला सफल उड़ान परीक्षण (Maiden Flight-trial) था ।
यह अत्याधुनिक तकनीक रक्षा-उन्मुख परीक्षाओं और यूपीएससी (GS Paper 3: Space and Defence Technology) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
इस उड़ान परीक्षण को वायुसेना के सेपेकैट जगुआर (SEPECAT Jaguar) लड़ाकू विमान के माध्यम से अंजाम दिया गया। इसने 500 किलोग्राम के पारंपरिक ‘डम्ब बम’ को टारा मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट के साथ सटीक निर्देशित स्मार्ट म्यूनिशन में बदलते हुए अपने लक्ष्य पर अचूक प्रहार किया ।
यह तकनीक कम लागत में भारतीय वायुसेना की परिचालन मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाली है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- यह सफल परीक्षण 7 मई 2026 को ओडिशा के तट पर जगुआर लड़ाकू विमान से उड़ान भरकर आयोजित किया गया था ।
- ‘TARA’ का पूर्ण रूप ‘Tactical Advanced Range Augmentation’ है, जो एक स्वदेशी मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट है ।
- यह तकनीक कम लागत वाले पारंपरिक गुरुत्वाकर्षण बमों को सटीक-निर्देशित ग्लाइड हथियारों (Precision-Guided Glide Weapons) में परिवर्तित करती है ।
- इस प्रणाली को डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला रिसर्च सेंटर इमरात (Research Centre Imarat – RCI) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है ।
✴️ सामरिक स्टैंड-ऑफ क्षमता और एरोडायनामिक डिजाइन (Strategic Stand-off Capability and Aerodynamic Design)
टारा (TARA) हथियार प्रणाली को जब किसी लड़ाकू विमान से ऊंचाई पर छोड़ा जाता है, तो इसके फोल्डिंग विंग्स (Folding Wings) खुल जाते हैं और यह एरोडायनामिक लिफ्ट के सिद्धांत पर काम करते हुए लंबी दूरी तय करता है ।
इसका सबसे बड़ा परिचालन लाभ इसकी स्टैंड-ऑफ (Stand-off) क्षमता है। इसका अर्थ है कि वायुसेना के पायलट दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों (S-400 या अन्य मिसाइल शील्ड्स) की मारक रेंज के बाहर रहकर ही सुरक्षित दूरी से अपने लक्ष्य पर सटीक हमला कर सकते हैं ।
यह विमान और पायलट दोनों की सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करता है ।
✴️ गाइडेंस सिस्टम और विनिर्माण में आत्मनिर्भरता (Guidance Variants and Manufacturing Partners)
‘TARA’ गाइडेंस किट दो प्रमुख रूपों में उपलब्ध है: पहला उपग्रह सहायता प्राप्त टर्मिनल (SAT) कॉन्फ़िगरेशन जो कि 20 मीटर से कम का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) प्रदान करता है।
दूसरा थर्मल इमेजिंग सीकर (UC-IIR) संस्करण है जो 3 मीटर से कम की अत्यधिक पिनपॉइंट सटीकता (CEP) सुनिश्चित करता है ।
इस किट के विकास में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों (जैसे Adani Defence and Aerospace) ने विकास-सह-उत्पादन भागीदार (DcPP) के रूप में भाग लिया है। इससे आयातित प्रणालियों (जैसे अमेरिकी JDAM या इजरायली SPICE) पर भारत की निर्भरता समाप्त होगी ।
| प्रणाली का नाम (System Name) | विकासक देश / कंपनी (Developer Country / Org) | तकनीक और विशेषताएं (Technology & Key Features) |
|---|---|---|
| TARA | भारत (DRDO – RCI) | स्वदेशी ग्लाइड किट, SAT और UC-IIR सीकर विकल्प, CEP < 3-20 मीटर |
| JDAM | संयुक्त राज्य अमेरिका (US) | जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन, GPS/INS आधारित वैश्विक गाइडेंस किट |
| SPICE | इजरायल (Rafael Advanced Defense) | इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेंस ग्लाइड किट, भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 में प्रयुक्त |
📚 Static GK Connect
- अनुसंधान केंद्र इमरात (RCI): हैदराबाद में स्थित यह प्रयोगशाला डीआरडीओ के मिसाइल एविओनिक्स, गाइडेंस और नेविगेशन प्रणालियों के विकास का प्रमुख केंद्र है, जिसकी आधारशिला डॉ. कलाम ने रखी थी ।
- लड़ाकू विमान ‘जगुआर’: सेपेकैट जगुआर (SEPECAT Jaguar) एक एंग्लो-फ्रेंच (ब्रिटिश और फ्रांसीसी संयुक्त) मूल का गहरा हमला करने वाला लड़ाकू विमान है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा भारत में लाइसेंस के तहत असेंबल किया गया था।
- अन्य स्वदेशी ग्लाइड बम: भारत ‘स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन’ (SAAW) का विकास कर चुका है, जिसकी रेंज 100 किमी है । इसके अलावा डीआरडीओ 500 किलोग्राम और 1000 किलोग्राम वजन वाले ‘गौतम’ (Gautham) और ‘गौरव’ (Gaurav) ग्लाइड बमों पर भी काम कर रहा है ।
🎯 Current Affairs MCQs
a) Tactical Air Range Augmentation
b) Tactical Advanced Range Augmentation ✅
c) Target Acquisition and Reconnaissance Aircraft
d) Terminal Air Defence Radar Array
🤔 Q2. ‘टारा’ (TARA) हथियार प्रणाली मुख्य रूप से किस श्रेणी के सैन्य हथियारों के अंतर्गत आती है?
a) एंटी-सबमरीन टॉरपीडो
b) क्रूज मिसाइल रक्षा प्रणाली
c) स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली (Indigenous Glide Weapon System) ✅
d) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM)
🤔 Q3. ‘टारा’ (TARA) हथियार प्रणाली के उपग्रह-सहायता प्राप्त टर्मिनल (SAT) गाइडेंस संस्करण का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) कितना है?
a) 3 मीटर से कम
b) 10 मीटर से कम
c) 20 मीटर से कम ✅
d) 50 मीटर से कम
🏛️ National Seminars & Polity Current Affairs

📌 राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) ने मुंबई में ‘पारसी समुदाय’ के संरक्षण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की
प्यारे दोस्तों, भारत की संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविधता है। इसी विविधता को संजोने और हमारे देश के एक बेहद सम्मानित लेकिन घटती आबादी वाले पारसी समुदाय के संरक्षण के लिए एक खास प्रयास किया गया है।
हाल ही में भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities – NCM) ने मुंबई के यशवंतराव चव्हाण केंद्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है ।
इस संगोष्ठी का विषय “आधुनिक भारत में पारसी: सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक पथों का संचालन” (Parsis in Modern India: Navigating Cultural and Socio-Economic Pathways) था।
यह विषय आगामी सिविल सेवा परीक्षाओं (UPSC GS Paper 1 – Society and Social Issues & GS Paper 2 – Polity) के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।
केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस संगोष्ठी को संबोधित किया। उन्होंने भारत की समृद्धि में पारसी समुदाय की अभूतपूर्व भूमिका को रेखांकित किया।
साथ ही, उनकी तेजी से घटती जनसंख्या (Declining Population) को नियंत्रित करने के लिए सरकारी प्रतिबद्धता को भी दोहराया ।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- यह संगोष्ठी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ज्ञान भागीदारों टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) और परजोर फाउंडेशन (Parzor Foundation) के सहयोग से आयोजित की गई ।
- गणमान्य व्यक्तियों ने पारसी समुदाय की विरासत, इतिहास और जनसांख्यिकी को दर्शाने वाली एक विशेष ‘Coffee Table Book’ का विमोचन किया ।
- जैन धर्म, बौद्ध धर्म और पारसियों से संबंधित ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित एक संकलन (Compendium) 19 मई 2026 को नई दिल्ली में लॉन्च किया जाएगा ।
- सरकार ने पारसी संस्कृति और उनकी पवित्र अवेस्तन भाषा (Avestan Language) को पुनर्जीवित करने के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की ।
✴️ जनसांख्यिकीय संकट और ‘जियो पारसी’ योजना का पुनर्मूल्यांकन (Demographic Crisis & Jiyo Parsi Scheme)
पारसी समुदाय भारत का सबसे छोटा धार्मिक अल्पसंख्यक समूह है। वर्तमान समय में घटती जन्म दर, वृद्ध होती आबादी और एकल परिवार संरचनाओं के कारण यह गंभीर जनसांख्यिकीय संकट का सामना कर रहा है ।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के तहत सरकार हर अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है ।
उन्होंने समुदाय के प्रतिनिधियों से भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘जियो पारसी’ (Jiyo Parsi) योजना को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के लिए नए सुझाव और भागीदारी मांगी ।
✴️ पारसी समुदाय का ऐतिहासिक और वस्त्र शिल्प योगदान (Historical & Craft Contribution)
यद्यपि पारसी समुदाय संख्या में बहुत कम है, परंतु टाटा परिवार द्वारा 1920 की पहली भारतीय ओलंपिक टीम को प्रायोजित करने जैसी ऐतिहासिक पहलों में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। 1880 के दशक में पहली भारतीय क्रिकेट टीम की स्थापना भी उन्होंने ही की थी।
तकनीकी सत्रों के दौरान गुजरात की समृद्ध पारसी वस्त्र परंपराओं जैसे तंचोई (Tanchoi), सुरती घाट नू कपड़ू (Surti Ghat Nu Kapdu) और बाफ्टा (BAFTA) वस्त्रों के संरक्षण पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही एफ.टी. अल्पाईवाला संग्रहालय (F.T. Alpaiwalla Museum) के आधुनिकीकरण पर भी सहमति बनी ।
| योजना / संगठन (Scheme / Org) | मुख्य उद्देश्य (Primary Objective) | संबद्ध मंत्रालय / भागीदार (Nodal Ministry / Partner) |
|---|---|---|
| जियो पारसी योजना (Jiyo Parsi) | वैज्ञानिक तकनीकों (जैसे IVF) द्वारा पारसी आबादी को स्थिर करना और बढ़ाना | अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) |
| अवेस्तन भाषा पुनरुद्धार (Avestan Language) | पारसी समुदाय की प्राचीन भाषा, संस्कृति और ग्रंथों का संरक्षण | राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) |
| परजोर फाउंडेशन (Parzor Foundation) | पारसी-ज़ोरोस्ट्रियन संस्कृति, वस्त्र शिल्प और मौखिक इतिहास का संरक्षण | यूनेस्को (UNESCO) और अल्पसंख्यक मंत्रालय |
📚 Static GK Connect
- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM): इसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) के रूप में की गई थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
- संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार है। अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार प्रदान करता है।
- अल्पसंख्यक समुदायों का दर्जा: वर्तमान में भारत में छह समुदायों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है: मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी (ज़ोरोस्ट्रियन), और जैन (2014 में जोड़ा गया)।
🎯 Current Affairs MCQs
a) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU)
b) टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) और परजोर फाउंडेशन ✅
c) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)
d) भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR)
🤔 Q2. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) की स्थापना किस वर्ष एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) के रूप में की गई थी?
a) 1950
b) 1978
c) 1992 ✅
d) 2005
🤔 Q3. पारसी वस्त्र परंपराओं के संदर्भ में ‘तंचोई’ (Tanchoi) और ‘बाफ्टा’ (BAFTA) मुख्य रूप से किस भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी ऐतिहासिक कलाएं हैं?
a) तमिलनाडु
b) पंजाब
c) गुजरात ✅
d) असम