🏆 (Awards & Literature Current Affairs)

📌 यांग शुआंग-जी के उपन्यास ‘Taiwan Travelogue’ ने रचा इतिहास; जीता वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित International Booker Prize
नमस्ते दोस्तों! Daily Current Affairs 22 May 2026 के इस विशेष अंक में आपका स्वागत है। आज साहित्य की दुनिया से एक बहुत ही बड़ी और गर्व करने वाली खबर आई है।
हाल ही में ताइवानी लेखिका यांग शुआंग-जी (Yáng Shuāng-zǐ) के बेहतरीन उपन्यास ‘Taiwan Travelogue’ को साल 2026 का प्रतिष्ठित ‘International Booker Prize’ दिया गया है।
अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें ऐसा क्या खास है? तो आपको बता दें कि इस पुरस्कार के इतिहास में यह पहला मौका है…
…जब मूल रूप से मंदारिन चीनी (Mandarin Chinese) भाषा में लिखे गए किसी उपन्यास ने यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान अपने नाम किया है।
इस लाजवाब किताब का अंग्रेजी में अनुवाद लिन किंग (Lin King) ने किया है। इस ऐतिहासिक जीत के लिए लेखक और अनुवादक को संयुक्त रूप से £50,000 की पुरस्कार राशि मिलेगी…
…जिसे दोनों आपस में आधा-आधा बांटेंगे। हमारी UPSC और राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं के नजरिए से यह टॉपिक बेहद जरूरी है…
…क्योंकि यह वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति और बहुभाषी साहित्य के बढ़ते दायरे को बेहतरीन ढंग से दिखाता है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- पहला मंदारिन उपन्यास: ‘Taiwan Travelogue’ इस पुरस्कार के पूरे इतिहास में मंदारिन चीनी भाषा में लिखी गई पहली ऐसी किताब बन गई है जिसने यह पुरस्कार जीता है।
- ताइवान के लिए ऐतिहासिक पल: इस शानदार जीत के साथ ही यांग शुआंग-जी और लिन किंग इस सम्मान को पाने वाले पहले ताइवानी और ताइवानी-अमेरिकी नागरिक बन गए हैं।
- लगातार दूसरी बड़ी सफलता: इस किताब को छापने वाले स्वतंत्र पब्लिशर ‘And Other Stories’ के लिए भी यह लगातार दूसरा बड़ा साल है। इससे पहले साल 2025 में भी इन्हीं के द्वारा प्रकाशित बानू मुश्ताक के कन्नड़ उपन्यास ‘Heart Lamp’ को यह पुरस्कार मिला था।
- कहानी का अनोखा ताना-बाना: इस उपन्यास की पृष्ठभूमि साल 1938 की है, जब ताइवान पर जापानी औपनिवेशिक शासन था। यह कहानी दो महिलाओं के बीच के खूबसूरत और जटिल रिश्ते पर आधारित है।
✴️ उत्तर-औपनिवेशिक जटिलता और भोजन का कूटनीतिक चित्रण
▪️ इस उपन्यास का ढांचा सचमुच बहुत अनोखा है। क्या आप जानते हैं कि इसके हर चैप्टर का नाम किसी न किसी पारंपरिक डिश पर रखा गया है?
जैसे ‘bah-so’ (यानी पकी हुई कीमा बनाई हुई सूअर का मांस) और ‘Mitsumame’ (एक तरह की फ्रूट और जेली आइस)।
कहानी में एक जापानी लेखिका अओयामा चिजुको और उनकी ताइवानी दुभाषिया (इंटरप्रेटर) चिज़ुरु के रिश्ते के जरिए औपनिवेशिक सत्ता (Colonial Power) के टेढ़े-मेढ़े समीकरणों को दिखाया गया है।
लेखिका ने बड़े ही खूबसूरत तरीके से यह बात समझाई है कि ताइवान के लोगों का अपने जापानी अतीत के साथ एक बड़ा ही उलझा हुआ रिश्ता रहा है…
…जिसमें गुस्सा भी है तो कहीं न कहीं पुरानी यादों का गहरा लगाव भी है।
✴️ उपन्यास का मेटाफिक्शनल विन्यास और छद्म नाम का इतिहास
▪️ इस उपन्यास की सबसे अनोखी बात इसका मेटाफिक्शनल (Metafictional) अंदाज है। यानी इसमें काल्पनिक पाद टिप्पणियों (footnotes), अकादमिक प्रस्तावनाओं और अनुवादक की टिप्पणियों का ऐसा शानदार इस्तेमाल किया गया है…
…कि पाठक को लगता है जैसे वह कोई असली ऐतिहासिक संस्मरण (memoir) पढ़ रहा हो। और हां, एक भावुक कर देने वाली बात यह भी है…
…कि यांग शुआंग-जी वास्तव में दो जुड़वां बहनों का छद्म नाम (pen name) है। साल 2015 में छोटी बहन रुओ-हुई के दुनिया से चले जाने के बाद…
…बड़ी बहन रुओ-त्सी ने अपनी बहन को श्रद्धांजलि देने के लिए इसी नाम से लिखना जारी रखा और इस बेमिसाल किताब का सृजन किया।
हाल के वर्षों के International Booker Prize विजेता
| वर्ष | पुस्तक का नाम | मूल लेखक | अनुवादक | मूल भाषा |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | Taiwan Travelogue | Yáng Shuāng-zǐ | Lin King | मंदारिन चीनी |
| 2025 | Heart Lamp | Banu Mushtaq | Deepa Bhasthi | कन्नड़ |
| 2022 | Tomb of Sand | Geetanjali Shree | Daisy Rockwell | हिंदी |
📚 Static GK Connect
- International Booker Prize: इस पुरस्कार की शुरुआत साल 2005 में हुई थी (तब इसे Man Booker International Prize कहा जाता था)। साल 2016 से नियम बदला गया और अब यह पुरस्कार हर साल यूके या आयरलैंड में प्रकाशित होने वाले अनूदित काल्पनिक साहित्य (translated fiction) को दिया जाता है।
- भारतीय संदर्भ: साल 2022 में भारत की गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘Tomb of Sand’ (जिसका अंग्रेजी अनुवाद डेज़ी रॉकवेल ने किया था) ने यह पुरस्कार जीतकर इतिहास रचा था। यह किसी भारतीय भाषा में लिखी गई पहली किताब थी जिसे यह सम्मान मिला था।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में मंदारिन चीनी भाषा से अंग्रेजी में अनूदित किस उपन्यास ने प्रतिष्ठित International Booker Prize 2026 जीता है?
a) Tomb of Sand
b) Heart Lamp
c) Taiwan Travelogue ✅
d) Not a River
🤔 Q2. उपन्यास ‘Taiwan Travelogue’ के अंग्रेजी अनुवादक कौन हैं, जिन्हें लेखिका यांग शुआंग-जी के साथ संयुक्त रूप से International Booker Prize 2026 दिया गया है?
a) डेज़ी रॉकवेल (Daisy Rockwell)
b) लिन किंग (Lin King) ✅
c) दीपा भस्ती (Deepa Bhasthi)
d) रॉस बेंजामिन (Ross Benjamin)
🤔 Q3. International Booker Prize के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह पुरस्कार प्रतिवर्ष यूनाइटेड किंगडम (UK) या आयरलैंड में प्रकाशित अनूदित काल्पनिक साहित्य को दिया जाता है。
2. इसकी पुरस्कार राशि केवल मूल लेखक को प्रदान की जाती है。
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
a) केवल 1 ✅
b) केवल 2
c) 1 और 2 दोनों
d) न तो 1 और न ही 2
🌿 (Environment & Economy Current Affairs)

📌 भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने नया ईंधन मानक ‘IS 19850:2026’ किया जारी; 30% एथेनॉल सम्मिश्रण का विनियामक ढांचा तैयार
चलिए अब पर्यावरण और हमारी जेब, दोनों से जुड़े एक बेहद जरूरी विषय पर बात करते हैं।
भारत को हरित ऊर्जा (Green Energy) के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने हाल ही में पेट्रोल में एथेनॉल के उच्च मिश्रण के नए मानकों को मंजूरी दे दी है।
भारत सरकार के नए गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल में 22% से 30% तक एथेनॉल सम्मिश्रण के लिए नया मानक ‘IS 19850:2026’ लागू कर दिया गया है।
आप तो जानते ही हैं कि वर्तमान में चल रहे E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) प्रोग्राम को भारत में कितनी शानदार सफलता मिली है।
बस इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने अब भविष्य के लिए यानी E30 ईंधन को बाजार में उतारने की कानूनी तैयारी शुरू कर दी है।
यह टॉपिक हमारी परीक्षा के पर्यावरण, विज्ञान और अर्थव्यवस्था खंड के लिए बहुत काम का है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- नया मानक IS 19850:2026: यह नया नियम पेट्रोल में एथेनॉल के ऊंचे स्तरों जैसे E22, E25, E27 और E30 के सुरक्षित और वैज्ञानिक मिश्रण के साथ-साथ ऑक्टेन और सल्फर के स्तर को तय करता है।
- कच्चे तेल के महंगे आयात पर लगाम: क्या आप जानते हैं कि भारत अपनी जरूरत का 85% से भी ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है? इस मिश्रण के जरिए हमारी यह आयात निर्भरता बहुत हद तक कम हो जाएगी।
- किसानों को सीधा फायदा: इस एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, खराब हुए मक्के और जैविक कचरों से किया जाता है। इसका मतलब साफ है कि इसका सीधा पैसा हमारे देश के किसानों की जेब में जाएगा।
- वाहनों के इंजन में बदलाव: हालांकि, यह काम इतना आसान नहीं है। गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले पॉजिटिव इग्निशन इंजनों (Positive Ignition Engines) के पुर्जों को एथेनॉल के कारण होने वाले जंग (corrosion) से बचाने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को नई तकनीक और डिजाइन पर काम करना होगा।
✴️ उच्च एथेनॉल सम्मिश्रण का रासायनिक और पर्यावरणीय प्रभाव
▪️ जब हम पेट्रोल में एथेनॉल ($C_2H_5OH$) मिलाते हैं, तो ईंधन में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है।
इसका सीधा वैज्ञानिक परिणाम यह होता है कि ईंधन का दहन (combustion) बहुत अच्छे से होता है, जिससे साइलेंसर से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड ($CO$), हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड ($NO_x$) जैसी जहरीली गैसों के उत्सर्जन में भारी कमी आती है।
लेकिन हां, E30 जैसे उच्च मिश्रण का इस्तेमाल करने के लिए गाड़ियों में हाई कंप्रेशन रेशियो और खास कोटिंग वाले फ्यूल सिस्टम की जरूरत होगी ताकि ईंधन पंपों को कोई नुकसान न पहुंचे।
✴️ भारत का राष्ट्रीय जैव ईंधन रोडमैप और रणनीतिक लक्ष्य
▪️ सरकार ने पहले पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) हासिल करने का लक्ष्य साल 2030 रखा था, लेकिन हमारी तेजी को देखते हुए इसे बदलकर साल 2025-26 कर दिया गया है।
अब सरकार द्वारा एथेनॉल के और ऊंचे स्तरों के लिए नए मानकों को अधिसूचित करना यह साफ दिखाता है कि भारत बहुत जल्द फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel)…
…और पूरी तरह से एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों (E100) की तरफ कदम बढ़ाने के लिए अपना मजबूत विनियामक ढांचा (regulatory framework) तैयार कर चुका है।
भारत का एथेनॉल सम्मिश्रण रोडमैप और मानक
| मानक कोड | सम्मिश्रण श्रेणी | लक्षित एथेनॉल प्रतिशत | वर्तमान कार्यान्वयन स्थिति |
|---|---|---|---|
| IS 2796 | E10 – E20 | 10% से 20% | पूरे भारत में वर्तमान में सक्रिय |
| IS 19850:2026 | E22 – E30 | 22% से 30% | विनियामक ढांचा अधिसूचित; वाणिज्यिक रोलआउट की तैयारी |
| CMVR (प्रस्तावित) | E85 – E100 | 85% से 100% | फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए मसौदा संशोधन चरण में |
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- भारतीय मानक ब्यूरो (BIS): यह संस्था उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत काम करती है। इसकी स्थापना भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के तहत की गई थी।
- जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति-2018: इसे भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से लागू किया गया था, ताकि देश में कच्चे तेल के आयात को घटाया जा सके और पर्यावरण को बचाया जा सके।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा E22 से E30 पेट्रोल वेरिएंट के लिए कौन सा नया मानक अधिसूचित किया गया है?
a) IS 15408:2026
b) IS 19850:2026 ✅
c) IS 12000:2026
d) IS 18001:2026
🤔 Q2. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) किस केंद्रीय मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करता है?
a) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
b) उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ✅
c) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
d) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
🤔 Q3. भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) प्राप्त करने के अपने लक्ष्य को किस वर्ष तक के लिए पुनर्निर्धारित किया है?
a) 2028-29
b) 2030-31
c) 2025-26 ✅
d) 2026-27
🌍 (Health & International Organisations Current Affairs)

📌 कांगो और युगांडा में फैले बुंडीबुग्यो इबोला वायरस प्रकोप को WHO ने घोषित किया ‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC)
दोस्तों, अगली खबर थोड़ी चिंताजनक है लेकिन परीक्षा के लिहाज से बहुत ज्यादा जरूरी है।
वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने हाल ही में कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे खतरनाक इबोला वायरस को…
…‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित कर दिया है।
आपको बता दें कि यह किसी भी स्वास्थ्य संकट के लिए दुनिया की सबसे बड़ी चेतावनी होती है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों (IHR 2005) के तहत तब जारी किया जाता है…
…जब कोई बीमारी देशों की सीमाओं को पार करके फैलने लगती है।
इस समय फैलने वाले इबोला का मुख्य कारण इसका बेहद दुर्लभ ‘बुंडीबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo Strain) है, जिसकी संक्रमण और मृत्यु दर बहुत अधिक है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की चुनौती: इस दुर्लभ स्ट्रेन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके इलाज के लिए अभी तक दुनिया में कोई भी स्वीकृत टीका (vaccine) या पक्की दवा उपलब्ध नहीं है।
- तेजी से फैलता संक्रमण: कांगो के इतूरी प्रांत में अब तक 80 से ज्यादा मौतें और करीब 246 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, और चिंता की बात यह है कि यह संक्रमण अब युगांडा की सीमा तक पहुंच गया है।
- PHEIC घोषित होने का असर: इस घोषणा के बाद सभी सदस्य देशों के लिए यह कानूनी रूप से जरूरी हो जाता है कि वे अपनी आपातकालीन प्रणालियों को चालू करें, कांटेक्ट ट्रेसिंग तेज करें और जांच की सुविधाओं को दुरुस्त करें।
- यात्रा और व्यापार पर स्थिति: हालांकि WHO ने फिलहाल किसी भी देश के बीच यात्रा या व्यापार पर पाबंदी लगाने से मना किया है, लेकिन हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग को और सख्त करने के निर्देश जरूर दिए हैं।
✴️ बुंडीबुग्यो इबोला वायरस की संचरण प्रणाली और नैदानिक चुनौतियां
▪️ अब जरा इसके विज्ञान को समझते हैं। इबोला वायरस एक बेहद जानलेवा बीमारी है जो किसी संक्रमित इंसान या जानवर के खून, लार, उल्टी या अन्य शारीरिक तरलों के सीधे संपर्क में आने से फैलती है।
अब तक हम ज़ैरे और सूडान इबोला स्ट्रेन के बारे में सुनते आए हैं, जिनके लिए हमारे पास ‘Ervebo’ जैसी वैक्सीन मौजूद हैं।
लेकिन बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ कोई सुरक्षा चक्र यानी टीका न होने के कारण यह डॉक्टरों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बहुत बड़ी सिरदर्दी बन गया है。
✴️ ‘One Health’ दृष्टिकोण और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियम (IHR)
▪️ इस संकट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इंसानों, जानवरों और हमारे पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में पूरी तरह जुड़ा हुआ है…
…जो हमारे राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन (National One Health Mission) का मुख्य आधार भी है।
इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियम (IHR 2005) विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों के बीच एक कानूनी समझौता है…
…जो महामारियों की समय पर पहचान करने और दुनिया भर में तेजी से कदम उठाने का एक मजबूत ढांचा देता है।
इबोला वायरस के प्रमुख स्ट्रेनों की तुलना
| इबोला स्ट्रेन का नाम | पहली पहचान का वर्ष | मृत्यु दर (औसत) | वैक्सीन की उपलब्धता |
|---|---|---|---|
| ज़ैरे इबोला वायरस (Zebov) | 1976 | ~60% – 90% | हाँ (Ervebo वैक्सीन) |
| सूडान इबोला वायरस (Sudv) | 1976 | ~50% | परीक्षण के चरण में |
| बुंडीबुग्यो वायरस (Bdbv) | 2007 | ~30% – 40% | नहीं (वर्तमान प्रकोप का कारण) |
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- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। इसी याद में हर साल 7 अप्रैल को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ मनाया जाता है।
- इबोला का इतिहास: इस वायरस की पहली बार पहचान साल 1976 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला नदी के किनारे बसे याम्बुकु गांव में हुई थी, इसी नदी के नाम पर इसका नाम इबोला पड़ा।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में WHO द्वारा किस दुर्लभ इबोला स्ट्रेन के प्रसार के कारण कांगो और युगांडा में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया गया है?
a) ज़ैरे स्ट्रेन (Zaire Strain)
b) सूडान स्ट्रेन (Sudan Strain)
c) बुंडीबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo Strain) ✅
d) रेस्टन स्ट्रेन (Reston Strain)
🤔 Q2. अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों (IHR) के तहत ‘PHEIC’ घोषित करने का अंतिम अधिकार किसके पास सुरक्षित होता है?
a) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
b) WHO के महानिदेशक (Director-General) ✅
c) विश्व स्वास्थ्य सभा के अध्यक्ष
d) अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज控制 (Africa CDC)
🤔 Q3. इबोला वायरस के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी खोज पहली बार वर्ष 1976 में इबोला नदी के समीप की गई थी。
2. यह हवा और पानी के माध्यम से फैलने वाली एक श्वसन संक्रामक बीमारी है。
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन असत्य है/हैं?
a) केवल 1
b) केवल 2 ✅
c) 1 और 2 दोनों
d) न तो 1 और न ही 2
💻 (International Relations & Cyber Security Current Affairs)

📌 वैश्विक आईटी सुरक्षा मानकों के क्षेत्र में भारत का नेतृत्व; कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड (CCDB) की संभाली अध्यक्षता
दोस्तों, साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) की दुनिया में भारत ने एक बहुत ही बड़ा और गर्व करने वाला मुकाम हासिल किया है।
वैश्विक आईटी सुरक्षा मानकों को तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण मंच ‘कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड’ (CCDB) की कमान अब भारत के हाथों में आ गई है।
भारत को दो सालों के लिए यानी अप्रैल 2026 से अप्रैल 2028 तक इस प्रतिष्ठित बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया है।
इस शानदार खबर पर मुहर टोक्यो, जापान में आयोजित ‘कॉमन क्राइटेरिया रिकग्निशन अरेंजमेंट’ (CCRA) की उच्च स्तरीय बैठक में लगाई गई।
यह उपलब्धि हमारे देश की तकनीकी ताकत और डिजिटल संप्रभुता को पूरी दुनिया के सामने साबित करती है, जो आपकी UPSC Hindi Current Affairs की तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- ग्लोबल मंच पर भारत का दबदबा: भारत अब इस बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर दुनिया भर के आईटी सुरक्षा मानकों के तकनीकी एजेंडे को दिशा देगा।
- CCRA का कमाल का नियम: CCRA वास्तव में एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसका सबसे सुंदर नियम यह है कि इसके सदस्य देश एक-दूसरे के द्वारा जारी किए गए आईटी सुरक्षा सर्टिफिकेट्स को बिना किसी दोबारा जांच (re-certification) के सीधे स्वीकार कर लेते हैं।
- भारत का प्रतिनिधित्व: हमारे देश में इसके लिए नोडल एजेंसी के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और ‘मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन’ (STQC) निदेशालय मिलकर काम करते हैं।
- डिजिटल सुरक्षा की ताकत: भारत साल 2013 से ही इस संधि में एक ‘सर्टिफिकेट जारी करने वाले देश’ (Certificate-Authorising Nation) के तौर पर शामिल है, जिसके पास आईटी प्रोडक्ट्स को EAL4 (Evaluation Assurance Level 4) स्तर तक सुरक्षा प्रमाणित करने का पूरा अधिकार है।
✴️ कॉमन क्राइटेरिया और सूचना सुरक्षा मूल्यांकन का महत्व
▪️ अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि यह ‘कॉमन क्राइटेरिया’ (यानी ISO/IEC 15408) क्या बला है?
आसान भाषा में कहें तो यह एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा है जिसके जरिए दुनिया भर में बिकने वाले आईटी सुरक्षा उत्पादों (जैसे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर) के दावों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जाती है।
CCDB मुख्य रूप से इसी जांच प्रणाली के तकनीकी विकास को संभालता है।
अब इस मंच की अध्यक्षता मिलने से भारत में बने आईटी प्रोडक्ट्स को बिना किसी रोक-टोक के पूरी दुनिया में तुरंत पहचान और सुरक्षा की गारंटी मिल सकेगी।
✴️ भारत का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढांचा और एसटीक्यूसी की भूमिका
▪️ भारत सरकार के एसटीक्यूसी (STQC) निदेशालय ने हमारे दिल्ली और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में अत्याधुनिक सुरक्षा जांच लैब स्थापित की हैं।
ये लैब ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम, स्मार्ट कार्ड और बायोमेट्रिक डिवाइस की कड़ी सुरक्षा जांच के लिए भारतीय सामान्य मानदंड प्रमाणन योजना (IC3S) चलाती हैं।
CCDB की अध्यक्षता मिलने से भारत को आने वाले दो सालों में वैश्विक स्तर पर उभरती साइबर सुरक्षा नीतियों को अपने अनुकूल बनाने का एक सुनहरा मौका मिला है।
CCRA सदस्यता एवं भारत की स्थिति
| सदस्यता स्तर | श्रेणी के सदस्य देशों की संख्या | भारत का दर्जा और अधिकार |
|---|---|---|
| प्रमाणपत्र-प्राधिकरण राष्ट्र | 20 देश | भारत (STQC) अधिकृत सदस्य; EAL4 स्तर तक प्रमाणीकरण जारी करने की क्षमता |
| प्रमाणपत्र-उपभोक्ता राष्ट्र | 18 देश | ये राष्ट्र केवल अन्य स्वीकृत देशों द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को स्वीकार करते हैं |
📚 Static GK Connect
- STQC निदेशालय: मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन निदेशालय, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाली एक संस्था है।
- CCRA संधि का सफर: कॉमन क्राइटेरिया रिकग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) का गठन वैश्विक सूचना सुरक्षा प्रमाणन प्रक्रियाओं को एक समान बनाने के लिए हुआ था। भारत इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते का हिस्सा 16 सितंबर 2013 को बना था।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. भारत को किस अवधि के लिए ‘कॉमन क्राइटेरिया Development Board’ (CCDB) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है?
a) जनवरी 2025 से दिसंबर 2027
b) अप्रैल 2026 से अप्रैल 2028 ✅
c) मई 2026 से मई 2030
d) अगस्त 2025 से अगस्त 2027
🤔 Q2. सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा मूल्यांकन के लिए ‘कॉमन क्राइटेरिया’ को किस अंतर्राष्ट्रीय मानक कोड के रूप में मान्यता प्राप्त है?
a) ISO 9001
b) ISO 27001
c) ISO/IEC 15408 ✅
d) ISO 14001
🤔 Q3. भारत किस वर्ष ‘कॉमन क्राइटेरिया Recognition Arrangement’ (CCRA) का प्रमाणपत्र-प्राधिकरण देश (Certificate-Authorising Nation) बना था?
a) 2011
b) 2013 ✅
c) 2015
d) 2018
🚀 (Defence & National Infrastructure Current Affairs)

📌 भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी आत्मनिर्भरता का नया अध्याय; पुट्टपर्थी में रखी गई पांचवीं पीढ़ी के गुप्त लड़ाकू विमान ‘AMCA’ परिसर की आधारशिला
डिफेंस के दीवाने छात्रों के लिए एक बहुत ही शानदार और जोश से भर देने वाली खबर आई है!
भारत को रक्षा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने…
…मिलकर आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी (श्री सत्य साईं जिला) में देश के पहले पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘Advanced Medium Combat Aircraft’ (AMCA) प्रोजेक्ट की ऐतिहासिक आधारशिला रखी है।
लगभग ₹15,803 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बनने वाला यह अत्याधुनिक परिसर करीब 650 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैलेगा।
इसमें वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) द्वारा संचालित एक कोर इंटीग्रेशन और समर्पित उड़ान परीक्षण परिसर (Flight-Testing Complex) बनाया जाएगा, जो दुनिया की चुनिंदा बेहतरीन प्रणालियों में से एक होगा।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- एक बहुत बड़ा निवेश: इस ₹15,803 करोड़ के प्रोजेक्ट के शुरू होने से रक्षा क्षेत्र में हमारे देश के लगभग 7,500 उच्च कुशल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए सीधे तौर पर रोजगार के शानदार अवसर पैदा होंगे।
- रणनीतिक तौर पर बेहतरीन जगह: पुट्टपर्थी का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि यह बेंगलुरु में मौजूद एडीए (ADA) मुख्यालय के काफी करीब है। इससे नए विमानों के परीक्षण में लगने वाला समय बहुत हद तक बच जाएगा।
- रायलसीमा डिफेंस कॉरिडोर: पुट्टपर्थी में एएमसीए के साथ-साथ भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के ‘एडवांस्ड अंडरवाटर नेवल सिस्टम्स’ और भारत फोर्ज की कंपनी ‘आग्नेयास्त्र एनर्जेटिक्स’ की डिफेंस एनर्जेटिक्स यूनिट का भी शिलान्यास किया गया।
- ड्रोन सिटी कूर्नूल: इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने कूर्नूल जिले में देश की महत्वाकांक्षी ‘ड्रोन सिटी’ की स्थापना का भी एलान किया, जो भविष्य के आधुनिक युद्धों का नक्शा बदल कर रख देगी।
✴️ एएमसीए (AMCA) की स्टील्थ तकनीक और पांचवीं पीढ़ी के युद्धक लक्षण
▪️ अब बात करते हैं कि आखिर यह विमान इतना खास क्यों है? एएमसीए (AMCA) भारत का पहला स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ (Stealth) यानी रडार की नजरों से पूरी तरह अदृश्य रहने वाला लड़ाकू विमान होगा।
इसके ऊपर रडार की किरणों को सोखने वाले खास पेंट का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसमें हथियारों को बाहर लटकाने के बजाय विमान के अंदरूनी हिस्से (internal weapons bay) में रखा जाएगा ताकि रडार इसे पकड़ न सके।
इसमें आधुनिक रडार (AESA) और सुपरक्रूज़ (Supercruise) जैसी क्षमताएं होंगी जो बिना एक्स्ट्रा फ्यूल जलाए विमान को सुपरसोनिक स्पीड से उड़ा सकेंगी।
✴️ स्वदेशी रक्षा उत्पादन का व्यापक आर्थिक परिदृश्य
▪️ इस शिलान्यास समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने गर्व से बताया कि साल 2014 में जहां हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन महज ₹46,000 करोड़ का था, वह आज बढ़कर लगभग ₹1.54 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है।
यही नहीं, भारत का रक्षा निर्यात भी अब करीब ₹40,000 करोड़ के आंकड़े को छू रहा है।
पुट्टपर्थी की यह नई यूनिट सिर्फ हवाई जहाज बनाने की जगह नहीं होगी, बल्कि यह पूरे रायलसीमा क्षेत्र को एक बहुत बड़े सैन्य-औद्योगिक परिसर (Military-Industrial Complex) के रूप में बदल कर रख देगी।
पुट्टपर्थी में शिलान्यास की गई रक्षा परियोजनाएं
| परियोजना का नाम | निवेशक संस्था/कंपनी | निवेश राशि (₹ करोड़) | प्रमुख विनिर्माण फोकस |
|---|---|---|---|
| AMCA एकीकरण एवं परीक्षण केंद्र | वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) | ₹15,803 करोड़ | पांचवीं पीढ़ी के गुप्त युद्धक विमान का परीक्षण |
| नेवल सिस्टम्स Plant | भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) | ₹480 करोड़ | उन्नत अंडरवाटर टॉरपीडो और सोनार तकनीक |
| डिफेंस एनर्जेटिक्स यूनिट | आग्नेयास्त्र एनर्जेटिक्स लिमिटेड | ₹1,500 करोड़ | भविष्य के युद्धक विस्फोटक और प्रोपेलेंट |
| अम्यूनिशन एंड इलेक्ट्रिक फ्यूज Plant | HFCL लिमिटेड | ₹1,200 करोड़ | डिजिटल इलेक्ट्रिक फ्यूज और सटीक गोला बारूद |
📚 Static GK Connect
- वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA): यह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के तहत काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था है जो देश के लड़ाकू विमानों का डिजाइन तैयार करती है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है।
- कैबिनेट की सुरक्षा समिति (CCS): देश की सुरक्षा से जुड़े सभी बड़े वित्तीय और रणनीतिक फैसले लेने वाली इस सर्वोच्च समिति के अध्यक्ष स्वयं प्रधानमंत्री होते हैं। इसी समिति ने मार्च 2024 में एएमसीए के पहले प्रोटोटाइप को मंजूरी दी थी।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में किस स्थान पर भारत की पहली पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (AMCA) के एकीकरण और उड़ान परीक्षण केंद्र की आधारशिला रखी गई है?
a) बेंगलुरु, कर्नाटक
b) पुट्टपर्थी, आंध्र प्रदेश ✅
c) विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश
d) चांदीपुर, ओडिशा
🤔 Q2. ‘Advanced Medium Combat Aircraft’ (AMCA) कार्यक्रम को केंद्रीय कैबिनेट की सुरक्षा समिति (CCS) द्वारा किस वर्ष आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की गई थी?
a) मार्च 2024 ✅
b) जनवरी 2025
c) फरवरी 2026
d) दिसंबर 2023
🤔 Q3. रक्षा क्षेत्र से संबंधित पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
1. ड्रोन सिटी – कूर्नूल
2. नौसेना प्रणाली संयंत्र – अनाकापल्ली
3. डिफेंस एनर्जेटिक्स संयंत्र – मडकासिरा
उपरोक्त में से कौन सा/से मिलान सही है/हैं?
a) केवल 1 और 2
b) केवल 2 और 3
c) 1, 2 और 3 सभी ✅
d) केवल 1 और 3