🤝 (International Relations / Art & Culture Current Affairs)

📌 शानदार! भारत और नीदरलैंड्स के रिश्ते अब बने ‘Strategic Partnership’; 11वीं सदी के ऐतिहासिक चोल ताम्रपत्रों की हुई घर वापसी
18 May 2026 Current Affairs की सबसे पहली और गर्व से भर देने वाली खबर हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति से जुड़ी है।
हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी नीदरलैंड्स की एक बेहद खास आधिकारिक यात्रा पर गए थे।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए इसे ‘Strategic Partnership’ (सामरिक साझेदारी) का दर्जा दे दिया है।
यह शिखर सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ भारत की ऐतिहासिक विरासत को वापस लाने के मामले में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है।
लेकिन इस पूरी यात्रा में जो बात हर भारतीय का दिल जीत लेगी, वो है डच सरकार द्वारा 11वीं सदी के बेहद कीमती और दुर्लभ चोल कालीन ताम्रपत्रों (Chola Copper Plates) की औपचारिक वापसी!
इन्हें डच शासन के समय भारत से बाहर ले जाया गया था। इन प्राचीन ताम्रपत्रों की वापसी हमारी सफल सांस्कृतिक कूटनीति (cultural diplomacy) का एक बेहतरीन उदाहरण है।
आने वाले एग्जाम्स जैसे UPSC और State PCS के लिहाज से यह टॉपिक बेहद जरूरी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर हमारी धरोहर से जुड़ा है।
इस ऐतिहासिक बैठक में दोनों देशों ने अर्धचालक (semiconductors), नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) जैसे क्षेत्रों में कुल 14 समझौतों पर मुहर लगाई है, जो वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को बहुत मजबूत करेंगे।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights):
- भारतीय प्रधानमंत्री और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन (Rob Jetten) के बीच ‘Roadmap of India-Netherlands Strategic Partnership [2026-2030]’ को स्वीकार किया गया, जो अगले कुछ सालों के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग का एक मजबूत ढांचा तैयार करता है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग बढ़ाने के लिए नीदरलैंड्स ने भारत की पहल ‘इन्डो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव’ (IPOI) का हिस्सा बनने का फैसला किया है। वह जर्मनी और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर इसके ‘क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण’ (Capacity Building & Resource Sharing) स्तंभ का नेतृत्व करेगा।
- डच सरकार और लीडेन यूनिवर्सिटी (Leiden University) ने 11वीं सदी के कुल 24 ताम्रपत्रों (जिसमें 21 बड़े और 3 छोटे प्लेट्स शामिल हैं) को भारत को सौंप दिया है। इन्हें भारत में ‘एनाइमंगलम ताम्रपत्र’ और नीदरलैंड्स में ‘लीडेन ताम्रपत्र’ (Leiden Plates) कहा जाता है।
- भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और डच कंपनी एएसएमएल (ASML) के बीच गुजरात के धोलेरा में स्थापित होने वाले सेमीकंडक्टर फैब को सपोर्ट करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ है।
✳ * चोल ताम्रपत्रों (Leiden Plates) का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सफर
▪️ चलिए, अब थोड़ा पीछे चलते हैं और इसके पीछे की दिलचस्प कहानी को समझते हैं। ये ताम्रपत्र चोल साम्राज्य के महान राजा राजराज चोल प्रथम (Rajaraja Chola I) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (Rajendra Chola I) के दौर के शाही दस्तावेज हैं।
इनमें से 21 ताम्रपत्रों का एक बड़ा सेट राजा राजेंद्र चोल प्रथम के समय का है। इस सेट में संस्कृत और तमिल भाषा में लिखा गया है कि कैसे नागपट्टिनम में बने एक बौद्ध विहार ‘चूड़ामणिवर्मन विहार’ को चलाने के लिए एनाइमंगलम गांव से मिलने वाला टैक्स (राजस्व) दान में दिया गया था。
हालांकि चोल राजा खुद हिंदू धर्म को मानने वाले थे, लेकिन बौद्ध विहार को दिया गया यह दान उनकी धार्मिक उदारता और सहिष्णुता का जीता-जागता प्रमाण है।
इसके अलावा, 3 ताम्रपत्रों का दूसरा छोटा सेट राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (Kulottunga Chola I) के काल का है।
ये सारे ताम्रपत्र आपस में एक भारी कांस्य वलय (bronze ring) से जुड़े हुए हैं, जिस पर चोल राजवंश की राजकीय मुहर लगी हुई है। इनका कुल वजन लगभग 30 किलोग्राम है।
✳ * सामरिक सहयोग और आर्थिक समझौतों के नए आयाम
▪️ इस शिखर सम्मेलन के दौरान केवल संस्कृति ही नहीं, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी पर भी बड़ा काम हुआ है। दोनों देशों ने मिलकर ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक साझा रोडमैप तैयार किया है।
साथ ही नीति आयोग (NITI Aayog) और डच प्रशासन के बीच ऊर्जा बदलाव (energy transition) के लिए मिलकर काम करने पर सहमति बनी है।
इसके अलावा, भारत के खान मंत्रालय और डच विदेश मंत्रालय ने क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के क्षेत्र में हाथ मिलाया है, जो भविष्य के स्मार्टफोन, ईवी और अन्य गैजेट्स बनाने के लिए बहुत जरूरी हैं।
गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) के लिए तटीय जल प्रबंधन की डच तकनीक का लाभ उठाने हेतु भारत के जल शक्ति मंत्रालय ने एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत-नीदरलैंड्स द्विपक्षीय समझौता विश्लेषण
| समझौता / दस्तावेज (MoU/Outcome) | भारतीय भागीदार संस्था | डच भागीदार संस्था | प्राथमिक उद्देश्य / सहयोग का क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| Roadmap of Strategic Partnership [2026-2030] | भारत सरकार (GoI) | नीदरलैंड्स सरकार | व्यापक द्विपक्षीय सामरिक रोडमैप |
| MoU on Semiconductors | टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) | ASML | धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को सहयोग प्रदान करना |
| MoU on Critical Minerals | खान मंत्रालय (Ministry of Mines) | विदेश मंत्रालय, नीदरलैंड्स | महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग |
| Letter of Intent (Water) | जल शक्ति मंत्रालय | अवसंरचना और जल प्रबंधन मंत्रालय | कल्पसर परियोजना (गुजरात) के लिए तकनीकी सहयोग |
| Roadmap on Green Hydrogen | नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय | डच ऊर्जा मंत्रालय | हरित हाइड्रोजन के विकास और सहयोग का ढांचा |
📚 Static GK Connect:
- चोल राजवंश (Chola Dynasty): दक्षिण भारत का एक बेहद प्रतापी हिंदू राजवंश, जिसकी स्थापना 9वीं सदी में विजयालय (Vijayalaya) ने की थी। चोल शासक अपनी शक्तिशाली नौसेना और भव्य द्रविड़ वास्तुकला (जैसे तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर) के लिए इतिहास में प्रसिद्ध हैं।
- यूनेस्को (UNESCO): संयुक्त राष्ट्र की यह संस्था दुनिया भर में सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने का काम करती है। इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है। इसकी एक विशेष समिति ‘ICPRCP’ देशों के बीच विवादित ऐतिहासिक धरोहरों को उनके असली देश में वापस पहुंचाने में मदद करती है।
- नीदरलैंड्स (Netherlands): इसकी आधिकारिक राजधानी एम्स्टर्डम (Amsterdam) है, लेकिन सरकार का मुख्य कामकाज ‘द हेग’ (The Hague) से चलता है। न्याय का वैश्विक मंदिर यानी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) भी इसी शहर में स्थित है।
🎯 Current Affairs MCQs:
🤔 Q1. हाल ही में नीदरलैंड्स सरकार द्वारा भारत को लौटाए गए ‘चोल ताम्रपत्र’ (Chola Copper Plates / Leiden Plates) किस बौद्ध विहार को दिए गए भूमि अनुदान को दर्ज करते हैं?
a) नालंदा महाविहार
b) चूड़ामणिवर्मन विहार, नागपट्टिनम ✅
c) विक्रमशिला विहार
d) ओदंतपुरी विहार
🤔 Q2. भारत-नीदरलैंड्स द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान, गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने में सहयोग करने के लिए डच कंपनी ASML ने किसके साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं?
a) रिलायंस डिजिटल
b) भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
c) टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) ✅
d) वेदांता समूह
🤔 Q3. नीदरलैंड्स ने हाल ही में भारत के किस क्षेत्रीय सुरक्षा कार्यक्रम के ‘क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण’ (Capacity Building and Resource Sharing) स्तंभ का सह-नेतृत्व करने के लिए शामिल होने की घोषणा की है?
a) हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA)
b) भारत प्रशांत महासागर पहल (IPOI) ✅
c) सागर (SAGAR) मिशन
d) कल्पसर क्षेत्रीय सुरक्षा नेटवर्क
⛈️ (Science & Technology / Environment Current Affairs)

📌 मौसम की सटीक जानकारी अब सीधे आपके खेतों तक! IMD लाया देश का पहला AI-आधारित ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान मॉडल
प्यारे साथियों, हम सब जानते हैं कि भारत में खेती-किसानी के लिए मानसून कितना जरूरी है।
लेकिन मौसम का बदलता मिजाज और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) हमारे पुराने मौसम अनुमानों को अक्सर फेल कर देते हैं।
इसी बड़ी मुश्किल का हल निकालने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक गजब की तकनीकी छलांग लगाई है।
विभाग ने देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान सिस्टम लॉन्च किया है।
अब हमें अपने ब्लॉक या तहसील स्तर पर मानसून की चाल और बारिश का बिल्कुल सटीक अनुमान चार हफ्ते पहले ही मिल जाएगा!
इसे पुणे के भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) ने मिलकर तैयार किया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के साइंस-टेक और भूगोल खंड के लिहाज से यह बेहद कीमती टॉपिक है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights):
- यह नया एआई सिस्टम (AI System) हर बुधवार को आने वाले चार हफ्तों के लिए मानसून की प्रगति का एक संभाव्य (probabilistic) पूर्वानुमान जारी करेगा, और सबसे कमाल की बात यह है कि इसका एरर मार्जिन सिर्फ 4 दिनों का है!
- यह योजना फिलहाल देश के ‘मानसून कोर जोन’ में आने वाले 15 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश के लगभग 3,196 ब्लॉकों को कवर कर रही है। ये वो इलाके हैं जहां सिंचाई की सुविधाएं कम हैं और खेती पूरी तरह बारिश पर टिकी है।
- इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह लगातार पांच दिनों तक होने वाली बारिश और उसके बाद के 30 दिनों में लंबे सूखे के दौर (dry spell) न होने के आधार पर अपना सटीक आकलन करता है।
- उत्तर प्रदेश के लिए एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें एआई तकनीक की मदद से सिर्फ 1 किलोमीटर के बेहद बारीक स्थानिक रिज़ॉल्यूशन (spatial resolution) पर 10 दिन पहले ही बारिश की सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी!
✳ * यह एआई मॉडल काम कैसे करता है? तकनीक को आसान भाषा में समझें
▪️ क्या आप जानते हैं कि हमारे पुराने मौसम मॉडल जैसे GFS और CFS लगभग 12 किलोमीटर के बड़े एरर एरिया में काम करते हैं? यानी वे छोटे कस्बों या गांवों के स्तर पर नहीं बता पाते थे कि बारिश कहां होगी।
लेकिन यह नया ब्लॉक-स्तरीय मॉडल कमाल का है! यह सैटेलाइट से मिले डेटा, डॉपलर वेदर रडार, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों (AWS) और पिछले लगभग 100 सालों के मौसम रिकॉर्ड को एआई-डाउनस्केलिंग तकनीक से जोड़ता है।
उत्तर प्रदेश के लिए शुरू किए गए ‘मिथुना मॉडल’ (Mithuna Model) को डाउनस्केल करके 1 किमी ग्रिड का बारीक स्तर हासिल किया गया है, जिससे किसानों को उनके गांव के स्तर पर मौसम की एकदम सटीक जानकारी मिलेगी।
✳ * भारतीय कृषि और हमारी आर्थिक सुरक्षा पर इसका असर
▪️ भारत में आज भी लगभग 52% खेती योग्य जमीन सिंचाई के लिए सीधे तौर पर मानसून की बारिश पर निर्भर है। ऐसे में मानसून का जरा सा भी भटकना हमारी फसलों को बर्बाद कर देता है और बाजारों में महंगाई बढ़ा देता है।
अब जब किसानों को पहले ही hyperlocal स्तर पर मौसम की खबर मिल जाएगी, तो वे खाद छिड़कने, बुवाई करने या कटी फसलों को सुरक्षित रखने का फैसला सही समय पर कर सकेंगे।
इससे फसलों का नुकसान तो बचेगा ही, साथ ही सरकार पर भी सूखा राहत का वित्तीय बोझ कम पड़ेगा।
मौसम पूर्वानुमान मॉडलों की तुलनात्मक तालिका
| पूर्वानुमान प्रणाली (Forecasting System) | तकनीक (Technology Used) | स्थानिक रिज़ॉल्यूशन (Spatial Resolution) | पूर्वानुमान अवधि (Lead Time) |
|---|---|---|---|
| Traditional Models (GFS/CFS) | संख्यात्मक मौसम भविष्यवाणी (NWP) | लगभग 12 किमी × 12 किमी | मध्यम से दीर्घकालिक |
| Bharat Forecasting System (BharatFS) | उन्नत टीसीओ ग्रिड आधारित | 6 किमी (Operational since 2025) | लघु से मध्यम अवधि (3-7 दिन) |
| New Block-Level AI System | AI + सांख्यिकीय + ग्लोबल NWP | ब्लॉक / सब-डिस्ट्रिक्ट स्तर | 4 सप्ताह पूर्व (साप्ताहिक बुधवार) |
| UP Pilot AI Project | AI-डाउनस्केलिंग + AWS डेटा | 1 किमी ग्रिड स्केल | 10 दिन पूर्व |
📚 Static GK Connect:
- नूडल मंत्रालय (Nodal Ministry): मौसम विभाग (IMD) भारत सरकार के ‘पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय’ (Ministry of Earth Sciences) के अंतर्गत काम करता है।
- मिशन मौसम (Mission Mausam): यह हमारे देश का एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी मिशन है, जिसका मकसद अत्याधुनिक रडार, वेदर स्टेशन और ‘प्रत्युष’ व ‘मिहिर’ जैसे महाशक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों की मदद से देश की मौसम भविष्यवाणी को दुनिया में सबसे अव्वल बनाना है।
- गवर्नेंस में एआई (AI in Governance): सरकार ने देश में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ‘IndiaAI’ मिशन शुरू किया है, जिसके तहत सरकारी सेवाओं और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में एआई का जिम्मेदार इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।
🎯 Current Affairs MCQs:
🤔 Q1. हाल ही में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा लॉन्च किया गया भारत का पहला ‘ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान सिस्टम’ (Block-Level Monsoon Forecasting System) किस अंतराल पर अपनी रिपोर्ट जारी करेगा?
a) प्रत्येक सोमवार को
b) प्रत्येक बुधवार को ✅
c) प्रत्येक शुक्रवार को
d) पाक्षिक रूप से
🤔 Q2. उत्तर प्रदेश के लिए शुरू किए गए विशेष एआई-संचालित पायलट प्रोजेक्ट के तहत किस स्थानिक रिज़ॉल्यूशन (Spatial Resolution) पर वर्षा का सटीक पूर्वानुमान लगाया जाएगा?
a) 12 किलोमीटर ग्रिड
b) 6 किलोमीटर ग्रिड
c) 1 किलोमीटर ग्रिड ✅
d) 500 मीटर ग्रिड
🤔 Q3. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) निम्नलिखित में से किस केंद्रीय मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करने वाली एक वैधानिक नोडल एजेंसी है?
a) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
b) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) ✅
c) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
d) गृह मंत्रालय
🌾 (Economy / Governance / Social Justice Current Affairs)

📌 बड़ा बदलाव! ग्रामीण भारत के लिए आया VB-G RAM G Act, 2025; 1 जुलाई 2026 से विदा हो जाएगा ‘मनरेगा’
दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा था कि हमारे देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना यानी ‘मनरेगा’ की जगह कोई नया कानून ले सकता है?
जी हां, ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को अधिसूचित कर दिया है।
यह क्रांतिकारी कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे भारत में लागू होने जा रहा है।
इसी तारीख के साथ, पिछले दो दशकों से ग्रामीण रोजगार की रीढ़ रहा ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA, 2005) हमेशा के लिए समाप्त (निरस्त) हो जाएगा।
यूपीएससी और अन्य एग्जाम्स की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह बदलाव ‘सरकारी नीतियों और सामाजिक न्याय’ के खंड में सीधे पूछा जा सकता है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights):
- इस नए कानून के तहत अब हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को साल में 100 दिन नहीं, बल्कि कम से कम 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम (unskilled manual work) की पक्की गारंटी मिलेगी!
- भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए मजदूरों की दिहाड़ी का सीधा भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे उनके बैंक या पोस्ट ऑफिस खातों में किया जाएगा।
- मजदूरों को पैसों के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए काम पूरा होने के 3 दिनों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और अधिकतम 15 दिनों में पैसा खाते में पहुंच जाएगा।
- इस योजना के तहत होने वाले कामों को बहुत सोच-समझकर चार बड़े हिस्सों (जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका के साधन और पर्यावरण अनुकूल कार्य) में बांटा गया है।
✳ * मनरेगा से कितना अलग और बेहतर है यह नया कानून?
▪️ अब आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि “सर, आखिर मनरेगा को बंद करके नया कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?” तो देखिए, मनरेगा का मुख्य काम सिर्फ बुनियादी रोजगार देना था।
लेकिन ‘VB-G RAM G अधिनियम, 2025’ देश को ‘Viksit Bharat@2047’ बनाने के बड़े सपने को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके तहत केवल गड्ढे खोदने का काम नहीं होगा, बल्कि ऐसी ग्रामीण संपत्तियों का निर्माण किया जाएगा जो लंबे समय तक टिकें और पर्यावरण के अनुकूल हों।
इसमें जल संचयन, बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना और मिट्टी को बहने से रोकने वाले कामों को प्राथमिकता दी जाएगी जो गांवों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाएंगे।
✳ * समय पर भुगतान की गारंटी और ग्राम सभाओं को बड़ी ताकत
▪️ मनरेगा में सबसे बड़ी शिकायत यह होती थी कि काम करने के हफ्तों बाद भी मजदूरों के पैसे नहीं आते थे। इस नए कानून में इस समस्या का पक्का इलाज किया गया है।
3 दिनों के भीतर पेमेंट फाइल आगे बढ़ाना और 15 दिनों में बैंक खाते में पैसा डालना अब कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, पैसों की हेराफेरी रोकने के लिए सोशल ऑडिट (Social Audit) के नियमों को और भी कड़ा कर दिया गया है। अब स्थानीय ग्राम सभाओं को कामों की निगरानी और उनके पैसों को पास करने के ज्यादा अधिकार दिए गए हैं।
ग्रामीण रोजगार योजनाओं का तुलनात्मक विश्लेषण
| मापदंड / विशेषता (Parameters) | मनरेगा अधिनियम, 2005 (MGNREGA, 2005) | VB-G RAM G अधिनियम, 2025 | सुधार के रणनीतिक प्रभाव (Impact) |
|---|---|---|---|
| वार्षिक गारंटीकृत कार्य दिवस | 100 दिन (प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए) | 125 दिन (प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए) | ग्रामीण परिवारों की सालाना आमदनी और सामाजिक सुरक्षा में बढ़ोतरी |
| मजदूरी भुगतान की समयसीमा | कोई निश्चित कड़ा नियम नहीं था (पेमेंट में देरी होती थी) | 3 दिन में प्रक्रिया शुरू, 15 दिन में खाते में क्रेडिट | मजदूरों के हाथ में समय पर पैसा आना और पारदर्शिता सुनिश्चित होना |
| कार्यों का प्राथमिक वर्गीकरण | मुख्य रूप से सामान्य शारीरिक और अकुशल काम | चार विशिष्ट क्षेत्र (जल सुरक्षा, क्लाइमेट रेजिलिएंस आदि) | ‘Viksit Bharat@2047’ के लक्ष्यों के तहत मजबूत ग्रामीण संपत्तियों का निर्माण |
| संवैधानिक / कानूनी स्थिति | 2005 के कानून द्वारा स्थापित (अब निरस्त होगा) | 2025 के नए कानून द्वारा प्रतिस्थापित | आधुनिक अर्थव्यवस्था के हिसाब से ग्रामीण रोजगार नीति का आधुनिकीकरण |
📚 Static GK Connect:
- नूडल मंत्रालय (Nodal Ministry): इस बड़ी योजना का पूरा जिम्मा ‘केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय’ (Ministry of Rural Development) के कंधों पर है।
- संविधान के नीति निर्देशक तत्व (DPSP – Article 41): हमारे संविधान का अनुच्छेद 41 राज्य को यह निर्देश देता है कि वह अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार नागरिकों को काम पाने का अधिकार, शिक्षा पाने का अधिकार और बुढ़ापे या बीमारी में सरकारी मदद पाने का अधिकार सुनिश्चित करे।
- पंचायती राज संस्थाएं (Panchayati Raj – Article 243G): संविधान का अनुच्छेद 243G ग्राम पंचायतों को यह शक्ति देता है कि वे अपने इलाके के आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं बनाएं और उन्हें लागू करें।
🎯 Current Affairs MCQs:
🤔 Q1. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए ‘VB-G RAM G अधिनियम, 2025’ के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वर्ष में न्यूनतम कितने दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी प्रदान की गई है?
a) 100 दिन
b) 120 दिन
c) 125 दिन ✅
d) 150 दिन
🤔 Q2. ‘VB-G RAM G अधिनियम, 2025’ के लागू होने के साथ ही वर्ष 2005 का प्रसिद्ध ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) किस तिथि से पूरी तरह से निरस्त (repeal) हो जाएगा?
a) 1 जनवरी 2026
b) 1 अप्रैल 2026
c) 1 जुलाई 2026 ✅
d) 15 अगस्त 2026
🤔 Q3. इस नए अधिनियम के अंतर्गत, श्रमिकों को उनकी मजदूरी का भुगतान सीधे उनके खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से काम पूरा होने के अधिकतम कितने दिनों के भीतर हस्तांतरित करना वैधानिक रूप से अनिवार्य है?
a) 7 दिन
b) 10 दिन
c) 15 दिन ✅
d) 30 दिन
🐘 (Environment & Ecology / Science & Technology Current Affairs)

📌 इंसान और हाथियों के संघर्ष को रोकने का नया वैज्ञानिक तरीका! पलामू टाइगर रिजर्व में खुलेगा देश का पहला ‘Human-Elephant Conflict Research Centre’
क्या आपने कभी अखबारों में या टीवी पर पढ़ा है कि कैसे जंगलों के कटने से जंगली हाथी अक्सर रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं और इंसानों तथा हाथियों के बीच भयानक संघर्ष होता है?
इस गंभीर समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान निकालने के लिए झारखंड सरकार ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है।
सरकार ने देश के पहले ‘मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र’ (Human-Elephant Conflict Research Centre) की स्थापना के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
आज के पर्यावरण करंट अफेयर्स के अनुसार, इस खास रिसर्च सेंटर को झारखंड के मशहूर पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve) के भीतर लगभग 20 एकड़ जमीन पर बनाया जा रहा है।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी (GS Paper III) के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील और जरूरी टॉपिक है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights):
- इस अत्याधुनिक सेंटर को पलामू टाइगर रिजर्व के ऐतिहासिक पलामू किले (Palamu Fort) और कमलदह झील (Kamaldah Lake) के खूबसूरत इलाके के बीच स्थापित किया जा रहा है।
- यह सेंटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डेटा एनालिसिस के जरिए हाथियों के बर्ताव, उनके घूमने के रास्तों (migratory corridors) और उन पर इंसानी गतिविधियों के पड़ने वाले असर का गहरा अध्ययन करेगा।
- इस अनोखे प्रोजेक्ट की शुरुआत पलामू टाइगर रिजर्व में रह रहे 4 पालतू (domesticated) हाथियों के व्यवहार, उनकी विशेष आवाजों (vocalisations) और उनके दिमागी तनाव का 360-डिग्री अध्ययन करके की जाएगी।
- वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि झारखंड में कुल 217 हाथी हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा यानी करीब 130 अकेले पलामू टाइगर रिजर्व में ही पाए जाते हैं।
✳ * क्यों बढ़ रहा है टकराव और क्या है इसका एआई आधारित समाधान?
▪️ हर साल देश में हाथियों के हमले में लगभग 500 बेकसूर लोगों की जान चली जाती है, जबकि लगभग 100 हाथी भी इंसानी गुस्से, बिजली के करंट या रेल हादसों का शिकार हो जाते हैं।
पलामू टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक प्राजेशकांत जेना के मुताबिक, जंगलों के बीच से निकलने वाले रेलवे ट्रैक, नेशनल हाईवे और बड़ी नहरों ने हाथियों के चलने के पारंपरिक रास्तों को तोड़ दिया है (जिसे हम habitat fragmentation कहते हैं)।
यह नया रिसर्च सेंटर हाथियों की आवाजों को रिकॉर्ड करेगा और एआई के जरिए यह समझेगा कि वे कब गुस्से में हैं, कब डरे हुए हैं या कब अपने साथियों को बुला रहे हैं।
थर्मल कैमरों और सेंसरों की मदद से जैसे ही हाथियों का झुंड इंसानी बस्तियों के करीब आएगा, गांव वालों को तुरंत मोबाइल अलर्ट या सायरन से सावधान कर दिया जाएगा।
✳ * पलामू के हाथियों का अनोखा इतिहास
▪️ क्या आप जानते हैं कि साल 1898 की पुरानी ब्रिटिश प्रशासनिक रिपोर्ट (Sanders’ Report) में पलामू के जंगलों में एक भी हाथी होने का कोई सबूत नहीं था?
इस इलाके में हाथियों की मौजूदगी का पहला पुख्ता प्रमाण साल 1936 में दर्ज किया गया था। ऐसा माना जाता है कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा के महाराजा ने जब अपने पालतू हाथियों को जंगलों में आजाद किया था, तो वे धीरे-धीरे पलामू के जंगलों में आकर बस गए।
यहां के हाथी आमतौर पर शांत स्वभाव के होते हैं और इनकी शारीरिक बनावट देश के दूसरे हिस्सों के हाथियों से थोड़ी अलग होती है।
झारखंड हाथी जनसांख्यिकी और संघर्ष सांख्यिकी
| मापदंड / सांख्यिकी (Data Point) | मूल्य / विवरण (Value/Details) | स्रोत / संदर्भ (Source) |
|---|---|---|
| झारखंड में कुल हाथियों की संख्या | 217 हाथी (2025 की रिपोर्ट के अनुसार) | वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) |
| पलामू टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या | लगभग 130 हाथी (झारखंड में सबसे अधिक) | वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) |
| संघर्ष से होने वाली मृत्यु का स्थान | 80% मौतें वन क्षेत्रों और पारंपरिक कॉरिडोर के बाहर होती हैं | झारखंड वन विभाग सर्वेक्षण |
| चिह्नित हाथी गलियारों (Corridors) की संख्या | झारखंड में कुल 17 गलियारे हैं | झारखंड वन विभाग रिकॉर्ड |
📚 Static GK Connect:
- नूडल मंत्रालय / संस्था (Nodal Ministry/Body): केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और झारखंड वन विभाग मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
- पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve): झारखंड के लातेहार और गढ़वा जिलों में छोटानागपुर के पठार पर स्थित है। यह बेतला नेशनल पार्क का ही एक हिस्सा है और साल 1973 में जब देश में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ शुरू हुआ था, तो उसमें शामिल शुरुआती 9 रिजर्वों में से एक था। साल 1932 में दुनिया की पहली बाघों की गिनती (pugmark method) भी यहीं जे.डब्ल्यू. निकोलसन की देखरेख में हुई थी। इस रिजर्व से उत्तरी कोयल, औरंगा और बूढ़ा नदियां बहती हैं।
- प्रोजेक्ट री-हैब (Project RE-HAB): खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की एक बहुत ही अनोखी योजना, जिसमें हाथियों को इंसानी बस्तियों से दूर रखने के लिए गांवों की सीमा पर मधुमक्खियों के बक्से रखे जाते हैं, क्योंकि हाथियों को मधुमक्खियों की भिनभिनाहट से बहुत डर लगता है।
🎯 Current Affairs MCQs:
🤔 Q1. भारत का पहला समर्पित ‘मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र’ (Human-Elephant Conflict Research Centre) निम्नलिखित में से किस टाइगर रिजर्व में स्थापित किया जा रहा है?
a) पेंच टाइगर रिजर्व
b) पलामू टाइगर रिजर्व ✅
c) सुंदरवन टाइगर रिजर्व
d) जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व
🤔 Q2. ‘वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (WII) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में सर्वाधिक हाथियों का संकेंद्रण (लगभग 130 हाथी) किस आरक्षित क्षेत्र में पाया जाता है?
a) दलमा वन्यजीव अभयारण्य
b) पलामू टाइगर रिजर्व ✅
c) हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य
d) कोडरमा वन्यजीव अभयारण्य
🤔 Q3. पलामू टाइगर रिजर्व में बहने वाली निम्नलिखित में से कौन सी नदी एकमात्र बारहमासी (perennial) नदी है जो सूखे के दौरान भी बहती रहती है?
a) औरंगा नदी
b) उत्तरी कोयल नदी
c) बूढ़ा नदी (Burha River) ✅
d) स्वर्णरेखा नदी
🚢 (Economy / Banking & Finance / Infrastructure Current Affairs)

📌 आत्मनिर्भर भारत की एक और बड़ी छलांग! समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने के लिए लॉन्च हुआ $1.5 बिलियन का ‘Bharat Maritime Insurance Pool’
दोस्तों, जब भी हम ग्लोबल ट्रेड या समुद्री व्यापार की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान सिर्फ बड़े समुद्री जहाजों और बंदरगाहों पर जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन जहाजों के सुरक्षित सफर के पीछे सबसे बड़ी ताकत ‘बीमा’ (Insurance) की होती है?
हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने भारतीय जहाजों को वैश्विक सुरक्षा देने के लिए ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल’ (Bharat Maritime Insurance Pool – BMIP) की शुरुआत की है।
यह पूरा फंड $1.5 बिलियन (लगभग 12,980 करोड़ रुपये) का है, जिसे सरकार की तरफ से $1.4 बिलियन की सॉवरेन गारंटी (sovereign guarantee) का मजबूत सुरक्षा कवच मिला हुआ है।
लाल सागर और पश्चिम एशिया में चल रहे तनावों के बीच यह कदम भारत के आर्थिक विकास और बैंकिंग सेक्टर के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights):
- यह विशेष इंश्योरेंस पूल भारतीय जहाजों को तीसरे पक्ष के नुकसानों जैसे तेल का रिसाव (oil pollution), समुद्र में डूबे मलबे को हटाने (wreck removal), सामान के नुकसान और चालक दल (crew) की सुरक्षा के लिए बीमा कवर देगा।
- अब तक हमारे भारतीय जहाजों को बीमा के लिए पूरी तरह से विदेशी कंपनियों और ‘प्रोटेक्शन एंड डेमनीटी’ (P&I) क्लबों पर निर्भर रहना पड़ता था, जो संकट के समय हाथ पीछे खींच लेते थे।
- युद्धग्रस्त या तनाव वाले इलाकों (जैसे लाल सागर या खाड़ी के देश) से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद बिना किसी रुकावट के बीमा कवर (Insurance Cover) मिलता रहेगा।
- यह पहल न केवल भारतीय जहाजों को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि हमारी घरेलू सरकारी बीमा कंपनियों जैसे GIC Re की वित्तीय ताकत को भी वैश्विक स्तर पर बहुत ऊंचा उठाएगी।
✳ * विदेशी P&I क्लबों के चंगुल से भारतीय जहाजों को मिलेगी आजादी
▪️ अब आपके दिमाग में यह आ सकता है कि “सर, ये P&I क्लब क्या होते हैं और भारत को अपना इंश्योरेंस पूल बनाने की क्या जरूरत थी?” तो देखिए, दुनिया के लगभग 90% से ज्यादा जहाजों का बीमा पश्चिमी देशों में स्थित गिने-चुने ‘प्रोटेक्शन एंड डेमनीटी’ (P&I) क्लब करते हैं。
जब भी अमेरिका या यूरोपीय देश किसी राष्ट्र (जैसे रूस या ईरान) पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो ये विदेशी बीमा कंपनियां तुरंत उन जहाजों का इंश्योरेंस रद्द कर देती हैं। इससे हमारा तेल आयात और विदेशी व्यापार खतरे में पड़ जाता था।
अब जब भारत के पास खुद का $1.5 बिलियन का इंश्योरेंस पूल है, तो हमें किसी विदेशी दबाव में आने की जरूरत नहीं होगी और हमारी समुद्री संप्रभुता (Maritime Sovereignty) बिल्कुल सुरक्षित रहेगी!
✳ * हमारी अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजार पर इसका गहरा प्रभाव
▪️ इस पूल के शुरू होने से हर साल भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी बीमा कंपनियों को दिया जाने वाला करोड़ों डॉलर का भारी-भरकम प्रीमियम देश से बाहर नहीं जाएगा।
यह पैसा देश के भीतर ही रहेगा, जिससे हमारे बैंकिंग और वित्तीय बाजार को मजबूती मिलेगी।
इस पूल का संचालन भारत की एकमात्र राष्ट्रीय पुनर्बीमा कंपनी ‘जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (GIC Re) और अन्य सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के नेतृत्व में किया जाएगा, जो आगे चलकर भारत को समुद्री बीमा क्षेत्र का एक बड़ा वैश्विक हब बना देगा।
भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (BMIP) संरचना
| घटक / मापदंड (Parameter of BMIP) | मूल्य / वित्तीय आवंटन (Value/Detail) | रणनीतिक लाभ (Strategic Benefit) |
|---|---|---|
| कुल पूल मूल्य (Total Pool Size) | $1.5 बिलियन (USD 1.5 Billion) | भारतीय जहाजों के लिए पर्याप्त तरलता और बीमा कवर |
| भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी | $1.4 बिलियन (लगभग ₹12,980 करोड़) | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीमा दावों के निपटान की संप्रभु विश्वसनीयता |
| नूडल विभाग (Nodal Department) | वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय | वित्तीय नीतिगत संरचना और सुचारू संचालन नियंत्रण |
| प्राथमिक कवरेज क्षेत्र | तीसरे पक्ष के दायित्व (तेल रिसाव, मलबे हटाना, आदि) | विदेशी P&I क्लबों पर निर्भरता को कम करना |
📚 Static GK Connect:
- नूडल विभाग (Nodal Department): इस रणनीतिक योजना का पूरा कामकाज वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाला ‘वित्तीय सेवा विभाग’ (Department of Financial Services – DFS) देखता है।
- भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI): देश में बीमा क्षेत्र को कंट्रोल करने वाली सबसे बड़ी सरकारी संस्था। इसकी स्थापना साल 1999 में मल्होत्रा समिति की सिफारिश पर हुई थी और इसका मुख्यालय हैदराबाद (तेलंगाना) में स्थित है।
- जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re): यह हमारे देश की एकमात्र सरकारी पुनर्बीमा (Reinsurance) कंपनी है, जो साल 1972 में स्थापित हुई थी और इसका मुख्यालय मुंबई में है।
🎯 Current Affairs MCQs:
🤔 Q1. वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा लॉन्च किया गया ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल’ (BMIP) कुल कितने मूल्य का बीमा कवर प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है?
a) $1.0 बिलियन
b) $1.2 बिलियन
c) $1.5 बिलियन ✅
d) $2.5 बिलियन
🤔 Q2. ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल’ (BMIP) के सुचारू संचालन के लिए भारत सरकार द्वारा कितने मूल्य की सॉवरेन गारंटी (Sovereign Guarantee) प्रदान की गई है?
a) $1.0 बिलियन
b) $1.4 बिलियन ✅
c) $1.5 बिलियन
d) $1.8 बिलियन
🤔 Q3. भारत में संपूर्ण बीमा क्षेत्र को विनियमित करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था IRDAI का मुख्यालय निम्नलिखित में से किस शहर में स्थित है?
a) नई दिल्ली
b) मुंबई
c) हैदराबाद ✅
d) बंगलुरु