Economy & Banking Current Affairs

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा केंद्र सरकार को ₹2.86 लाख करोड़ का ऐतिहासिक लाभांश हस्तांतरण
Intro Summary
नमस्ते दोस्तों! क्या आप जानते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था में हाल ही में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है?
दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सेंट्रल बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2,86,588.46 करोड़ का एक ऐतिहासिक डिविडेंड (Surplus) देने का फैसला किया है।
अब आप सोच रहे होंगे कि यह इतना खास क्यों है? दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, यह पैसा भारत सरकार के लिए एक बड़े ‘Fiscal Cushion’ (राजकोषीय बफर) का काम करेगा।
अगर आप UPSC या Banking परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो यह विषय आपके Daily Current Affairs नोट्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
यह Fiscal Deficit, Government Borrowing और RBI के Economic Capital Framework (ECF) को समझने के लिए एक बेहतरीन केस स्टडी है।
सीधे शब्दों में कहें तो, इस कदम से न सिर्फ हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेज़ी आएगी, बल्कि बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) भी कंट्रोल में रहेगी, जिससे हमारी इकॉनमी को एक गज़ब की स्थिरता मिलेगी।
तो चलिए, पिछले 24 घंटों की इस सबसे बड़ी आर्थिक न्यूज़ का थोड़ा गहराई से विश्लेषण करते हैं!
मुख्य बातें (Key Highlights)
- ऐतिहासिक लाभांश (Record Dividend Payout): RBI ने इस बार जो 2.87 लाख करोड़ रुपये का ट्रांसफर किया है, उसने पिछले साल के 2.69 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। मजे की बात यह है कि यह रकम बजट में लगाए गए अनुमान से कहीं ज़्यादा है!
- आकस्मिक जोखिम बफर (Contingent Risk Buffer – CRB): RBI ने बड़ा ही स्मार्ट फैसला लेते हुए अपनी बैलेंस शीट के 6.5% हिस्से को CRB के रूप में रिज़र्व रखा है। यह 5.5% से 7.5% की तय लिमिट के बिल्कुल बीच का एक सेफ ज़ोन है।
- बैलेंस शीट में अभूतपूर्व विस्तार (Balance Sheet Expansion): 31 मार्च 2026 तक आते-आते RBI की बैलेंस शीट में 20.61% का तगड़ा उछाल आया है, और यह 91,97,121.08 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। यह दिखाता है कि रिज़र्व बैंक ने विदेशी और घरेलू बाज़ारों में कितने बड़े पैमाने पर काम किया है।
- आय और व्यय वृद्धि (Income & Expenditure Surge): पिछले साल के मुकाबले इस बार RBI की ग्रॉस इनकम (Gross Income) में 26.42% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं रिस्क प्रोविज़न से पहले कुल खर्च में 27.60% का इज़ाफा हुआ है।
- पूंजी आवंटन (Capital Allocation): अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत को देखते हुए, बोर्ड ने FY26 के लिए कंटींजेंट रिस्क बफर (CRB) में ₹1,09,379.64 करोड़ डालने की मंज़ूरी दी है। ज़रा सोचिए, यह पिछले साल के ₹44,861.70 करोड़ के मुकाबले कितना बड़ा अमाउंट है!
राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और बाज़ार तरलता पर इसका बहुआयामी प्रभाव
यह बड़ा सरप्लस केंद्र सरकार के ‘Fiscal Math’ यानी राजकोषीय गणना के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
अगर हम अर्थशास्त्रियों की मानें, तो भारत सरकार अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य (GDP का 4.3%) को हासिल करने को लेकर भारी दबाव में थी।
कच्चे तेल (Crude Oil) और फर्टिलाइज़र के ग्लोबल दाम बढ़ने से हमारा इम्पोर्ट बिल तेज़ी से बढ़ रहा था, लेकिन RBI का यह पैसा इस दबाव को काफी हद तक हल्का कर देगा।
अब सवाल यह है कि इसका फायदा क्या होगा? जब सरकार को RBI से इतना सारा पैसा (Non-tax Revenue के रूप में) मिल जाता है, तो उसे बाज़ार से कर्ज (Market Borrowing) लेने की ज़रूरत कम पड़ती है।
सरकार जब बाज़ार से कम उधार लेती है, तो इसका सीधा और पॉजिटिव असर हमारे बॉन्ड मार्केट (Bond Market) पर पड़ता है। अभी 10-साल का बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड 7.09% पर चल रहा है।
जब बाज़ार में सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) कम आती हैं, तो उनकी डिमांड बढ़ जाती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं और यील्ड नीचे आ जाती है।
यील्ड घटने का मतलब है कि सरकार और प्राइवेट कंपनियों, दोनों के लिए लोन लेना सस्ता हो जाता है। इससे बाज़ार में निवेश (Private Capex) बढ़ता है और नई नौकरियाँ पैदा होती हैं।
हालांकि, कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि टैक्स कलेक्शन में कमी और सब्सिडी के भारी बोझ को देखते हुए शायद यह पैसा भी पूरी तरह काफी न हो, लेकिन इसने तात्कालिक रूप से सरकार को एक बड़ी राहत ज़रूर दी है।
आर्थिक पूंजी ढांचा (Economic Capital Framework – ECF) का विकास और रणनीतिक महत्व
क्या आप जानते हैं कि RBI सरकार को यह सारा पैसा किस नियम के तहत देता है? यह भारी-भरकम लाभांश संशोधित ‘Economic Capital Framework’ (ECF) के कड़े नियमों के तहत दिया गया है।
इस ECF का असली मकसद यह पक्का करना है कि कल को अगर कोई भी ग्लोबल या घरेलू आर्थिक संकट (जैसे महंगाई, मंदी या युद्ध) आ जाए, तो हमारे रिज़र्व बैंक के पास उससे निपटने के लिए भरपूर रिस्क बफर (Risk Buffers) मौजूद हों.
लेकिन साथ ही, ECF यह भी तय करता है कि ज़रूरत से ज़्यादा पैसा RBI के पास बेकार न पड़ा रहे, बल्कि उसे सरकार को दे दिया जाए ताकि उससे लोक कल्याण (Public Welfare) और इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो सके।
इस ECF की नींव 2019 में बिमल जालान समिति (Bimal Jalan Committee) ने रखी थी। उन्होंने कहा था कि RBI को अपने ‘कंटींजेंट रिस्क बफर’ (CRB) को 5.5% से 7.5% के बीच रखना चाहिए।
इस बार RBI ने इसे 6.5% पर रखा है। यह दिखाता है कि रिज़र्व बैंक अपनी आज़ादी (Financial Autonomy) और देश के आर्थिक जोखिमों को मैनेज करने के बीच कितना शानदार बैलेंस बना कर चल रहा है।
फॉरेक्स रिज़र्व (Forex Reserves) की वैल्यू बढ़ने और ओपन मार्केट ऑपरेशंस से हुई कमाई ने इस बार के लाभांश को इतना बड़ा बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
Static GK Connect
| संगठन / विधिक प्रावधान / अवधारणा | विस्तृत जानकारी (UPSC/SSC परीक्षा हेतु) |
|---|---|
| नोडल संस्था (Nodal Body) | भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India – RBI) |
| स्थापना एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि | 1 अप्रैल 1935 (Hilton Young Commission की सिफारिश पर); राष्ट्रीयकरण (Nationalization): 1 जनवरी 1949; मुख्यालय: मुंबई |
| महत्वपूर्ण वैधानिक अधिनियम (Statutory Act) | RBI Act, 1934 – इसी अधिनियम के तहत रिज़र्व बैंक की शक्तियों और कार्यों को परिभाषित किया गया है। |
| अधिशेष हस्तांतरण का कानूनी आधार | RBI अधिनियम, 1934 की धारा 47 (Section 47) के तहत मुनाफे (Profits) का आवंटन किया जाता है। प्रावधान है कि खराब और संदिग्ध ऋणों, संपत्तियों के मूल्यह्रास के प्रावधान के बाद शेष मुनाफा केंद्र को जाएगा। |
| आर्थिक पूंजी ढांचा (ECF) समिति | बिमल जालान समिति (Bimal Jalan Committee, 2019) – इस समिति ने RBI के अतिरिक्त भंडार को सरकार को हस्तांतरित करने के लिए नियम और सीमाएँ (5.5% – 7.5% CRB) तय की थीं। |
| कंटींजेंट रिस्क बफर (CRB) | यह RBI की आकस्मिक जोखिम बफर निधि है, जिसे मौद्रिक और वित्तीय अस्थिरता, क्रेडिट जोखिम और परिचालन जोखिमों को अवशोषित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। |
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा केंद्र सरकार को किए गए 2.86 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष हस्तांतरण (Surplus Transfer) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह हस्तांतरण RBI अधिनियम, 1934 की धारा 47 के तहत एक वैधानिक अनिवार्यता है।
2. RBI ने ‘आकस्मिक जोखिम बफर’ (Contingent Risk Buffer – CRB) को अपनी बैलेंस शीट के 6.5% पर बनाए रखा है, जो बिमल जालान समिति की अनुशंसित सीमा के भीतर है।
3. ECF (Economic Capital Framework) के अनुसार, RBI को अपनी पूरी शुद्ध आय (Net Income) बिना किसी जोखिम प्रावधान के सरकार को हस्तांतरित करनी होती है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3
✅ a) केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation): चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं। पहला कथन बिल्कुल सही है क्योंकि RBI Act, 1934 की धारा 47 साफ-साफ कहती है कि मुनाफे का हिस्सा सरकार को देना होगा। दूसरा कथन भी एकदम सही है; जालान समिति ने CRB को 5.5% से 7.5% रखने को कहा था, और RBI ने इसे 6.5% रखा है। लेकिन तीसरा कथन गलत हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ECF का पूरा मकसद ही यह है कि पैसा सरकार को देने से पहले RBI अपने लिए ‘रिस्क प्रोविजन’ (आपातकाल के लिए फंड) ज़रूर अलग रखे। पूरी की पूरी कमाई कभी ट्रांसफर নয়া की जाती!
Q2. एक बड़े RBI लाभांश हस्तांतरण (Dividend Payout) का भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित मैक्रोइकोनॉमिक प्रभाव (Macroeconomic Impact) क्या होगा?
a) यह बाज़ार में तरलता को सोख लेगा और 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड को अनियंत्रित रूप से बढ़ाएगा।
b) यह सरकार की बाज़ार उधारी आवश्यकताओं को कम करेगा, जिससे बॉन्ड यील्ड में कमी आएगी और वित्तीय स्थिरता का समर्थन होगा।
c) इससे सरकार के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) में तत्काल और अत्यधिक वृद्धि होगी, जिससे क्रेडिट रेटिंग गिर जाएगी।
d) यह तुरंत प्रभाव से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को सभी क्षेत्रों में 100% कर देगा।
✅ b) यह सरकार की बाज़ार उधारी आवश्यकताओं को कम करेगा, जिससे बॉन्ड यील्ड में कमी आएगी और वित्तीय स्थिरता का समर्थन होगा।
व्याख्या (Explanation): ध्यान दीजिए, जब सरकार के पास RBI से एक मुश्त इतना बड़ा पैसा (Non-tax revenue) आ जाता है, तो ज़ाहिर सी बात है सरकार को बाहर से लोन (Market Borrowing) कम लेना पड़ेगा। जब सरकार बाज़ार में कम बॉन्ड्स लाएगी (सप्लाई कम होगी), तो उनकी कीमत बढ़ेगी और इकोनॉमिक्स के नियम के हिसाब से यील्ड (Yield) कम हो जाएगी। यील्ड कम होने से बाज़ार में ब्याज दरें स्थिर रहती हैं जो हमारी इकोनॉमी के लिए बहुत अच्छी खबर है। इसलिए विकल्प (b) आपका सही उत्तर है।
Q3. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की बैलेंस शीट के संदर्भ में, ‘कंटींजेंट रिस्क बफर’ (CRB) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे सटीक है?
a) यह वह राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों (Commercial Banks) को मौद्रिक नीति के तहत RBI के पास अनिवार्य नकद रिज़र्व (CRR) के रूप में रखनी होती है।
b) यह विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का वह हिस्सा है जो केवल अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के विशेष आहरण अधिकार (SDR) का प्रतिनिधित्व करता है।
c) यह केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट का वह विशिष्ट हिस्सा है जिसे मौद्रिक, विनिमय दर और वित्तीय अस्थिरता के जोखिमों को अवशोषित करने के लिए रणनीतिक रूप से बनाए रखा जाता है।
d) यह सरकार द्वारा RBI को दी गई वह गारंटी है जिसका उपयोग केवल युद्ध जैसी राष्ट्रीय आपात स्थितियों में किया जा सकता है।
✅ c) यह केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट का वह विशिष्ट हिस्सा है जिसे मौद्रिक, विनिमय दर और वित्तीय अस्थिरता के जोखिमों को अवशोषित करने के लिए रणनीतिक रूप से बनाए रखा जाता है।
व्याख्या (Explanation): कंटींजेंट रिस्क बफर (CRB) असल में RBI की अपनी ‘गुल्लक’ या सेफ्टी नेट है। क्योंकि RBI देश का आखिरी मददगार (Lender of Last Resort) है और उसे करेंसी मार्केट में भी उतरना पड़ता है, इसलिए उसे कई रिस्क लेने पड़ते हैं। भविष्य में अगर कोई बड़ा आर्थिक झटका लगे, तो उससे निपटने के लिए जो पैसा RBI अलग से बचाकर रखता है, उसी को CRB कहते हैं। बिमल जालान समिति ने इसे 5.5% से 7.5% के बीच रखने को कहा था। इसलिए विकल्प (c) बिल्कुल सही है।
Science & Technology Current Affairs

विश्व का पहला AI-आधारित प्लांट जीनोम-एडिटिंग प्लेटफॉर्म ‘Plant-OpenCRISPR1’ विकसित
Intro Summary
दोस्तों, ज़रा सोचिए अगर हम बिना किसी बाहरी जीन को मिलाए, सिर्फ AI की मदद से फसलों को बीमारियों से बचा सकें?
बिल्कुल ऐसा ही कुछ कमाल भारत ने कर दिखाया है! हाल ही में, बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संगम ने कृषि विज्ञान में एक नई क्रांति ला दी है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कटक स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI) के वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला AI-बेस्ड प्लांट जीनोम-एडिटिंग प्लेटफॉर्म ‘Plant-OpenCRISPR1 (POC1)’ विकसित करके इतिहास रच दिया है।
डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला की टीम ने चावल (Rice) को एक मॉडल के रूप में इस्तेमाल कर इस तकनीक को कामयाबी से साबित किया है।
UPSC (GS Paper 3: Science & Tech / Agriculture) की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह टॉपिक सुपर इम्पोर्टेन्ट है!
ऐसा इसलिए क्योंकि यह तकनीक पुरानी CRISPR-Cas9 की कमियों को दूर करती है और हमें बिना किसी विदेशी जीन (Foreign Gene) के, क्लाइमेट-रेज़िलिएंट (Climate-resilient) और अच्छी उपज वाली फसलें देने का रास्ता साफ करती है।
आज जब पूरी दुनिया फूड सिक्योरिटी (Food Security) के बड़े संकट से जूझ रही है, तब भारत का यह स्वदेशी इनोवेशन वैश्विक कृषि को एक नई दिशा दे सकता है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- AI-डिज़ाइन एंजाइम (AI-Designed Enzyme): पुरानी CRISPR तकनीकों में हम बैक्टीरिया से मिलने वाले प्राकृतिक एंजाइम (जैसे Cas9) का इस्तेमाल करते थे, लेकिन POC1 में पूरी तरह से AI द्वारा डिज़ाइन किए गए न्यूक्लियस (Nuclease) का यूज़ किया गया है।
- उत्पत्ति और विकास (Origin & Adaptation): मजे की बात यह है कि यह नया प्लेटफॉर्म मूल रूप से अमेरिका में इंसानी कोशिकाओं (Human Cells) के लिए बनाए गए AI न्यूक्लियस ‘OpenCRISPR-1 (OC1)’ पर आधारित है। हमारे वैज्ञानिकों ने बड़ी ही होशियारी से इसे पौधों (Plants) के जटिल सिस्टम के लिए कस्टमाइज़ कर लिया है।
- उन्नत संपादन क्षमता (Advanced Editing Features): इस नई प्रणाली की मदद से हम चावल में जीन नॉकआउट (Gene Knockout), बेस एडिटिंग (Base Editing) और प्राइम एडिटिंग जैसे जटिल जेनेटिक बदलावों को बहुत ही सटीक तरीके से कर सकते हैं।
- गैर-ट्रांसजेनिक दृष्टिकोण (Non-Transgenic Approach): इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी बाहरी या विदेशी जीन को मिलाए बिना ही पौधों के अपने DNA में शानदार बदलाव कर सकती है। यही चीज़ इसे आम ‘जेनेटिकली मॉडिफाइड’ (GM) फसलों से बिल्कुल अलग और सुरक्षित बनाती है।
- ओपन-सोर्स और पेटेंट-फ्री (Open-Source Nature): सबसे अच्छी बात! इस एडवांस सिस्टम को पढ़ाई-लिखाई और व्यापारिक इस्तेमाल के लिए पूरी तरह ‘ओपन-सोर्स’ रखा गया है। यानी अब रिसर्चर्स को भारी-भरकम पेटेंट फीस नहीं चुकानी पड़ेगी।
पारंपरिक CRISPR और AI-डिज़ाइन एंजाइम की कार्यप्रणाली में मूलभूत अंतर
अगर हम पारंपरिक जीनोम एडिटिंग (खासकर नोबेल प्राइज़ जीतने वाली CRISPR-Cas9 तकनीक) की बात करें, तो यह पूरी तरह से बैक्टीरिया के इम्यून सिस्टम (Immune System) से मिलने वाले एंजाइमों पर टिकी होती है।
हालांकि ये काम तो अच्छा करते हैं, लेकिन पौधों में इनका इस्तेमाल करते वक्त एक बड़ी टेंशन होती है जिसे ‘ऑफ़-टारगेट इफेक्ट्स’ (Off-target effects) कहते हैं।
आसान भाषा में समझें तो, ये बैक्टीरियल एंजाइम कभी-कभी टारगेट जीन की बजाय DNA में किसी और जगह कट लगा देते हैं, जिससे अनचाहे म्यूटेशन हो सकते हैं।
इसके ठीक उलट, ‘Plant-OpenCRISPR1’ (POC1) को प्रोटीन डेटाबेस के विशाल भंडार पर प्रशिक्षित ‘Large Language Models’ (LLM) का यूज़ करके AI ने तैयार किया है।
ये AI वाले एंजाइम प्रकृति में तो नहीं पाए जाते, लेकिन जब बात पौधों के DNA को सटीकता (Precision) से काटने और जोड़ने की आती है, तो ये नेचुरल एंजाइम्स से कहीं ज़्यादा तेज़ और सुरक्षित होते हैं।
यह AI और सिंथेटिक बायोलॉजी (Synthetic Biology) की वह शानदार जुगलबंदी है जिसने जीन एडिटिंग की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया है।
कृषि जैव प्रौद्योगिकी (Agricultural Biotechnology) में इसके दूरगामी परिणाम और विनियामक लाभ
हम सब देख रहे हैं कि क्लाइमेट चेंज, बेमौसम बारिश और नई बीमारियों के कारण दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा (Food Security) खतरे में है।
POC1 का आना भारत को जीन-एडिटिंग के मामले में दुनिया का लीडर बना सकता है। क्योंकि यह तकनीक ‘नॉन-ट्रांसजेनिक’ है (यानी यह बाहर से कोई जीन नहीं डालती, बल्कि पौधे के अपने जीन को ही सुधारती है), इसलिए इसे जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गनिज़्म (GMO) के कड़े और विवादित नियमों से भी आज़ादी मिल सकती है।
भारत के नियमों की बात करें तो, SDN-1 और SDN-2 (Site-Directed Nuclease) कैटेगरी की जीन-एडिटेड फसलों को ‘जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति’ (GEAC) के कड़े टेस्ट से छूट मिली हुई है, क्योंकि इनमें कोई विदेशी DNA नहीं होता।
POC1 सीधे तौर पर इसी का फायदा उठा सकता है। इसका मतलब है कि अब हम कम समय और कम खर्चे में रोग-प्रतिरोधी (Disease-resistant), सूखे में टिकने वाली और ज़्यादा पोषण (Biofortified) वाली फसलें तैयार कर सकेंगे।
अंततः, यह हमारे किसानों की आय बढ़ाने का एक शानदार टूल साबित होगा।
Static GK Connect
| विषय (Topic) | महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (UPSC/SSC Facts) |
|---|---|
| नोडल अनुसंधान निकाय (Nodal Body) | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन कार्यरत एक स्वायत्त निकाय। |
| शोध संस्थान (Research Institute) | केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (Central Rice Research Institute – CRRI), कटक (ओडिशा)। (स्थापना: 1946) |
| जीनोम एडिटिंग (CRISPR) का वैज्ञानिक सिद्धांत | CRISPR (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats) एक ‘आणविक कैंची’ (Molecular Scissor) की तरह कार्य करता है जो गाइड RNA की मदद से DNA अनुक्रमों को पहचानता है और सटीक रूप से काटता/जोड़ता है। 2020 में इमैनुएल चारपेंटियर और जेनिफर डौडना को इसके लिए नोबेल मिला था। |
| जैव सुरक्षा विनियामक (Biotech Regulator) | भारत में आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) और उत्पादों की मंज़ूरी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) के तहत GEAC (Genetic Engineering Appraisal Committee) द्वारा दी जाती है, जो MoEFCC के अधीन कार्य करती है। |
| SDN तकनीक (Site-Directed Nuclease) | जीन एडिटिंग की तीन श्रेणियां होती हैं: SDN-1, SDN-2, और SDN-3। भारत सरकार ने SDN-1 और SDN-2 (बिना विदेशी जीन के) को GMO नियमों से छूट दी है। |
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में कृषि विज्ञान में चर्चा में रहे ‘Plant-OpenCRISPR1 (POC1)’ प्लेटफॉर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह विश्व का पहला AI-डिज़ाइन किया गया प्लांट जीनोम-एडिटिंग प्लेटफॉर्म है जिसे विशेष रूप से चावल की फसल पर मॉडल के रूप में मान्य किया गया है।
2. यह तकनीक संपादन के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किए जाने वाले प्राकृतिक बैक्टीरियल एंजाइम (जैसे Cas9) पर निर्भर होने के बजाय पूरी तरह से AI-डिज़ाइन किए गए एंजाइम का उपयोग करती है।
3. इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी सीमा यह है कि यह पौधों में अनिवार्य रूप से विदेशी जीवों के जीन (Foreign Genes) को पेश करके कार्य करता है, जिससे इसे कठोर GMO नियमों का सामना करना पड़ेगा।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3
✅ a) केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation): चलिए इसे चेक करते हैं। कथन 1 और 2 बिल्कुल सटीक हैं। ICAR-CRRI ने सच में दुनिया का पहला AI-बेस्ड प्लांट जीन एडिटर बनाया है जो नेचुरल एंजाइम की जगह AI द्वारा डिज़ाइन किए गए न्यूक्लियस का यूज़ करता है। लेकिन कथन 3 बिल्कुल गलत है। क्यों? क्योंकि POC1 की तो सबसे बड़ी खासियत ही यही है कि यह बिना किसी बाहरी जीन (Foreign Gene) को मिलाए काम करता है। इसी खूबी की वजह से यह GMO के कड़े नियमों और विवादों से बच जाता है!
Q2. कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर माने जाने वाले ‘Plant-OpenCRISPR1’ को भारत के किस प्रमुख शोध संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है?
a) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली
b) राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI), लखनऊ
c) केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI), कटक
d) सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB), हैदराबाद
✅ c) केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI), कटक
व्याख्या (Explanation): इस क्रांतिकारी तकनीक को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कटक (ओडिशा) स्थित ‘केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान’ (CRRI) के होनहार वैज्ञानिकों ने डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला की लीडरशिप में तैयार किया है। इसलिए, सही जवाब विकल्प (c) है।
Q3. जीनोम एडिटिंग के आधुनिक संदर्भ में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित न्यूक्लियस (जैसे OpenCRISPR-1) को पारंपरिक Cas9 और Cas12a की तुलना में वैज्ञानिक रूप से अधिक आशाजनक और उपयोगी क्यों माना जा रहा है?
a) क्योंकि AI-आधारित न्यूक्लियस केवल मानव कोशिकाओं में ही कार्य कर सकते हैं और उनका पौधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
b) क्योंकि वे प्राकृतिक एंजाइमों के महंगे बौद्धिक संपदा (IP) पेटेंट बंधनों से मुक्त हैं और पौधों के जटिल जीव विज्ञान में उच्च सटीकता (Precision) तथा कम ‘ऑफ़-टारगेट’ प्रभाव प्रदान करते हैं।
c) क्योंकि उनके संपादन के लिए किसी भी प्रकार के गाइड RNA या DNA अनुक्रम की आवश्यकता नहीं होती है, वे सीधे प्रोटीन को बदलते हैं।
d) क्योंकि वे स्वचालित रूप से पौधों में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की दर को रातोंरात दस गुना बढ़ा देते हैं।
✅ b) क्योंकि वे प्राकृतिक एंजाइमों के महंगे बौद्धिक संपदा (IP) पेटेंट बंधनों से मुक्त हैं और पौधों के जटिल जीव विज्ञान में उच्च सटीकता (Precision) तथा कम ‘ऑफ़-टारगेट’ प्रभाव प्रदान करते हैं。
व्याख्या (Explanation): देखिए, जो पुराने CRISPR (Cas9/Cas12a) एंजाइम हैं, वे भारी-भरकम पेटेंट (Patents) में फंसे हुए हैं, जिससे उनका यूज़ बहुत महंगा पड़ता है। साथ ही, वे पौधों में कई बार गलत जगह कट (Off-target mutations) लगा देते हैं। वहीं AI वाले एंजाइम (जैसे POC1) न सिर्फ ‘पेटेंट-लाइट’ और ओपन-सोर्स हैं, बल्कि ये एडिटिंग के काम में गज़ब के सटीक (Precise) और सुरक्षित हैं। इसलिए वैज्ञानिक इन्हें फ्यूचर मान रहे हैं। विकल्प (b) एकदम सही कारण है।
National & Schemes Current Affairs

वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए ‘JEEVAN’ मोबाइल ऐप और ‘SHATAYU’ केयरगिवर डैशबोर्ड का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ
Intro Summary
क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे घर के बुज़ुर्गों को डिजिटल दुनिया में कैसे सुरक्षित और सशक्त बनाया जा सकता है?
हाल ही में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) ने इसी दिशा में एक बेहद शानदार कदम उठाया है।
सरकार ने देश के वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए ‘JEEVAN’ मोबाइल एप्लिकेशन और ‘SHATAYU’ डैशबोर्ड लॉन्च किया है।
इसका सीधा मकसद भारत की तेज़ी से बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी के लिए एक सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक ‘Care Economy’ तैयार करना है।
UPSC (GS Paper 2 – Vulnerable Sections Welfare & E-governance) के नज़रिए से यह टॉपिक बहुत ज़रूरी है।
जैसे-जैसे भारत में बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ रही है, सरकार का यह कदम असंगठित केयरगिविंग (Caregiving) सेक्टर को एक प्रोफेशनल, रेगुलेटेड और ट्रैक करने लायक सिस्टम में बदलने की बड़ी पहल है।
पिछले 24 घंटों की यह खबर हमें दिखाती है कि कैसे टेक्नोलॉजी (E-governance) का इस्तेमाल समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- JEEVAN ऐप (JEEVAN App): यह बुज़ुर्गों के लिए एक ‘सिंगल-विंडो’ सिस्टम की तरह काम करेगा। यानी केंद्र और राज्य सरकार की सारी योजनाएं, पेंशन, और हेल्थ केयर की जानकारी उन्हें अब एक ही प्लैटफॉर्म पर मिल जाएगी।
- SHATAYU डैशबोर्ड (SHATAYU Dashboard): यह एक सेंट्रलाइज्ड (Centralized) नेशनल डैशबोर्ड है जिसका मेन काम जेरियाट्रिक केयरगिवर्स (बुज़ुर्गों की देखभाल करने वाले पेशेवरों) को ट्रैक करना और उन्हें प्रमाणित करना है, ताकि केयरगिवर्स की डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बना रहे।
- आपातकालीन सहायता (SOS Matrix): सुरक्षा के लिहाज़ से JEEVAN ऐप में एक ‘वन-टच पैनिक बटन’ दिया गया है। किसी भी इमरजेंसी में यह सीधे पुलिस, एम्बुलेंस और नेशनल एल्डर हेल्पलाइन से कनेक्ट कर देता है।
- इंस्टीट्यूशनल होम लोकेटर: अगर कोई बुज़ुर्ग अकेला रहता है, तो यह फीचर उन्हें जियो-टैग (Geo-tagged) की मदद से मंत्रालय द्वारा अप्रूव्ड नज़दीकी वृद्धाश्रम या डे-केयर सेंटर खोजने में मदद करेगा।
- केयर इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण: यह सब ‘Creating a Well-Functioning Care Economy’ नाम की एक नेशनल वर्कशॉप में लॉन्च किया गया, जो साफ दिखाता है कि सरकार अब टेक्नोलॉजी और समाज को साथ लेकर चलना चाहती है।
JEEVAN ऐप के तकनीकी आयाम और भारत का जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition)
आज हमारा भारत एक दिलचस्प जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) से गुज़र रहा है। भले ही अभी हम युवा आबादी (Demographic Dividend) का फायदा उठा रहे हों, लेकिन यूनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि 2050 तक भारत की करीब 20% आबादी बुज़ुर्ग होगी।
दूसरी तरफ, अब जॉइंट फैमिली सिस्टम टूट रहा है और छोटे परिवार (Nuclear Families) बन रहे हैं। ऐसे में बुज़ुर्गों का अकेलापन और उन्हें सही समय पर मदद न मिल पाना एक बड़ा सामाजिक संकट बन गया है।
इसी मुश्किल को दूर करने के लिए ‘JEEVAN’ ऐप एक जीवनरक्षक टूल बनकर आया है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे पूरी तरह से बुज़ुर्गों की सहूलियत (Elder-centric design) को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
जिन्हें कम दिखाई या सुनाई देता है, उनके लिए बड़े फॉन्ट और वॉइस-नेविगेशन दिए गए हैं। इसका ‘SOS पैनिक बटन’ किसी भी क्राइम या मेडिकल इमरजेंसी में पुलिस और डॉक्टर को तुरंत अलर्ट कर सकता है।
सही मायनों में, यह ऐप ई-गवर्नेंस का वह मानवीय चेहरा है जो जनरेशन गैप और डिजिटल डिवाइड दोनों को खत्म कर रहा है।
SHATAYU डैशबोर्ड और भारत में ‘केयर इकोनॉमी’ (Care Economy) का औपचारिकरण
हमारे देश में बुज़ुर्गों या बीमारों की देखभाल का काम हमेशा से एक असंगठित (Unorganized) सेक्टर रहा है। अक्सर यह काम घरों की महिलाएं बिना किसी पगार के करती हैं।
‘SHATAYU’ डैशबोर्ड इसी असंगठित सिस्टम को एक प्रोफेशनल और फॉर्मल ‘Care Economy’ में बदलने का मास्टरस्ट्रोक है।
अब ज़िला और राज्य स्तर पर कितने ट्रेंड केयरगिवर्स (Geriatric Caregivers) मौजूद हैं, इसका रियल-टाइम डेटा इस डैशबोर्ड पर रहेगा। इसके दो बड़े फायदे होंगे।
पहला, बुज़ुर्गों को वेरिफाइड और प्रोफेशनल लोग मिलेंगे, जिससे उनके साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार का खतरा कम हो जाएगा।
दूसरा, सरकार को यह पता चल जाएगा कि किन टियर-2 या टियर-3 शहरों में ऐसे प्रोफेशनल्स की कमी है, ताकि वहां स्किल-डेवलपमेंट (Skill-development) कैम्प लगाए जा सकें।
यानी एक तरफ बुज़ुर्गों को बेहतर जीवन मिलेगा, तो दूसरी तरफ हज़ारों युवाओं के लिए रोज़गार (Employment) के नए दरवाज़े खुलेंगे।
Static GK Connect
| महत्वपूर्ण बिंदु / संवैधानिक प्रावधान | परीक्षा उपयोगी तथ्य (UPSC/State PCS/SSC) |
|---|---|
| नोडल मंत्रालय (Nodal Ministry) | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment – MoSJE)। |
| संवैधानिक प्रावधान (DPSP) | अनुच्छेद 41 (Article 41): यह स्पष्ट रूप से प्रावधान करता है कि राज्य, अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर, बेरोजगारी, बुढ़ापा (Old Age), बीमारी और विकलांगता के मामलों में काम पाने, शिक्षा पाने और सार्वजनिक सहायता प्राप्त करने के अधिकार को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा। |
| संवैधानिक प्रावधान (पंचायती राज) | अनुच्छेद 243G (11वीं अनुसूची): पंचायतों को सामाजिक कल्याण से संबंधित विषय सौंपे गए हैं, जिसमें विकलांगों और मानसिक रूप से मंद लोगों का कल्याण (Item 26) शामिल है। |
| महत्वपूर्ण वैधानिक अधिनियम (Act) | माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) – यह बच्चों और उत्तराधिकारियों के लिए माता-पिता को भरण-पोषण प्रदान करना कानूनी रूप से अनिवार्य बनाता है। |
| राष्ट्रीय हेल्पलाइन (National Helpline) | एल्डरलाइन (Elderline) – 14567 (वरिष्ठ नागरिकों की सहायता, दुर्व्यवहार निवारण और बचाव के लिए एक टोल-फ्री नंबर)। |
| सम्बंधित अम्ब्रेला योजना | अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) – इसके तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण सुनिश्चित किया जाता है। |
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लॉन्च किए गए ‘JEEVAN’ मोबाइल एप्लिकेशन का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है?
a) Joint Elder Evaluation & Volunteer Assistance Node
b) Joint Elderly Empowerment & Virtual Assistance Network
c) Justice for Elderly Empowerment and Virtual Action Node
d) Junior and Elder Empowerment & Virtual Assistance Network
✅ b) Joint Elderly Empowerment & Virtual Assistance Network
व्याख्या (Explanation): ‘JEEVAN’ का पूरा नाम “Joint Elderly Empowerment & Virtual Assistance Network” है। यह खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाया गया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहाँ उन्हें सरकारी योजनाओं, पेंशन, SOS इमरजेंसी सर्विसेज़ और केयर होम्स की सारी जियो-टैग्ड जानकारी एक ही जगह मिल जाती है। इसलिए विकल्प (b) सही है।
Q2. ‘SHATAYU’ (Senior Holistic Care Assistance and Training For Your Utility) डैशबोर्ड का प्राथमिक नीतिगत उद्देश्य क्या है?
a) यह भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान करने के लिए एक नया ऑनलाइन पेमेंट गेटवे है।
b) यह एक केंद्रीकृत, डेटा-संचालित राष्ट्रीय डैशबोर्ड है जो विशेष रूप से जेरियाट्रिक केयरगिवर्स (बुजुर्गों की देखभाल करने वाले पेशेवर) को ट्रैक, प्रमाणित और तैनात करता है, ताकि देश में केयर इकोनॉमी को औपचारिक बनाया जा सके।
c) यह केवल ग्रामीण भारत के वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त टेली-मेडिसिन और स्वास्थ्य बीमा योजना प्रदान करने वाला पोर्टल है।
d) यह पुरानी संपत्तियों के ऑनलाइन पंजीकरण और विवाद निपटान के लिए न्याय मंत्रालय का एक पोर्टल है।
✅ b) यह एक केंद्रीकृत, डेटा-संचालित राष्ट्रीय डैशबोर्ड है जो विशेष रूप से जेरियाट्रिक केयरगिवर्स (बुजुर्गों की देखभाल करने वाले पेशेवर) को ट्रैक, प्रमाणित और तैनात करता है, ताकि देश में केयर इकोनॉमी को औपचारिक बनाया जा सके。
व्याख्या (Explanation): SHATAYU डैशबोर्ड का मेन टारगेट भारत में केयरगिविंग (Caregiving) सेवाओं को एक फॉर्मल सिस्टम में ढालना है। इससे यह पता चलता है कि देश में कहाँ कितने ट्रेंड जेरियाट्रिक केयरगिवर्स (बुज़ुर्गों की देखभाल करने वाले) मौजूद हैं। इससे बुज़ुर्गों को अच्छी केयर भी मिलती है और रोज़गार के नए रास्ते भी खुलते हैं। इसलिए विकल्प (b) एकदम सही जवाब है।
Q3. वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के संबंध में, राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के अंतर्गत भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद प्रत्यक्ष रूप से राज्य को ‘बुढ़ापे’ (Old Age) की स्थिति में सार्वजनिक सहायता (Public Assistance) का अधिकार सुनिश्चित करने का निर्देश देता है?
a) अनुच्छेद 39A
b) अनुच्छेद 40
c) अनुच्छेद 41
d) अनुच्छेद 44
✅ c) अनुच्छेद 41
व्याख्या (Explanation): संविधान का अनुच्छेद 41 (Article 41) साफ तौर पर कहता है कि राज्य अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर बेरोज़गारी, बीमारी, विकलांगता और ‘बुढ़ापे’ (Old Age) की स्थिति में लोगों को सार्वजनिक सहायता (Public Assistance) देने का प्रयास करेगा। हमारी सरकार की JEEVAN, SHATAYU और वृद्धावस्था पेंशन जैसी योजनाएं इसी संवैधानिक आर्टिकल से प्रेरित हैं। इसलिए विकल्प (c) सही है।
Defence & International Current Affairs

मेघालय में 13-देशीय बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI 2026’ का सफल आयोजन
Intro Summary
चलिए अब बात करते हैं भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और कूटनीति की। क्या आप जानते हैं कि फिलहाल मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन (Umroi Military Station) में एक बहुत बड़ा बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI 2026’ चल रहा है?
इसमें मेज़बान भारत के साथ-साथ 13 मित्र देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
इसका मेन फोकस हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) और दक्षिण-पूर्व एशिया में सुरक्षा की चुनौतियों से निपटना, आतंकवाद-विरोधी (Counter-terrorism) ऑपरेशन्स में महारत हासिल करना और सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (Interoperability) बढ़ाना है।
परीक्षा के लिहाज़ से (खासकर UPSC GS Paper 2 और 3), यह कोई आम युद्धाभ्यास नहीं है। यह भारत की ‘Neighborhood First’ और ‘Act East’ पॉलिसी का एक जीता-जागता उदाहरण है।
यह युद्धाभ्यास दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि भारत अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक ‘Preferred Security Partner’ बन चुका है।
साथ ही, यह भारत के डिफेन्स एक्सपोर्ट और मिलिट्री डिप्लोमेसी (Military Diplomacy) का भी एक शानदार नमूना पेश कर रहा है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- पूर्ण रूप (Full Form): इस युद्धाभ्यास का नाम PRAGATI है, जिसका पूरा मतलब है – Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region।
- प्रतिभागी देश (Participating Nations): भारत के अलावा इस महा-अभ्यास में 12 और मित्र देश शामिल हैं, जैसे – भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम।
- अभ्यास का सामरिक फोकस: यह मिलिट्री ड्रिल खास तौर पर घने जंगलों (Jungle Warfare) और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में आतंकवादियों से निपटने (Counter-terrorism) की ट्रेनिंग पर फोकस कर रही है।
- आत्मनिर्भर भारत का जीवंत प्रदर्शन: इस अभ्यास के दौरान भारतीय रक्षा कंपनियों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) के तहत बनाए गए अपने स्वदेशी हथियारों, ड्रोन्स और डिफेंस सिस्टम्स की शानदार प्रदर्शनी भी लगाई है।
- आयोजन स्थल एवं अवधि: यह अभ्यास मेघालय की खूबसूरत पहाड़ियों में बसे उमरोई मिलिट्री स्टेशन में 18 मई से 31 मई 2026 तक पूरे दो हफ्तों के लिए आयोजित किया जा रहा है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में भारत का सामरिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण
अगर हम भू-राजनीतिक (Geopolitical) चश्मे से देखें, तो ‘PRAGATI 2026’ सिर्फ एक मिलिट्री ड्रिल नहीं है, बल्कि यह भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव का एक पावरफुल शो है।
इसमें हिस्सा लेने वाले ज़्यादातर देश (जैसे फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया) इस वक्त चीन की आक्रामक पॉलिसियों (जैसे साउथ चाइना सी में दादागिरी और ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति) से परेशान हैं।
ऐसे में इस पूरे इलाके में एक पावर बैलेंस (Balance of Power) की सख्त ज़रूरत है। भारत इन सभी देशों के साथ हाथ मिलाकर खुद को हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में एक भरोसेमंद ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ (Net Security Provider) के रूप में स्थापित कर रहा है।
‘PRAGATI’ अभ्यास इन 13 देशों की सेनाओं को एक साथ काम करना सिखाता है, ताकि कल को अगर कोई बड़ा क्षेत्रीय संकट या प्राकृतिक आपदा आए, तो ये सेनाएं बिना किसी कन्फ्यूज़न के एक साथ (Seamlessly) मिलकर रेस्पॉन्ड कर सकें।
सच कहें तो, यह भारत की ‘Act East Policy’ का एक आक्रामक और शानदार सैन्य विस्तार है।
आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) और रक्षा निर्यात (Defence Export) का बढ़ता इकोसिस्टम
इस युद्धाभ्यास का एक और बहुत ही दिलचस्प पहलू हमारी ‘रक्षा उत्पादन कूटनीति’ (Defence Production Diplomacy) है।
भारत जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार इम्पोर्टर हुआ करता था, अब दुनिया का एक बड़ा डिफेंस एक्सपोर्टर (Global Defence Exporter) बनने की राह पर है।
इस अभ्यास के बहाने भारत की डिफेंस कंपनियों को 12 देशों के सैन्य अधिकारियों के सामने अपने देसी हथियारों, रडार सिस्टम और ड्रोन्स (UAVs) का लाइव डेमो देने का मौका मिला है।
ज़रा सोचिए, जब विदेशी सेनाएं हमारे हथियारों को खतरनाक पहाड़ी और जंगली इलाकों में इतना शानदार काम करते हुए देखेंगी, तो उनका भरोसा कितना बढ़ेगा!
यही तो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का असली विज़न है – ग्लोबल साउथ (Global South) और आसियान देशों को सस्ते और बेहतरीन क्वालिटी के हथियार देकर अपनी रक्षा कूटनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को मज़बूत करना।
Static GK Connect
| सामरिक तथ्य / संगठन / नीतियां | परीक्षा उपयोगी विस्तृत विवरण (UPSC/SSC Facts) |
|---|---|
| आयोजन स्थल (Location Profile) | उमरोई (Umroi) – यह मेघालय के री भोई (Ri Bhoi) ज़िले में शिलांग के निकट स्थित भारतीय सेना का एक प्रमुख मिलिट्री कैंटोनमेंट है। यह अपने उन्नत जंगल वॉरफेयर प्रशिक्षण के लिए जाना जाता है। |
| संबंधित कूटनीतिक नीतियां | एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy): 2014 में घोषित, यह ‘लुक ईस्ट’ का उन्नत संस्करण है, जिसका फोकस आसियान देशों के साथ आर्थिक एकीकरण और सुरक्षा सहयोग पर है। नेबरहुड फर्स्ट (Neighborhood First): पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध विकसित करने की नीति। |
| आसियान (ASEAN) | दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संघ। स्थापना: 1967 (बैंकॉक घोषणा)। मुख्यालय: जकार्ता, इंडोनेशिया। सदस्य: 10 देश। PRAGATI में कई आसियान देश शामिल हैं। |
| प्रतिभागी देशों के साथ प्रमुख द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास | मित्र शक्ति (भारत-श्रीलंका), गरुड़ शक्ति / समुद्र शक्ति (भारत-इंडोनेशिया), सूर्य किरण (भारत-नेपाल), एकुवेरिन (भारत-मालदीव), नोमैडिक एलीफेंट (भारत-मंगोलिया – हालांकि मंगोलिया इसमें नहीं है), विनबैक्स (VINBAX – भारत-वियतनाम)। |
Current Affairs MCQs
Q1. हाल ही में मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन में आयोजित विशाल बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI 2026’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस अभ्यास में मेज़बान भारत के अलावा 12 मित्र देश शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) और दक्षिण-पूर्व एशिया (आसियान) के देश हैं।
2. इस अभ्यास का मुख्य फोकस समुद्री युद्ध (Naval Warfare) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी अभियानों (Anti-submarine operations) पर है।
3. यह अभ्यास विदेशी सेनाओं के समक्ष ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत भारतीय स्वदेशी सैन्य उपकरणों, हथियारों और नवाचारों को प्रदर्शित करने का एक समर्पित मंच भी प्रदान करता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2
b) केवल 1 और 3
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3
✅ b) केवल 1 और 3
व्याख्या (Explanation): चलिए इन स्टेटमेंट्स को डिकोड करते हैं। पहला और तीसरा कथन बिल्कुल सही है। भारत इस अभ्यास में साउथ-ईस्ट एशिया के देशों को बुलाकर अपने देसी हथियारों का ज़बरदस्त प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन दूसरा कथन गलत है! क्यों? क्योंकि PRAGATI 2026 नेवी का अभ्यास नहीं है, बल्कि थल सेना (Indian Army) का अभ्यास है। इसका मेन फोकस जंगलों और पहाड़ियों में आतंकवाद-रोधी (Counter-terrorism) ऑपरेशन्स पर है, न कि पनडुब्बियों पर। इसलिए विकल्प (b) सही जवाब है।
Q2. ‘PRAGATI’ शब्द, जो हाल ही में सैन्य कूटनीति और बहुपक्षीय अभ्यासों के संदर्भ में समाचारों में प्रमुखता से छाया रहा, का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है?
a) Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region
b) Pact for Rapid Action and Growth Against Terrorism in India
c) Partnership of Regional Airforces for Global Action and Tactical Intelligence
d) Pacific Region Agreement for Growth and Transformation Initiative
✅ a) Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region
व्याख्या (Explanation): डिफेन्स एग्ज़ाम्स के लिए फुल फॉर्म्स बहुत ज़रूरी होते हैं। PRAGATI का यहाँ अर्थ “Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region” है। इस युद्धाभ्यास का पूरा फोकस क्षेत्रीय सेनाओं के बीच दोस्ती, सहयोग और आपसी तालमेल (Interoperability) बढ़ाने पर है। इसलिए विकल्प (a) सही है।
Q3. भू-राजनीतिक रणनीति के दृष्टिकोण से, भारत की कौन सी विदेश नीति पहल विशेष रूप से ‘PRAGATI 2026’ में भाग लेने वाले दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (जैसे कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, वियतनाम, फिलीपींस) के साथ रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने का वैचारिक आधार प्रदान करती है?
a) लुक वेस्ट पॉलिसी (Look West Policy)
b) एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy)
c) गुजराल सिद्धांत (Gujral Doctrine)
d) प्रोजेक्ट मौसम (Project Mausam)
✅ b) एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy)
व्याख्या (Explanation): साल 2014 में सरकार ने पुरानी ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी (जो सिर्फ व्यापार तक सीमित थी) को अपग्रेड करके ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) बना दिया था। इसका मकसद आसियान (ASEAN) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि डिफेन्स और सिक्योरिटी के रिश्ते भी मज़बूत करना है। PRAGATI 2026 इसी पॉलिसी का एक शानदार मिलिट्री एक्शन है। इसलिए विकल्प (b) एकदम सही है।
Environment & Agriculture Current Affairs

ICAR द्वारा ‘खेत बचाओ अभियान’ की उपलब्धियों की घोषणा: टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
Intro Summary
दोस्तों, हम सब जानते हैं कि खेतों में अंधाधुंध यूरिया और केमिकल्स का इस्तेमाल हमारी मिट्टी को कैसे बर्बाद कर रहा है।
लेकिन अब इसे रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है! हाल ही में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अपने देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan) की बड़ी उपलब्धियों का ऐलान किया है।
इस महा-अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य किसानों को यह समझाना है कि वे मिट्टी की जांच (Soil Test) के आधार पर ही फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल करें और केमिकल पर अपनी निर्भरता कम करें।
UPSC (GS Paper 3: Agriculture and Environment Ecology) और SSC परीक्षाओं के लिए यह एक परफेक्ट केस स्टडी है। यदि आप और अधिक जानकारी चाहते हैं, तो हमारे Daily Current Affairs सेक्शन को जरूर विजिट करें।
यह अभियान सीधे तौर पर मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (Sustainable Development) जैसे अति-प्रासंगिक विषयों से जुड़ा हुआ है।
चलिए देखते हैं कि इस अभियान ने ज़मीनी स्तर पर क्या बड़े बदलाव किए हैं।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- व्यापक जनसंपर्क और जागरूकता (Massive Outreach): इस अभियान ने कमाल करते हुए डिजिटल मीडिया, रेडियो और ज़मीनी नेटवर्क के ज़रिए देश भर के 2.712 करोड़ लोगों तक अपनी बात पहुंचाई है, और 7.17 लाख से ज़्यादा किसानों को सीधे तौर पर जागरूक (Sensitize) किया है।
- क्षमता निर्माण और व्यावहारिक प्रदर्शन: बात सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रही! इसके तहत 12,979 जागरूकता कैंप, 3,145 ट्रेनिंग प्रोग्राम और 7,928 खेतों में सीधे डेमो (Field Demonstrations) दिए गए हैं।
- हरित विकल्पों को प्रोत्साहन (Promoting Green Alternatives): किसानों को बताया गया कि केमिकल खादों के बजाय जैविक खाद (Organic nutrient sources), बायो-फर्टिलाइज़र (Bio-fertilizers) और हरी खाद का कैसे इस्तेमाल करना है।
- पंचायती राज और स्थानीय नेतृत्व की भागीदारी: गांव के सरपंच और पंचायत मेंबर्स को साथ जोड़ने के लिए ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलनों’ (Janpratinidhi Sammelans) का आयोजन किया गया, ताकि यह अभियान एक जन-आंदोलन बन सके।
- सप्लाई चेन के साथ रणनीतिक संवाद: खाद बेचने वाले डीलरों (Input Supply Chain) के साथ भी 9,609 से ज़्यादा मीटिंग्स की गईं, ताकि वे भी किसानों को सही मात्रा में खाद लेने की सलाह दें।
मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) का संकट और अवैज्ञानिक उर्वरक उपयोग के गंभीर दुष्परिणाम
आज़ादी के बाद 1960 के दशक में आई हरित क्रांति (Green Revolution) ने हाइब्रिड बीजों (HYV Seeds) और केमिकल फर्टिलाइज़र्स की मदद से हमें अन्न के मामले में आत्मनिर्भर (Food Security) तो बना दिया, लेकिन लंबे समय में इसके गंभीर नुकसान भी सामने आए हैं।
अगर हम पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें, तो वहाँ यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल ने मिट्टी की असली जान यानी ‘मृदा जैविक कार्बन’ (Soil Organic Carbon – SOC) को बुरी तरह खत्म कर दिया है।
मिट्टी में खारापन (Salinization) बढ़ना, ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स का कम होना और केमिकल्स का ज़मीन के पानी में मिलकर उसे ज़हरीला (Groundwater Pollution) बनाना आज हमारी खेती के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
‘खेत बचाओ अभियान’ सीधे इसी समस्या की जड़ पर प्रहार करता है।
यह किसानों को सिखाता है कि पहले अपनी मिट्टी की जांच (Soil Test) करवाओ, और फिर रिपोर्ट के हिसाब से सिर्फ उतना ही फर्टिलाइज़र डालो जितनी ज़मीन को असल में ज़रूरत है।
इससे न सिर्फ हमारी मिट्टी बचेगी, बल्कि किसानों का खाद का खर्च (Input Cost) भी कम होगा और खेती मुनाफे का सौदा बनेगी।
अभियान का बहु-आयामी दृष्टिकोण और जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Change Mitigation) में योगदान
इस ‘खेत बचाओ अभियान’ की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसने सिर्फ किसानों को नहीं, बल्कि सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs), FPOs और खाद बेचने वाले डीलरों को भी अपने साथ जोड़ा है।
क्या आप जानते हैं कि यह अभियान हमारे पर्यावरण को कैसे बचा रहा है? दरअसल, जब खेतों में ज़रूरत से ज़्यादा यूरिया डाला जाता है, तो पौधे सारा नाइट्रोजन नहीं सोख पाते।
यह बचा हुआ नाइट्रोजन बारिश के पानी के साथ बहकर नदियों में चला जाता है (Eutrophication), या फिर वाष्प बनकर ‘नाइट्रस ऑक्साइड’ (Nitrous Oxide – N2O) गैस के रूप में हवा में उड़ जाता है।
यह नाइट्रस ऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले लगभग 300 गुना ज़्यादा खतरनाक ग्रीनहाउस गैस (GHG) है और ओजोन लेयर को भी फाड़ देती है!
‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जब किसान उर्वरकों का संतुलित (Balanced) इस्तेमाल करते हैं, तो यह हानिकारक नाइट्रोजन लीचिंग और N2O गैस का निकलना काफी हद तक कम हो जाता है।
इस तरह, यह अभियान सीधे तौर पर क्लाइमेट चेंज (Climate Change Mitigation) से लड़ने में भारत की मदद कर रहा है। साथ ही, इससे सरकार के हज़ारों करोड़ रुपये की सब्सिडी भी बच रही है, जिसे गांवों के विकास में लगाया जा सकता है।
Static GK Connect
| कृषि योजना / निकाय / अवधारणा | परीक्षा उपयोगी स्थिर सामान्य ज्ञान (Static GK Facts) |
|---|---|
| कार्यान्वयन मुख्य एजेंसी (Implementing Agency) | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – इसकी स्थापना 16 जुलाई 1929 को हुई थी। यह दुनिया के सबसे बड़े कृषि अनुसंधान प्रणालियों में से एक है। इसके पदेन अध्यक्ष (Ex-officio President) हमेशा केंद्रीय कृषि मंत्री होते हैं। |
| मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme) | मृदा परीक्षण को बढ़ावा देने के लिए यह फ्लैगशिप योजना 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ से प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च की गई थी। इसका आधिकारिक नारा है: “स्वस्थ धरा, खेत हरा” (Healthy Earth, Green Farm)। यह 12 मापदंडों पर मिट्टी की जांच करती है। |
| PM PRANAM योजना (2023) | “PM Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth”। इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने और वैकल्पिक/जैविक उर्वरकों (Alternative Fertilizers) को अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देना है। |
| संवैधानिक प्रावधान (Constitution) | अनुच्छेद 48 (Article 48): राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य, कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों (Scientific lines) पर संगठित करने का प्रयास करेगा। |
Current Affairs MCQs
Q1. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ (Khet Bachao Abhiyan) के प्राथमिक नीतिगत उद्देश्य क्या हैं?
1. रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की अत्यधिक और अवैज्ञानिक निर्भरता को कम करना।
2. केवल मृदा परीक्षण-आधारित (Soil test-based) रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना।
3. देश भर में छोटे किसानों की सभी कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण करके कॉरपोरेट औद्योगीकरण (Corporate Industrialization) करना।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनें:
a) केवल 1 और 3
b) केवल 1 और 2
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3
✅ b) केवल 1 और 2
व्याख्या (Explanation): इसे समझना बहुत आसान है! ‘खेत बचाओ अभियान’ एक जागरूकता अभियान है जिसका मेन टारगेट किसानों को केमिकल फर्टिलाइज़र्स के कम और संतुलित इस्तेमाल (Soil Test के आधार पर) के लिए तैयार करना है। किसानों की ज़मीन छीनना या खेती का कॉर्पोरेट औद्योगीकरण करना इसका उद्देश्य बिल्कुल नहीं है; बल्कि यह तो किसानों को और ज़्यादा सशक्त बनाने की पहल है। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं, और विकल्प (b) आपका सही उत्तर है।
Q2. ‘खेत बचाओ अभियान’ के जनसंपर्क (Outreach) और ज़मीनी कार्यान्वयन रणनीति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा तरीका अपनाया गया है?
a) अभियान को केवल डिजिटल सोशल मीडिया विज्ञापन और ईमेल के माध्यम से शहरी किसानों तक सीमित रखा गया है।
b) एक बहु-स्तरीय दृष्टिकोण (Multi-tiered approach) अपनाया गया है, जिसमें फील्ड प्रदर्शन (Field demonstrations), स्थानीय नेताओं के साथ जनप्रतिनिधि सम्मेलन, FPOs का उपयोग और कृषि इनपुट डीलरों के साथ संवाद शामिल है।
c) सरकार ने रातों-रात यूरिया और सभी रासायनिक उर्वरकों के उत्पादन और आयात पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध लगा दिया है।
d) सभी भारतीय किसानों को बिना किसी मृदा परीक्षण के मुफ्त में विदेशी बीजों का बड़े पैमाने पर वितरण किया जा रहा है।
✅ b) एक बहु-स्तरीय दृष्टिकोण (Multi-tiered approach) अपनाया गया है, जिसमें फील्ड प्रदर्शन (Field demonstrations), स्थानीय नेताओं के साथ जनप्रतिनिधि सम्मेलन, FPOs का उपयोग और कृषि इनपुट डीलरों के साथ संवाद शामिल है。
व्याख्या (Explanation): ICAR ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए केवल मोबाइल या टीवी का सहारा नहीं लिया, बल्कि खेतों में उतरकर काम किया है। इसके तहत 7,928 खेतों में लाइव डेमो दिए गए, सरपंचों के साथ 4,916 मीटिंग्स हुईं और खाद बेचने वाले डीलरों से भी बातचीत की गई। यह एक मल्टी-लेवल जन-आंदोलन है। इसलिए विकल्प (b) एकदम सही है।
Q3. पर्यावरण पारिस्थितिकी (Environmental Ecology) के दृष्टिकोण से, ‘खेत बचाओ अभियान’ द्वारा वकालत किए गए संतुलित उर्वरक उपयोग का जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर क्या अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
a) यह वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके उसे मीथेन (Methane) में परिवर्तित कर देता है, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।
b) यह पौधों में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया को पूरी तरह से रोककर वैश्विक तापमान को नियंत्रित करता है।
c) यह अतिरिक्त नाइट्रोजन लीचिंग को रोककर कृषि से होने वाले ‘नाइट्रस ऑक्साइड’ (N2O) के अत्यधिक उत्सर्जन को कम करता है, जो एक बेहद शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है।
d) यह सीधे तौर पर ओजोन परत के छिद्र में ऑक्सीजन इंजेक्ट करता है, जिससे वह तुरंत भर जाता है।
✅ c) यह अतिरिक्त नाइट्रोजन लीचिंग को रोककर कृषि से होने वाले ‘नाइट्रस ऑक्साइड’ (N2O) के अत्यधिक उत्सर्जन को कम करता है, जो एक बेहद शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है。
व्याख्या (Explanation): यह बहुत ही इंटरेस्टिंग साइंटिफिक फैक्ट है! जब खेतों में बहुत ज़्यादा यूरिया (रासायनिक नाइट्रोजन) डाला जाता है, तो बचे हुए नाइट्रोजन से मिट्टी में एक केमिकल रिएक्शन होता है जिसे ‘डीनाइट्रिफिकेशन’ (Denitrification) कहते हैं। इससे ‘नाइट्रस ऑक्साइड’ (N2O) गैस हवा में निकलती है, जो CO2 से लगभग 300 गुना ज़्यादा गर्मी (ग्लोबल वार्मिंग) पैदा करती है। ‘खेत बचाओ अभियान’ इसी एक्स्ट्रा यूरिया के इस्तेमाल को रोकता है, जिससे N2O गैस का निकलना कम हो जाता है और हमारे क्लाइमेट को बड़ी राहत मिलती है। इसलिए विकल्प (c) बिल्कुल सही जवाब है!