Political GK MCQs In Hindi

Political GK महज़ किताबों का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह देश की नब्ज और समाज के ढांचे को गहराई से समझने का एक बेहतरीन ज़रिया है। जब आप राजनीति के बेसिक फंडे समझ लेते हैं, तो आसपास की बड़ी घटनाओं को डिकोड करना काफी आसान हो जाता है। अगर आप UPSC, State PCS, SSC, या NDA जैसे बड़े कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स को क्रैक करना चाहते हैं, तो यह विषय आपकी सफलता के लिए सबसे मज़बूत कड़ी साबित हो सकता है। यह न सिर्फ आपकी Analytical Skills को बढ़ाता है, बल्कि आपको एक जागरूक और समझदार नागरिक के तौर पर समाज में अपनी बात मजबूती से रखने की पावर भी देता है।

10 MCQ With Answer set Political GK
1-10 MCQ With Answer set Political GK

‘गरीबी हटाओ’ नारे के साथ किसका नाम जुड़ा है?





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Explanation:- ‘गरीबी हटाओ’ नारे के साथ किसका नाम जुड़ा है?

‘गरीबी हटाओ, देश बचाओ’ का प्रसिद्ध नारा इंदिरा गांधी ने 1971 के आम चुनाव के दौरान दिया था। यह नारा भारतीय राजनीतिक इतिहास के सबसे प्रभावशाली मोड़ों में से एक माना जाता है, जिसने उन्हें भारी जनसमर्थन दिलाया। इस नारे ने न केवल चुनाव का रुख मोड़ा बल्कि इंदिरा गांधी को एक जननेता के रूप में स्थापित किया।
इस नारे को बाद में पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-1979) के मुख्य लक्ष्य के रूप में शामिल किया गया। इसका उद्देश्य रोजगार के अवसर पैदा करना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था। हालांकि इसके क्रियान्वयन को लेकर आलोचनाएं भी हुईं, लेकिन यह आज भी भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक प्रतीक बना हुआ है।

निम्नलिखित में से किस समिति का पदेन अध्यक्ष लोक सभा का अध्यक्ष होता है?





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Explanation:- निम्नलिखित में से किस समिति का पदेन अध्यक्ष लोक सभा का अध्यक्ष होता है?

लोकसभा की ‘नियम समिति’ (Rules Committee) का पदेन अध्यक्ष स्वयं लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) होता है। इस समिति का प्राथमिक कार्य सदन की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों पर विचार करना और आवश्यक संशोधन सुझाना है। लोकसभा अध्यक्ष इस समिति के माध्यम से सदन की मर्यादा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करते हैं।
नियम समिति के अतिरिक्त, ‘कार्य मंत्रणा समिति’ (Business Advisory Committee) और ‘सामान्य प्रयोजन समिति’ के अध्यक्ष भी लोकसभा अध्यक्ष ही होते हैं। इसके विपरीत, लोक लेखा समिति और प्राकलन समिति जैसी वित्तीय समितियों के अध्यक्षों का चयन सदस्यों में से किया जाता है, परंतु वे पदेन अध्यक्ष नहीं होते।

1935 के भारत सरकार का अधिनियम किस निर्णय से सम्बन्धित है?





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Explanation:- 1935 के भारत सरकार का अधिनियम किस निर्णय से सम्बन्धित है?

1935 का भारत सरकार अधिनियम भारतीय संवैधानिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता ‘प्रांतीय स्वायत्तता’ (Provincial Autonomy) की शुरुआत थी। इसके तहत प्रांतों में पूर्व में प्रचलित ‘द्वैध शासन’ को समाप्त कर दिया गया और उन्हें अपने आंतरिक प्रशासन में स्वतंत्र और जिम्मेदार बनाया गया।
इस अधिनियम ने केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली लागू की और एक अखिल भारतीय संघ की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। वर्तमान भारतीय संविधान का लगभग 60-70 प्रतिशत हिस्सा इसी अधिनियम से लिया गया है। इस अधिनियम ने शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों (संघीय, प्रांतीय और समवर्ती) में किया, जो आज भी प्रचलित है।

राज्य की कार्यपालिका शक्ति किसमें निहित होती है?





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Explanation:- राज्य की कार्यपालिका शक्ति किसमें निहित होती है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार, राज्य की कार्यपालिका शक्ति ‘राज्यपाल’ (Governor) में निहित होती है। वह राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और राज्य के सभी प्रशासनिक कार्य उसी के नाम से किए जाते हैं। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह केंद्र व राज्य के बीच एक सेतु का कार्य करता है।
हालांकि, राज्यपाल केवल नाममात्र का प्रमुख होता है। वास्तविक कार्यपालिका शक्तियां मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद के पास होती हैं। राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता से अपनी शक्तियों का प्रयोग करता है। राज्यपाल का पद राज्य की गरिमा और संवैधानिक निरंतरता का प्रतीक माना जाता है।

किस देश में दोहरी नागरिकता का सिद्धांत स्वीकार किया गया है?





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Explanation:- किस देश में दोहरी नागरिकता का सिद्धांत स्वीकार किया गया है?

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में ‘दोहरी नागरिकता’ (Dual Citizenship) का प्रावधान है। इसका अर्थ है कि वहां का नागरिक न केवल पूरे देश (USA) का नागरिक है, बल्कि वह उस विशिष्ट राज्य (जैसे टेक्सास या न्यूयॉर्क) का भी नागरिक है जहाँ वह रहता है। नागरिक को दोनों स्तरों पर अलग-अलग अधिकार और सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
इसके विपरीत, भारत में ‘एकल नागरिकता’ (Single Citizenship) की व्यवस्था है, जो ब्रिटेन के संविधान से ली गई है। भारत में कोई भी व्यक्ति केवल देश का नागरिक होता है, राज्यों की अपनी अलग नागरिकता नहीं होती। अमेरिका की यह संघीय व्यवस्था राज्यों की स्वायत्तता को दर्शाती है, जबकि भारत की व्यवस्था राष्ट्रीय एकता और अखंडता को प्राथमिकता देती है।

भारत में कार्यपालिका का अध्यक्ष कौन होता है?





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Explanation:- भारत में कार्यपालिका का अध्यक्ष कौन होता है?

संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार, संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है। वह भारत का प्रथम नागरिक और राष्ट्र का संवैधानिक प्रमुख होता है। रक्षा बलों का सर्वोच्च सेनापति भी राष्ट्रपति ही होता है। प्रशासन के सभी निर्णय और अंतरराष्ट्रीय संधियाँ औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के नाम पर ही की जाती हैं।
भारत में संसदीय प्रणाली अपनाई गई है, इसलिए राष्ट्रपति एक नाममात्र का अध्यक्ष होता है। शासन की वास्तविक शक्तियाँ प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य है, हालांकि उसके पास कुछ विवेकाधीन शक्तियाँ और परामर्श देने का अधिकार सुरक्षित होता है।

संघीय मंत्रिपरिषद का अध्यक्ष कौन होता है?





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Explanation:- संघीय मंत्रिपरिषद का अध्यक्ष कौन होता है?

संघीय मंत्रिपरिषद का प्रधान और वास्तविक नेता ‘प्रधानमंत्री’ होता है। अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होती है जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। प्रधानमंत्री ही मंत्रियों का चयन करता है, उनके विभागों का आवंटन करता है और सरकार की प्रमुख नीतियों को दिशा प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है और सरकार के कामकाज के लिए लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता है। यदि प्रधानमंत्री इस्तीफा दे देता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद का पतन हो जाता है। प्रधानमंत्री को भारतीय शासन प्रणाली में ‘धुरी’ (Pivot) कहा जाता है, जिसके इर्द-गिर्द पूरी सरकार घूमती है।

मौलिक अधिकारों पर निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्रतिबन्ध लगाए जा सकते हैं?





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Explanation:- मौलिक अधिकारों पर निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्रतिबन्ध लगाए जा सकते हैं?

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार पूर्ण (Absolute) नहीं हैं, बल्कि उन पर ‘उचित प्रतिबंध’ (Reasonable Restrictions) लगाए जा सकते हैं। इन अधिकारों को संशोधित करने या उन पर न्यायसंगत सीमाएं लगाने की शक्ति भारत की ‘संसद’ के पास है। संसद संविधान संशोधन के माध्यम से मौलिक अधिकारों के दायरे को सीमित कर सकती है।
हालांकि, संसद मौलिक अधिकारों के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) को नष्ट नहीं कर सकती। सर्वोच्च न्यायालय इन प्रतिबंधों की न्यायिक समीक्षा कर सकता है और यदि कोई प्रतिबंध असंवैधानिक पाया जाता है, तो उसे रद्द कर सकता है। आपातकाल के दौरान, अनुच्छेद 358 और 359 के तहत राष्ट्रपति भी कुछ अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर सकते हैं।

42 वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द जोड़ा गया?





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Explanation:- 42 वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द जोड़ा गया?

1976 में आपातकाल के दौरान किए गए 42वें संविधान संशोधन को ‘लघु संविधान’ कहा जाता है। इस संशोधन द्वारा प्रस्तावना में तीन महत्वपूर्ण शब्द जोड़े गए: ‘समाजवादी’ (Socialist), ‘पंथनिरपेक्ष’ (Secular) और ‘अखंडता’ (Integrity)। इन शब्दों का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र के सामाजिक और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को और अधिक स्पष्ट करना था।
‘समाजवाद’ शब्द यह सुनिश्चित करता है कि राज्य संसाधनों के समान वितरण और गरीबी उन्मूलन के लिए कार्य करेगा। यह संशोधन स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित था। संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक ही बार संशोधन किया गया है, जिसने संविधान के दर्शन और मूल्यों को तत्कालीन समय की आवश्यकताओं के अनुरूप परिभाषित किया।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्त होने वाली प्रथम महिला कौन हैं?





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Explanation:- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्त होने वाली प्रथम महिला कौन हैं?

न्यायमूर्ति लीला सेठ भारत के किसी भी उच्च न्यायालय की ‘मुख्य न्यायाधीश’ बनने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने 1991 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था। लीला सेठ न केवल एक प्रखर न्यायविद थीं, बल्कि उन्होंने कानूनी सुधारों और महिला अधिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए।
उल्लेखनीय है कि एम. फातिमा बीवी सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं, जबकि अन्ना चांडी उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश (केरल उच्च न्यायालय) थीं। लीला सेठ का यह कीर्तिमान भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


10 Question With Answer set Political GK
11-20 Question With Answer set Political GK

किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल अथवा प्रादेशिक दल के रूप में मान्यता कौन देता है?





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Explanation:- किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल अथवा प्रादेशिक दल के रूप में मान्यता कौन देता है?

भारत में किसी भी राजनीतिक दल को उसकी चुनावी सफलता और प्रभाव के आधार पर ‘राष्ट्रीय’ या ‘प्रादेशिक’ (राज्य स्तरीय) दल की मान्यता ‘भारत निर्वाचन आयोग’ (Election Commission) प्रदान करता है। इसके लिए आयोग द्वारा निर्धारित विशिष्ट मानदंड (वोट प्रतिशत और सीटों की संख्या) पूरे करने होते हैं।
मान्यता प्राप्त दलों को कई सुविधाएं मिलती हैं, जैसे एक स्थायी ‘चुनाव चिन्ह’, निर्वाचन नामावली की मुफ्त प्रतियां और आकाशवाणी/दूरदर्शन पर प्रचार के लिए समय। निर्वाचन आयोग समय-समय पर पार्टियों के प्रदर्शन की समीक्षा करता है और उसी के आधार पर उनकी मान्यता को बरकरार रखता है या वापस लेता है।

भारत में पंचवर्षीय योजना अन्तिम रूप से अनुमोदित की जाती है?





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Explanation:- भारत में पंचवर्षीय योजना अन्तिम रूप से अनुमोदित की जाती है?

भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण का कार्य योजना आयोग करता था, लेकिन उसे ‘अंतिम स्वीकृति’ और अनुमोदन ‘राष्ट्रीय विकास परिषद’ (National Development Council – NDC) द्वारा दिया जाता था। 1952 में गठित इस परिषद के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते थे और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते थे।
NDC का उद्देश्य विकास योजनाओं में राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना था। हालांकि, 2014 में योजना आयोग के स्थान पर ‘नीति आयोग’ (NITI Aayog) के गठन के बाद पंचवर्षीय योजनाओं की प्रणाली समाप्त हो गई है। अब 15 वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट और 3 वर्षीय एक्शन एजेंडा पर काम किया जाता है, लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से NDC की भूमिका निर्णायक थी।

निम्नलिखित में से कौन एक क्षेत्रीय दल है?





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Explanation:- निम्नलिखित में से कौन एक क्षेत्रीय दल है?

‘अकाली दल’ (Shiromani Akali Dal) एक प्रमुख क्षेत्रीय दल है, जो मुख्य रूप से पंजाब राज्य की राजनीति में सक्रिय है। क्षेत्रीय दल वे होते हैं जिनका आधार और चुनावी प्रभाव किसी एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र या राज्य तक सीमित होता है। ये दल स्थानीय और सांस्कृतिक मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुखता से उठाते हैं।
जबकि कांग्रेस, भाजपा और भाकपा (CPI) राष्ट्रीय स्तर के दल हैं जिनका आधार देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। क्षेत्रीय दल भारतीय लोकतंत्र में संतुलन बनाए रखने और संघीय ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत के विभिन्न राज्यों में ऐसे कई दल (जैसे DMK, शिवसेना, सपा) सत्ता के विकेंद्रीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं।

निम्नलिखित में से किस वर्ष संविधान में मूल कर्तव्यों को अन्तः स्थापित किया गया?





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Explanation:- निम्नलिखित में से किस वर्ष संविधान में मूल कर्तव्यों को अन्तः स्थापित किया गया?

भारतीय संविधान में ‘मूल कर्तव्यों’ (Fundamental Duties) को 1976 के 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। इसके लिए संविधान में एक नया भाग ‘IV-A’ और अनुच्छेद ’51-A’ शामिल किया गया। ये कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित हैं और नागरिकों को राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का बोध कराते हैं।
प्रारंभ में 10 मूल कर्तव्य थे, लेकिन 2002 के 86वें संशोधन द्वारा ‘शिक्षा का अवसर प्रदान करना’ 11वें कर्तव्य के रूप में जोड़ा गया। हालांकि ये कर्तव्य कानूनी रूप से प्रवर्तनीय (Justiciable) नहीं हैं, फिर भी ये नागरिकों के लिए एक नैतिक संहिता के रूप में कार्य करते हैं और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देते हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रयुक्त ‘हिन्दू’ शब्द किसे सम्मिलित नहीं करता?





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Explanation:- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रयुक्त ‘हिन्दू’ शब्द किसे सम्मिलित नहीं करता?

अनुच्छेद 25, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, के स्पष्टीकरण II में ‘हिंदू’ शब्द की व्याख्या दी गई है। इसके अनुसार, ‘हिंदू’ शब्द के अंतर्गत बौद्ध, जैन और सिख धर्म को मानने वाले व्यक्तियों को भी शामिल माना जाता है। इसका उद्देश्य इन समुदायों के सामाजिक संस्थानों को समाज सुधार हेतु हिंदू धर्म के समान कानूनी दायरे में लाना है।
‘पारसी’ (Parsis) इस परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते। वे अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान और पारसी कानूनों के अधीन रहते हैं। इसी तरह मुस्लिम और ईसाई समुदाय भी हिंदू शब्द की इस संवैधानिक परिभाषा से बाहर हैं। यह वर्गीकरण केवल अनुच्छेद 25 के विशिष्ट कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में किया गया है।

निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में स्थानीय निकायों पर राज्य सरकार का कोई नियन्त्रण नहीं है?





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Explanation:- निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में स्थानीय निकायों पर राज्य सरकार का कोई नियन्त्रण नहीं है?

स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) पर राज्य सरकारों का व्यापक नियंत्रण होता है, विशेषकर वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में। हालांकि, आंतरिक संचालन के विशिष्ट ‘नियम निर्धारण’ (Rule Making) में इन निकायों को कुछ स्वायत्तता प्रदान की जाती है। राज्य विधायिका व्यापक नीतियां बनाती है, लेकिन दैनिक कामकाज के उप-नियम बनाने में वे स्वतंत्र होते हैं।
अन्य विकल्पों जैसे वित्तीय सहायता, कर्मचारियों की सेवा शर्तें और नागरिकों की गंभीर शिकायतों की जांच में राज्य सरकार का सीधा और कड़ा नियंत्रण रहता है। 73वें और 74वें संशोधन के बाद स्थानीय निकायों को शक्तियां तो दी गई हैं, लेकिन उनका अस्तित्व और कार्यप्रणाली काफी हद तक राज्य सरकार के कानूनों पर निर्भर करती है।

आजाद हिन्द फौज कब सक्रिय हुआ था?





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Explanation:- आजाद हिन्द फौज कब सक्रिय हुआ था?

आजाद हिन्द फौज (INA) का गठन और सक्रियता मुख्य रूप से 1942 में शुरू हुई थी। इसका विचार सबसे पहले मोहन सिंह ने दिया था और इसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों को मिलाकर बनाया गया था। इसका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराना था।
1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इस फौज की कमान संभाली और इसे पुनर्गठित किया। ‘दिल्ली चलो’ और ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ जैसे नारों ने इसमें नई जान फूँक दी। INA ने जापान के सहयोग से भारत की उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर ब्रिटिश सेना का डटकर मुकाबला किया, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी।

वित्त आयोग का गठन कितनी अवधि के लिए होता है?





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Explanation:- वित्त आयोग का गठन कितनी अवधि के लिए होता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति प्रत्येक ‘5 वर्ष’ के अंतराल पर या आवश्यकता पड़ने पर उससे पहले ‘वित्त आयोग’ का गठन करते हैं। यह एक संवैधानिक निकाय है जिसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व (Tax revenue) के वितरण के लिए सिफारिशें देना है।
वित्त आयोग यह सुनिश्चित करता है कि राज्यों को उनके विकास कार्यों के लिए उचित वित्तीय संसाधन मिलें। आयोग की सिफारिशें सरकार के लिए सलाहकारी होती हैं, लेकिन आमतौर पर इन्हें स्वीकार कर लिया जाता है। पहले वित्त आयोग का गठन 1951 में के.सी. नियोगी की अध्यक्षता में किया गया था।

किसी भाषा को किसी राज्य भाषा के रूप में अंगीकार करने का अधिकार किसे है?





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Explanation:- किसी भाषा को किसी राज्य भाषा के रूप में अंगीकार करने का अधिकार किसे है?

अनुच्छेद 345 के अनुसार, किसी राज्य के ‘विधानमंडल’ (State Legislature) को यह अधिकार है कि वह कानून बनाकर उस राज्य में प्रचलित किसी एक या अधिक भाषाओं को अपनी ‘राजभाषा’ के रूप में अपना सकता है। यदि कोई राज्य ऐसा नहीं करता, तो वहां अंग्रेजी भाषा का उपयोग आधिकारिक कार्यों के लिए जारी रहता है।
भारत में राज्यों को अपनी सांस्कृतिक और भाषाई अस्मिता बनाए रखने के लिए यह शक्ति दी गई है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश ने हिंदी के साथ उर्दू को भी राजभाषा का दर्जा दिया है। हालांकि, राज्यों और केंद्र के बीच संचार के लिए संघ की आधिकारिक भाषा (हिंदी/अंग्रेजी) का उपयोग किया जाता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 किन विषयों पर विचार करते हैं?





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Explanation:- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 किन विषयों पर विचार करते हैं?

अनुच्छेद 74 और 75 भारतीय संविधान के वे स्तंभ हैं जो केंद्र सरकार की ‘मंत्रिपरिषद’ (Council of Ministers) की संरचना और कार्यप्रणाली को परिभाषित करते हैं। अनुच्छेद 74 में राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का प्रावधान है, जबकि अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति, शपथ, वेतन और उनके सामूहिक उत्तरदायित्व के बारे में बताता है।
ये अनुच्छेद स्पष्ट करते हैं कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से ‘लोकसभा’ के प्रति जिम्मेदार है, जो संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना है। यह सुनिश्चित करता है कि कार्यपालिका अपनी शक्तियों के लिए सीधे तौर पर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह बनी रहे।


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