20 May 2026 Current Affairs: SC Judges, Ebola & NPS RIS

⚖️ National / Judiciary Current Affairs

Supreme Court Ordinance 2026 Increase Judges Strength

📌 राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 38 करने के लिए ऐतिहासिक अध्यादेश जारी

दोस्तों, 20 May 2026 Current Affairs के तहत आज की सबसे बड़ी खबर हमारी न्यायपालिका से आ रही है। आज की ताज़ा रिपोर्ट पर नज़र डालें, तो भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 123 (Article 123) का इस्तेमाल करते हुए एक बेहद ऐतिहासिक अध्यादेश को मंजूरी दी है।

क्या आपको पता है इसका मतलब क्या है? सीधा सा मतलब है कि अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या काफी बढ़ जाएगी।

‘The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Ordinance, 2026’ के लागू होते ही जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर सीधे 37 कर दी गई है (इसमें Chief Justice of India शामिल नहीं हैं)।

अब सवाल यह है कि ऐसा फैसला क्यों लिया गया? दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामलों (Pending Cases) का अंबार 93,000 के खतरनाक आंकड़े को पार कर चुका है। इसलिए न्याय प्रणाली को सुचारू बनाने के लिए यह कदम उठाना बहुत जरूरी था।

यह अध्यादेश सीधे तौर पर ‘Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956’ में बदलाव करता है। अगर आप UPSC या State PCS की तैयारी कर रहे हैं, तो Indian Polity के नजरिए से इसे जरूर नोट कर लें, क्योंकि यह हमारे ज्यूडिशियल सिस्टम का एक बहुत बड़ा रिफॉर्म है। आप हमारी Daily Current Affairs सीरीज़ में ऐसे और भी अपडेट्स पा सकते हैं।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

  • संसद का सत्र फिलहाल नहीं चल रहा है, इसीलिए राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 123 के तहत अपनी खास विधायी शक्ति का इस्तेमाल करके यह अध्यादेश (Promulgate) पास किया है।
  • इस नए बदलाव के बाद, चीफ जस्टिस (CJI) को मिलाकर अब सुप्रीम कोर्ट की कुल क्षमता 34 से बढ़कर 38 हो गई है।
  • ताजा आंकड़ों की बात करें तो कोर्ट में करीब 93,000 मामले पेंडिंग हैं। कोविड-19 के बाद से ई-फाइलिंग (e-filing) का जो चलन बढ़ा है, उसने इस पेंडेंसी संकट को और भी ज्यादा गहरा कर दिया है।
  • हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी, जिसके बाद ही यह अध्यादेश लाया गया है।
  • Supreme Court Bar Association (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका तो यह भी कहना है कि जब कोर्ट की नई बिल्डिंग पूरी तरह चालू हो जाएगी, तो भविष्य में हमें 50 जजों तक की जरूरत पड़ सकती है।

✴️ अध्यादेश का संवैधानिक ढांचा और ऐतिहासिक संदर्भ (Constitutional Framework and Historical Context of the Ordinance)

हमारे संविधान के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का स्ट्रक्चर कैसा होगा और उसमें कितने जज होंगे, यह तय करने का पूरा पावर सिर्फ हमारी संसद (Parliament) के पास है।

शुरू में संविधान के अनुच्छेद 124(1) में लिखा था कि भारत का एक सुप्रीम कोर्ट होगा, जिसमें एक चीफ जस्टिस होंगे और 7 अन्य जज होंगे (यानी कुल 8)। यह तब तक के लिए था, जब तक संसद कोई नया कानून नहीं बनाती।

इसी पावर का इस्तेमाल करके संसद ने ‘Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956’ पास किया था। अब चूँकि अभी संसद का सत्र नहीं चल रहा है, इसलिए राष्ट्रपति ने कैबिनेट (Cabinet) की सलाह पर आर्टिकल 123 के तहत यह अध्यादेश जारी करके 1956 वाले कानून में बदलाव किया है।

ध्यान रखिएगा, जब भी संसद का अगला सत्र (जैसे मानसून सत्र) शुरू होगा, तो इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सामने रखा जाएगा। और मजे की बात यह है कि सत्र शुरू होने के 6 हफ्ते के अंदर इसे कानून (Act) बनाना जरूरी है, वरना यह खारिज हो जाएगा।

यह पूरी प्रक्रिया हमें बताती है कि इमरजेंसी के समय हमारी कार्यपालिका (Executive) न्यायिक जरूरतों को कैसे पूरा करती है।

वर्ष (Year)अधिनियम / संशोधन (Act/Amendment)जजों की संख्या (CJI को छोड़कर)कुल स्वीकृत क्षमता (Total Strength)
1950मूल संविधान (Original Constitution)78
1956Supreme Court (Number of Judges) Act1011
1960Amendment Act1314
1977Amendment Act1718
1986Amendment Act2526
2009Amendment Act3031
2019Amendment Act3334
2026Current Ordinance 20263738

ऊपर दी गई टेबल को देखकर आप आसानी से समझ सकते हैं कि जैसे-जैसे देश की आबादी और मुकदमे बढ़े हैं, वैसे-वैसे सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में भी इजाफा किया गया है।

✴️ न्यायपालिका में पेंडेंसी संकट और भविष्य की ढांचागत आवश्यकताएं (Pendency Crisis and Future Infrastructural Needs)

हमारी न्याय प्रणाली काफी समय से पेंडिंग मुकदमों के भारी बोझ तले दबी है। 93,000 से ज्यादा मामलों का पेंडिंग होना सिर्फ आम लोगों के ‘जल्दी न्याय पाने के मौलिक अधिकार’ (Fundamental Right to Speedy Justice – Article 21) पर असर नहीं डालता, बल्कि यह देश की इकोनॉमी और प्रशासन के सुधारों में भी एक बड़ा रोड़ा है।

कई बड़े कानूनविदों, जैसे सचिन पुरी, की काफी समय से यही मांग थी कि जजों की संख्या तो बढ़ाई ही जाए, साथ ही कोर्ट के बुनियादी ढांचे को भी मॉडर्न बनाया जाए। यह फैसला सिर्फ एक नंबर का खेल नहीं है।

इससे फायदा यह होगा कि ‘Constitutional Benches’ जल्दी बन सकेंगी और पेचीदा कानूनी मामलों का निपटारा तेजी से होगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग के चालू होने से इन 4 नए जजों को आसानी से जगह (Accommodate) भी मिल जाएगी।

अगर हम इसके दूरगामी फायदों (Second and Third-order effects) को देखें, तो जजों की संख्या बढ़ने से ‘Specialized Benches’ बनाने में भी मदद मिलेगी, जो एनवायरनमेंट, बिजनेस और मानवाधिकार के मामलों को ज्यादा अच्छे से हैंडल कर पाएंगी।

सोचिए, इससे ग्लोबल लेवल पर हमारी ‘Ease of Doing Business’ रैंकिंग भी सुधरेगी और विदेशी निवेशकों (Foreign Institutional Investment) का भरोसा भी बढ़ेगा।

📚 Static GK Connect

  • सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना: 28 जनवरी 1950 (इसने भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत बने Federal Court की जगह ली थी)।
  • संवैधानिक प्रावधान: भाग V (Part V), अनुच्छेद 124 से 147 सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के गठन, उसकी आजादी और पावर से जुड़े हैं।
  • अनुच्छेद 123 (Article 123): यह राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की ताकत देता है। इसका असर बिल्कुल वैसा ही होता है, जैसा संसद के बनाए किसी कानून का।
  • भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (CJI): (आप सभी छात्रों को मौजूदा CJI का नाम टिप्स पर याद होना चाहिए)।

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. हाल ही में प्रख्यापित ‘The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Ordinance, 2026’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
इस अध्यादेश के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (CJI सहित) 38 कर दी गई है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124(1) राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने की विधायी शक्ति देता है।
यह अध्यादेश ‘Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956’ में संशोधन करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2
b) केवल 1 और 3 ✅
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

🤔 Q2. भारत के राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (Ordinance Making Power) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
a) यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत प्रदान की गई है।
b) अध्यादेश केवल तभी जारी किया जा सकता है जब संसद के दोनों सदन या कोई एक सदन सत्र में न हो।
c) संसद के पुनः समवेत (Reassemble) होने पर इसे छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए।
d) यह राष्ट्रपति की एक पूर्ण विवेकाधीन शक्ति (Discretionary Power) है, जिसके लिए मंत्रिपरिषद की सलाह अनिवार्य नहीं है। ✅

🤔 Q3. भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, मूल संविधान (1950) में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के अतिरिक्त कितने अन्य न्यायाधीशों का प्रावधान किया गया था?
a) 5
b) 7 ✅
c) 10
d) 11

🌍 International / Health Current Affairs

WHO Declares Bundibugyo Ebola Outbreak PHEIC

📌 WHO द्वारा DRC और युगांडा में ‘Bundibugyo’ इबोला आउटब्रेक को PHEIC घोषित

अंतरराष्ट्रीय मामलों की बात करें, तो पिछले 24 घंटों में एक बहुत ही गंभीर खबर सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैले इबोला वायरस (Bundibugyo strain) को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है।

उन्होंने इसे ‘Public Health Emergency of International Concern’ (PHEIC) घोषित कर दिया है। यह कदम International Health Regulations (IHR) 2005 के नियमों के तहत उठाया गया है।

कांगो के इटुरी (Ituri) प्रांत में यह वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है, जहां कई लोगों की जान जा चुकी है और संक्रमण के मामले 246 को पार कर गए हैं।

यह बीमारी इतनी खतरनाक क्यों है? क्योंकि फिलहाल इस Bundibugyo स्ट्रेन के लिए दुनिया में कोई भी अप्रूव्ड वैक्सीन या पक्का इलाज (Specific Therapeutics) मौजूद नहीं है। जो छात्र International Relations या Global Health Governance की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह टॉपिक बेहद काम का है।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

  • WHO ने 17 मई 2026 को आधिकारिक तौर पर इस आउटब्रेक को PHEIC घोषित किया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब पूरी दुनिया को मिलकर इसके खिलाफ काम (Coordinated International Response) करना होगा।
  • DRC के इटुरी प्रांत के बुनिया (Bunia), रवाम्पारा (Rwampara) और मोंगबवालु (Mongbwalu) जैसे स्वास्थ्य क्षेत्रों में इसका सबसे ज्यादा कहर देखा गया है, जहां 80 से ज्यादा संदिग्ध मौतें दर्ज हुई हैं।
  • युगांडा की राजधानी कंपाला (Kampala) में भी लैब टेस्टिंग में 2 मामलों की पुष्टि हुई है (जिसमें 1 की मौत हो चुकी है)। ये लोग DRC की यात्रा करके आए थे, जो बताता है कि यह बीमारी अब बॉर्डर पार (Cross-border) भी फैल रही है।
  • Zaire स्ट्रेन (जिसके लिए mAb114 और Ervebo जैसी वैक्सीन मौजूद हैं) के उलट, Bundibugyo स्ट्रेन के लिए दुनिया भर में अभी कोई भी क्लिनिकल समाधान (Approved Countermeasures) नहीं है।
  • WHO ने साफ किया है कि हालांकि यह एक इमरजेंसी है, लेकिन यह कोविड-19 जैसी “महामारी” (Pandemic Emergency) की कैटेगरी में नहीं आता है, इसलिए फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा या व्यापार पर रोक लगाने की सलाह नहीं दी गई है।

✴️ Bundibugyo स्ट्रेन की गंभीरता और PHEIC के मानदंड (Severity of Bundibugyo Strain and Criteria for PHEIC)

इबोला डिसीज (Ebola Disease) एक बहुत ही खतरनाक और जानलेवा वायरल हेमोरेजिक फीवर (Viral Hemorrhagic Fever) है, जो Orthoebolavirus जीनस का हिस्सा है।

Bundibugyo स्ट्रेन का यह नया प्रकोप मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है क्योंकि इसके लिए न तो कोई अप्रूव्ड टीका (Vaccine) है और न ही कोई मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (Monoclonal Antibodies) का इलाज मौजूद है।

इतिहास गवाह है कि इस बीमारी में मृत्यु दर (Case Fatality Rate) हमेशा 30% से 50% के बीच रही है।

आपको बता दें कि ‘Public Health Emergency of International Concern’ (PHEIC) की घोषणा तब की जाती है, जब कोई बीमारी बॉर्डर पार करके दूसरे देशों के लिए एक बड़ा खतरा बन जाती है और जिससे निपटने के लिए पूरी दुनिया के सपोर्ट की जरूरत होती है।

इबोला आउटब्रेक डेटा (DRC और युगांडा)वर्तमान आँकड़े (मई 2026 तक)
इटुरी प्रांत (DRC) संदिग्ध मामले246+
इटुरी प्रांत (DRC) संदिग्ध मौतें80
प्रयोगशाला-पुष्ट मामले (DRC)8
कंपाला (युगांडा) पुष्ट मामले2 (1 मृत्यु सहित)
प्रभावित स्वास्थ्य क्षेत्र (Health Zones)Bunia, Rwampara, Mongbwalu

WHO के इस कदम का मतलब है कि अब ग्लोबल हेल्थ एजेंसियां, बैंक और रिसर्च ऑर्गनाइजेशन तुरंत इसके लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), वैक्सीन ट्रायल और इंटरनेशनल फंडिंग जुटाने के काम में लग जाएंगे। इससे यह पक्का होगा कि प्रभावित इलाकों में दवाइयां और एक्सपर्ट्स बिना किसी देरी के पहुंच सकें।

✴️ स्वास्थ्य संकट का भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय प्रभाव (Geopolitical and Regional Impact of the Health Crisis)

कांगो का पूर्वी हिस्सा (खासकर Ituri और North Kivu प्रांत) लंबे समय से हथियारों की लड़ाई, राजनीतिक उठापटक और लोगों के विस्थापन (Displacement) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि जनवरी 2025 से लेकर अब तक DRC में अस्पतालों पर हमलों की 44 घटनाएं और राहत कर्मियों पर 742 घटनाएं हो चुकी हैं। इन इलाकों में बागी गुटों के होने से हेल्थ सिस्टम (Health Systems) एकदम खस्ताहाल है।

ऐसे संघर्ष वाले इलाकों में जब इबोला जैसी संक्रामक बीमारी फैलती है, तो मरीजों को खोजना (Contact Tracing) और उन्हें अलग करना (Isolation) लगभग नामुमकिन हो जाता है।

इसके अलावा, गोमा (Goma) के प्रशासन ने डर के मारे रवांडा और गोमा का बॉर्डर बंद कर दिया, जिससे जरूरी दवाइयों की सप्लाई (Logistics) में भारी रुकावट आ रही है।

युगांडा की राजधानी तक संक्रमण का पहुंचना साफ दिखाता है कि कैसे किसी इलाके की अस्थिरता एक लोकल बीमारी को इंटरनेशनल खतरा बना देती है। यह पूरा माहौल ग्लोबल हेल्थ डिप्लोमेसी (Health Diplomacy) के लिए एक बहुत बड़ा टेस्ट है।

📚 Static GK Connect

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): स्थापना – 7 अप्रैल 1948 (इसी दिन विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है); मुख्यालय – जेनेवा, स्विट्जरलैंड (Geneva, Switzerland)।
  • इबोला का इतिहास: इबोला वायरस पहली बार 1976 में DRC (तब इसका नाम ज़ैरे था) की इबोला नदी (Ebola River) के पास और सूडान में एक साथ मिला था।
  • रोग का वाहक: वैज्ञानिकों का मानना है कि Pteropodidae परिवार के फ्रूट बैट (Fruit Bats) इस वायरस के असली घर (Natural Hosts) हैं।
  • International Health Regulations (IHR): IHR 2005 एक ऐसा इंटरनेशनल कानून है जो 196 देशों (WHO के सभी मेंबर) को मानना ही पड़ता है, ताकि बीमारियों को दुनिया भर में फैलने से रोका जा सके।
  • अफ्रीका CDC: अफ़्रीका सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) असल में अफ़्रीकी संघ (African Union) की ही एक पब्लिक हेल्थ एजेंसी है।

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. हाल ही में WHO द्वारा ‘Public Health Emergency of International Concern’ (PHEIC) घोषित किए गए इबोला आउटब्रेक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
यह प्रकोप मुख्य रूप से ‘Bundibugyo’ ebolavirus स्ट्रेन के कारण हो रहा है, जिसके लिए वर्तमान में कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
इस आउटब्रेक का मुख्य केंद्र (Epicenter) पूर्वी कांगो (DRC) का इटुरी (Ituri) प्रांत है।
WHO ने इस प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को तुरंत सील करने और व्यापार प्रतिबंध लगाने की आधिकारिक सिफारिश की है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2 ✅
b) केवल 1 और 3
c) केवल 2 और 3
d) 1, 2 और 3

🤔 Q2. ‘Public Health Emergency of International Concern’ (PHEIC) की घोषणा का कानूनी और वैधानिक आधार क्या है?
a) United Nations Security Council Resolution
b) International Health Regulations (IHR) 2005 ✅
c) Geneva Convention on Biological Threats
d) Paris Agreement on Global Health

🤔 Q3. इबोला डिसीज (Ebola Disease) के प्राकृतिक मेजबान (Natural Host) के रूप में वैज्ञानिक रूप से किसे सबसे अधिक संभावित माना जाता है?
a) एडीज एजिप्टी मच्छर (Aedes aegypti)
b) पैंगोलिन (Pangolin)
c) फ्रूट बैट (Fruit Bats) ✅
d) टीसीसी मक्खी (Tsetse fly)

💻 Economy / Science & Technology Current Affairs

India First SME Semiconductor Chip Unit Bhiwadi Rajasthan

📌 राजस्थान के भिवाड़ी में भारत की पहली SME-आधारित Semiconductor चिप यूनिट का उद्घाटन

अब बात करते हैं साइंस और इकॉनमी की। हाल ही में भारत ने सेमीकंडक्टर (Semiconductor) मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में एक बहुत लंबी छलांग लगाई है।

राजस्थान के भिवाड़ी (Bhiwadi) में भारत की पहली SME-संचालित (Small and Medium Enterprise) सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन यूनिट का उद्घाटन किया गया है। यह एकदम मॉडर्न और हाई-टेक प्लांट ‘Sahasra Semiconductors Pvt. Ltd.’ द्वारा चलाया जा रहा है।

इसे ELCINA द्वारा बनाए गए ‘Electronics Manufacturing Cluster’ (EMC) के अंदर सेट अप किया गया है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री द्वारा शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट, भारत को ‘Aatmanirbhar Bharat’ और ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का एक मजबूत पिलर बनाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। बैंकिंग, SSC और UPSC Current Affairs की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह इकोनॉमी और साइंस-टेक का एक बेहद इम्पोर्टेन्ट टॉपिक है।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

  • यह ATMP (Assembly, Testing, Marking, and Packaging) / OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) फैसिलिटी पूरे 57,000 वर्ग फुट में फैली है। इसमें बहुत ही हाई-टेक क्लास 10K और 100K क्लीनरूम (Cleanrooms) बनाए गए हैं।
  • इस शानदार प्रोजेक्ट को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की SPECS (Scheme for Promotion of Manufacturing of Electronic Components and Semiconductors) योजना के तहत 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश से तैयार किया गया है।
  • फिलहाल यह प्लांट हर साल 60 मिलियन सेमीकंडक्टर यूनिट्स की पैकेजिंग कर सकता है, लेकिन अगले 2-3 सालों में इसे बढ़ाकर 400 से 600 मिलियन यूनिट्स तक ले जाने का टारगेट है।
  • यहाँ मुख्य रूप से माइक्रो एसडी कार्ड (Micro SD Cards), फ्लैश स्टोरेज डिवाइस, LED ड्राइवर ICs और eSIMs जैसी जरूरी चीजों की पैकेजिंग की जाएगी।
  • सबसे अच्छी बात यह है कि इस फैसिलिटी का 60% से ज्यादा प्रोडक्शन अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, चीन और नेपाल जैसे बड़े इंटरनेशनल मार्केट्स में एक्सपोर्ट (Export) भी किया जा रहा है।

✴️ SPECS योजना और भारत का उभरता हुआ Semiconductor इकोसिस्टम (SPECS Scheme and India’s Emerging Semiconductor Ecosystem)

क्या आप जानते हैं कि सेमीकंडक्टर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का दिमाग (Brain) होता है? आज के समय में जब पूरी दुनिया सप्लाई चेन की समस्या से जूझ रही है, तब भारत सरकार ने ‘India Semiconductor Mission’ (ISM) लॉन्च किया है।

Sahasra Semiconductors की यह शुरुआत MeitY की SPECS योजना का ही एक बहुत बढ़िया नतीजा है।

SPECS योजना का मेन टारगेट यही है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को उनके कैपिटल खर्च (Capital Expenditure) पर 25% का इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) दिया जाए, ताकि वो देश में ही प्रोडक्शन बढ़ा सकें।

सेमीकंडक्टर और EMC प्रोजेक्ट विवरणआंकड़े / जानकारी
संचालक (Operator)Sahasra Semiconductors Pvt. Ltd.
सुविधा का प्रकारATMP / OSAT
वर्तमान क्षमता (Annual)60 मिलियन यूनिट्स
लक्षित क्षमता (2-3 वर्षों में)400 – 600 मिलियन यूनिट्स
ELCINA EMC का क्षेत्रफल50.3 एकड़
EMC में नियोजित कुल निवेश₹1,200 करोड़ से अधिक

यह OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) प्लांट भारत के भारी-भरकम आयात बिल (Import Bill) को कम करने में बहुत बड़ा रोल निभाएगा।

अगर हम इसके बड़े इम्पैक्ट (Second-order effects) को देखें, तो यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ बड़ी विदेशी कंपनियों (MNCs) के भरोसे नहीं बैठा है, बल्कि हमारे अपने छोटे और मध्यम उद्योग (SMEs) भी हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में कमाल कर रहे हैं।

ऐसा विकेंद्रीकृत (Decentralized) नजरिया भारत को ताइवान और साउथ कोरिया जैसे सेमीकंडक्टर दिग्गजों की टक्कर में लाकर खड़ा कर देगा।

✴️ इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) का रणनीतिक और व्यापक आर्थिक प्रभाव (Strategic and Macroeconomic Impact of EMC)

भिवाड़ी (राजस्थान) में बना यह ELCINA EMC सिर्फ कोई आम इंडस्ट्रियल पार्क नहीं है, बल्कि यह एक पूरा ‘इकोसिस्टम’ (Ecosystem) है जिसे प्लग-एंड-प्ले (Plug-and-play) सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया है।

EMC योजना का मकसद ही यही है कि भारत में बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन देकर दुनिया भर की इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन (ESDM) कंपनियों को आकर्षित किया जाए।

इस क्लस्टर में 20 से ज्यादा कंपनियों ने ₹1,200 करोड़ से ज्यादा के निवेश का प्लान बनाया है, जिनमें ईवी पार्ट्स (EV Parts) और आरएफआईडी (RFID) बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं।

अभी ई-पैक ड्यूरेबल (E-Pack Durable) जैसी 11 कंपनियां वहां काम करना शुरू भी कर चुकी हैं, जिससे 2,700 से ज्यादा लोगों को रोजगार (Employment) मिल रहा है। राजस्थान का इस फील्ड में आना भारत के पश्चिमी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Industrial Corridor) की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।

📚 Static GK Connect

  • नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology – MeitY)।
  • SPECS का पूर्ण रूप: Scheme for Promotion of Manufacturing of Electronic Components and Semiconductors.
  • India Semiconductor Mission (ISM): इसे ‘Digital India Corporation’ के तहत एक इंडिपेंडेंट बिजनेस डिवीजन के रूप में बनाया गया है, ताकि देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को रफ्तार मिल सके।
  • OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test): यह सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का वह जरूरी हिस्सा है जहाँ बने हुए सिलिकॉन वेफर्स (Silicon Wafers) को फाइनल चिप्स के रूप में असेंबल, पैकेज और टेस्ट किया जाता है।

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. हाल ही में राजस्थान के भिवाड़ी में उद्घाटित भारत की पहली SME-आधारित सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन इकाई के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
यह सुविधा ‘Sahasra Semiconductors Pvt. Ltd.’ द्वारा स्थापित की गई है जो मुख्य रूप से एक OSAT/ATMP सुविधा है।
इस प्रोजेक्ट को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की SPECS योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त है।
यह एक पूर्णतः फैब (Fabrication) यूनिट है जो स्क्रैच से सिलिकॉन वेफर का निर्माण करती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2 ✅
b) केवल 2 और 3
c) केवल 1 और 3
d) 1, 2 और 3

🤔 Q2. भारत सरकार की ‘SPECS’ योजना, जो हाल ही में भारी चर्चा में रही, मुख्य रूप से किस क्षेत्र को बढ़ावा देने से संबंधित है?
a) सौर ऊर्जा उपकरणों और पैनलों का विनिर्माण
b) इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टरों का विनिर्माण ✅
c) फार्मास्युटिकल सक्रिय सामग्री (APIs) का उत्पादन
d) रक्षा उपकरणों का घरेलू निर्माण और निर्यात

🤔 Q3. सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के संदर्भ में ‘OSAT’ का पूर्ण रूप क्या है?
a) Open System for Advanced Technology
b) Outsourced Semiconductor Assembly and Test ✅
c) Optical Semiconductor Array Testing
d) Overseas Semiconductor Alignment Tool

🏦 Economy / Banking Current Affairs

PFRDA NPS Retirement Income Scheme RIS Drawdown

📌 PFRDA द्वारा NPS सब्सक्राइबर्स के लिए नई ‘Retirement Income Scheme’ (RIS) लॉन्च

अगर आप बैंकिंग (IBPS, SBI PO) या SSC की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काफी काम आने वाली है। हाल ही में पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े बुजुर्गों के लिए एक बेहद शानदार और फ्लेक्सिबल ‘Retirement Income Scheme’ (RIS) लॉन्च की है।

15 मई 2026 को जारी इस नए नियम के तहत, लोगों को रिटायरमेंट के बाद (Post-retirement) अपने जमा पैसे (Corpus) को निकालने के लिए “ड्रॉडाउन” (Drawdown) का एक गजब का ऑप्शन दिया गया है।

पहले नियम थोड़े सख्त थे, लेकिन अब आप अपने फंड का एक बड़ा हिस्सा मार्केट में निवेशित रख सकते हैं और 85 साल की उम्र तक अपनी सहूलियत के हिसाब से किस्तों में पैसा ले सकते हैं।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

  • इस नई RIS स्कीम के तहत, सब्सक्राइबर अपने रिटायरमेंट (60 साल की उम्र) पर अपने फंड का 60% हिस्सा (Lumpsum) NPS के अंदर ही छोड़ सकते हैं। यह पैसा ‘RIS Steady’ नाम के एक खास लाइफसाइकिल फंड (Lifecycle Fund) में लगा रहेगा।
  • मजे की बात यह है कि इस ‘RIS Steady’ फंड का एसेट मिक्स (Asset Mix) आपकी उम्र के हिसाब से अपने आप बदलता रहेगा। 60 साल की उम्र में यह 35% इक्विटी (Equity) में होगा, 75 साल में घटकर 10% रह जाएगा, और 85 साल तक इसी 10% पर फिक्स रहेगा।
  • आप इस ड्रॉडाउन सुविधा का इस्तेमाल करके हर महीने, हर तीन महीने या साल में एक बार पेमेंट लेने का विकल्प चुन सकते हैं। यह सुविधा सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के NPS ग्राहकों के लिए है।
  • PFRDA ने 14 मई 2026 को एक और सर्कुलर जारी किया है, जिसमें वार्षिकी (Annuity) सरेंडर करने के नियमों में भी बड़ी छूट दी गई है। मतलब अब अगर कोई गंभीर बीमारी (Critical Illness) हो जाए, तो पैसा समय से पहले निकाला जा सकेगा।
  • ध्यान रहे कि इस ड्रॉडाउन सुविधा से आपकी 20% या 40% वाली अनिवार्य वार्षिकी (Mandatory Annuitization) के नियम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वह वैसे ही चलेगी।

✴️ Retirement Income Scheme (RIS) की कार्यप्रणाली और वित्तीय तंत्र (Mechanisms and Financial Framework of RIS)

NPS के अंदर यह जो नई ड्रॉडाउन सुविधा आई है, यह मुख्य रूप से दो तरीकों पर काम करती है: Systematic Payout Rate (SPR) और Systematic Unit Redemption (SUR)

‘SPR’ (जो कि डिफॉल्ट ऑप्शन है) के तहत, आपको कितना पैसा मिलेगा यह आपकी मौजूदा उम्र और 85 साल होने तक बचे हुए समय के आधार पर (प्रतिशत में) तय होता है। इसका सिंपल सा फॉर्मूला है: 1 ÷ (85 – वर्तमान आयु) = वार्षिक पेआउट दर।

आयु (Age)SPR पेआउट दर (Payout Rate)
60 वर्ष4.00%
65 वर्ष5.00%
70 वर्ष6.67%
75 वर्ष10.00%
80 वर्ष20.00%

वहीं दूसरी तरफ, ‘SUR’ के तहत आपके कुल यूनिट्स को बचे हुए सालों में बराबर बांट दिया जाता है। इसका फायदा यह है कि मार्केट (NAV) के उतार-चढ़ाव के बावजूद आपको हर महीने एक फिक्स संख्या में यूनिट्स का पैसा मिलता रहेगा।

यह योजना अपने आप में काफी क्रांतिकारी है! एक तरफ जहां यह बुजुर्गों को नियमित आय की गारंटी देती है, वहीं उनके फंड के बचे हुए हिस्से को मार्केट में रखकर महंगाई (Inflation) से लड़ने और ‘कॉर्पस एप्रिसिएशन’ (Corpus Appreciation) का फायदा भी दिलाती है।

यह रिटायरमेंट प्लानिंग को सिर्फ पैसे बचाने (Wealth Preservation) से आगे ले जाकर, पैसे बढ़ाने (Wealth Optimization) का मौका देती है।

✴️ Annuity Surrender नियमों में छूट और व्यापक आर्थिक प्रभाव (Relaxation in Annuity Surrender Rules and Broader Economic Impacts)

PFRDA ने सिर्फ ड्रॉडाउन की ही छूट नहीं दी है, बल्कि ‘Annuity Service Providers’ (ASPs) के जरिए वार्षिकी सरेंडर (Annuity Surrender) के नियमों को भी काफी आसान कर दिया है।

आपको बता दें कि पहले एक बार पेंशन प्लान ले लिया तो उससे बाहर निकलना लगभग नामुमकिन था, क्योंकि सरकार चाहती थी कि बुढ़ापे में इनकम सिक्योर रहे।

लेकिन अब, अगर सब्सक्राइबर या उसके परिवार के किसी सदस्य को कोई गंभीर बीमारी (Critical Illness) हो जाती है, तो वे अपनी पॉलिसी सरेंडर करके इलाज के लिए पैसा निकाल सकते हैं।

अगर हम इसे मैक्रोइकोनॉमिक (Macroeconomic) नजरिए से देखें, तो यह लचीलापन (Flexibility) NPS को बाकी पुरानी पेंशन स्कीम्स से कहीं ज्यादा अट्रैक्टिव बनाता है।

जब लोगों को भरोसा होता है कि इमरजेंसी में वो अपना पैसा निकाल सकते हैं, तो वे ज्यादा निवेश (Voluntary Contributions) करते हैं। इसका सीधा फायदा हमारे शेयर बाजार (Capital Markets) को होता है और देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लंबे समय के लिए पैसा मिल पाता है।

📚 Static GK Connect

  • PFRDA (Pension Fund Regulatory and Development Authority): यह वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अंडर काम करने वाली एक वैधानिक संस्था (Statutory Body) है। इसे PFRDA एक्ट 2013 के जरिए कानूनी दर्जा मिला था। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • NPS (National Pension System): इसे सरकार ने 1 जनवरी 2004 को सेना (Armed Forces) को छोड़कर सभी नए सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू किया था। बाद में मई 2009 में इसे देश के सभी आम नागरिकों (18-70 वर्ष) के लिए भी खोल दिया गया।
  • PFRDA के मुख्य कार्य: पेंशन फंड बनाना, उसे रेगुलेट करना और पेंशन स्कीम से जुड़े लोगों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करना।

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. PFRDA द्वारा हाल ही में लॉन्च की गई ‘Retirement Income Scheme’ (RIS) के तहत, NPS सब्सक्राइबर्स किस अधिकतम आयु तक ‘ड्रॉडाउन’ (Drawdown) के माध्यम से आवधिक भुगतान प्राप्त कर सकते हैं?
a) 70 वर्ष
b) 75 वर्ष
c) 80 वर्ष
d) 85 वर्ष ✅

🤔 Q2. नई NPS ड्रॉडाउन सुविधा के अंतर्गत ‘SUR’ और ‘SPR’ विकल्पों का पूर्ण रूप क्या है?
a) Static Unit Ratio और Simple Payout Return
b) Systematic Unit Redemption और Systematic Payout Rate ✅
c) Standard Unit Reserve और Secured Pension Rate
d) Synchronized Unit Return और Statutory Payout Ratio

🤔 Q3. PFRDA द्वारा NPS निकासी नियमों में किए गए हालिया संशोधनों के अनुसार, किसी सब्सक्राइबर को अपनी ‘Annuity’ (वार्षिकी) पॉलिसी को समय से पहले सरेंडर करने की अनुमति मुख्य रूप से किस परिस्थिति में दी गई है?
a) बच्चों की उच्च शिक्षा के वित्तपोषण के लिए
b) नया घर खरीदने (Housing Loan) के डाउनपेमेंट के लिए
c) स्वयं या परिवार के किसी सदस्य की गंभीर बीमारी (Critical Illness) के इलाज के मामले में ✅
d) विदेश यात्रा के लिए धन जुटाने हेतु

🌾 Economy / Agriculture Current Affairs

Cabinet Approves Kharif Crops MSP Hike 2026-27

📌 केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के MSP में भारी वृद्धि को मंजूरी

चलिए, अब चलते हैं हमारे कृषि क्षेत्र की ओर। किसानों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है।

हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs – CCEA) ने साल 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों (Kharif Crops) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price – MSP) में अच्छी खासी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।

सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके और उनकी आमदनी (Income Security) पक्की हो सके।

इस बार सबसे ज्यादा पैसों की बढ़ोतरी (Absolute Increase) सूरजमुखी के बीज (Sunflower Seed), कपास (Cotton), और तिलहन (Oilseeds) जैसी फसलों में की गई है। UPSC Mains (GS Paper 3) और स्टेट PCS की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह इकॉनमी और एग्रीकल्चर का एकदम हॉट टॉपिक है।

⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)

  • कैबिनेट कमिटी (CCEA) ने 14 प्रमुख खरीफ फसलों के लिए 2026-27 सीजन के MSP में इजाफा किया है।
  • सबसे ज्यादा पैसों की बढ़ोतरी (Absolute Increase) सूरजमुखी के बीज में की गई है, जो सीधे ₹622 प्रति क्विंटल बढ़ी है।
  • इसके बाद नंबर आता है कपास (Cotton) का जिसमें ₹557 प्रति क्विंटल, रामतिल (Nigerseed) में ₹515 और तिल (Sesamum) में ₹500 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
  • ज्वार (Jowar) के MSP को बढ़ाकर ₹2553, बाजरा (Bajra) को ₹1650, रागी (Ragi) को ₹3705 और मक्का (Maize) को ₹1100 प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
  • धान (Paddy), जो कि हमारे देश की सबसे बड़ी खरीफ फसल है, उसकी कीमतों में भी अच्छा इजाफा किया गया है।

✴️ खरीफ फसलों के MSP का विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis of MSP for Kharif Crops 2026-27)

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह गारंटी वाला दाम है जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदती है। यह मार्केट में दाम अचानक गिरने पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच (Safety Net) का काम करता है।

यह दाम ‘कृषि लागत और मूल्य आयोग’ (CACP) की सिफारिशों पर तय किए जाते हैं और इनका सीधा असर देश की फूड सिक्योरिटी और महंगाई (Inflation) पर पड़ता है।

फसल (Kharif Crop)MSP 2026-27 (₹ प्रति क्विंटल)मुख्य विशेषताएं / वृद्धि
सूरजमुखी के बीज (Sunflower Seed)सर्वाधिक पूर्ण वृद्धि: ₹622
कपास (Cotton)दूसरी सर्वाधिक वृद्धि: ₹557
रामतिल (Nigerseed)तीसरी सर्वाधिक वृद्धि: ₹515
रागी (Ragi)₹3705पौष्टिक अनाज (Nutri-cereals) को बढ़ावा
ज्वार (Jowar)₹2553168% वृद्धि (बेसलाइन के संदर्भ में)
बाजरा (Bajra)₹1650132% वृद्धि (बेसलाइन के संदर्भ में)
मक्का (Maize)₹1100पोल्ट्री और इथेनॉल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण

अगर आप गौर करें, तो सरकार की प्राइसिंग स्ट्रेटेजी में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। सरकार अब धान और गेहूं जैसी पुरानी फसलों के बजाय दलहन (Pulses), तिलहन (Oilseeds) और मोटे अनाजों (Millets/Nutri-cereals) के MSP को ज्यादा तेजी से बढ़ा रही है।

यह सिर्फ किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे इकोनॉमी और एनवायरनमेंट के बहुत गहरे कारण छिपे हैं।

✴️ फसल विविधीकरण और व्यापक आर्थिक निहितार्थ (Crop Diversification and Macroeconomic Implications)

अब सवाल यह है कि सरकार ने ऐसा क्यों किया? देखिए, भारत आज भी अपनी जरूरत का करीब 60% कुकिंग ऑयल बाहर से मंगाता है। इससे हमारे विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर बहुत तगड़ा असर पड़ता है।

सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलों के दाम बढ़ाकर सरकार किसानों को धान (Paddy) जैसी ज्यादा पानी पीने वाली (Water-guzzling) फसलों से हटाकर दाल और तिलहन उगाने की ओर प्रेरित कर रही है। अर्थशास्त्र की भाषा में इसे ‘फसल विविधीकरण’ (Crop Diversification) कहा जाता है।

इसके बहुत ही शानदार दूरगामी प्रभाव (Third-order effects) होते हैं: पहला, यह जमीन के गिरते जल स्तर (Groundwater depletion) को रो20 May 2026 Current Affairs: SC Judges, Ebola & NPS RISकता है। दूसरा, यह मिट्टी की सेहत (Soil Health) सुधारता है (खासकर दालें जो नाइट्रोजन फिक्स करती हैं)।

और तीसरा, यह खाने के तेल के आयात बिल को कम करके हमारे व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बैलेंस करता है। साथ ही, रागी और बाजरा जैसे श्री अन्न (Millets) पर फोकस करने से देश में पोषण (Nutritional Security) बढ़ता है और जलवायु परिवर्तन से लड़ने वाली खेती (Climate-resilient Agriculture) को बढ़ावा मिलता है।

📚 Static GK Connect

  • MSP (Minimum Support Price): यह भारत सरकार द्वारा किसानों को मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए दिया जाने वाला एक तरह का गारंटी मूल्य है।
  • CACP (Commission for Agricultural Costs and Prices): यह कृषि मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था है (1965 में बनी थी)। यही संस्था 22 प्रमुख फसलों के लिए MSP तय करने की सलाह देती है।
  • अंतिम निर्णय: MSP पर फाइनल मुहर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली ‘आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति’ (CCEA) लगाती है।
  • खरीफ फसलें (Kharif Crops): ये मानसून के मौसम की फसलें हैं, जिन्हें जून-जुलाई में बोया जाता है और सितंबर-अक्टूबर में काट लिया जाता है (जैसे धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास और सोयाबीन)।

🎯 Current Affairs MCQs

🤔 Q1. विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के संबंध में, सरकार द्वारा किस फसल के लिए सबसे अधिक ‘पूर्ण वृद्धि’ (Absolute Increase – रुपये प्रति क्विंटल में) की घोषणा की गई है?
a) रागी (Ragi)
b) कपास (Cotton)
c) सूरजमुखी के बीज (Sunflower Seed) ✅
d) धान (Paddy)

🤔 Q2. भारत में कृषि फसलों के लिए ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) की सिफारिश करने वाली नोडल एजेंसी कौन सी है?
a) नाबार्ड (NABARD)
b) कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) ✅
c) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
d) भारतीय खाद्य निगम (FCI)

🤔 Q3. वर्तमान आर्थिक नीतियों के तहत, सरकार द्वारा तिलहन (Oilseeds) और दलहन (Pulses) के MSP में गेहूं और धान की तुलना में अधिक आनुपातिक वृद्धि करने का प्राथमिक रणनीतिक उद्देश्य क्या है?
a) कृषि क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करना
b) किसानों को फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के लिए प्रेरित करना और खाद्य तेल आयात बिल को कम करना ✅
c) केवल निर्यात के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देना
d) कृषि उत्पादों पर माल और सेवा कर (GST) संग्रह को बढ़ाना

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top