🌾 (National Current Affairs & Governance)

📌 ग्रामीण रोजगार में युगांतकारी सुधार: MGNREGA की जगह देश भर में लागू होगा ऐतिहासिक VB-G RAM G Act, 2025
हेलो दोस्तों! 17 May 2026 Current Affairs में आपका स्वागत है। ग्रामीण भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में पिछले 24 घंटों में एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला आया है,
जो आने वाले समय में ग्रामीण आजीविका की पूरी तस्वीर बदल कर रख देगा। अगर आप UPSC, SSC या Banking परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो Daily Current Affairs in Hindi के इस विश्लेषण को बहुत ध्यान से समझिएगा।
दरअसल, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक, अब देश से मनरेगा (MGNREGA) का सफर खत्म होने जा रहा है।
जी हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना! दो दशकों से चल रहे मनरेगा की जगह अब एक नया और बेहद आधुनिक कानून
‘Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act, 2025’ यानी VB-G RAM G Act, 2025 लागू होने जा रहा है।
इसे आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा, जिसके बाद मनरेगा (MGNREGA, 2005) इसी तारीख से पूरी तरह निरस्त (repealed) हो जाएगा।
अब सवाल यह है कि सरकार को अचानक इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी? दरअसल, सरकार का मकसद सिर्फ अकुशल मजदूरों को सामान्य काम देना नहीं है,
बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत सार्वजनिक संपत्तियां (durable assets) बनाना और ऐसी संरचनाएं तैयार करना है जो जलवायु परिवर्तन के असर को झेल सकें (climate resilient infrastructure)।
यह पूरा सुधार भारत को ‘Viksit Bharat @2047’ के लक्ष्य तक पहुँचाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक कदम है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- काम की गारंटी के दिनों में बड़ी बढ़ोतरी: अब तक मनरेगा में आपको साल में कम से कम 100 दिन का काम मिलता था। लेकिन इस नए कानून के तहत इसे बढ़ाकर सीधे 125 दिन कर दिया गया है। यानी अब परिवारों को ज्यादा दिनों तक पक्की आमदनी मिलेगी।
- खेती-किसानी के सीजन की सुरक्षा (Off-Season Balance): अक्सर देखा जाता है कि बुवाई या कटाई के पीक सीजन में खेतों में काम करने के लिए मजदूरों की बड़ी किल्लत हो जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए योजना के तहत साल में 60 दिनों की ‘नो-वर्क’ अवधि (No-Work Period) अनिवार्य रूप से रखी गई है। इस दौरान कोई नया सरकारी काम नहीं शुरू होगा, जिससे खेती-किसानी और किसानों को कोई नुकसान न हो।
- नया फंडिंग मॉडल (Centre-State Partnership): पहले मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी का पूरा 100% खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। लेकिन अब इसे बदल दिया गया है। अब यह एक Centrally Sponsored Scheme (केंद्र प्रायोजित योजना) होगी, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर खर्च उठाएंगे।
- पैसों का समय पर भुगतान: अब मजदूरों को अपनी मजदूरी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया है।
✴️ वित्तीय उत्तरदायित्व और राज्यों पर बढ़ता राजकोषीय प्रभाव
▪️ प्यारे दोस्तों, इस नए कानून को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹95,692.31 करोड़ का एक विशाल बजट आवंटित किया है।
ग्रामीण रोजगार के इतिहास में आज तक का यह सबसे बड़ा केंद्रीय बजट आवंटन है! जब इसमें राज्यों का 40% हिस्सा भी मिल जाएगा, तो यह पूरा खर्च ₹1.51 lakh crore से भी ऊपर निकल जाएगा।
अब बात करते हैं पैसों के बंटवारे की। सामान्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 (60% केंद्र और 40% राज्य) का होगा।
वहीं हमारे पूर्वोत्तर (North-Eastern) और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रखा गया है। संघ राज्य क्षेत्रों (UTs) के लिए केंद्र 100% खर्च उठाएगा।
एक और जरूरी बात—अगर कोई मजदूर काम मांगता है और उसे 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता (unemployment allowance) देना होगा और इसका पूरा वित्तीय बोझ राज्य सरकार को उठाना पड़ेगा!
✴️ टिकाऊ बुनियादी ढांचा और डिजिटल योजना निर्माण
▪️ इस अधिनियम के तहत अब केवल खानापूर्ति के लिए काम नहीं कराया जाएगा।
अब सारा ध्यान पानी बचाने (water harvesting), सूक्ष्म सिंचाई (micro-irrigation), गांवों की सड़कों और खेती से जुड़े गोदामों जैसी टिकाऊ संपत्तियां बनाने पर होगा।
इसके लिए बकायदा निचले स्तर पर ‘Viksit Gram Panchayat Plans’ बनाए जाएंगे और उन्हें पूरे देश के स्तर पर Viksit Bharat National Rural Infrastructure Stack के साथ जोड़ा जाएगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले अनैच्छिक पलायन (distress migration) को रोकने में बहुत मदद मिलेगी।
| विशेषता (Key Parameter) | मनरेगा (MGNREGA, 2005) | VB-G RAM G Act, 2025 |
|---|---|---|
| वैधानिक रोजगार गारंटी | 100 दिन प्रति वर्ष | 125 दिन प्रति वर्ष |
| योजना की श्रेणी | मांग-संचालित अधिकार कार्यक्रम | केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) |
| कोष साझाकरण अनुपात (सामान्य राज्य) | केंद्र द्वारा 100% मजदूरी भुगतान | 60% केंद्र : 40% राज्य |
| कोष साझाकरण अनुपात (पूर्वोत्तर / पहाड़ी) | विशेष सहायता संरचना | 90% केंद्र : 10% राज्य |
| कृषि पीक सीजन सुरक्षा | कोई विशेष नो-वर्क अवधि नहीं | 60 दिनों की नो-वर्क अवधि अनिवार्य |
| प्रशासनिक व्यय सीमा | 6 प्रतिशत | 9 प्रतिशत (कर्मचारी Remuneration और प्रशिक्षण हेतु) |
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- नोडल मंत्रालय: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development).
- संवैधानिक प्रावधान: यह कानून भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के अंतर्गत अनुच्छेद 41 (काम पाने का अधिकार) और अनुच्छेद 43 (कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी और मानवीय कार्यदशाएं) को साकार करता है।
- महत्वपूर्ण विधायी तथ्य: VB-G RAM G Act, 2025 को भारत सरकार द्वारा संसद की मंजूरी के बाद दिसंबर 2025 में अधिनियमित किया गया था (अधिनियम संख्या 36, वर्ष 2025).
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. ‘Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act, 2025’ के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में न्यूनतम कितने दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है?
a) 100 दिन
b) 110 दिन
c) 120 दिन
d) 125 दिन ✅
🤔 Q2. नए रोजगार कानून (VB-G RAM G) के तहत सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय साझाकरण अनुपात (Fund-sharing ratio) क्या निर्धारित किया गया है?
a) 50:50
b) 60:40 ✅
c) 75:25
d) 90:10
🤔 Q3. नए रोजगार अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस कानून के लागू होने की तिथि से मनरेगा (MGNREGA), 2005 पूर्णतः निरस्त हो जाएगा।
2. कृषि सीजन में श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता के लिए इसमें वार्षिक 60 दिनों की ‘नो-वर्क’ अवधि जोड़ी गई है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
a) केवल 1
b) केवल 2
c) 1 और 2 दोनों ✅
d) न तो 1 और न ही 2
🚢 (Economy Current Affairs)

📌 भू-राजनीतिक जोखिमों से भारतीय जहाजों का बचाव: वित्तीय सेवा विभाग ने लॉन्च किया $1.5 बिलियन का ‘Bharat Maritime Insurance Pool’
दोस्तों, वर्तमान में पूरी दुनिया में जो भू-राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है, विशेषकर मध्य पूर्व (Middle East) और लाल सागर (Red Sea) के इलाकों में,
उसने समुद्री व्यापार को बहुत जोखिम में डाल दिया है। ऐसे मुश्किल समय में भारत के समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए हमारी सरकार ने एक कमाल का कदम उठाया है।
हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने देश के भीतर ही काम करने वाला ‘Bharat Maritime Insurance Pool’ (BMIP) लॉन्च किया है।
इस पूरे बीमा पूल की क्षमता 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर (USD) तय की गई है। और सबसे बड़ी बात?
भारत सरकार ने इस पूल को 1.4 बिलियन डॉलर (यानी करीब ₹12,980 करोड़) की संप्रभु गारंटी (sovereign guarantee) का तगड़ा बैकअप दिया है।
यानी अब अंतरराष्ट्रीय संकटों के बीच भी हमारे मालवाहक जहाजों का बीमा कभी नहीं रुकेगा और अर्थव्यवस्था से जुड़े व्यापार सुचारू रूप से चलते रहेंगे!
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- हर तरह के खतरों से सुरक्षा: यह पूल समुद्री सफर में होने वाले लगभग सभी मुख्य जोखिमों को कवर करेगा, जैसे जहाजों के ढांचे और मशीनरी की क्षति (Hull & Machinery), माल की क्षति (Cargo), तीसरे पक्ष की देनदारियां (Protection and Indemnity – P&I), और युद्ध के कारण होने वाले नुकसान (War risks).
- दावे निपटाने का तीन-स्तरीय फॉर्मूला: अगर कोई हादसा होता है, तो $100 मिलियन तक के बीमा दावों का निपटान यह पूल अपने प्रीमियम और सदस्य कंपनियों के योगदान से खुद करेगा। लेकिन अगर नुकसान इससे बड़ा होता है, तो सरकार की ‘सॉवरेन गारंटी’ को आखिरी हथियार (contingent backstop of last resort) की तरह इस्तेमाल किया जाएगा।
- किसे मिलेगा इसका फायदा?: यह सुरक्षा कवच भारतीय झंडे वाले जहाजों, भारतीय कंपनियों के नियंत्रण वाले जहाजों और साथ ही भारत आने-जाने वाले सभी मालवाहक जहाजों के लिए खुला रहेगा।
- पहली पॉलिसी जारी: इस योजना के तहत पहली ‘मरीन हल एंड मशीनरी वॉर पॉलिसी’ न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी द्वारा ‘M/s. Hoger Offshore and Marine Private Limited’ को युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए जारी की गई है।
✴️ विदेशी बीमा कंपनियों (IG P&I Clubs) के नखरों से मिलेगी मुक्ति
▪️ क्या आप जानते हैं कि अब तक हमारे जहाजों को समुद्री तेल रिसाव (oil pollution), दुर्घटनाओं में मलबे को हटाने, या चालक दल के सदस्यों के नुकसान जैसे खर्चों के लिए मुख्य रूप से विदेशी ‘International Group of Protection and Indemnity (IG P&I) Clubs’ पर निर्भर रहना पड़ता था?
दिक्कत यह होती है कि जब भी वैश्विक प्रतिबंध (sanctions) लगते हैं या युद्ध जैसी स्थिति बनती है, ये विदेशी कंपनियां अचानक अपनी सेवाएं वापस ले लेती हैं।
इससे हमारा पूरा व्यापार ठप होने की नौबत आ जाती है। लेकिन अब हमारा BMIP इस विदेशी निर्भरता को खत्म कर देगा और भारत के समुद्री व्यापार को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएगा।
✴️ प्रशासनिक संरचना और री-इंश्योरेंस व्यवस्था
▪️ इस बड़े पूल को चलाने और इसके हिसाब-किताब की जिम्मेदारी देश की इकलौती सरकारी पुनर्बीमा कंपनी भारतीय सामान्य बीमा निगम (GIC Re) को सौंपी गई है,
जो ‘Pool Administrator’ की भूमिका निभाएगी। इसके लिए बकायदा एक गवर्निंग बॉडी और अंडरराइटिंग कमेटी (Underwriting Committee) का गठन किया गया है जो सॉवरेन गारंटी को लागू करने की मंजूरी देगी।
| प्रमुख पैरामीटर (BMIP Parameter) | वित्तीय मूल्य / विवरण (Financial Value / Details) |
|---|---|
| पूल का कुल आकार | USD 1.5 बिलियन |
| भारत सरकार की संप्रभु गारंटी | USD 1.4 बिलियन (₹12,980 करोड़) |
| पूल का मुख्य प्रशासक | जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) |
| प्राथमिक दावा सीमा | USD 100 मिलियन तक (पूल निधि से) |
| सॉवरेन गारंटी लागू होने की शर्त | USD 100 मिलियन से अधिक के दावों के लिए अंतिम उपाय |
📚 Static GK Connect
- नोडल विभाग और मंत्रालय: वित्तीय सेवा विभाग (DFS), केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance).
- भारतीय सामान्य बीमा निगम (GIC Re): इसकी स्थापना 22 नवंबर 1972 को साधारण बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 के तहत की गई थी। इसका मुख्यालय मुंबई में है और यह देश की एकमात्र राष्ट्रीय पुनर्बीमा (reinsurance) कंपनी है।
- IG P&I क्लब्स: यह दुनिया के प्रमुख समुद्री बीमा क्लबों का एक संघ है जो वैश्विक स्तर पर समुद्री जहाजों की कुल क्षमता का लगभग 90% से अधिक हिस्सा कवर करता है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. वित्तीय सेवा विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘भारत समुद्री बीमा पूल’ (BMIP) को भारत सरकार द्वारा कितने मूल्य की संप्रभु गारंटी (sovereign guarantee) प्रदान की गई है?
a) USD 1.0 बिलियन
b) USD 1.2 बिलियन
c) USD 1.4 बिलियन ✅
d) USD 1.5 बिलियन
🤔 Q2. ‘भारत समुद्री बीमा पूल’ (BMIP) के तहत दावों के निपटान के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
a) सभी दावों का भुगतान सीधे वित्त मंत्रालय द्वारा अग्रिम रूप से किया जाएगा।
b) $100 मिलियन तक के दावों का निपटान पूल की अपनी संचित निधि से होगा, जबकि इससे बड़े दावों के लिए संप्रभु गारंटी का उपयोग होगा। ✅
c) यह पूल केवल भारतीय वायु सेना और नौसेना के विमानों के बीमा को कवर करता है।
d) इसके अंतर्गत दावों के निपटान के लिए किसी प्रशासनिक निकाय की आवश्यकता नहीं है।
🤔 Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा संस्थान ‘भारत समुद्री बीमा पूल’ (BMIP) के लिए पूल प्रशासक (Pool Administrator) के रूप में कार्य कर रहा है?
a) भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)
b) भारतीय सामान्य बीमा निगम (GIC Re) ✅
c) न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
d) भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI)
🤝 (Agreements & International Current Affairs)

📌 भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक कूटनीति: सामरिक तेल भंडारों की क्षमता दोगुनी करने और $5 बिलियन के निवेश समझौतों पर मुहर
प्यारे साथियों, पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट के देशों के साथ भारत के रिश्ते कितने मजबूत हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं
कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अपनी बेहद सफल यात्रा पूरी की है।
अबू धाबी में जब पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच बैठक हुई, तो समझौतों की झड़ी लग गई!
इस कूटनीतिक मुलाकात में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के निवेश, आधुनिक रक्षा तकनीक और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में कई बड़े और ऐतिहासिक समझौते हुए।
इस पूरी यात्रा का सबसे बड़ा धमाका रहा यूएई की बड़ी वित्तीय संस्थाओं द्वारा भारत में कुल $5 बिलियन (5 अरब डॉलर) के निवेश की ऐतिहासिक घोषणा!
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- सामरिक तेल भंडार में बड़ी हिस्सेदारी: भारतीय सामरिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड (ISPRL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच हुए समझौते के तहत यूएई अब भारत के सामरिक तेल भंडारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल करेगा। साथ ही देश में रणनीतिक गैस भंडार बनाने पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
- मजबूत रक्षा साझेदारी: दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग, साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों को साझा करने के लिए एक ‘Framework for the Strategic Defence Partnership’ पर दस्तखत किए हैं।
- गुजरात में नया शिप रिपेयर क्लस्टर: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और दुबई की ड्राईडॉक्स वर्ल्ड मिलकर गुजरात के वाडिनार में एक वर्ल्ड-क्लास ‘शिप रिपेयर क्लस्टर’ विकसित करेंगे।
- सुपरकंप्यूटिंग का महा-नेटवर्क: भारतीय संस्था C-DAC और यूएई की प्रसिद्ध कंपनी G-42 मिलकर 8 एक्साफ्लॉप (Exaflop) की ताकत वाला एक बेहद शक्तिशाली सुपरकंप्यूट क्लस्टर तैयार करेंगी।
✴️ $5 बिलियन की विशाल निवेश प्रतिबद्धता और वित्तीय सहयोग
▪️ चलो, अब देखते हैं कि यह $5 बिलियन का निवेश कहाँ-कहाँ आ रहा है। सबसे पहले, यूएई के ‘Emirates NBD’ बैंक द्वारा भारत के आरबीएल बैंक (RBL Bank) में सीधे $3 बिलियन का निवेश किया जाएगा।
इसके अलावा, ‘Abu Dhabi Investment Authority’ (ADIA) भारत के नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट फंड (NIIF) के साथ मिलकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में $1 बिलियन का निवेश करेगी।
बची हुई $1 बिलियन की रकम इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) द्वारा भारत के सम्मान कैपिटल (Sammaan Capital) में निवेश की जाएगी।
✴️ दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति सुरक्षा और वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर
▪️ इसके साथ ही, रसोई गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति के लिए इंडियन ऑयल (IOCL) और ADNOC के बीच एक दीर्घकालिक समझौता हुआ है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों देशों के बीच कस्टम और बंदरगाहों के बीच कागजी कार्रवाई को बेहद आसान बनाने के लिए ‘MAITRI’ (Master Application for International Trade and Regulatory Interface) डिजिटल फ्रेमवर्क के जरिए वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर शुरू कर दिया गया है।
| निवेश का स्रोत (UAE Entity) | भारतीय प्राप्तकर्ता क्षेत्र / बैंक | निवेशित राशि (USD) |
|---|---|---|
| Emirates NBD | आरबीएल बैंक ऑफ इंडिया (RBL Bank) | $3 बिलियन |
| Abu Dhabi Investment Authority (ADIA) | राष्ट्रीय अवसंरचना और निवेश कोष (NIIF) | $1 बिलियन |
| International Holding Company (IHC) | सम्मान कैपिटल ऑफ इंडिया (Sammaan Capital) | $1 बिलियन |
📚 Static GK Connect
- भारत-यूएई CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement): यह ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता 1 May 2022 को लागू हुआ था, जिसके बाद से दोनों देशों का आपसी व्यापार रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुँच गया है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): भौगोलिक दृष्टिकोण से यह फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) से जोड़ने वाला बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार गुजरता है।
- कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड: इसकी स्थापना 1972 में हुई थी। यह केरल के कोच्चि में स्थित भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल शिपयार्ड है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. हाल ही में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान, भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) और ADNOC के बीच हस्ताक्षरित समझौते के तहत भारत के सामरिक तेल भंडार में यूएई की भागीदारी को बढ़ाकर कितने मिलियन बैरल करने का निर्णय लिया गया है?
a) 15 मिलियन बैरल
b) 20 मिलियन बैरल
c) 30 मिलियन बैरल ✅
d) 45 मिलियन बैरल
🤔 Q2. भारत और यूएई के बीच सीमा शुल्क और बंदरगाहों के बीच डिजिटल एकीकरण कर व्यापार की गति बढ़ाने के लिए क्रियान्वित किए गए डिजिटल फ्रेमवर्क का नाम क्या है?
a) MAITRI ✅
b) SAMARTH
c) SETU
d) SAGAR
🤔 Q3. यूएई की कंपनी एमिरेट्स न्यू डेवलपमेंट बैंक (ENDB) द्वारा भारत के किस बैंक में $3 बिलियन के रणनीतिक पूंजी निवेश की घोषणा की गई है?
a) आरबीएल बैंक (RBL Bank) ✅
b) येस बैंक (Yes Bank)
c) एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank)
d) आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank)
🔌 (Science & Technology Current Affairs)
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📌 चिप निर्माण में भारत का पहला SME नेतृत्व: राजस्थान के भिवाड़ी में देश के पहले वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन
हेलो दोस्तों! आज के समय में हमारे पास जो स्मार्टफोन, लैपटॉप या गाड़ियाँ हैं, वे बिना सेमीकंडक्टर चिप्स के सिर्फ लोहे का डिब्बा हैं।
इस बेहद जरूरी तकनीक में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पिछले 24 घंटों में राजस्थान से एक बहुत ही शानदार खबर आई है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने मिलकर राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी में
‘सहस्र सेमीकंडक्टर्स’ (Sahasra Semiconductors Pvt. Ltd.) की नई चिप पैकेजिंग और असेंबली इकाई का वर्चुअल उद्घाटन किया है।
यह भारत की पहली ऐसी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (ATMP/OSAT) यूनिट है, जिसे किसी लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) द्वारा शुरू किया गया है।
यह देश के इलेक्ट्रॉनिक ईकोसिस्टम के लिए एक मील का पत्थर है!
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- आधुनिक तकनीक और बड़ा निवेश: इस यूनिट को भिवाड़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) में ₹150 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ लगभग 57,000 वर्ग फुट में तैयार किया गया है। इसमें बेहद संवेदनशील Class 10K और Class 100K के धूल-मुक्त क्लीनरूम्स बनाए गए हैं।
- क्या बनेगा यहाँ?: यहाँ पर मुख्य रूप से कंप्यूटर-मोबाइल की मेमोरी चिप्स (जैसे माइक्रो एसडी कार्ड और फ्लैश स्टोरेज), ई-सिम (eSIMs), आरएफआईडी (RFID) कार्ड और एलईडी लाइटों में लगने वाली ड्राइवर आईसी (LED driver ICs) की पैकेजिंग की जाएगी।
- पूरी दुनिया में धूम (60% एक्सपोर्ट): आपको जानकर गर्व होगा कि इस प्लांट में बनने वाले कुल प्रोडक्ट्स का 60% से अधिक हिस्सा सीधे अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, चीन और पूर्वी यूरोप जैसे बड़े देशों को निर्यात (export) किया जा रहा है।
- भविष्य का टारगेट: अभी इस प्लांट की क्षमता साल भर में 60 मिलियन चिप्स पैक करने की है, जिसे अगले 2 से 3 सालों में बढ़ाकर 400 से 600 मिलियन सालाना करने की योजना है।
✴️ ATMP और OSAT संरचना का रणनीतिक महत्व
▪️ क्या होते हैं ये ATMP और OSAT? आसान भाषा में समझें। सेमीकंडक्टर चिप बनाने के दो बड़े हिस्से होते हैं।
पहला हिस्सा होता है सिलिकॉन की वेफर्स पर बेहद बारीक सर्किट डिजाइन करना (वेफर फैब्रिकेशन)। इसके बाद जो बारीक चिप्स निकलती हैं,
उन्हें सुरक्षित पैकेट में बंद करना, उनकी टेस्टिंग करना और उन पर मार्किंग करना बेहद जरूरी होता है। इसी काम को ATMP (Assembly, Testing, Marking, and Packaging) और OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) कहा जाता है।
भिवाड़ी की यह यूनिट इसी महत्वपूर्ण काम को अंजाम देगी।
✴️ राजस्थान सेमीकंडक्टर नीति और केंद्रीय SPECS योजना का तालमेल
▪️ यह पूरा कमाल केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की SPECS (Scheme for Promotion of Manufacturing of Electronic Components and Semiconductors) योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से संभव हो पाया है।
इसके साथ ही, राजस्थान सरकार ने भी हाल ही में अपनी ‘राजस्थान सेमीकंडक्टर नीति’ लागू की है , जिसके तहत दिल्ली-एनसीआर से सटे इस भिवाड़ी इलाके को देश का नया इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी है।
| पैरामीटर (Parameter) | विवरण (Details) |
|---|---|
| संयंत्र का प्रकार | भारत का पहला SME-led वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर संयंत्र |
| स्थान | इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC), भिवाड़ी, राजस्थान |
| सहायक योजना | Scheme for Promotion of Manufacturing of Electronic Components and Semiconductors (SPECS) |
| संयंत्र का क्षेत्रफल | 57,000 वर्ग फुट (Class 10K/100K Cleanrooms युक्त) |
| वर्तमान वार्षिक क्षमता | 60 मिलियन सेमीकंडक्टर इकाइयां |
📚 Static GK Connect
- मिशन और मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत चलने वाला इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM).
- सेमीकंडक्टर क्या हैं?: ये सिलिकॉन या जर्मेनियम जैसे ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी बिजली का संचालन करने की क्षमता सुचालक (conductors) और कुचालक (insulators) के बीच की होती है।
- ELCINA क्लस्टर: भिवाड़ी के इस इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर को ‘इलेक्ट्रॉनिक उद्योग संघ’ (ELCINA) द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार ने ₹20.24 करोड़ की सीधी मदद दी है।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. भारत की पहली लघु और मध्यम उद्यम (SME) के नेतृत्व वाली वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन (ATMP/OSAT) इकाई का उद्घाटन हाल ही में किस राज्य में किया गया है?
a) गुजरात
b) राजस्थान ✅
c) कर्नाटक
d) तमिल नाडु
🤔 Q2. सहस्र सेमीकंडक्टर सुविधा भिवाड़ी (राजस्थान) को आईटी मंत्रालय की किस विशिष्ट प्रोत्साहन योजना के तहत विकसित किया गया है?
a) PLI Scheme
b) SPECS Scheme ✅
c) FAME Scheme
d) PM E-DRIVE Scheme
🤔 Q3. सेमीकंडक्टर विनिर्माण के संबंध में ‘ATMP’ का पूर्ण रूप (Full Form) क्या ক্ষমতায় है?
a) Assembly, Testing, Marking, and Packaging ✅
b) Advanced Technology for Micro Processors
c) Automated Testing and Manufacturing Protocol
d) Assembly of Transistors on Micro Platforms
🌐 (International & Multilateral Current Affairs)

📌 वैश्विक डिजिटल कूटनीति में भारत की बढ़ती धमक: वर्ष 2030 में प्रतिष्ठित ‘ITU प्लेनिपोटेंटियरी कॉन्फ्रेंस’ की मेजबानी करेगा भारत
साथियों, आज पूरी दुनिया जिस इंटरनेट और मोबाइल तकनीक पर निर्भर है, उसके वैश्विक नियम और मानक तय करने में भारत की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
पिछले 24 घंटों में स्विट्जरलैंड के जेनेवा से एक ऐसी खबर आई है जो हर भारतीय को गर्व से भर देगी।
जेनेवा में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ’ (ITU) परिषद की बैठक में हमारे दूरसंचार विभाग (DoT) के प्रयासों की बदौलत यह तय हुआ है
कि वर्ष 2030 में होने वाले ‘ITU प्लेनिपोटेंटियरी कॉन्फ्रेंस’ (PP-2030) की मेजबानी भारत को दी जाएगी। इस प्रस्ताव को वहां सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है।
यह सम्मेलन वैश्विक दूरसंचार क्षेत्र की सबसे बड़ी और सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था है, यानी इंटरनेट और मोबाइल से जुड़ी संधियों और दिशा-निर्देशों का अंतिम फैसला यहीं होता है।
⏬ मुख्य बातें (Key Highlights)
- दुनिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम मंच: यह सम्मेलन हर चार साल में एक बार आयोजित किया जाता है। इसकी मेजबानी मिलना कूटनीतिक रूप से भारत के लिए बहुत बड़ी जीत है।
- अंतिम मुहर दोहा में लगेगी: जेनेवा परिषद में मिली इस मंजूरी को आगामी नवंबर 2026 में कतर के दोहा में होने वाले मुख्य प्लेनिपोटेंटियरी सम्मेलन में अंतिम रूप से पास किया जाएगा।
- भारत का वित्तीय योगदान: भारत ने परिषद के सामने 6G, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों के विकास के लिए स्वैच्छिक वित्तीय मदद देने की घोषणा की है।
- वैश्विक पदों पर भारतीय दावेदारी: इस बैठक में भारत ने अपनी योग्य उम्मीदवार डॉ. रेवती मन्नेपल्ली (Dr. Revathi Mannepalli) को ITU के महत्वपूर्ण ‘रेडियो संचार ब्यूरो’ (Radiocommunications Bureau – BR) का निदेशक बनाने के लिए अपना समर्थन अभियान भी तेज किया है।
✴️ वैश्विक मानकों (Standardization) के निर्धारण में भारत की भूमिका
▪️ क्या आप जानते हैं कि इस सम्मेलन की मेजबानी का भारत के लिए क्या फायदा है? इसके जरिए भारत को दुनिया भर में 6G इंटरनेट की तकनीक, सुरक्षा नियमों और डेटा प्राइवेसी से जुड़े वैश्विक मानक तय करने का सीधा मौका मिलेगा।
भारत ने ‘Bharat 6G Alliance’ के माध्यम से दुनिया भर के कम से कम 10% 6G पेटेंट अपने नाम करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
साथ ही, भारत अपने सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) यानी यूपीआई और डिजीलॉकर जैसे सफल मॉडल्स को अन्य विकासशील देशों के साथ साझा करने की योजना पर काम कर रहा है।
✴️ भारत की ITU परिषद में दीर्घकालिक भागीदारी
▪️ भारत साल 1952 से ही लगातार इस महत्वपूर्ण दूरसंचार परिषद का निर्वाचित सदस्य रहा है।
भारत ने साल 2027 से 2030 के कार्यकाल के लिए भी परिषद में दोबारा चुने जाने की अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।
इस वैश्विक मंच का उपयोग करके भारत विकासशील देशों (Global South) में डिजिटल गैप को कम करने में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
| संगठन / सम्मेलन (Organization / Event) | विवरण और मुख्यालय (Details & Headquarters) |
|---|---|
| अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) | संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूरसंचार एजेंसी, जेनेवा, स्विट्जरलैंड |
| ITU परिषद की भूमिका | 48 सदस्य देशों की शासी निकाय जो प्रतिवर्ष बजट और नीति की निगरानी करती है |
| ITU Plenipotentiary Conference 2030 (PP-2030) | मेजबान देश: भारत (प्रस्ताव जेनेवा में स्वीकृत) |
| भारत की परिषद सदस्यता | वर्ष 1952 से लगातार निर्वाचित सदस्य |
| दूरसंचार मानक लक्ष्य (6G Target) | भारत 6G एलायंस के माध्यम से वैश्विक स्तर पर 10% 6G पेटेंट हासिल करना |
📚 Static GK Connect
- अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU): यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की सूचना और संचार तकनीक से जुड़ी सबसे पुरानी एजेंसी है। इसकी स्थापना 17 May 1865 को पेरिस में ‘अंतर्राष्ट्रीय टेलीग्राफ कन्वेंशन’ के रूप में हुई थी, जिससे यह दुनिया की सबसे पुरानी संस्थाओं में से एक है। इसका मुख्यालय जेनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
- दूरसंचार विभाग: यह हमारे केंद्रीय संचार मंत्रालय (Ministry of Communications) के अधीन कार्य करता है।
- भारत 6G एलायंस (B6GA): भारत में 6G अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए गठित एक मंच है जिसमें दूरसंचार उद्योग, शिक्षाविद और अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।
🎯 Current Affairs MCQs
🤔 Q1. संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी ‘अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ’ (ITU) ने वर्ष 2030 के अपने प्रतिष्ठित ‘प्लेनिपोटेंटियरी कॉन्फ्रेंस’ (PP-2030) की मेजबानी के लिए किस देश के प्रस्ताव को स्वीकार किया है?
a) यूनाइटेड किंगडम
b) भारत ✅
c) स्वीडन
d) कतर
🤔 Q2. अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी स्थापना वर्ष 1865 में पेरिस में हुई थी, जिससे यह संयुक्त राष्ट्र की सबसे पुरानी विशेष एजेंसियों में से एक है।
2. भारत वर्ष 1952 से लगातार ITU परिषद का सदस्य रहा है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
a) केवल 1
b) केवल 2
c) 1 और 2 दोनों ✅
d) न तो 1 और न ही 2
🤔 Q3. अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) का प्रशासनिक मुख्यालय (Headquarters) किस शहर में स्थित है?
a) पेरिस, फ्रांस
b) न्यूयॉर्क, यूएसए
c) जेनेवा, स्विट्जरलैंड ✅
d) लंदन, यूके